सामान्य ज्ञान

  • 1. हाल ही में किस संस्थान ने पात्र विदेशी निवेशकों के लिए दिशा निर्देश में संशोधन किए हैं?

    (अ) इरडा (ब) आरबीआई (स) एफडीआई(द) सेबी

    2. वल्र्ड बॉक्सिंग ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूबीओ) वेल्टरवेट का खिताब निम्नलिखित में से किसने जीता?

    (अ) आमिर खान (ब) जेफ हॉर्न (स) विजेंदर सिंह (द) जुल्फिकार मैमत अली 

    3. फूल गोभी की फसल के लिए निम्न में से कौन सी जलवायु ज्यादा उपयुक्त रहती है?

    (अ)शीत और नम (ब) समशीतोष्ण(स)शुष्क (द)उष्ण और नम

    4. बंद गोभी की जल्दी बढऩे वाली जातियां अच्छी उगती हैं?

    (अ) दोमट मिट्टी में (ब) रेतीली मिट्टी में (स) अम्लीय मिट्टी में (द) क्षारीय मिट्टी में

    5. आधार बीज किस बीज को कहा जाता है?

    (अ) जो नर्सरी में उगाया जाता है (ब) जो बीज संस्थानों द्वारा उगाया जाता है (स) जो शत प्रतिशत शुद्ध हो (द) जो केंद्रक बीज की संतति से तैयार किया हो

    6. निम्न में से कौन सा सागर ईरान की उत्तरी सीमा को स्पर्श करता है?

    (अ) लाल सागर (ब)उत्तरी सागर (स)कैस्पियन सागर (द)भूमध्य सागर

    7. वह लड़ाकू विमान कौन सा है, जिसे भारतीय वायु सेना से हटा दिया गया है?

    (अ) अग्रि (ब) मिग-23 (स) आकाश (द) मिग-20

    8. रक्त के स्कंदन के लिए निम्नलिखित में से कौन सा विटामिन आवश्यक है?

    (अ) ए (ब) डी (स) ई (द) के

    9. संविधान सभा निम्नलिखित में से किसके अधीन गठित की गई?

    (अ) क्रिप्स मिशन (ब) कैबिनेट मिशन योजना (स) वैवेल योजना (द) नेहरू रिपोर्ट

    10. स्वतंत्र भारत की आर्थिक नीति के निर्माण से पी.सी. महालानोबिस किस भूमिका से संबद्घ थे?

    (अ) प्रायोगिक सांख्यिकीविद् (ब) योजना आयोग के उपाध्यक्ष (स) प्रमुख उद्योगपति (द) केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री 

    11. पृथ्वी से बढ़ती दूरी के अनुसार ग्रहों का निम्नलिखित में से कौन सा क्रम सही है?

    (अ) मंगल, शुक्र, बुध, बृहस्पति (ब) शुक्र, मंगल, बुध, बृहस्पति (स) शुक्र, बुध, मंगल, बृहस्पति (द) मंगल, शुक्र, बृहस्पति, बुध

    12. हीलियम के नाभिक में क्या होता है?

    (अ) एक प्रोटॉन तथा दो न्यूट्रॉन (ब) केवल एक प्रोटॉन (स) दो प्रोटॉन तथा दो न्यूट्रॉन (द) केवल दो प्रोटॉन

    13. साधारणतया द्रव ऊंचे तल से नीचे तल की ओर प्रवाहित होते हैं। निम्नलिखित में से कौन सा द्रव ग्लास में रखने पर ऊपर की ओर चढ़ सकता है?

    (अ) जल (ब) द्रव नाइट्रोजन (स) द्रव हीलियम (द) पेट्रोल

    14. वस्त्र उद्योग में सहायक फल है?

    (अ) केला (ब) नासपाती (स) नारंगी (द) शहतूत 

    15. विश्व में किस खाड़ी की तटरेखा सर्वाधिक लंबी है?

    (अ) मैक्सिको की खाड़ी (ब) बिस्के की खाड़ी (स) हडसन की खाड़ी की (द) इनमें से कोई नहीं

    16. पोटैलैंड सीमेंट के विनिर्माण के लिए उपयोग में ली गई कच्ची सामग्री है?

    (अ) चूना पत्थर एवं मिट्टी (ब) एल्युमिना, मिट्टïी एवं जिप्सम (स) जिप्सम एवं चूना पत्थर (द) जिप्सम एवं मिट्टïी

    17. भारत के प्रसिद्घ उद्योगपति नरेश गोयल निम्नलिखित में से किस क्षेत्र के जाने-माने उद्यमी हैं?

    (अ) टेक्सटाइल्स (ब) दूरसंचार (स) उड्डïयन (द) बीमा

    18. निम्नलिखित में से किस सुल्तान ने सर्वप्रथम स्थायी सैन्य बल का गठन किया?

    (अ) इल्तुतमिश (ब) बलबन (स) अलाउद्दीन खिलजी (द) मुहम्मद बिन तुगलक

    19. मालविका इस्पात कारखाना, उत्तर भारत का सबसे पहला पूर्णरूपेण एकीकृत इस्पात कारखाने की स्थापना किए जाने वाला राज्य है?

    (अ) बिहार (ब) हिमाचल प्रदेश (स) उत्तरप्रदेश  (द) पंजाब

    20. चेर वंश ने ने किसे अपनी राजधानी बनाया था?

