छत्तीसगढ़

  • कवर्धा में कर्ज से दबे किसान की खुदकुशी
    कवर्धा में कर्ज से दबे किसान की खुदकुशी

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    कवर्धा, 20 जुलाई।  कबीरधाम जिले के पिपरिया थाना के ग्राम डेहरी निवासी एक किसान ने  जहर खाकर जान दे दी। पास ही सुसाइडल नोट भी मिला है जिसमें खेत के डायवर्सन न होने तथा कर्ज सम्बन्धी बातेें लिखी हंै।  परिजनों के अनुसार वह कर्ज से परेशान था।
    मिली जानकारी के अनुसार  पिपरिया थाना अंतर्गत ग्राम डेहरी के किसान संतोष साहू पिता बालाराम (50) ने कर्ज के चलते जहर खाकर खुदकुशी कर ली। बुधवार  उसकी लाश उसके खेत के पम्प हाउस में मिली।  परिजनों ने पुलिस को कल शाम  सूचना दी थी।  आज  सुबह  पुलिस पंचनामा के लिए पहुंची। 
    लाश के पास ही सुसाइडल नोट भी मिला है जिसमें खेत के डायवर्सन न होने तथा कर्ज सम्बन्धी बातें लिखी हंै। इसे  पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है।  परिजनों का कहना  है कि उसने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या की है। किसान  गुड़ फैक्ट्री चला रहा था। अधिक कर्ज के कारण खेत को डायवर्सन करा कर लोन लेना चाहता था। लोन लेकर कर्ज से मुक्ति पाना चाहता था लेकिन तत्कालीन कलेक्टर ने डायवर्सन को रिजेक्ट कर दिया था। वहीं खेत व गुड़ फैक्टी का कर्ज अधिक हो गया था। किसान के पास 11 एकड़ खेत है। इसमें से ढाई एकड़ उसने गिरवी रखा है।  वहीं कुछ कर्ज प्राइवेट बैंक का भी था।

 

राजनीति

  • गठबंधन में गांठ : कैबिनेट मीटिंग के बाद नीतीश, तेजस्वी और तेजप्रताप की अलग से बैठक

    पटना: बिहार में चल रहे राजनीतिक संकट में कयासों का दौर जारी है. बिहार कैबिनेट मीटिंग के बाद नीतीश, तेजस्वी और तेजप्रताप ने अलग से बैठक की जिससे नए कयासों को बल मिला है. हर कोई यही जानना चाहता हैं कि क्या उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफ़ा देंगे या नहीं. सब जानते हैं कि महागठबंधन का भविष्य उनके इस्तीफ़े पर निर्भर करता है. खबर आई थी कि तेजप्रताप और तेजस्वी ने कार्यालय जाना छोड़ दिया है और उनके विभागों की महत्वपूर्ण फाइलें उनके घर पर जा रही हैं.
    माना जाता है कि फिलहाल, तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े के लिए कांग्रेस पार्टी को ज़िम्मा दिया गया है. बताया जाता है कि बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी इस मुद्दे पर मध्यस्थता की भूमिका में लालू और नीतीश से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. लेकिन कांग्रेस ने लालू यादव के घर पर 7 जुलाई को हुई सीबीआई छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताया था वहीं अब तेजस्वी के मुद्दे पर कह रही है कि राजद को अपना रुख नरम कर महागठबंधन के हित में निर्णय लेना चाहिए.
    कांग्रेस तेजस्वी का इस्तीफ़ा चाहती है लेकिन सार्वजनिक रूप से बोल नहीं सकती. क्योंकि खुद कांग्रेस में कई मिसाल हैं जहां नेता पर आरोप लगने के बावजूद वे सत्ता में पद पर बने रहे. कांग्रेस को मालूम है कि इस बार उनका वास्ता एक तरफ नीतीश कुमार से पड़ा है जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करते और दूसरी तरफ लालू यादव हैं जो कई मामलों में आरोपी और चारा घोटाले के एक मामले में दोषी क़रार दिए जाने के बाद भी भ्रष्ट आचरण करने से परहेज नहीं करते.
    सुशील मोदी ने फिर लगाए आरोप  
    बीजेपी नेता सुशील मोदी आरजेडी परिवार पर हमला जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि 2013-14 में 'मूंछ वाले' तेजस्वी यादव ने 13 बेनामी संपत्तियों का मालिकाना हक लिया. उन्होंने तेजस्वी यादव के उस बयान के जरिए भी हमला किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरी मूंछ भी नहीं आई थी तब के केस सुशील मोदी उठा रहे हैं. लेकिन आज मोदी ने कहा कि ये मामले उनके मूंछ आ जाने के बाद है.
    उधर, राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि उनकी पार्टी ने पिछले हफ़्ते ये निर्णय ले लिया कि तेजस्वी के इस्तीफ़ा का सवाल नहीं है. अब जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि उनकी पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर संयम से काम लेते हुए महागठबंधन धर्म निभाते हुए इस्तीफे की मांग नहीं की लेकिन ये अनिश्चित काल के लिए नहीं माना जा सकता. (एनडीटीवी)

