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Andaman and Nicobar Islands / 6568 Andhra Pradesh / 1411320 Arunachal Pradesh / 21622 Assam / 324979 Bihar / 645015 Chandigarh / 54703 Chhattisgarh / 907589 Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu / 9566 Delhi / 1387411 Goa / 134542 Gujarat / 744409 Haryana / 685312 Himachal Pradesh / 157862 Jammu and Kashmir / 240467 Jharkhand / 313181 Karnataka / 2171931 Kerala / 2118264 Ladakh / 16333 Lakshadweep / 4650 Madhya Pradesh / 724279 Maharashtra / 5344063 Manipur / 39052 Meghalaya / 22763 Mizoram / 8499 Nagaland / 17835 Odisha / 600492 Puducherry / 82545 Punjab / 490755 Rajasthan / 849379 Sikkim / 11070 State Unassigned / 0 Tamil Nadu / 1565035 Telangana / 525007 Tripura / 40052 Uttar Pradesh / 1609140 Uttarakhand / 283239 West Bengal / 1114313

ताजा खबर

अंतरराष्ट्रीय

  • गाजा में इजरायल की सेना ने मीडिया संस्थानों के ऑफिस वाली बिल्डिंग पर की एयर स्ट्राइक
    गाजा में इजरायल की सेना ने मीडिया संस्थानों के ऑफिस वाली बिल्डिंग पर की एयर स्ट्राइक

    गाजा, 15 मई 2021: इजरायल के एयर स्ट्राइक में गाजा पट्टी स्थित एक ऊंची बिल्डिंग तबाह हो गई. इस बिल्डिंग में द एसोसिएटेड प्रेस और अल-जजीरा जैसे मीडिया संस्थान का दफ्तर था. एपी के मुताबिक, मुश्किल से ये एयर स्ट्राइक इजरायल की सेना की उस चेतावनी के बाद आई जिसमें उन्होंने बिल्डिंग को खाली करने के लिए कहा था.

    इससे पहले गाजा सिटी में शनिवार तड़के इजराइल के हवाई हमले में कम से कम 10 फलस्तीनियों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश बच्चे थे. गाजा के उग्रवादी हमास शासकों के साथ लड़ाई शुरू होने के बाद से इजराइल के एक हमले में मरने वाले लोगों की यह सबसे अधिक संख्या है.

    पिछले महीने यरुशलम में तनाव से शुरू हुआ यह संघर्ष व्यापक पैमाने पर फैल गया है. अरब और यहूदियों की मिश्रित आबादी वाले इजराइली शहरों में रोज हिंसा देखी जा रही है. इजराइल और हमास के बीच जारी लड़ाई के दौरान वेस्ट बैंक में भी फलस्तीनियों ने व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन किया और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में इजराइली सेना के साथ झड़प की. इस दौरान इजराइली सेना की कार्रवाई में कम से कम 11 लोग मारे गए.

    यह हिंसा ऐसे वक्त में हो रही है जब फलस्तीन शनिवार को ‘नकबा दिवस’ मना रहे हैं जब वे 1948 के युद्ध में इजराइल द्वारा मारे गए हजारों फलस्तीनियों को याद करता है. इससे संघर्ष के और तेज होने की आशंका बढ़ गई है. (abplive)

     

राष्ट्रीय

  • महाराष्ट्र में कोविड मामलों में गिरावट, 960 लोगों की मौत, अब तक 80 हजार से ज्यादा मरे
    महाराष्ट्र में कोविड मामलों में गिरावट, 960 लोगों की मौत, अब तक 80 हजार से ज्यादा मरे

     मुंबई, 15 मई (आईएएनएस)| महाराष्ट्र में शनिवार को कोविड-19 के नए मामलों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि राज्य में संक्रमण की वजह से मरने वालों की संख्या 80,000 के स्तर को पार कर गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। शुक्रवार को हुई 695 मौतों की तुलना में, राज्य में मरने वालों की संख्या 265 की संख्या के साथ से बढ़कर शनिवार को 960 दर्ज की गई, जिसके बाद महाराष्ट्र में मरने वालों की संख्या बढ़कर 80,512 हो गई, जो देश में सबसे अधिक है।