    (अ) मुजिरिस (ब) वाजि (स) अरिकमेडु (द) सौपारा

    21. देश में पहली बार कृषि गणना किस वर्ष कराई गई?

    (अ) वर्ष 1955 (ब) वर्ष 1970 (स) वर्ष 1975 (द) वर्ष 1980

    22. कर्नाटक राज्य में सेंट्रल फॉडर सीड प्रोडक्शन फार्म कहां स्थित है?

    (अ) शादनगर (ब) कल्पक्कम् (स) आवडी (द) हैस्सरघट्टïा

    23. ऋणात्मक उत्प्रेरक वे हैं, जो?

    (अ) अभिक्रिया के वेग को कम करते हैं (ब) अभिक्रिया के वेग को बढ़ाते हैं (स) अभिक्रिया के वेग को अपरिवर्तित रखते हैं (द) प्रेरित उत्प्रेरक की भांति व्यवहार करते हैं

    24. नाभिकीय भट्टïी में ग्रेफाइट को किस रूप में प्रयुक्त किया जाता है?

    (अ) स्नेहक के रूप में (ब) ईंधन के रूप में (स) भट्टïी के आंतरिक भाग में स्नेहक के स्तर के रूप में (द) न्यूट्रॉनों का वेग घटाने के लिए

    25. मूलांकर के अतिरिक्त पौधे के किसी भी भाग से विकसित होने वाली जड़ें कहलाती हैं?

    (अ) तन्तुमय मूल (ब) अपस्थानिक मूल (स) अवस्तंभ मूल (द) मूसला जड़ें

    26. पुनर्जीवन का गुण होने के कारण निम्नलिखित में से किसे मेजों पर सजावट के लिए रखते हैं?

    (अ)लाइसोटम (ब) लाइकोपोडियम (स)सिलेजिनेला (द) सिरेटोप्टेरिस

    27. चावल का एक दाना निम्न में से क्या है? 

    (अ) एक बीज(ब)एक बीजीय फल (स) बहुबीजीय फल (द) भू्रणपोष  

    सही जवाब-1.(द) सेबी, 2.(ब) जेफ हॉर्न, 3.(अ) शीत और नम, 4.(ब) रेतीली मिट्टी में, 5.(द) जो केंद्रक बीज की संतति से तैयार किया हो, 6.(स) कैस्पियन सागर, 7.(ब) मिग-23, 8.(द) के, 9.(ब) कैबिनेट मिशन योजना, 10.(अ) प्रायोगिक सांख्यिकीविद्, 11.(ब) शुक्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, 12.(स) दो प्रोटॉन तथा दो न्यूट्रॉन, 13.(स) द्रव हीलियम, 14.(द) शहतूत, 15.(स) हडसन की खाड़ी की, 16.(ब)एल्युमिना, मिट्टïी एवं जिप्सम, 17.(स)उड्डïयन, 18.(अ) इल्तुतमिश, 19.(स) उत्तरप्रदेश, 20.(ब) वाजि, 21.(ब) वर्ष 1970, 22.(द) हैस्सरघट्टïा, 23.(अ) अभिक्रिया के वेग को कम करते हैं, 24.(द) न्यूट्रॉनों का वेग घटाने के लिए, 25.(ब) अपस्थानिक मूल, 26.(स) सिलेजिनेला, 27.(ब) एक बीजीय फल।