मनोरंजन

  • आईफा-मंच से कंगना का मजाक उड़ाकर अब पछता रहे हैं करण

    कंगना रनौत और निर्देशक करण जौहर के बीच नेपोटिज्म (परिवारवाद) को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। करण के चैट शो पर आई कंगना ने करण को बॉलीवुड में नेपोटिज्म का सबसे बड़ा समर्थक बता चुकी हैं। इसी विवाद को आगे बढ़ाते हुए करण जौहर, सैफ अली खान और वरुण धवन ने न्यूजर्सी में हुए आईफा अवॉर्ड्स में भी नेपोटिज्म रॉक्स का नारा लगा कर फिर से इस विवाद को बढ़ा दिया है। लेकिन अब करण को अपने इस नारे पर पछतावा हो रहा है। करण ने अपनी इस टिप्पणी पर अफसोस जताया है। करण ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, मैं पूरी तरह इस बात पर विश्वास करता हूं कि परिवारवाद काम नहीं करता। अगर कुछ मायने रखता है तो वह है सिर्फ टैलेंट, मेहनत और समर्पण। जो हमने कहा था, वह सिर्फ मजाक था और मुझे लगता है वह गलत जगह पर, गलत तरीके से ले लिया गया। मुझे इसका दुख है।
    जब मेटलाइफ स्टेडियम के मंच पर एक्टर वरुण धवन फिल्म ढिशूम के लिए बेस्ट कॉमिक एक्टर का पुरस्कार लेने पहुंचे तो सैफ ने मजाक में कहा कि वह (वरुण) फिल्म उद्योग में आज इस मुकाम पर अपने पापा की वजह से हैं। वरुण भी नहीं चूके और उन्होंने भी कह दिया, ...और आप यहां अपनी मम्मी (शर्मिला टैगोर) की वजह से हैं। इस पर करण ने तुरंत कहा, मैं यहां अपने पापा (दिवंगत फिल्मकार यश जौहर) की वजह से हूं। फिर तीनों ने एक साथ कहा, परिवारवाद ने मचाई धूम (नेपोटिज्म रॉक्स)।
    आईफा अवॉर्ड में इन तीनों की इस टिप्पणी के बाद उनकी काफी किरकिरी हुई और सोशल मीडिया पर लोगों ने कंगना का पक्ष लेते हुए परिवारवाद के इस नारे पर उनकी खिंचाई की। इस पर मंगलवार को ही वरुण धवन ने अपनी बात पर माफी मांग ली। वरुण ने मंगलवार को ट्वीट किया, मैं माफी मांगता हूं और अफसोस जताता हूं।। अगर मैंने किसी को उस एक्ट से तकलीफ या चोट पहुंचाई है तो मैं तहेदिल से माफी मांगता हूं।
    फिल्म क्वीन की अभिनेत्री कंगना ने करण जौहर के चैट शो कॉफी विद करण में उन्हें परिवारवाद का ध्वजवाहक यानी परिवारवाद को बढ़ावा देने वाला कहा था।
    करण ने कहा, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरे और कंगना के बीच में क्या विवाद है। मेरी परवरिश एक अच्छे और सभ्य परिवार में हुई है और मुझे लगता है कि मैं कहीं न कहीं उस आधार पर फेल हुआ हूं। मुझे लगता है कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि किसी विषय पर मैं क्या सोचता हूं, लेकिन मुझे इस विषय को बार-बार नहीं उठाना चाहिए... और इस बात के लिए मैं काफी अफसोस महसूस कर रहा हूं।
    करण जौहर ने कहा, यह बात हमने सिर्फ मजाक में कही थी। इसे कहने की जगह गलत हो सकती है, तरीका गलत हो सकता है या यह एक बेकार जोक हो सकता है लेकिन यह किसी को दुखी करने या परेशान करने के लिए नहीं था। मैं उस पल में थोड़ा बहक गया था और मुझे उसका पछतावा है। करण जौहर और सैफ अली खान ने इस साल के आईफा अवॉर्ड्स होस्ट किए थे। (एनडीटीवी)