    हालांकि ताजा मामलों की संख्या 50,000 के स्तर से नीचे 34,848 पर दर्ज की गई, जिसके बाद राज्य में कुल मामलों की संख्या 53,44,063 हो गई है।

    इस बीच, शनिवार को 62 लोगों की मौत के साथ ही देश की वाणिज्यिक राजधानी में मरने वालों की कुल संख्या 14,164 हो गई है।

    यहां फिलहाल सक्रिय मामलों की संख्या शुक्रवार को 519,254 थी जो घटकर शनिवार को 494,032 हो गई है।

    राज्य में 59,073 पूरी तरह से ठीक हो चुके मरीज घर लौट गए, जिसके बाद स्वस्थ होने वालों की कुल संख्या 47,67,053 हो गई है, जबकि रिकवरी रेट में और सुधार हुआ है और यह अब 89.02 प्रतिशत हो गई है।

राजनीति

  • अदालत में आपको कौन बचाएगा ग्रेट गुरु? सिद्धू का अमरिंदर पर फिर निशाना
    अदालत में आपको कौन बचाएगा ग्रेट गुरु? सिद्धू का अमरिंदर पर फिर निशाना

     

    चंडीगढ़. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनावों से पहले कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह की आपसी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है. गुरुवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह से कहा कि ''वह साथियों के कंधों पर बंदूक रखकर चलाना बंद करें.''

    दरअसल, राज्य के कुछ मंत्रियों ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधने के लिये सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद सिद्धू ने यह बात कही. क्रिकेट की दुनिया से राजनीति में आए सिद्धू ने हाल ही में अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए उनसे 2015 की बेअदबी की घटनाओं में न्याय दिलाने की मांग की थी. पंजाब के फरीदकोट जिले में हुईं उन घटनाओं में गुरु ग्रंथ साहिब के कई फटे हुए पन्ने बिखरे पड़े मिले थे. इन घटनाओं के दो दिन बाद हुई पुलिस गोलीबारी में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी.

    कोर्ट में आपको कौन बचाएगा ग्रेट गुरु?

    सिद्धू ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा, ''अदालत में आपको कौन बचाएगा ग्रेट गुरु?'' उन्होंने ट्वीट किया, ''कल और आज भी, मेरी आत्मा गुरु साहिब के लिये न्याय मांगती रही है. आने वाले कल भी इस मांग को दोहराता रहूंगा. पंजाब की अंतरात्मा की आवाज पार्टी लाइन से ऊपर है. पार्टी के साथियों के कंधों पर बंदूक रखकर चलाना बंद कीजिये. आप प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार और जवाबदेह हैं. अदालत में आपको कौन बचाएगा ग्रेट गुरू?''
    क्यों बढ़ा सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच विवाद?

    पंजाब तथा हरियाणा उच्च न्यायालय ने पिछले महीने 2015 के कोट कपूरा गोलीबारी मामले की जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, जिसके बाद से सिद्धू अमरिन्दर सिंह पर हमला बोल रहे हैं. वह 2015 में हुईं बेअदबी की घटनाओं और पुलिस गोलीबारी के मामले में न्याय में हुई कथित देरी को लेकर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पर बार-बार निशाना साध रहे हैं.

    इससे पहले, पंजाब के मुख्यमंत्री ने सिद्धू को पूरी तरह अनुशासनहीन बताया था. पंजाब के चार मंत्रियों ने अमरिन्दर सिंह पर निरतंर हमले करने के लिये बुधवार को सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा कि सिद्धू आम आदमी पार्टी और भाजपा के इशारे पर पार्टी की राज्य इकाई पर हमले कर रहे हैं.

