सामान्य ज्ञान

वर्चुअल आईडी

Posted Date : 13-Jan-2018



आधार से डेटा लीक होने की तमाम आशंकाओं के बीच यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वेरिफिकेशन के लिए वर्चुअल आईडी जारी करने का फैसला किया है। कोई भी आधार कार्ड धारक प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाकर अपना वर्चुअल आईडी निकाल सकता है।
 वर्चुअल आईडी कंप्यूटर से बना 16 डिजिट का नंबर होगा जो जरूरत पडऩे पर तत्काल जारी किया जाएगा। इसे एक मार्च 2018 से जेनरेट किया जाने लगेगा। इस आईडी के जरिए बिना आधार नंबर शेयर किए सिम के सत्यापन समेत कई अन्य काम किए जा सकेंगे। वर्चुअल आईडी आधार से मैप होगी। आधार होल्डर कई बार आईडी जनरेट कर सकेंगे। नई आईडी जनरेट होते ही पुरानी रद्द हो जाएगी।
 वर्चुअल आईडी से मोबाइल कंपनी या किसी अन्य ऑथराइज्ड एजेंसी को कस्टमर का नाम, पता एवं फोटो मिल जाएगा जो कि सत्यापन के लिए पर्याप्त है। सत्यापन के लिए आधार का इस्तेमाल करनेवाली सभी एजेंसियों के लिए वर्चुअल आईडी स्वीकृत करना 1 जून, 2018 से अनिवार्य हो जाएगा। इसका पालन नहीं करनेवाली एजेंसियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
 सरकार केवाईसी के लिए आधार के इस्तेमाल को भी सीमित करेगी। अभी कई एजेंसियों के पास आपका डीटेल पहुंच जाता है और वे उसे अपने पास रखते हैं। जब केवाईसी के लिए आधार की जरूरत ही कम हो जाएगी तो ऐसी एजेंसियों की संख्या भी घट जाएगी जिनके पास आपके डीटेल होंगे।

साम्यवाद 
साम्यवाद  शब्द अंग्रेजी भाषा के कम्युनिज्म शब्द के अर्थ में प्रयुक्त होता है। इसका आधुनिक प्रयोग पेरिस फ्रांस के 1834-1839 के क्रांतिकारी संगठनों के बाद आरंभ हुआ। कार्ल माक्र्स और उसके सहयोगी एंजिल्स ने समाजवाद (सोशलिज्म) और साम्यवाद (कम्युनिज्म) का प्रयोग समानार्थी शब्द के रूप में किया है, परंतु रूस के क्रांतिकारी लेनिन ने अपने संगठन को पुराने समाजवादी आंदोलन से पृथक करके साम्यवाद नाम देना उचित समझा। आधुनिक विचारक समाजवाद को क्रांति की आरंभिक सीढ़ी और साम्यवाद को अंतिम सीढ़ी मानते हैं।
साम्यवाद की मान्यता है कि समाज में शोषक और शोषित, बुर्जुवा और सर्वहारा, पूंजीपति और श्रमिक ये परस्पर संघर्षरत वर्ग हंै। यह विचारधारा वैयक्तिक के स्थान पर सामूहिक या सार्वजनिक उत्पादन, वितरण और व्यवस्था की स्थापना चाहती है। समाजवाद जहां क्रांति के लिए शांतिमय तरीकों का समर्थक है, साम्यवाद इसके लिए बल प्रयोग और सर्वहारा के अधिनायकत्व का समर्थन करता है। यह विचारधारा संघर्षरत शोषित वर्ग को संगठित करने पर अधिक जोर देती है।




Related Post

Comments