स्थायी स्तंभ

  • इतिहास में 20 जुलाई

    कोई जीत छोटी नहीं होती लेकिन बात दुनिया जीतने की हो तो उसे बड़ी कहना जरूरी हो जाता है. शायद इसी सोच ने दुनिया जीतने वाले सिकंदर को आज तक बड़ा बनाए रखा है. ईसा पूर्व 356 में आज ही के दिन सिकंदर महान ने जन्म लिया.
    प्राचीन ग्रीस के उत्तर में मौजूद मैसेडोनिया के इस राजा ने पेला में आंखें खोली और 16 साल की उम्र तक अरस्तू से ज्ञान अर्जित किया. अपना तीसवां जन्मदिन मनाने तक सिकंदर ने दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया था जिसका विस्तार भूमध्यसागर से लेकर हिमालय तक था. जंग के मैदान में सिकंदर अविजित रहे और इतिहास उन्हें सबसे सफल कमांडर मानता है.
    सिकंदर ने अपने पिता फिलिप द्वीतीय की हत्या के बाद मैसेडोनिया की गद्दी संभाली थी और विरासत में उन्हें एक मजबूत साम्राज्य और अनुभवी सेना मिली थी. सिकंदर ने सेना के विस्तार की अपनी पिता की योजनाओं को आगे बढ़ाया. ईसा पूर्व 334 में सिकंदर ने पहला धावा बोला और फिर अगले 10 सालों तक चले विजय अभियान के पूरा होने तक उसकी सेना भारत तक जा पहुंची थी. आज भी दुनिया भर की सेनाएं सिकंदर की रणनीतियों और तौर तरीकों का इस्तेमाल करती हैं. महज 32 साल की उम्र में ही सिकंदर की बीमारी से मौत हो गई.

