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  • जेल में 21 दिन से भूख हड़ताल कर रहे एलेक्सी नवलनी मौत के कगार पर, व्लादिमीर पुतिन के हैं धुर-विरोधी
    जेल में 21 दिन से भूख हड़ताल कर रहे एलेक्सी नवलनी मौत के कगार पर, व्लादिमीर पुतिन के हैं धुर-विरोधी

    मॉस्को. जेल में बंद और तीन सप्ताह से भूख हड़ताल कर रहे रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी के चिकित्सक ने कहा है कि उनके मरीज का स्वास्थ्य तेजी से खराब हो रहा है और वह मौत के कगार पर हैं. चिकित्सक यारोस्लोव अशिखमिन ने शनिवार को कहा कि नवलनी के परिवार से उन्हें मिले जांच परिणाम दर्शाते हैं कि क्रेमलिन के 44 वर्षीय आलोचक के शरीर में पोटैशियम का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है, जिसके कारण उन्हें कभी भी दिल का दौरा पड़ सकता है और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ रहा है जो संकेत है कि उनके गुर्दे खराब हो रहे हैं.

    उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘हमारा मरीज किसी भी क्षण दम तोड़ सकता है.’’ नवलनी का समर्थन कर रहे ‘अलायंस ऑफ डॉक्टर्स’ संघ की प्रमुख अनास्तासिया वासिलयेवा ने ट्वीट किया, ‘‘तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है.’’

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुखर आलोचक नवलनी के निजी चिकित्सकों को उनसे जेल में मिलने की अनुमति नहीं है. नवलनी की पीठ में अत्यधिक दर्द और पैरों में संवेदनशून्यता होने के बाद उनके चिकित्सकों को उनसे मिलने नहीं दिया गया था, जिसके विरोध में नवलनी ने भूख हड़ताल शुरू की.

    रूस की सरकारी जेल सेवा ने कहा कि नवलनी को हर आवश्यक चिकित्सकीय मदद दी जा रही है. नवलनी र्व एजेंट हमले के कारण बीमार पड़ गए थे. उन्होंने इस हमले के लिए क्रेमलिन को जिम्मेदार ठहराया है. जर्मनी में पांच महीने इलाज कराने के बाद नवलनी इस साल 17 जनवरी को रूस पहुंचे थे, जहां मास्को में उन्हें पेरोल का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. (news18.com)

राष्ट्रीय

  • घर पर रहकर ओटीटी और आईपीएल जैसे कार्यक्रमों से हो सकती है बेहतर दिनचर्या : विशेषज्ञ
    घर पर रहकर ओटीटी और आईपीएल जैसे कार्यक्रमों से हो सकती है बेहतर दिनचर्या : विशेषज्ञ

    नई दिल्ली, 17 अप्रैल | भारत में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर अपने चरम पर है। इस बीच लाखों लोग एक बार फिर से दूरस्थ कार्य मोड पर वापस आ गए हैं, क्योंकि काफी कंपनियों ने अपने संचालन को दफ्तर से वर्क फ्रॉम होम में तब्दील कर लिया है। लोगों को बेहतर तरीके से दिनचर्या बिताने को लेकर सलाह देने वाले लाइफ कोच के अनुसार, घर पर रहकर कोविड की दूसरी लहर को हराकर स्वस्थ रहने के साथ ही एक स्वस्थ स्क्रीन समय के साथ भी जुड़ने की आवश्यकता है।

    चूंकि कोविड-19 की दूसरी लहर की रफ्तार काफी तेज है और इस बीच विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच भविष्य के प्रति अनिश्चितता और चिंता के साथ ही तनाव भी बनना शुरू हो गया है। चिंता और तनाव को दूर करने के लिए यह लाइफ कोच घर में रहकर स्वस्थ्य शारीरिक और मानसिक स्थिति के लिए सलाह दे रहे हैं।

    मुंबई में लाइफ कोच और रिलेशनशिप काउंसलर शीतल शापरिया ने आईएएनएस से कहा, "महामारी सभी आयु वर्ग के लोगों में चिंता और घबराहट की भावना को जन्म दे रही है। ऐसी स्थिति में अपने विचारों को काबू करके सभी नकारात्मकता से छुटकारा पाना महत्वपूर्ण है और ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उन्हें लिखकर और उनसे निपटने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाए जाएं।"

    अपने आप को व्यस्त रखने और मनोरंजन के लिए एक और तरीका है कि आप फिल्मों या टीवी/ओटीटी सीरीज देख सकते हैं। इसके अलावा इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के साथ अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री के साथ कई ओटीटी प्लेटफार्म हैं, जिसकी मदद से आप अपनी अच्छी शाम बिता सकते हैं।

    शीतल ने कहा कि अपने विचारों को लिखने से नकारात्मकता को दूर के साथ ही आपके दिल और दिमाग को हल्का करने में भी मदद मिल सकती है।

    उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक अच्छी तरह से लिखा गया उपन्यास भी आपको घर पर रहने के दौरान भी बाहरी दुनिया से जोड़ सकता है।

    गुरुग्राम स्थित नारायण अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार और मनोचिकित्सक राहुल राय कक्कड़ के अनुसार, महामारी लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से भी प्रभावित कर रही है और इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है, जितना कि कोविड संबंधी स्वच्छता बनाए रखना।

    विशेषज्ञों ने जोर दिया है कि उचित नींद लेना, समय प्रबंधन, शारीरिक व्यायाम आदि घर से काम करते समय महामारी ब्लूज को हराया जा सकता है।

    घर से काम करते समय परिवार के सदस्यों के साथ कुछ अच्छा समय बिताने से भी आत्मविश्वास बनाने में मदद मिल सकती है।