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  • क्यूबन पेसो (राष्ट्रीय पेसो भी कहा जाता है) क्यूबा की क्यूबन कन्वर्टेबल पेसो के अलावा दूसरी आधिकारिक मुद्रा है। इसे सौ सेंटावोस से समविभाजित किया जाता है।  डॉलर्स को कभी पेसो कहा जाता है, और क्यूबन कन्वर्टेबल पेसो को डालर कहा जाता है, जिससे भ्रम की स्थिति निर्मित होती है। क्यूबन राज्य कर्मचारियों को उनके मेहनताने का कुछ हिस्सा क्यूबन कन्वर्टेबल पेसो में तो बाकी हिस्सा सामान्य पेसों में दिया जाता है। जिन दुकानों में फल-सब्जी की बिक्री होती है, वहां सामान्य पेसो को, वहीं अन्य जगहों पर क्यूबन कन्वर्टेबल पेसो को स्वीकार किया जाता है।
    एलटीटीई विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच आज ही के दिन  गृह युद्ध शुरू हुआ
     तमिल टाइगर्स के नाम से विख्यात एलटीटीई विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच 26 सालों तक चले गृह युद्ध में हजारों जानें गईं। यह युद्ध 23 जुलाई , 1983 में शुरू हुआ था।  विद्रोही समूह उत्तरी और पूर्वी इलाके को स्वतंत्र प्रांत बनाने की कोशिश में था। सालों चले इस संघर्ष में अस्सी हजार से ज्यादा जानें गई। इस संघर्ष के दौरान इस्तेमाल किए गए विद्रोह के तरीके के चलते संयुक्त राष्ट्र और भारत समेत 32 देशों ने उन्हें आतंकवादी संगठन करार दिया।
     18 मई 2009 को श्रीलंका की सरकार ने तमिल विद्रोहियों के साथ चल रही जंग के खत्म होने का एलान किया।  सेना ने देश के उत्तरी हिस्से पर कब्जा किया और लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन को मार दिया गया।  सेना के मुताबिक अंतिम लड़ाई में 250 विद्रोही मारे गए।  72 हजार  लोगों को युद्ध से प्रभावित इलाकों में अपना घर छोड़ कर जाना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2009 में 20 जनवरी और 7 मई के बीच 7 हजार लोग मारे गए थे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने वहां युद्ध अपराधों के जांच की मांग की है। नवंबर में कॉमनवेल्थ बैठक कोलंबो में होने वाली है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि श्रीलंकाई सरकार युद्ध अपराध के मामलों को गंभीरता से ले और इन पर जांच शुरू हो।
     पंचेश्वर परियोजना
     भारत और नेपाल के बीच महाकाली और सरयू नदी के संगम में प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना का विरोध तेज हो गया है।   पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना के निष्पादन, प्रचालन और अनुरक्षण के लिए वर्ष 2014 में भारत और नेपाल द्वारा संयुक्त रूप से पंचेश्वर विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई है।  इस परियोजना से 5040 मे.वा. विद्युत उत्पादन और 4.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र (भारत में 2.6 लाख हेक्टेयर और नेपाल में 1.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र) की सिंचाई क्षमता सृजित होगी। परियोजना में 6 बीसीएम का भंडारण होगा; 5050 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होगा, 4.3 लाख हेक्टेयर सिंचाई होगी,जिसमें से 2.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र भारत में है, इसकी कुल लागत 33 हजार 108 करोड़ रूपए होगी। परियोजना से वार्षिक तौर पर 4 हजार 592 करोड़ रूपए का लाभ होगा जिसमें 3 हजार 665 करोड़ रूपए का विद्युत लाभ, 837 करोड़ रूपए का सिंचाई लाभ और 90 करोड़ रूपए का बाढ़ संबंधी लाभ शामिल है। 
    पंचेश्वर भंडारण बांध बाढ़ों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।   भारत-नेपाल का 230 किमी. का सीमांकन करती महाकाली नदी पर पंचेश्वर में बनने वाले इस बांध के प्रस्ताव 'भारत-नेपाल महाकाली संधिÓ पर 12 फरवरी 1996 को दोनों देशों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। नवम्बर 1999 में काठमांडू में एक संयुक्त परियोजना प्राधिकरण (जेपीओ) गठित की गई। पंचेश्वर बांध 315 मी. ऊंचा विश्व में दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा।  इस परियोजना पर दो चरणों में काम होना है। पहले 315 मीटर ऊंचा बांध पंचेश्वर में महाकाली और सरयू नदी के संगम से 2 किमी नीचे बनना है।
     दूसरे चरण में 145 मीटर ऊंचाई वाला बांध इससे नीचे महाकाली की अग्रगामी शारदा नदी पर पूर्णागिरी में। बांध की इस बहुउद्देश्यीय परियोजना में भारत और नेपाल का 134 वर्ग किमी क्षेत्र डूब जाना है। इसमें भी 120 वर्ग किमी का क्षेत्र उत्तराखण्ड का है। सिर्फ 14 वर्ग किमी का क्षेत्र नेपाल का डूबेगा। दोनों ही ओर महाकाली और सहायक नदियों की उपजाऊ तलहटी में बसे प्रमुखत: कृषि पर जीवनयापन करने वाले 115 गांवों के 11 हजार 361 परिवार प्रभावित होंगे। 'टिहरी विस्थापन' से उबर भी न पाए उत्तराखण्ड के लोगों को एक और बड़े विस्थापन से जूझने की तैयारी करनी है। नेपाल ने अपने प्रभावित क्षेत्र के गांवों के पुनर्वास का एक नक्शा भी तैयार कर लिया है। भारत की ओर से क्षेत्रीय लोगों को ऐसे किसी भी नक्शे की जानकारी नहीं है।
     विस्थापन से पुनर्वास के अतिरिक्त मध्य हिमालयी क्षेत्र में बनने वाले इस बृहद बांध से कई समस्याएं हैं। भूगर्भवेत्ताओं का मानना है कि 'पंचेश्वरÓ भूगर्भीय हलचलों की दृष्टि से Óजोन 4Ó में है। बांध में रोके जाने वाले पानी से यहां तकरीबन 80 से 90 करोड़ घन लीटर का दबाव पड़ेगा। 
    यह दबाव पहाड़ों के भीतर संवेदनशील स्थिति में अवस्थित चट्टानों को धंसाने का काम कर सकता है। इसके कारण बड़े भूकम्पों की आशंका है। विगत 15 वर्षों में मध्य हिमालय के 'सीसमिक 4 जोनÓ में रिएक्टर पैमाने पर 5 अंकों की तीव्रता से ऊपर वाले दस भूकम्प दर्ज हुए हैं। इनमें से पांच भूकम्पों का केन्द्र पंचेश्वर से 10 किमी की दूरी के अंदर ही रहा है। 