    इतिहास में 20 जुलाई

    • 1969-अपोलो-11 के अंतरिक्षयात्रियों नील आर्मस्ट्रांग तथा ऐड्विन ऐल्ड्रिन ने पहली बार चन्द्रमा पर क़दम रखे।
    • 1974-तुर्की की सेना ने साइप्रस के तुर्क क्षेत्रों पर जो इस क्षेत्र का उत्तरी भाग है कब्ज़ा कर लिया । साइप्रस में तुर्क और यूनानी नागरिकों के बीच लम्बे समय से विवाद जारी रहा इस बीच तुर्की ने साइप्रस के तुर्की और यूनान ने यूनानियों का समर्थन किया। साइप्रस के राष्ट्रीय गारद के विद्रोह और यूनानियों के शासक असकफ़़ माकारयोस के अपदस्थ हो जाने के कारण तुर्की की सेना के बहाना मिल गया और उसने उत्तरी साइप्रस के तुर्क क्षेत्रों पर जो देश के क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत है, कब्ज़ा  कर लिया। इस प्रकार यह क्षेत्र तुर्क और यूनानी दो भागों में बंट गया। उत्तरी भाग पर अब भी तुर्की का अधिकार है। दोनों ही भागों के एकीकरण के लिए प्रयास निरंतर जारी हैं।
    • 1976-अमेरिका के अंतरिक्ष यान वाइकिंग-1 लैन्डर 20 अगस्त 1975 को मंगल की धरती पर उतरा।
    • 1997- तीस्ता नदी के जल बंटवारे पर भारत-बांग्लादेश में समझौता।
    • 1999 - यू.आर. राव (भारत)  यूनिस्पेस-3 (अंतरिक्ष सम्मेलन) के अध्यक्ष निर्वाचित, स्पेन में प्रथम बौद्ध स्तूप का उद्घाटन।
    • 2002 - उत्तर व दक्षिण कोरिया ने आपस में वायुयान सेवा की शुरुआत की।
    • 2007- पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने मुशर्रफ़ सरकार द्वारा बर्खास्त किये गए मुख्य न्यायाधीश इफ़्ितख़ार चौधरी को पद पर पुन: बहाली का निर्णय दिया।
    • 2008- अमेरिकी विदेशमंत्री कोंडलिजा राइस ने भारतीय अमेरिकी डॉक्टर जयन्त पाटिल के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी।
    • 1972- पाश्र्व गायिका गीता दत्त का निधन हुआ। 
    • 1804 -अंग्रेज़ पुराजन्तु विज्ञानी सर रिचर्ड ओवेन का जन्म हुआ, जो जीवाश्म जन्तुओं के अध्ययन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने डायनासोर  शब्द दिया जिसका शाब्दिक अर्थ होता है भयानक छिपकली। (निधन-18 दिसम्बर 1892) 
    • 1897-स्विस रसायनज्ञ  टैडियस रीक्सटीन का जन्म हुआ, जिन्होंने फिलिप एस. हेन्च तथा ऐडवर्ड सी. कैन्डेल के साथ ऐड्रीनल कॉर्टेक्स के हार्मोन पर अध्ययन करने के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।
    • 1937 -इटली के अन्वेषक  गुग्लिएल्मो मार्कोनी का निधन हुआ,  जो एक भौतिकविद् भी थे। उन्होंने वायरलेस टेलीग्राफी की खोज की जिसे आज रेडियो कहा जाता सन् 1909 में उन्हें कार्ल फर्डीनैंड ब्राउन के साथ नोबेल पुरस्कार मिला। (जन्म 25 अप्रैल 1874)
    • 1819-स्कॉटलैंड के गणितज्ञ भौतिकीविद् तथा भूगोलशास्त्री जॉन प्लेफेयर का निधन हुआ, जो अपने उस सिद्धान्त के लिए जाने जाते हैं कि जिसके अनुसार- कोई दो सीधी प्रतिच्छेदित रेखाएं एक साथ किसी तीसरी सीधी रेखा के समान्तर नहीं हो सकतीं। (जन्म 10 मार्च 1748)