    इन चार मंत्रियों में बलबीर सिद्धू, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशू और गुरप्रीत सिंह कंगार शामिल हैं. इनके अलावा तीन अन्य मंत्रियों ने भी कांग्रेस आलाकमान से सिद्धू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था. (news18.com)

संपादक की पसंद

  • Editor's Choice : Water in age of climate change
    Editor's Choice : Water in age of climate change

    By Sunita Narain

    We now need to be more than obsessive about water and its management as it is the basis of health and wealth

                                                                                                 
    Every year, March 22 is observed as the World Water Day. This year as we celebrate, and reiterate, the importance of water we need to remember the difference — this is the World Water Day in the age of climate change.

    This means we have to do everything that we know we need to do: Augment water availability by harvesting every drop of rainwater; use it much more efficiently so that every drop of that rainwater is valued in the food we eat or the water we flush; and ensure that every drop of that used water is reused and recycled and not degraded by pollution. This we already know and we practice.

    But this will not be enough in the age of climate change — we will have to do all we know at a faster pace, on a massive scale, and differently. Why do I say this?

    We know that climate change impacts are about heat — increased and scorching temperatures — and about variable and extreme rain. Both have a direct correlation with the water cycle. So climate change mitigation has to be about water and its management.

    Every year, we know now, is the hottest year in recorded history — till the next year comes around and breaks the record. In India, temperatures in parts of Odisha have crossed 40 degree Celsius as early as February — even before summer set in. North Indian states are breaking all records in terms of rising heat and higher than normal temperatures.

    And this is when 2021 is the year of La Niña — the Pacific water currents that are known to bring cooler temperatures globally as compared to El Niño. But Indian weather scientists say global warming has offset this cooling effect of La Niña.

    Rising heat has many implications for water security. First, it means that there will be greater evaporation from all waterbodies. It means that we need to work not just on storing water in millions of structures, but also plan for reducing losses due to evaporation. One option is to work on underground water storage — wells in other words.

    India has for too long discounted the management of groundwater systems as irrigation bureaucracies have been built on the planned canals and other surface water systems. But this will need to shift in this age of climate change and water scarcity.

    We need to find ways of reducing losses from tanks, ponds and canals as well. It’s not that evaporation losses didn’t happen in the past; but now the rates will increase with temperatures soaring. So we need to plan; we need to do more.

    Second, increased heat means that it will dry up the moisture in soils; it will make the land dusty and will increase the need for irrigation. In a country like India where the bulk of the food is still grown in rainfed regions — irrigated by rain — it will intensify land degradation and dust bowl formations. This means water management must go hand in hand with vegetation planning to improve the ability of soils to hold water, even in times of intense and prolonged heat.

    Thirdly, and obviously, heat will drive up the use of water — from drinking and irrigation to fighting fires in forests or buildings. We have already seen devastating forest fires rage in many parts of the world, and in the forests of India. This will only increase as temperatures go up. So the demand for water will increase with climate change, making it even more imperative that we do not waste — either water or wastewater.

    But this is not all. The fact is that climate change is already showing up in terms of the increasing number of extreme rain events. This means that we can expect rain to come as a flood, making the cycle of floods followed by droughts even more intense. India already has fewer rainy days in a year — it is said that it rains for just 100 hours on average in a year. Now the number of rainy days will further go down, but extreme rainy days will increase.

    This has a huge impact on our plans for water management. This means that we need to think more about flood management, not only to embank rivers but to optimise the floodwaters so that we can store them in underground and overground aquifers — wells and ponds. But it also means that we need to plan differently for the capture of rainwater.

    Currently, our water structures, the many millions that are being constructed under the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, for instance, are designed for normal rainfall. But now, as extreme rains become the normal, the structures will need to be redesigned so that they last over the seasons. The bottom-line is that we must plan deliberately to capture every drop, not just of rain but of floodwater, in this age of climate change.