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  • बाजरा का उत्पादन चारा और खाद्यान्न दोनों के लिए समान रूप से होता है। इस फसल का खाद्यान्न के रूप में मुख्यत: उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और गुजरात में होता है।  बाजरा की खेती गर्म एवं शुष्क जलवायु में होती है। इसकी खेती मुख्यत: जून और अक्टूबर के बीच होती है। शीत ऋतु की फसल के रूप में इस फसल का उत्पादन नवम्बर से फरवरी के बीच होता है, जबकि ग्रीष्म ऋतु की फसल के रूप में इस फसल का उत्पादन मार्च से जून के बीच होता है। कम वर्षा वाले क्षेत्र इस फसल के लिए उपयुक्त हैं।
     इस फसल का उत्पादन उन्हीं क्षेत्रों में अधिक होता है, जहां वार्षिक वर्षा 100 सेंटीमीटर से कम दर्ज की जाती है। बाजरा की वृद्धि के लिए 25ए सेंटीग्रेड से 35ए सेंटीग्रेड तक के तापमान को उपयुक्त माना जाता है। इस फसल का उत्पादन विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में होता है- पंजाब और उत्तर प्रदेश में दोमट मिट्टी में, राजस्थान और उत्तरी गुजरात में हल्की मिट्टी में, जबकि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में कठोर चिकनी मिट्टी में और महाराष्ट्र में लाल एवं हल्की मिट्टी में। इस फसल के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हल्की मिट्टी ही है।
     इस फसल की खेती पृथक एवं मिश्रित दोनों रूप में की जाती है। मिश्रित कृषि के रूप में इसका उत्पादन कपास, ज्वार या रागी के साथ किया जाता है। इस फसल का उत्पादन वर्ष में तीन या चार बार किया जा सकता है। इसकी खेती के लिए बहुत ही छोटे पैमाने पर भूमि को तैयार करना पड़ता है।
     राजस्थान, महाराष्ट्र,  गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और पंजाब प्रमुख बाजरा-उत्पादक राज्य हैं। भारत में बाजरा की अनेक प्रकार की किस्में उत्पादित की जाती हैं, जिनमें प्रमुख हैं- सी. ओ. 1, सी.ओ. 2, सी.ओ. 3, सी.ओ. 4, सी.ओ. 5, के. 1, एक्स. 3, एच.एस.वी. 67, एच. एच.बी. 50, डब्ल्यू.सी.सी. 75 आदि।
    सातवाहन
    सातवाहन भारत का एक राजवंश था । जिसने केन्द्रीय दक्षिण भारत पर शासन किया । इस वंश का आरंभ सिभुक अथवा सिंधुक नामक व्यक्ति ने दक्षिण में कृष्णा और गोदावरी नदियों की घाटी में किया था। इसे आंध्र राजवंश भी कहते हैं।  वंश के संस्थापक विभुक ने 60 ई. पू. से 37 ई. पू. तक राज्य किया। उसके बाद उसका भाई कृष्ण और फिर कृष्ण का पुत्र सातकर्णी प्रथम गद्दी पर बैठा। इसी के शासनकाल में सातवाहन वंश को सबसे अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। वह ,खारवेल का समकालीन था। उसने गोदावरी के तट पर प्रतिष्ठानगर को अपनी राजधानी बनाया। इस वंश में कुल 27 शासक हुए। ये हिंदू धर्म के अनुयायी थे। साथ ही इन्होंने बौद्ध और जैन विहारों को भी सहायता प्रदान की। यह मौर्य वंश के पतन के बाद शक्तिशाली हुआ 8 वीं सदी ईसा पूर्व में इनका उल्लेख मिलता है । अशोक की मृत्यु (सन् 232 ईसा पूर्व) के बाद सातवाहनों ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया था । 
    कार्ले चैत्यगृह
     मुम्बई के निकट कार्ले चैत्यगृह 1900 वर्ष पूर्व खोदकर बनाया गया था।  यह चैत्यगृह दोनों तरफ़ सीधी रेखा में बने स्तम्भों के लिए प्रसिद्ध है।
    इस विशाल चैत्यगृह में तीन विहार भी हैं।  इसमें आगे का भाग दो मंजिला है, और नीचे के हिस्से में तीन दरवाजे हैं।  ऊपर एक बरामदा है, जिसमें एक विशाल चैत्य गवाक्ष है।
     इस चैत्यगृह की लम्बाई 38.25 मीटर, चौड़ाई 15.10 मीटर तथा ऊंचाई 14.50 मीटर है। चैत्यगृह के अन्दर एवं बाहर कई अभिलेख अंकित है। इसी आधार पर इसके निर्माण का समय प्रथम शताब्दी ई. का प्रारम्भिक चरण माना जाता है। 

     