खेल

  • महिला वर्ल्‍डकप : भारत का कल ऑस्‍ट्रेलिया से मुकाबला

    जीती तो दूसरी बार फाइनल में पहुंचेगी
    डर्बी: आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम आईसीसी महिला वर्ल्‍डकप के दूसरे सेमीफाइनल में गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरेगी तो उसके इरादे छह बार की चैंपियन को हराकर खिताब की ओर अगला कदम रखने के होंगे. भारत का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खराब रिकॉर्ड रहा है और 42 में से 34 मैचों में उसे पराजय झेलनी पड़ी है. मिताली राज की अगुवाई वाली टीम हालांकि कल उस हार का बदला चुकता करने उतरेगी. भारत अगर कल जीतता है तो टूर्नामेंट के इतिहास में दूसरी बार फाइनल में पहुंच जाएगा. भारत 2005 में दक्षिण अफ्रीका में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा था जिसमें उसे ऑस्ट्रेलिया ने हराया था. दक्षिण अफ्रीका राउंड रॉबिन चरण में पांच जीत और दो हार के साथ तीसरे और आस्ट्रेलिया सात मैचों छह जीतकर दूसरे स्थान पर रहा.
    यह मैच काउंटी ग्राउंड पर खेला जाएगा जहां भारत ने अपने चार ग्रुप मैच खेले हैं जिसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ 'करो या मरो' का आखिरी मैच शामिल था. दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने इस मैदान पर एक भी मैच नहीं खेला है लेकिन उसका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है. भारतीय कप्तान मिताली ने कहा,‘मुझे लगता है कि यह हमारा घरेलू मैदान है चूंकि हमने यहां चार मैच खेले हैं.’भारत को इस मैच के जरिये राउंड राबिन चरण में आस्ट्रेलिया से मिली आठ विकेट से हार का बदला चुकता करने का भी मौका मिलेगा. यह करना हालांकि आसान नहीं होगा. ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए भारत को खेल के हर विभाग में उम्दा प्रदर्शन करना होगा. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ राउंड रॉबिन चरण में धीमी पारी खेलनी वाली मिताली अपनी गलती सुधारना चाहेगी जबकि पूनम राउत अपना शतकीय प्रदर्शन दोहराने के इरादे से उतरेगी. न्यूजीलैंड के खिलाफ दबाव वाले मैच में मिताली ने शतक बनाया जबकि वेदा कृष्णामूर्ति ने 40 गेंद में 70 रन जोड़े । इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड को सिर्फ 79 रन पर समेटकर 186 रन से जीत दर्ज की.
    मिताली और कृष्णामूर्ति के अलावा हरमनप्रीत कौर ने भी अर्धशतक जमाया. सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना का खराब फॉर्म हालांकि चिंता का सबब है. गेंदबाजी में स्पिनरों ने प्रभावित किया है लेकिन झूलन गोस्वामी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व कप में पदार्पण करने वाली स्पिनर राजेश्वरी गायकवाड़ ने 15 रन देकर पांच विकेट लिए थे. न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली बड़ी जीत से भारत के हौसले बुलंद होंगे. मिताली ने कहा ,‘ऑस्ट्रेलिया बेहतरीन टीम है. उसकी बल्लेबाजी में गहराई है और गेंदबाज बहुत उम्दा है. हमें मैच के दिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा ताकि उसे हरा सके.’
    दोनों टीमें इस प्रकार हैं
    भारत : मिताली राज (कप्तान ) , एकता बिष्ट, राजेश्वरी गायकवाड़, झूलन गोस्वामी, मानसी जोशी, हरमनप्रीत कौर, वेदा कृष्णमूर्ति , स्मृति मंधाना, मोना मेशराम, शिखा पांडे, पूनम यादव, नुजहत परवीन, पूनम राउत, दीप्ति शर्मा, सुषमा वर्मा, स्मृति मंधाना.
    ऑस्ट्रेलिया : मेग लेनिंग ( कप्तान ), सारा एले, क्रिस्टीन बीम्स, एलेक्स ब्लैकवेल, निकोल बोल्टन, एशले गार्डनर, रशेल हेंस, एलिसा हीली, जेस जोनासेन, बेथ मूनी, एलिसे पेरी, मेगान शट, बेलिंडा वेकारेवा, एलिसे विलानी, अमांडा जेड वेलिंगटन.
    मैच का समय : तीन बजे से.
    (भाषा)

