राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अपनी दौलत के मामले में चूक...

Posted Date : 14-Jan-2018

सरकार में बैठे हुए बड़े-बड़े अफसर भी अपने खुद के मामलों में छोटी-बड़ी चूक करते चलते हैं। खासकर जब बात जमीन-जायदाद की जानकारी भरकर सरकार में दाखिल करने की होती है, तो बड़े काबिल अफसर भी कभी किसी जायदाद को भूल जाते हैं, कभी उसका आकार कम या अधिक हो जाता है, और कभी उसके दाम घट-बढ़ जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक, और ऑल इंडिया सर्विस के अफसरों से लेकर मंत्रियों और सांसदों तक ऐसी जानकारी पता नहीं क्यों गलतियों से भरी रहती हैं, या अधूरी रहती हैं, या कोई जानकारी जानबूझकर छुपाई हुई रहती हैं। और इसके बाद फिर आरटीआई एक्टिविस्ट का काम शुरू होता है जो कि आज भारतीय लोकतंत्र में मीडिया का एक बड़ा सोर्स बन चुके हैं। दिक्कत यह है कि सूचना देने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, उन्हीं लोगों के बारे में सूचना मांगते-मांगते लोगों का दम टूट चुका है, और लोकतंत्र पर से भरोसा उठ चुका है। ऐसे में ही फिर लोग पुख्ता जानकारी समेत हमला करने के बजाय गुमनाम चि_ियों से हमला करने लगते हैं। छत्तीसगढ़ में सूचना पाना और दुश्मन बनाना कमोबेश एक ही बात हो गई है। 

छत्तीसगढ़ में राहुल का सीधा आदमी
पिछले दिनों महाराष्ट्र में जातीय हिंसा के बाद दलित नेता जिग्नेश मेवाणी फिर सुर्खियों में आ गए। उन्होंने दिल्ली में प्रेस कॉन्फे्रंस लेकर मोदी-भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। मेवाणी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की पूरी तैयारी अलंकार सवाई ने कराई थी। आमतौर पर पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले अलंकार पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस के चलते भाजपा नेताओं के निशाने पर आ गए। आप सोच रहे होंगे कि मेवाणी-अलंकार का जिक्र यहां क्यों किया जा रहा है। वह इसलिए कि  अलंकार, राहुल गांधी के बेहद करीबी हैं और वे कई बार गुपचुप तरीके से छत्तीसगढ़ के दौरे पर आ चुके हैं। 
सुनते हैं कि अलंकार प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से मेल-मुलाकात भले ही नहीं करते, लेकिन वे प्रदेश के नेताओं के काम के तौर-तरीकों से वाकिफ हैं। कहा जाता है कि अंतागढ़ कांड के खुलासे के बाद अलंकार के कहने पर ही राहुल ने जोगी पिता-पुत्र को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। अलंकार सालभर पहले छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान बस्तर गए थे। वे वहां काम करने वाले एनजीओ और कई प्रमुख आदिवासी नेताओं के सीधे संपर्क में हैं। यानी प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से परे अलंकार की अगुवाई में गुपचुप तरीके से राहुल की टीम बस्तर-सरगुजा संभाग में चुनाव को लेकर रणनीति तैयार कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में बस्तर संभाग में अच्छी सफलता मिली थी, लेकिन सरगुजा में भाजपा कांग्रेस को बराबरी पर रहे। इस बार आदिवासी इलाकों में सफलता के लिए अलंकार ने ब्लू प्रिंट तैयार किया है। पार्टी यहां चुनाव के लिहाज से किस तरह काम करती है और क्या परिणाम होता है, यह देखना है। (  rajpathjanpath@gmail.com)


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