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  • कहवा या कॉफ़ी का पौधा भारत में 18वीं शताब्दी में ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा लाया गया था। सन् 1798 में तैलीचेरी के निकट यह प्रयोगात्मक रूप से बोया गया, किन्तु सन् 1830 से ही इसे पैदा किया जाने लगा। भारत में विश्व के उत्पादन का केवल 4.5 प्रतिशत कहवा ही पैदा होता है, किन्तु इसका स्वाद उत्तम होने के कारण विश्व के बाज़ारों में इसका मूल्य अधिक मिलता है। भारतीय कहवा को मधुर कहवा कहा जाता है। कहवा उत्पादन में लगभग 6 लाख व्यक्ति लगे हुए हैं।   कहवा भारत की एक महत्वपूर्ण बगनी फसल है। इस फसल की उत्पत्ति अबीसीनिया में माना जाता है। भारत में इसका उत्पादन चिकमंगलूर (कर्नाटक) से शुरू हुआ। मक्का के एक फकीर बाबा बुदान साहिब ने 17वीं शताब्दी में भारतीयों को कहवा से परिचित कराया। कर्नाटक, केर और तमिलनाडु इसके प्रमुख उत्पादक हैं। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और मध्य प्रदेश अन्य कहवा उत्पादक राज्य हैं।
     भारत में कहवा की दो प्रजातियां मुख्य रूप से उगाई जाती हैं- अरबिका  और रोबुस्टा । अरबिका का उत्पादन 900 मीटर से 1200 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तथा रोबुस्टा का उत्पादन लगभग 150 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होता है। कहवा के उत्पादन में जलवायविक एवं पर्यावरणीय कारक- वर्षा, तापमान और उच्चता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 180 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा के साथ उष्ण एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। इसकी कृषि के लिए तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड से 30  डिग्री  सेंटीग्रेड के बीच होना चाहिए। इसके अतिरिक्त कहवा की कृषि के लिए मिट्टी में लोहा एवं चूना की पर्याप्त मात्रा का होना आवश्यक होता है।
     भारत में अरेबिका किस्म का कहवा पैदा किया जाता है जो आरम्भ में यमन से लाया गया था। इस किस्म के कहवे की विश्व भर में अधिक मांग है। इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बुदन की पहाडिय़ों से हुई और आज भी नीलगिरि पहाड़ी के चारों ओर संकेंद्रित है। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु कहवा के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। भारत में अरेबिका कहवे की तुलना में रोबेस्टा कहवे का उत्पादन अधिक होता है।
    गोवर्धन
    गोवर्धन एक प्रख्यात मुगल चित्रकार थे, जो शाही सेवारत एक हिंदू चित्रकार भवानी दास के पुत्र थे। उनकी कलाकृतियां अकबर, जहांगीर और शाहजहां के शासनकाल की हैं। आज भी मौजूद उनकी कई कलाकृतियां उन्हें गहरे व ऐंद्रिक रंगों और कोमल रेखांकनों के प्रति लगाव रखने वाले महान सक्षम चित्रकार के रूप में स्थापित करने के लिए पर्याप्त है।  ब्रिटिश संग्रहालय में रखे बाबरनामा के चित्रकारों में से गोवर्धन भी एक थे। भारत के रामपुर स्थित रजा पुस्तकालय में संगृहित कलाकृति गुलाबपाशी की सभा, तिथियांकन 1615, उन्हीं की रचना है। कई अमेरिकी और यूरोपीय संग्रहालयों में सुरक्षित जहांगीर अलबमों में उनके द्वारा बनाए गए रूपांकन मौजूद हैं। गिने-चुने मुगल चित्रकारों ने ही भारत की विविध मानव आकृतियों को इतनी अंतर्दृष्टिï से उकेरा है।
    त्रिकाया
    त्रिकाया एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है तीन कायाएं या शरीर। महायान बौद्घ धर्म में बुद्घ के तीन शरीर के रूप में धर्मकाया -(शाश्वत नियमों की काया), अप्रकटित रूप और परमज्ञान की चरम स्थिति, संभोग काया -(भोग की काया), स्वर्गिक रूप और निर्माण काया (परिवर्तन की काया), सांसारिक रूप- जिसमें बुद्घ ने स्वयं को सांसारिक बोधिसत्व के रूप में प्रकट किया अर्थात एक सांसारिक राजा, एक चित्र या कमल जैसी कोई प्राकृतिक वस्तु के रूप में बताया गया है।  त्रिकाया की अवधारणा केवल ऐतिहासिक बुद्घ गौतम पर ही नहीं, बल्कि सभी बुद्घों पर लागू होती है।

     