कारोबार

  • मूर्ति को इन्फोसिस छोड़ने का अफसोस, कहा जिंदगी की सबसे बड़ी भूल

    बेंगलूरु। प्रमुख आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति ने अपने दूसरे कार्यकाल के बाद 2014 में इस सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी को छोड़ने के निर्णय को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल करार दिया है। उसी दौरान उन्होंने कंपनी की कमान गैर-संस्थापक प्रबंधन एवं बोर्ड को सौंप दी थी। अपनी सेवानिवृत्ति के दो साल बाद जून 2013 में मूर्ति ने दोबारा इस सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी की कमान संभाली थी क्योंकि तत्कालीन सीईओ एवं सह-संस्थापक एसडी शिबुलाल उनकी दृष्टि इन्फोसिस 3.0 को लागू करने और अनिश्चितता के माहौल में वृद्धि के लिए संघर्ष कर रही थी ।
    मूर्ति ने अपने बेटे रोहन मूर्ति की मदद से कंपनी को पुनर्गठित किया जो उनके कार्यकारी सहायक के तौर पर कंपनी से जुड़े थे। इसके तहत मूर्ति ने लागत में कटौती, उत्पादकता बढ़ाने और ग्राहकों के साथ संबंध को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित किया था। करीब एक साल तक चले इस अभियान के दौरान वी बालकृष्णन एवं अशोक वेमुरी सहित ऐसे आठ शीर्ष अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया जो शीर्ष पद के लिए शिबुलाल का उत्तराधिकारी बन सकते थे।
    मूर्ति ने बाहर से किसी सीईओ को नियुक्त कर उनके हाथों में इन्फोसिस की कमान सौंपने के लिए भी तैयार हो गए। इसी क्रम में सैप के पूर्व बोर्ड सदस्य विशाल सिक्का को नियुक्त कर कंपनी के नेतृत्व की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी गई। उसके बाद मूर्ति और उनके बेटे रोहन ने इन्फोसिस के सात सह-संस्थापकों में से अंतिम दो सह-संस्थापकों एस गोपालकृष्णन और वाइस चेयरमैन शिबुलाल के साथ कंपनी से बाहर होने का निर्णय लिया।
    मूर्ति ने सीएनबीसी टीवी18 समाचार चैनल से बातचीत में कहा, 'आप जानते हैं कि 2014 में हमारे कई सह-संस्थापक साथियों ने मुझसे इन्फोसिस को न छोडऩे और कुछ साल और बरकरार रहने के लिए कहा था। सामान्य तौर पर मैं काफी भावुक व्यक्ति हूं और हमारे अधिकतर निर्णय आदर्शवाद पर आधारित हैं लेकिन मुझे संभवत: अपने साथियों को सुनना चाहिए था।' उस समय मूर्ति ने जोर देकर कहा था कि वह कंपनी में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने 1981 में अपनी भूमिका शुरू की थी और इन्फोसिस को सॉफ्टवेयर निर्यात करने वाली भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी के तौर पर स्थापित कर दिया। मूर्ति ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया।
    जब कंपनी की कमान सिक्का को सौंपी जा रही थी तो इन्फोसिस ने देखा कि उसका चेयरमैन केवी कामथ ने एशियाई विकास बैंक से जुड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया और जून 2015 में आर शेषशायी को नियुक्त किया गया। इस प्रकार कंपनी के संचालन की जिम्मेदारी गैर-संस्थापक सदस्यों वाले बोर्ड और प्रबंधन को दी गई। लेकिन सबकुछ सही नहीं रहा। पिछले साल से ही मूर्ति कंपनी प्रशासन संबंधी मुद्दों पर चिंता जताने लगे। 
    कंपनी के पूर्व सीएफओ राजीव बंसल और महाधिवक्ता डेविड केनेडी को कंपनी छोड़ने छोडऩे के लिए दिए गए भारीभड़कम पैकेज को लेकर मूर्ति ने चिंता जताई और उन्होंने कंपनी प्रशाशन में चूक को लेकर वर्तमान बोर्ड के चेयरमैन शेषशायी के इस्तीफे की मांग भी कर दी। हालांकि शेषशायी ने कहा कि बोर्ड सभी शेयरधारकों का ट्रस्टी है और कंपनी ने मूर्ति के आग्रह पर इन्फोसिस मेंं उनके पूर्व साथी डीएन प्रहलाद को बोर्ड में शामिल कर लिया। इसके अलावा एक अन्य बोर्ड सदस्य रवि वेंकटेशन को सह-चेयरमैन के तौर पर पदोन्नति दी गई। साथ ही कंपनी ने अपनी नीतियों में भी बदलाव करते हुए कहा कि वह खुलासा संबंधी सभी प्रावधानों का अनुपालन करेगी और कहीं अधिक पारदर्शी बनेगी। हालिया सालाना आम बैठक में इन्फोसिस के शेयरधारकों ने कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए सिक्का के नजरिये का समर्थन किया लेकिन मूर्ति की चिंताओंं पर भी गौर करने के लिए कहा। मूर्ति के शब्दों में कहें तो आंधी अभी थमी नहीं है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