    Let’s then be clear; we needed to be obsessive about water and its management yesterday because water is the basis of health and wealth. But now we need to be more than obsessive — we need to be determined and deliberate. This is the real make or break of our future. (downtoearth.org.in)

संपादकीय

  • ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : चलो, कोरोना की चर्चा बहुत हुई, कुछ जात-पात की चर्चा हो जाये
    ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : चलो, कोरोना की चर्चा बहुत हुई, कुछ जात-पात की चर्चा हो जाये

    हिंदुस्तान में लोगों की सोच धर्म और जाति के दायरे में कैद रहती है। अधिकतर लोगों से बात करें तो धर्म और जाति के उनके पूर्वाग्रह, उनकी सोच और उनकी बातचीत पर, उनके फैसलों पर हावी रहते हैं। कहीं भी बैठकर लोग बातें करते रहते हैं तो अगर उस भीड़ में मौजूद किसी के हुलिए और उसके नाम से उसके धर्म, या खासकर उसकी जाति, का अंदाज ना लगे तो बहुत से लोग बड़ी असुविधा महसूस करते हैं कि उसे किस जाति का मान कर बात की जाए। और बातचीत इससे भी तय होती है कि वहां मौजूद लोगों में किन जातियों के लोग हैं और किन जातियों के लोग नहीं हैं। इसके अलावा धर्म तो है ही, कि अगर किसी धर्म के लोग मौजूद हैं, तो ही उसके खिलाफ ना बोला जाए और अगर किसी धर्म के लोग नहीं हैं तो उस धर्म की बुराइयां याद करके या गढक़र चर्चा में लाई जाए। ऐसे में अभी एक बड़ा दिलचस्प मामला सामने आया है। पहली पहली नजर में तो ऐसा लगा कि मानो किसी ने कुछ गलत जानकारियां जोड़-घटा कर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की एक पोस्ट तैयार की है, लेकिन फिर एक-एक नाम को परखा गया तो यह समझ आया कि यह तो बहुत ही दुर्लभ केस मामला है।

    हिंदुस्तान में आज जिस वैक्सीन की सबसे अधिक मांग है, और जो सबसे अधिक चर्चा है, उस वैक्सीन को बनाने वाले के नाम की चर्चा तो कुछ अधिक ही हो चुकी है और लोगों को यह मालूम है कि कोवीशील्ड नाम की वैक्सीन बनाने वाली सिरम इंस्टीट्यूट नाम की कंपनी का मालिक एक पारसी नौजवान अदर पूनावाला है। अब इस वैक्सीन के लिए एक  खास किस्म के कांच की शीशी भी लगती है और इस शीशी को बनाने वाली कंपनी का मालिक एक और पारसी है, ऋषभ दादाचानजी। पूनावाला भी पारसी और दादाचानजी भी पारसी। अब इसके बाद इन वैक्सीन का ट्रांसपोर्ट करने के लिए जो खास ट्रकें बनाई गई जो कि एक फ्रिज की तरह वैक्सीन को बहुत ही कम टेंपरेचर पर लेकर एक शहर से दूसरे शहर जा सकें वे ट्रकें देश और दुनिया के सबसे मशहूर पारसी, टाटा की बनाई हुई हैं। इन्हें कोल्ड स्टोरेज की तरह का बना कर टाटा ने आनन-फानन देश में उतार दिया। अब यह देखें कि वैक्सीन एक बार पहुंच गईं तो उन्हें कैसे और कहां रखा जाए, तो इसकी तैयारी इस देश में एक और मशहूर पारसी परिवार, गोदरेज की कंपनी गोदरेज अप्लायंसेज के बनाए हुए मेडिकल फ्रीजर वैक्सीन रखने के काम आ रहे हैं। अब बात यहीं पर खत्म नहीं होती है, इन वैक्सीन को सूखी बर्फ के जिन बक्सों में रखा जाता है वे बक्से किसने बनाएं? ये बक्से एक और पारसी फारुख दादाभाई की कंपनी के बनाए हुए हैं। और फिर इन वैक्सीन को कारखाने से लेकर अलग-अलग शहरों तक कौन सी कंपनी मुफ्त में लेकर जा रही है, यह अगर देखें तो गो एयर नाम की कंपनी एक और पारसी की कंपनी है, इसके मालिक वाडिया ने वैक्सीन के मुफ्त ट्रांसपोर्टेशन का काम शुरू किया और जारी रखा है। अब पारसियों में बहुत से लोग अपना नाम मराठी लोगों की तरह शहर के नाम पर रख लेते हैं जैसे अदर पूनावाला। इसी तरह पारसियों में बहुत से लोग अपना नाम अपने पेशे के साथ जोड़ लेते हैं जैसे जरीवाला, बैटरीवाला, बॉटलीवाला, दारूवाला या कोई और काम वाला। पारसियों के सरनेम का मजाक करने वाले, एक सरनेम अपनी कल्पना से बनाकर बीच-बीच में लिखते थे सोडावाटरबॉटलओपनरवाला। लेकिन अगर देखें कि पेशे के हिसाब से सरनेम बनाना है तो अभी जितने सरनेम हमने गिनाए हैं जो कि वैक्सीन बनाने से लेकर पहुंचाने और रखने तक का काम कर रहे हैं, उनकी आने वाली पीढिय़ां अपना सरनेम वैक्सीनवाला भी रख सकती हैं।