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  • दुनिया के तमाम देशों में सरकारें अपने नागरिकों की ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाने में लगी हैं।  ज्यादातर इसे प्रभावी कामकाज से जोड़ा जा रहा है।  अब तक किसी दूसरे व्यक्ति या निजी समूहों से अपनी जानकारी बचाने की चिंताएं, अब सरकार से अपनी जानकारियां बचाने पर आ पहुंची हैं।  
     भारत- भारत में नागरिकों के निजता के अधिकार पर छिड़ी बहस अब सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है। नौ जजों की बेंच ने इतना साफ किया है कि प्राइवेसी बचाने के लिए सरकार को नागरिकों के लिए बाध्यकारी कानून बनाने से नहीं रोका जा सकता। सर्वोच्य न्यायालय ने   कहा कि निजता का अधिकार संपूर्ण अधिकार नहीं है और इस पर राज्य कुछ हद तक तर्कपूर्ण रोक लगा सकते हैं। पिछले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 20 याचिकाएं दाखिल हुई हैं।
    अमेरिका- विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र वाले देश अमरीका में निजता का अधिकार गंभीर मसला है। हालांकि यह संविधान में उल्लिखित नहीं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कई संशोधनों की व्याख्या इस तरह की, जिससे प्राइवेसी के अधिकार का पता चलता है। संविधान का चौथा संशोधन बिना किसी  संभावित कारण के किसी की तलाशी पर रोक लगाता है। कुछ अन्य संशोधनों में नागरिकों को बिना सरकारी दखलअंदाजी के अपने शरीर और निजी जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। खास है प्राइवेसी एक्ट, 1974। अमेरिका के इस एक्ट के अंतर्गत सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किसी की निजी जानकारियों को बिना उसकी अनुमति के देश की कोई केंद्रीय एजेंसी हासिल नहीं कर सकती। अगर किसी एजेंसी को जानकारी चाहिए तो पहले उसे बताना होता है कि उसे किस काम के लिए उस सूचना की जरूरत है। सोशल सिक्योरिटी नंबर को लेकर यह विवाद है कि इससे सरकारी एजेंसी यह जान जाती है कि कोई व्यक्ति टैक्स भरता है या नहीं या कैसे सरकारी अनुदान लेता है।
      जापान - वर्ष  2015 में जापान में नागरिकों की पहचान से जुड़ा एक नया सिस्टम शुरु हुआ. इसमें टैक्स से जुड़ी जानकारी, सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत मिलने वाले फायदों और आपदा राहत के अंतर्गत मिलने वाली मदद को एक साथ लाया गया। आलोचकों की भारी निंदा के बावजूद सरकार ने इसे शुरु कर दिया। सभी जापानी नागरिकों और वहां के विदेशी निवासियों को 12 अंकों की संख्या माइ नंबर  मिला। सरकार अब इसमें बैंक खातों को भी जोडऩा चाहती है।  जापान में भी निजता के अधिकार को साफ साफ परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन जापानी संविधान में नागरिकों को  जीवन, आजादी और खुशी तलाशने  का अधिकार है। 2003 में निजी सूचना की सुरक्षा का कानून बना, जिसमें लोगों की जानकारी को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। जब भी किसी व्यक्ति के डाटा का इस्तेमाल होगा, तो उसे इसके मकसद के बारे में जानकारी दी जाएगी। निजी डाटा को लीक से बचाने के लिए सरकार कानूनी रूप से बाध्य है।
     यूरोपीय देश- पूरे यूरोप में डाटा प्रोटेक्शन डायरेक्टिव लागू होते हैं। इसके अंतर्गत लोगों की सूचना के रखरखाव और इस्तेमाल पर कई तरह की रोक है। ईयू के सदस्य देशों को  ऐसे तकनीकी और संगठनात्मक उपाय लागू करने होते हैं जिससे किसी के डाटा का गलती या गैरकानूनी इस्तेमाल ना हो, ना ही उसे कोई अनाधिकृत व्यक्ति पा सके, बदल सके या किसी तरह का नुकसान पहुंचा सके।  इस नियम का उल्लंघन होने पर न्यायिक उपायों का व्यवस्था है।
    स्वीडन- स्वीडन विश्व का पहला देश था जहां नागरिकों को पहचान संख्या दी गयी। हर सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल अनिवार्य हुया, लेकिन अगर किसी की सूचना उसकी जानकारी के बिना इस्तेमाल की जाये और उस पर नजर रखी जाये, तो इसके खिलाफ सुरक्षा मिलेगी। स्वीडन जैसे स्कैंडेनेवियाई देशों में सरकार से नागरिकों को इतने भत्ते मिलते हैं, जिनके लिए लोगों का पहचान नंबर देना जरूरी होता है। प्राइवेसी की चिंता यहां बहुत कम है।
    भारत में  चावल अनुसंधान संस्थान का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होगा
     अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला, फिलीपींस में स्थित है। अब भारत में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने की तैयारी की जा रही है।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 जुलाई 2017 को वाराणसी स्थित राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र  परिसर में यह केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत वाराणसी में चावल में मूल्य संवर्धन के लिए एक उत्कृष्टता केंद स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
    पूर्वी भारत में यह पहला अंतरराष्ट्रीय केंद्र होगा जो इस क्षेत्र में सतत चावल उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में वरदान साबित होगा। इसके साथ ही दक्षिण एशिया और अफ्रीकी देशों के लिए भी यह खाद्यान्न उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।
    इस केंद्र का प्रबंधन आईआरआरआई के न्यासी बोर्ड द्वारा संचालित होगा। आईआरआरआई अपने सदस्य को इस केंद्र के निदेशक के तौर पर नियुक्त करेगी। आईआरआरआई के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति इस केंद्र के अध्यक्ष के तौर पर काम करेगी। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव इस केंद्र के सह अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होंगे।