सेहत/फिटनेस

  • ब्रेन सर्जरी के दौरान गिटार बजाता रहा

    बेंगलुरु। ब्रेन सर्जरी का एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां 32 साल के एक युवक के न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर के बाद उसका ऑपरेशन किया गया, जिस समय ऑपरेशन टेबल पर डॉक्टर सर्जरी कर रहे थे, उस समय युवक साथ-साथ गिटार भी बजा रहा था। पिछले हफ्ते सिटी हॉस्पिटल में 7 घंटे की सर्जरी के बाद युवा संगीतकार को काफी राहत है। यह युवक एक इंजीनियर से संगीतकार बना है। गिटार बजाते समय उसकी उंगलियों में बेहद दर्द होता था।
    तुषार (परिवर्तित नाम) को करीब डेढ़ साल पहले गिटार बजाते हुए पहली बार समस्या का पता चला। दिमाग की मांसपेशियों में गड़बड़ी की वजह से युवक को इस तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। डॉक्टर जिस समय उसके दिमाग की अतिरिक्त मांसपेशियों को जला रहे थे, जिससे तहत उसकी मांसपेशियों को असामान्य झटके दिए जाने थे। उस समय तुषार लगातार गिटार बजा रहा था ताकि समस्या वाली जगह का जल्दी पता चल सके। ब्रिटिश कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजव सी सी ने बताया, उसे समस्या उस समय आती थी जब वह गिटार बजाता था, ऐसे में हमारे लिए प्रॉब्लम और उसकी सही जगह समझना बेहद जरूरी था।
    जैन इंस्टिट्यूट ऑफ मूवमेंट डिस्ऑर्डर ऐंड स्टीरियोटैक्टिक न्यूरोसर्जन डॉ. शरन श्रीनिवासन ने बताया, यह एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें दिमाग में प्रॉब्लम वाली जगह को जलाकर खत्म किया जाता है। ऑपरेशन से पहले युवक के दिमाग में चार खास तरह के फ्रेम लगाए गए थे। युवक के एमआरआई के बाद आई तस्वीरों में टारगेट एरिया का पता लगाया गया। कॉडिनेट्स के मुताबिक, युवक की खोपड़ी में 14 एमएम का छेद किया गया, जिसमें खास तरह की इलेक्ट्रॉड पास कराई गई और उसके बाद आगे का ऑपरेशन किया गया। तुषार की हालत अब बेहतर है। जब तुषार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अचानक जादुई ढंग से उसकी उंगलियों का दर्द खत्म हो गया। (टाईम्स न्यूज)

