राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : इनका बीमा न होने पर जुर्माना क्यों नहीं?

Posted Date : 13-Jan-2018

सड़कों पर जब पुलिस या आरटीओ के लोग किसी गाड़ी के कागजात की जांच करते हैं, तो देखते हैं कि उसका बीमा हुआ है या नहीं, और बीमा पूरा हुआ है या नहीं, वह गुजर तो नहीं चुका है, और एक्सीडेंट में किसी और को चोट लगने या नुकसान पहुंचने पर उसकी भरपाई के लिए थर्ड पार्टी बीमा हुआ या नहीं। बीमा न होने पर चालान और जुर्माने का इंतजाम है। लेकिन हर सड़क पर रात-दिन चलने वाली सरकारी गाडिय़ों का कोई भी बीमा नहीं होता। सरकार यह मानकर चलती है कि किसी हादसे में जख्मी होने या मरने वाले को मुआवजा देना अधिक सस्ता पड़ता है बजाय बीमे के प्रीमियम के। इसके साथ-साथ सरकारी गाड़ी को एक्सीडेंट के बाद सुधरवाना भी बीमे के मुकाबले सस्ता पड़ता है। मंत्रालय के एक बड़े अफसर ने बताया कि अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से सरकार ने एक आदेश निकालकर सरकारी गाडिय़ों का बीमा करवाना खत्म कर दिया था, और वह अब तक जारी है। लेकिन सवाल यह है कि केंद्र सरकार के मोटर वीकल एक्ट में जो वाहन-बीमा अनिवार्य है, उससे सरकारी गाड़ी को छूट राज्य सरकार कैसे दे सकती है? 

रामदेव के पतंजलि ब्रांड ने लोगों की खपत और ब्रांड की पसंद को देशभक्ति और देशद्रोह से जोडऩे का नुस्खा आजमाया है, और ग्राहकों को लग रहा है कि पतंजलि और स्वतंत्रता संग्राम एक ही हैं। नतीजा यह हुआ है कि बाजार में दूसरे देशी-विदेशी, या मिले-जुले ब्रांड अब वेद की शक्ति वाले टूथपेस्ट बना रहे हैं, और उसके भीतर रखकर पंचांग भी तोहफे में दे रहे हैं। हालात से ख्यालात बदलते हैं, एक वक्त विदेशी वैज्ञानिकों की शोध के नतीजे के नाम पर सामान बिकते थे, आज वेद-विज्ञान के नाम पर बिक रहे हैं। (rajpathjanpath@gmail.com)


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