    यह तो हो गई एक अच्छी बात लेकिन धर्म और जाति को लेकर चर्चा करें तो जरूरी नहीं है कि तमाम चर्चाएं अच्छी बातों के इर्द-गिर्द ही रहें। पिछले दिनों लगातार इस देश में जीवनरक्षक इंजेक्शनों की कालाबाजारी करते हुए लोग गिरफ्तार हुए। दिलचस्प बात यह है कि इस देश में तमाम किस्म के जुर्म करने के लिए जिस जाति को सबसे बदनाम करार देने की कोशिश होती है, उस धर्म या जाति के शायद कोई भी व्यक्ति जिंदगी की इस कालाबाजारी में शामिल नहीं थे, क्योंकि गिरफ्तार होने वाले तमाम लोगों के नाम भी सामने आ रहे थे इसलिए यह बात भी हक्का-बक्का करने वाली थी कि एक सवर्ण कारोबारी जाति के इतने लोग इंजेक्शनों की कालाबाजारी में लगे हुए थे! लेकिन बात यहीं पर नहीं टिकती, जब यह बात निकली कि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को गिरफ्तार किया है जो कि कोरोना मृतकों के शव पर से कपड़े और कफन चोरी करके उनको बाजार में बेचता था, तो उसमें भी ऐसी ही सवर्ण उच्च समझी जाने वाली जातियों के लोगों की भीड़ थी और शायद नमूने के लिए उसमें एक अल्पसंख्यक धर्म का व्यक्ति भी था। इसके बाद देखें तो दिल्ली के जिस खान चाचा नाम के रेस्तरां में सैकड़ों ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पकड़ाए, और जिसे खबर में देखते ही देश का एक बड़ा हमलावर तबका खान चाचा की गिरफ्तारी के लिए टूट पड़ा, उसको मुंह की खानी पड़ी, जब पता लगा कि यह नाम केवल रेस्तरां का है, इसका मालिक तो एक पंजाबी है, और पंजाबियों में भी उच्च जाति का माना जाने वाला है, तो फिर खान चाचा नाम को छोड़ देना ही लोगों को ठीक लगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि देश भर में जगह-जगह न सिर्फ इंजेक्शनों की कालाबाजारी बल्कि जीवन रक्षक इंजेक्शन नकली तैयार करके उनको बेचने का धंधा जिन लोगों ने किया था उनमें से कोई भी किसी नीची कही जाने वाली जाति के नहीं थे, वे सब के सब ऊंची कही जाने वाली कारोबारी जाति के लोग थे, और गुजरात से लेकर मध्यप्रदेश के इंदौर तक और दिल्ली से लेकर जाने कहां-कहां तक इस कालाबाजारी में लगे हुए थे। नकली इंजेक्शन बनाकर बेचना तो जिंदगी बेचने से कम कुछ नहीं है। अब हैरानी यह है कि जो जातियां अपने आप में बहुत संगठित हैं, जो जातियां अपने आपमें बहुत धर्मालु हैं  उन जातियों के लोग जब ऐसे तमाम धंधों में शामिल दिखते हैं, तो फिर वैक्सीन के कारोबार में कदम-कदम पर जुड़े हुए पारसी लोग भी दिखते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हिंदुस्तान में पारसियों की कुल आबादी 70 हजार से भी कम है, जिन पर आज 133 करोड़ हिन्दुस्तानियों के टीके टिके हुए हैं!(क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