सामान्य ज्ञान

  • किस देश में कितनी सुरक्षित है नागरिकों की सूचना

    दुनिया के तमाम देशों में सरकारें अपने नागरिकों की ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाने में लगी हैं।  ज्यादातर इसे प्रभावी कामकाज से जोड़ा जा रहा है।  अब तक किसी दूसरे व्यक्ति या निजी समूहों से अपनी जानकारी बचाने की चिंताएं, अब सरकार से अपनी जानकारियां बचाने पर आ पहुंची हैं।  
     भारत- भारत में नागरिकों के निजता के अधिकार पर छिड़ी बहस अब सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है। नौ जजों की बेंच ने इतना साफ किया है कि प्राइवेसी बचाने के लिए सरकार को नागरिकों के लिए बाध्यकारी कानून बनाने से नहीं रोका जा सकता। सर्वोच्य न्यायालय ने   कहा कि निजता का अधिकार संपूर्ण अधिकार नहीं है और इस पर राज्य कुछ हद तक तर्कपूर्ण रोक लगा सकते हैं। पिछले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 20 याचिकाएं दाखिल हुई हैं।
    अमेरिका- विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र वाले देश अमरीका में निजता का अधिकार गंभीर मसला है। हालांकि यह संविधान में उल्लिखित नहीं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कई संशोधनों की व्याख्या इस तरह की, जिससे प्राइवेसी के अधिकार का पता चलता है। संविधान का चौथा संशोधन बिना किसी  संभावित कारण के किसी की तलाशी पर रोक लगाता है। कुछ अन्य संशोधनों में नागरिकों को बिना सरकारी दखलअंदाजी के अपने शरीर और निजी जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। खास है प्राइवेसी एक्ट, 1974। अमेरिका के इस एक्ट के अंतर्गत सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किसी की निजी जानकारियों को बिना उसकी अनुमति के देश की कोई केंद्रीय एजेंसी हासिल नहीं कर सकती। अगर किसी एजेंसी को जानकारी चाहिए तो पहले उसे बताना होता है कि उसे किस काम के लिए उस सूचना की जरूरत है। सोशल सिक्योरिटी नंबर को लेकर यह विवाद है कि इससे सरकारी एजेंसी यह जान जाती है कि कोई व्यक्ति टैक्स भरता है या नहीं या कैसे सरकारी अनुदान लेता है।
      जापान - वर्ष  2015 में जापान में नागरिकों की पहचान से जुड़ा एक नया सिस्टम शुरु हुआ. इसमें टैक्स से जुड़ी जानकारी, सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत मिलने वाले फायदों और आपदा राहत के अंतर्गत मिलने वाली मदद को एक साथ लाया गया। आलोचकों की भारी निंदा के बावजूद सरकार ने इसे शुरु कर दिया। सभी जापानी नागरिकों और वहां के विदेशी निवासियों को 12 अंकों की संख्या माइ नंबर  मिला। सरकार अब इसमें बैंक खातों को भी जोडऩा चाहती है।  जापान में भी निजता के अधिकार को साफ साफ परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन जापानी संविधान में नागरिकों को  जीवन, आजादी और खुशी तलाशने  का अधिकार है। 2003 में निजी सूचना की सुरक्षा का कानून बना, जिसमें लोगों की जानकारी को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। जब भी किसी व्यक्ति के डाटा का इस्तेमाल होगा, तो उसे इसके मकसद के बारे में जानकारी दी जाएगी। निजी डाटा को लीक से बचाने के लिए सरकार कानूनी रूप से बाध्य है।
     यूरोपीय देश- पूरे यूरोप में डाटा प्रोटेक्शन डायरेक्टिव लागू होते हैं। इसके अंतर्गत लोगों की सूचना के रखरखाव और इस्तेमाल पर कई तरह की रोक है। ईयू के सदस्य देशों को  ऐसे तकनीकी और संगठनात्मक उपाय लागू करने होते हैं जिससे किसी के डाटा का गलती या गैरकानूनी इस्तेमाल ना हो, ना ही उसे कोई अनाधिकृत व्यक्ति पा सके, बदल सके या किसी तरह का नुकसान पहुंचा सके।  इस नियम का उल्लंघन होने पर न्यायिक उपायों का व्यवस्था है।
    स्वीडन- स्वीडन विश्व का पहला देश था जहां नागरिकों को पहचान संख्या दी गयी। हर सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल अनिवार्य हुया, लेकिन अगर किसी की सूचना उसकी जानकारी के बिना इस्तेमाल की जाये और उस पर नजर रखी जाये, तो इसके खिलाफ सुरक्षा मिलेगी। स्वीडन जैसे स्कैंडेनेवियाई देशों में सरकार से नागरिकों को इतने भत्ते मिलते हैं, जिनके लिए लोगों का पहचान नंबर देना जरूरी होता है। प्राइवेसी की चिंता यहां बहुत कम है।
    भारत में  चावल अनुसंधान संस्थान का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होगा
     अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला, फिलीपींस में स्थित है। अब भारत में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने की तैयारी की जा रही है।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 जुलाई 2017 को वाराणसी स्थित राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र  परिसर में यह केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत वाराणसी में चावल में मूल्य संवर्धन के लिए एक उत्कृष्टता केंद स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
    पूर्वी भारत में यह पहला अंतरराष्ट्रीय केंद्र होगा जो इस क्षेत्र में सतत चावल उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में वरदान साबित होगा। इसके साथ ही दक्षिण एशिया और अफ्रीकी देशों के लिए भी यह खाद्यान्न उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।
    इस केंद्र का प्रबंधन आईआरआरआई के न्यासी बोर्ड द्वारा संचालित होगा। आईआरआरआई अपने सदस्य को इस केंद्र के निदेशक के तौर पर नियुक्त करेगी। आईआरआरआई के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति इस केंद्र के अध्यक्ष के तौर पर काम करेगी। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव इस केंद्र के सह अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होंगे।

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