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  • क्या होती है संसदीय रिर्पोटिंग
     संसद के दोनों सदनों का एक आम दृश्य यह है कि सादा पोशाक पहने कुछ व्यक्ति सेन्ट्रल टेबल की तरफ तेज गति से लेकिन सतर्कता पूर्वक आकर अपना स्थान ग्रहण करते हैं, थोड़ी देर तक अपने नोटबुक में कुछ लिखते हैं और फिर जिस तेजी से और निर्बाध रूप से उनका प्रवेश हुआ था, उसी ढंग से बाहर चले जाते हैं। ये संसदीय रिर्पोटर  हैं जो विचार-विमर्श हेतु देश के सर्वोच्च विधायी निकाय में सम्पन्न होने वाले कार्यों का संपूर्ण एवं प्रामाणिक रिकार्ड तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य का निवर्हण करते हैं।
     प्रक्रिया नियमों के अनुसार महासचिव से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सदन के प्रत्येक बैठक की कार्यवाही की पूरी रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था करें ।   लोक सभा तथा राज्य सभा में बोले जाने वाले हर शब्द, प्रत्येक प्रश्न, टिप्पणी और भाषण का संसदीय रिर्पोटर   द्वारा जो आशुलिपि लेखन में चरम दक्षता का प्रतिनिधित्व करते हैं, अत्यंत सतर्कता और सटीक ढंग से रिकार्ड किया जाता है ।   कुछ शब्द अथवा अभिव्यक्तियां जिन्हें कार्यवाही वृत्तांत से विशेष रूप से निकाला गया हो, अथवा अध्यक्ष अथवा पीठासीन अधिकारी द्वारा रिकार्ड न करने का आदेश दिया गया हो, रिकार्ड का हिस्सा नहीं बनाया जाता है।
     अपने वर्तमान शब्दश: रूप में पहुंचने के पहले, संसदीय रिपोर्टिंग का तौर-तरीका परिवर्तन के कई दौरों से गुजऱ चुका है । प्रारंभ में अर्थात सन् 1777 से 1835 तक जब विधायिका, कार्यपालिका के एक भाग के रूप में कार्य करती थी, तत्कालीन काउंसिल ऑफ द गवर्नर जनरल ऑफ इण्डिया जो अनन्य रूप से कानूनी मामलों का निपटान करता था, की कार्यवाहियों का रिकार्ड ईस्ट इण्डिया कंपनी के राजस्व विभाग द्वारा तैयार किया जाता था । वर्ष 1835 में विधायी कार्य से संबंधित कार्यवाही का कार्यवाही सारांश के रूप में अलग से रिकार्ड तैयार किया जाने लगा, जिसमें काउंसिल द्वारा विचार-विमर्श किए गए विधानों के केवल शीर्षक का उल्लेख होता था। 1860 से भारत सरकार के राजपत्र में काउंसिल में निष्पादित विधायी कार्यों का संक्षिप्त उल्लेख शामिल किया जाने लगा था।
     वर्ष 1854 में जब तत्कालीन विधायी काउंसिल की कार्यवाही को बाहर वालों के लिए खोल दिया गया, तब प्रकाशन के लिए उसकी कार्यवाहियों की एक प्रामाणिक रिपोर्ट जारी करने का निर्णय लिया गया। 16 मार्च, 1864 से प्रकाशित की जाने वाली कार्यवाही के सारांशों के अलावा कार्यवाही के भाग प्रत्यक्ष कथन शैली रूप में, संक्षेप में, प्रकाशित होने लगे। 
    सारांश की बजाय, कार्यवाही की पूर्ण रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था करने हेतु संबंधित नियमों का वर्ष 1897 में संशोधन किया गया । रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व सचिव से हटकर हाई स्पीड आशुलिपिक अथवा रिपोर्टरों के कंधों पर चला गया । परिणामस्वरूप, सारांश लेखन को बंद कर दिया गया और शब्दश: रिपोर्टें जारी की जाने लगीं तथा उसे राजपत्र में भी प्रकाशित किया जाने लगा । तब कार्यवाही में सदस्यों की वैयक्तिक शैली प्रतिबिम्बित होती थी जिससे आधुनिक शब्दश: रिपोर्ट की प्रामाणिकता तथा जीवंतता का आभास मिलता था । वर्ष 1892 में प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया जिससे रिपोर्टों को जीवंतता तथा पठनीयता प्राप्त हुई । 
    चूंकि वर्ष 1920 में, भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत पहला द्विसदनी विधायिका शीघ्र ही अस्तित्व में आने वाली थी, इसलिए इसकी कार्यवाही को पृथक पुस्तक रूप में प्रकाशित किए जाने के प्रस्ताव पर विचार किया गया । यह सोचा गया कि लोकप्रिय विधान मंडल की कार्यवाही की मांग अधिक रहेगी और इसलिए यह निर्णय लिया गया कि इसे जनसाधारण को बिक्री के लिए उपलब्ध कराने हेतु इसे पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाए । साथ ही इसके शीर्षक को  कार्यवाही  से बदलकर  वाद-विवाद   करने का भी निर्णय लिया गया । आज लोक सभा का आधिकारिक प्रतिवेदन  लोक सभा वाद-विवाद के नाम से जारी किया जाता है।

     

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  • दिल्ली। दिल्ली में लगातार घना कोहरा छाये रहने के कारण आज भी रेल और सड़क यातायात प्रभावित रहा। कोहरे के कारण दृश्यता का स्तर बेहद कम होने के कारण 52 रेलगाड़ियां देरी से चल रही है और पांच के समय में परिवर्तन किया गया है एवं एक को रद्द कर दिया गया है।

    कोहरे के कारण हालांकि विमानन सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट होने के कारण दिल्लीवासियों को ऐसी ही ठंड और कोहरे का सामना करना पड़ेगा। शहर का न्यूनतम तापमान कल 7.8 डिग्री सेल्सियस था जबकि आज 8.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर का अधिकतम तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

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  • गाजियाबाद। कवि नगर पुलिस ने मुठभेड़ के बाद विद्युत तार चोर अंतरराज्यीय गिरोह के चार चोरों को दबोचा है। इनसे 950 मीटर तार, तार कटिंग के उपकरण, तमंचा और चाकू बरामद हुए हैं। शुक्रवार को एसएसपी दीपक कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पकड़े गए चोरों में गिरोह सरगना फिरोज निवासी बाबूगढ़, मोहित चौधरी निवासी पिलखुवा, योगेंद्र निवासी याद नगर हापुड़ और छोटू उर्फ सुरेंद्र बीबीनगर बुलंदशहर है।