सेहत-फिटनेस

  • फल-सब्जियां खरीदते समय कोरोना संक्रमण से रहें सावधान, इनकी सफाई में रखें इन बातों का ख्‍याल
    फल-सब्जियां खरीदते समय कोरोना संक्रमण से रहें सावधान, इनकी सफाई में रखें इन बातों का ख्‍याल

    कोरोना संक्रमण देशभर में तेजी से बढ़ रहा है. लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए तमाम तरह के प्रिकोर्शन्‍स ले रहे हैं. ऐसे में बाजार के सामान को घर लाने और उनकी सफाई को लेकर हर किसी के मन में कई सवाल हैं. विशेषज्ञों को मानना है कि अगर बाहर से लाई गई चीजों को पहले सैनेटाइज कर लिया जाए तो कोरोना के संक्रमण से किसी हद तक बचा जा सकता है. फिर वह ग्रोसरी के सामान हों या फल सब्जियां. इन सब को बाहर से लाने के बाद तुरंत सही तरीके से सैनेटाइज करना बहुत जरूरी हो है. तो आइए जानते हैं कि हम फलों या सब्जियों को खरीदकर घर लाएं तो किन बातों को ध्‍यान में रखकर उनकी सफाई करें जिससे संक्रमण भी ना फैले और वे खराब भी ना हों. जानें क्‍या है तरीका.

    क्‍या कहता है WHO

    WHO के मुताबिक, अन्‍य चीजों की तरह ही फलों और सब्जियों को भी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए धोना जरूरी है. इन्‍हें साफ करने से पहले अपने हाथों को अच्‍छी तरह से साबुन से धो लें इसके बाद ही इन्‍हें धोएं. इसके लिए आप साबुन और पानी का प्रयोग कर सकते हैं. अगर आप इन्‍हें कच्‍चा खाने वाले हैं तो इनकी सफाई और भी अधिक जरूरी हो जाती है.

    सबसे पहले हाथ को साफ करना जरूरी
    फलों और सब्जियों को साफ करने से पहले आप अपने हाथों को 20 सेकंड तक तक साबुन से साफ करें. इसके बाद सब्जियों को साफ करें. इससे आपके हाथ पर मौजूद वायरस हट जाएंगे और आप साफ फलों को दुबारा संक्रमण से रोक पाएंगे. बेहतर होगा कि आप सफाई के बाद भी हाथों को साफ कर लें.

    रनिंग वॉटर में करें सफाई

    जब आप इन्‍हें साफ करें तो इस बात का ध्‍यान रखना जरूरी है कि उन्‍हें नल के नीचे ही धोएं. अगर आप किसी बाल्‍टी का टब में जमा पानी से इन्‍हें साफ कर रहे हैं तो वे वायरस के संक्रमण के संपर्क में रह जाते हैं. ऐसे में सब्जियों और फलों को धोने के लिए नल के नीचे या सिंक का ही प्रयोग करें.

    डिटर्जेंट का ना करें प्रयोग

    एफडीए के मुताबिक, इन्‍हें साफ करने के लिए किसी तरह के डिटर्जेंट या सोप की जरूरत नहीं. आप इन्‍हें रनिंग वॉटर में अच्‍छी तरह रगड़ रगड़ कर साफ कर सकते हैं. अगर फल या सब्जियों में छेद या कटा हिस्‍सा हो तो इन्‍हें बनाने से इस हिस्‍से को काट कर हटा दें.

