सामान्य ज्ञान

काली मिट्टी

Posted Date : 07-Dec-2017



काली मिट्टी भारत में मिलने वाली प्रमुख  मिट्टी है।  यह मिट्टी ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा से बनती है। भारत में यह लगभग 5 लाख वर्ग-किमी. में फैली है। महाराष्ट्र में इस मिट्टी का सबसे अधिक विस्तार है। इसे दक्कन ट्रॅप से बनी मिट्टी भी कहते हैं। इस मिट्टी में चुना, पोटॅश, मैग्निशियम, एल्यूमिना और लोहा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसका विस्तार लावा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि नदियों ने इसे ले जाकर अपनी घाटियों में भी जमा किया है। 
काली मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है और कपास की उपज के लिए प्रसिद्ध है इसलिए इसे कपासवाली काली मिट्टी कहते हैं। इस मिट्टी में नमी को रोक रखने की प्रचुर शक्ति है, इसलिए वर्षा कम होने पर भी सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। इसका काला रंग शायद अत्यंत महीन लौह अंशों की उपस्थिति के कारण है। इस मिट्टी का रासायनिक संघटन इस प्रकार है-
 काली मिट्टी का रासायनिक संघटन
फेरिक ऑक्साइड        11.24 प्रतिशत
एल्यूमिना        9.39 प्रतिशत
जल तथा जीवांश        5.83 प्रतिशत
चूना            1.81 प्रतिशत
मैग्निशिया        1.79 प्रतिशत
 इसकी मिट्टी की मुख्य फसल कपास है। इस मिट्टी में गन्ना, केला, ज्वार, तंबाकू, रेंड़ी, मूँगफली और सोयाबीन की भी अच्छी पैदावार होती है।




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