    इन्होंने चोरी का तार स्वर्णजयंतीपुरम से मटियाला गांव जाने वाले रास्ते पर बनी पानी की टंकी के पास अर्द्घ निर्मित खंडहरनुमा भवन में छिपाया हुआ था, जिसे गुरुवार रात वाहन में भरकर बेचने की फिराक में थे।

    मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी तो चोरों ने उन पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की और घेराबंदी कर आरोपियों को दबोच लिया। इनकी निशानदेही पर विद्युत खंभों से काट कर चोरी किया हुआ 70 हजार रुपए कीमत का करीब 140 किलोग्राम एल्युमीनियम तार (950 मीटर) बरामद हुआ, जो इन्होंने गुलावठी बुलंदशहर, मुरादनगर, शामली, बागपत, मेरठ आदि स्थानों से चोरी किया था। इनके खिलाफ बुलंदशहर, गाजियाबाद, मेरठ और एटा में पहले भी केस दर्ज हैं। इसके अलावा एटा, बुलंदशहर और मेरठ से चारों पहले भी जेल गए हैं। एसएसपी ने बताया कि इनके खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

    साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि विद्युत विभाग के कर्मचारी तो इनके साथ नहीं मिले हुए हैं। यह गिरोह नए-नए क्षेत्रों में चोरी करता था, जहां विद्युतीकरण हो रहा हो। रेकी करने के बाद वारदात करते थे। चोरी के बाद दोबारा उन स्थानों पर नहीं जाते थे।

    यह लोग करंट चलती हुई लाइनों के तारों पर चेन और रस्सा फेंक कर शट डाउन कराते थे, इसके बाद खंभों पर चढ़ कर मोटे व असरदार उपकरणों से कनेक्शन को काटकर तारों को चोरी करते थे। गिरोह के अन्य सदस्य जो चोरी किए गए तारों को संभल, मेरठ और दिल्ली में ठिकाने लगाते हैं, उनकी तलाश की जा रही है।

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  • ग्रेटर नोएडा। नेफोवा के नेतृत्व में शुक्रवार  को सैकड़ों फ्लैट खरीदारों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय के सामने  प्राधिकरण और बिल्डर्स के खिलाफ  जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। फ्लैट्स के कब्जे में हो रही देरी की वजह से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में घर बुक कराए लोग काफी गुस्से में है और प्राधिकरण द्वारा इस सम्बन्ध में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाने से क्षुब्ध हैं। 

    प्रदर्शन में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के अलग-अलग बिल्डर्स के तमाम प्रोजेक्ट्स के फ्लैट खरीदार शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान फ्लैट खरीदारों ने लगभग एक किलोमीटर तक मार्च भी निकाला। सुमित सक्सेना, सागर चौधरी, चन्दन कुमार, संजय साहनी, बीएन गुप्ता, बीएस. त्रिपाठी, रविन्द्र जैन इत्यादि के अलावा सैकड़ों फ्लैट खरीदारों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    इस प्रदर्शन का नेतृत्व अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने किया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी जब फ्लैट खरीदारों से मिलने आए तो उन्हें  इस सम्बन्ध में ज्ञापन भी सौंपा गया। नेफोवा ने ये चेतावनी भी दी कि कब्जे में हो रही देरी के मुद्दे पर प्राधिकरण तमाम बिल्डर्स के खिलाफ  यदि तुरंत कोई कारवाई नहीं करता है, तो नेफोवा अगले महीने फिर से बिल्डर्स और प्राधिकरण के खिलाफ  बड़ा आन्दोलन खड़ा करेगी।  

    साल दर साल बीतते जा रहे हैं, लेकिन कुछेक प्रॉजेक्ट को छोड़कर अभी तक ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में ज्यादातर हाउसिंग में निर्माण कार्य तय समय से काफी पीछे चल रहा है। कुछ प्रोजेक्ट्स में तो काम महीनों से बंद पड़ा है। कई प्रोजेक्ट का भविष्य अभी भी अधर में लटका है और बिल्डर कब्जे की रोज नई नई तारीख देकर फ्लैट खरीदारों को ऊल्लू बनाने में लगे हैं।

     यहां 6-7 साल पहले घर बुक कराए खरीदारों का सब्र अब टूट चुका है। अपने अपने बिल्डर से शिकायत करके जब खरीदार थक गए तब उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया। हजारों की संख्या में मेल भेजे गए। नेफोवा की तरफ से अनगिनत पत्र लिखे गए। लेकिन, प्राधिकरण तो, बिल्डरों के खिलाफ  कोई शिकायत मिलते ही जैसे कान में रुई डालकर सो जाता है।

    के्रडाई, बिल्डर और प्राधिकरण सभी ने जल्द से जल्द काम पूरा कर कब्जा दिए जाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए। लोग महंगे रेंट और इएमआई दे देकर परेशान हो चुके हैं। 

    नेफोवा द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश को ट्विटर अभियान द्वारा कब्जे में देरी को लेकर उचित कारवाई की जाने की अपील भी की गयी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राधिकरण को इस सम्बन्ध में कार्रवाई की जाने के आदेश के बावजूद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सोता रहा। प्राधिकरण के उदासीन रवैये से लोगों में खासी नाराजगी है।

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