    स्‍पंज या ब्रश कर करें प्रयोग

    जरूरत हो तो आप आलू, गाजर, मूली जैसी सब्जियों को साफ करने के लिए स्‍पंज या सॉफ्ट ब्रश  का प्रयोग कर सकते हैं.

    कुछ फलों और सब्जियों को दें एक्‍स्‍ट्रा केयर

    कुछ फल और सब्जियों को सफाई के समय एक्‍ट्रा केयर की जरूरत पड़ती है. ऐसे में आप उन्‍हें साफ करते वक्‍त खास ध्‍यान दें. लेटस, पत्‍तागोभी आदि पत्‍तेदार सब्जियों को धोनें के बाद कुछ देर आइस वॉटर में रख दें और पानी अच्‍छी तरह से निकलने के बाद ही फ्रिज में स्‍टोर करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) (news18.com)

मनोरंजन

  • बॉलीवुड अभिनेत्री अंकिता लोखंडे का ‘पवित्र-रिश्ता’ बिलासपुर के विक्की जैन से साथ जुड़ेगा
    बॉलीवुड अभिनेत्री अंकिता लोखंडे का ‘पवित्र-रिश्ता’ बिलासपुर के विक्की जैन से साथ जुड़ेगा

    बिलासपुर, 16 मई। बॉलीवुड अभिनेत्री अंकिता लोखंडे बिलासपुर की बहू बनने जा रही है। यहां के कारोबारी विक्की जैन के साथ वे विवाह करने जा रही है।

    वेब पोर्टल बॉलीवुड बबल में दिये गये एक साक्षात्कार में स्वयं अंकिता लोखंडे ने इस बात का खुलासा किया है। विक्की जैन के बिलासपुर में कई कारोबार हैं, जिनमें एक लख्मीचंद्र जैन इंजीनियरिंग कॉलेज भी शामिल हैं। चर्चा है कि बीते तीन साल से वे विक्की जैन से डेट कर रही हैं। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि शादी के ख्याल से वह अपने आपको चांद पर महसूस कर रही हैं। 36 वर्षीय अभिनेत्री ने इंटरव्यू में कहा- “शादी एक ऐसी चीज है जो बहुत खूबसूरत है। मैं शादी करने के लिए बहुत उत्साहित हूं। मैं अपनी शादी के लिए बहुत उत्साहित हूं जो बहुत जल्द होने वाली है। मुझे जयपुर और जोधपुर की राजस्थानी शादी पसंद है। लेकिन इस समय तय नहीं है कि मैं क्या योजना बनाऊंगी।"

    इस साल 10 अप्रैल को अंकिता लोखंडे और उनके बॉयफ्रेंड विक्की जैन ने एक साथ तीन साल पूरे किए। इससे पहले, अंकिता दिवंगत अभिनेता और उनके 'पवित्र-रिश्ता' के सह-कलाकार सुशांत सिंह राजपूत के साथ लगभग 6-7 वर्षों तक रिश्ते में थीं। बीच में चर्चा हुई थी कि विक्की जैन ने विवाह की तैयारियां करते हुए मुम्बई में एक बड़ा फ्लैट भी खरीदा है।

    उन्होंने 2018 में टीवी सीरियल छोड़ दिया और 2019 में कंगना रनौत-स्टारर 'मणिकर्णिका' से बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की। 2020 में, वह टाइगर श्रॉफ और श्रद्धा कपूर अभिनीत एक्शन-थ्रिलर 'बागी-3' में दिखाई दे चुकी हैं।

     

खेल

  • टेस्ट सीरीज और डब्ल्यूटीसी फाइनल के लिए न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड रवाना
    टेस्ट सीरीज और डब्ल्यूटीसी फाइनल के लिए न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड रवाना

    अॉकलैंड, 15 मई | न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम इंग्लैंड के साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज और फिर भारत के खिलाफ वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने के लिए शनिवार शाम को इंग्लैंड रवाना हो गई। कीवी टीम इंग्लैंड के साथ लंदन में दो जून से पहला और फिर बमिर्ंघम में 10 जून से दूसरा टेस्ट खेलेगी। इसके बाद वह 18 जून से साउथम्पटन में भारत के साथ डब्ल्यूटीसी का फाइनल खेलेगी।

    न्यूजीलैंड क्रिकेट (एनजेडसी) ने सोशल मीडिया पर टीम की रवानगी का फोटो पोस्ट किया है, जिसमें उसने लिखा, " हमारे न्यूजीलैंड के खिलाड़ी इंग्लैंड की ओर रवाना होते हुए। टीम दो जून से लॉर्डस में इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले के खिलाफ पहले टेस्ट की तैयारी के लिए इंग्लैंड पहुंचने पर साउथम्प्टन की यात्रा करेगी।"

    न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज बीजे वाटलिंग का अपनी नेशनल टीम के साथ आखिरी दौरा होगा। इसके बाद वह इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे।

    टीम: केन विलियमसन (कप्तान), टॉम ब्लंडेल, ट्रेंट बाउल्ट, टिम साउदी, डग ब्रेसवेल, डेवन कॉनवे, कॉलिन डी ग्रैंडहोम, जैकब डफी, मैट हेनरी, काइल जैमिसन, टॉम लाथम, डेरिल मिशेल, हेनरी निकोल्स, एजाज पटेल, रचिन रवींद्र, मिशेल सेंटनर, रॉस टेलर, नील वेग्नर, बीजे वाटलिंग और विल यंग। (आईएएनएस)

कारोबार

  • व्यापारी संगठनों का रायपुर जिलाधीश से अनुरोध, ऑड-इवन से हैं कई बेहतर विकल्प-वासवानी
    व्यापारी संगठनों का रायपुर जिलाधीश से अनुरोध, ऑड-इवन से हैं कई बेहतर विकल्प-वासवानी

    रायपुर, 15 मई। मालवीय रोड व्यापारी संघ के राजेश वासवानी ने बताया कि आज विभिन्न समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई कि बाजार को ऑड इवन के नियमों के अनुसार खोलने की तैयारी की जा रही है।  पूर्व में भी इस प्रकार के निर्णय लिए गए थे किंतु वे सफल नहीं रहे। लंबे अंतराल से सभी मुख्य बाजार बंद का सामना कर रहे हैं। 

    श्री वासवानी ने बताया कि कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण यह जरूरी भी था किंतु वर्तमान में जब सभी व्यापार को खोलने की अनुमति दी जा रही है और सभी प्रकार के आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ करने की अनुमति दी जा रही है तब समय की सीमा को निर्धारित करते हुए ऑड इवन प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। इससे व्यापारिक वैमनस्यता बढ़ती है एवं आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

    श्री वासवानी ने बताया कि उनका रायपुर जिलाधीश से निवेदन है कि तीन प्रस्ताव लगभग सभी स्थानीय प्रमुख बाजार के प्रमुख होने रखा था। प्रथम, प्रात: 6 से दोपहर 12 तक सभी जीवन उपयोगी वस्तुएं एवं दोपहर 12 से शाम 6 तक बाकी सभी व्यवसाय। द्वितीय प्रात: 6 से शाम 6 तक सभी व्यवसायों को अनुमति दी जाए।  शनिवार-रविवार को पूर्ण लॉकडाउन करते हुए 5 दिनों तक सभी व्यवसाय को गाइडलाइन की निर्धारित शर्तों के अनुसार खोलने की अनुमति दी जाए।

    श्री वासवानी ने बताया कि सराफा एसोसिएशन, मालवीय रोड व्यापारी संघ, बंजारी रोड व्यापारी संघ,पंडरी कपड़ा एसोसिएशन, एमजी रोड स्कूटर पार्ट्स एसोसिएशन, रेडीमेड गारमेंट एसोसिएशन ने यह अनुरोध किया है। 

     

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