    स्वस्थ रहने के लिए, कक्कर ने कुछ चीजें बताईं जैसे कि नियमित नींद, दिन के समय में नींद से बचना, शाम 5 बजे के बाद कैफीन का सेवन करना आदि।

    उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि कभी-कभी अपने विचारों के जंजाल से बाहर आना मुश्किल होता है। इसलिए, पेशेवर मदद लेना उचित है। मनोचिकित्सक ने कहा कि मदद मांगना कमजोरी का संकेत नहीं है, यह ताकत का संकेत है।

    विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले सप्ताह गंभीर होंगे, इसलिए हर किसी को केवल जरूरी काम से घर से बाहर निकलना चाहिए और पर्याप्त सावधानियां बरतनी चाहिए।

    केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले 24 घंटों में 2,34,692 ताजा कोविड मामले दर्ज किए हैं, जो अब तक एक ही दिन में सबसे अधिक मामले हैं। शनिवार को देश में समग्र कोविड मामलों की संख्या 1,45,26,609 तक पहुंच चुकी है।(आईएएनएस)

राजनीति

  • कुलदीप सेंगर की बीवी का टिकट काट BJP ने पूर्व MLC की पत्नी का ऐन वक्त पर करवाया नामांकन
    कुलदीप सेंगर की बीवी का टिकट काट BJP ने पूर्व MLC की पत्नी का ऐन वक्त पर करवाया नामांकन

    -अनुज गुप्‍ता

    उन्नाव. उत्तर प्रदेश के उन्नाव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नामांकन प्रक्रिया गुरुवार को समाप्त हो गई. बता दें कि यहां उन्नाव जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट ‘हॉट’ बनी हुई है. दरअसल, वार्ड नंबर-22 (फतेहपुर चौरासी तृतीय) सीट से कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर का बीजेपी ने समर्थन रद्द कर दिया था. अब इसी सीट पर पार्टी ने क्षत्रिय प्रत्याशी के तौर पर दिवंगत एमएलसी अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है. शकुन सिंह ने नामांकन पर्चा दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश कर दी है. शकुन की एंट्री से जिले की राजनीतिक सियासत गरम हो गई है.

    नामांकन के दौरान प्रत्याशी के साथ काफी संख्या में समर्थक पहुंचे, जिन्हें कलेक्ट्रेट से दूर रोका गया. वहीं, नामांकन स्थलों पर भारी संख्या में फोर्स तैनात रहा. उन्नाव में तीसरे चरण में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. उन्नाव में 26 अप्रैल को मतदान होगा. उन्नाव में 1040 ग्राम प्रधान, 1319 क्षेत्र पंचायत और 51 जिला पंचायत सदस्य पद के साथ ही 12902 ग्राम पंचायत सदस्य पद पर नामांकन प्रक्रिया 15 अप्रैल को समाप्त हो गई.

    ...जब संगीता का कटा टिकट
    बता दें कि 7 अप्रैल को बीजेपी समर्थित प्रत्याशी की जारी सूची में जेल में बंद पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष को वार्ड नंबर 22 फतेहपुर चौरासी तृतीय सीट से बीजेपी ने समर्थन देकर प्रत्यशी घोषित किया था. इसके बाद विपक्ष व रेप पीड़िता ने बीजेपी की छवि पर सवाल खड़े कर संगीता सेंगर के बीजेपी समर्थित प्रत्याशी पर हमला बोल दिया. राजनीतिक सरगर्मी बढ़ता देख 11 अप्रैल को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने बयान जारी कर संगीता सेंगर का समर्थन रद्द कर दिया.
    फतेहपुर चौरासी तृतीय सीट भी रिक्त हो गई. काफी उठापटक के बीच नामांकन के आखिरी दिन 15 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे पूर्व बीजेपी एमएलसी अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह पर बीजेपी ने आखिरी समय पर दांव लगाया और पार्टी समर्थित प्रत्याशी घोषित किया. शकुन सिंह ने अपने बेटे बीजेपी नेता शशांक शेखर सिंह के साथ नामांकन कराया है.

    बीजेपी से चुनावी मुकाबला
    पूर्व एमएलसी की पत्नी शकुन सिंह इससे पहले भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं. वहीं 2017 में अजीत सिंह के पुत्र शशांक शेखर सिंह ने सपा/बीएसपी के गठबंधन में बीएसपी प्रत्याशी के तौर पर भगवंतनगर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में थे और बीजेपी प्रत्याशी मौजूदा यूपी विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने चुनाव जीता था. शशांक शेखर सिंह दूसरे नंबर पर रहे थे.

    शकुन सिंह बोलीं- जनता का विश्‍वास हमारे साथ
    बीजेपी समर्थित प्रत्याशी शकुन सिंह ने नामांकन कराने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी ने समर्थन दिया है. जनता का विश्वास हमारे साथ है, जनता चुनाव जरूर जिताएगी. स्वर्गीय एमएलसी अजीत सिंह के पुत्र शशांक शेखर सिंह ने कहा कि पार्टी ने समर्थन दिया है, इसका आभार है. अपने पिता (अजीत सिंह) के पदचिन्हों पर चल रहा हूं. जनता की मदद के लिए हर समय तत्पर हूं और तत्पर रहूंगा. (news18.com)

संपादक की पसंद

  • Editor's Choice : Water in age of climate change
    Editor's Choice : Water in age of climate change

    By Sunita Narain

    We now need to be more than obsessive about water and its management as it is the basis of health and wealth

                                                                                                 
    Every year, March 22 is observed as the World Water Day. This year as we celebrate, and reiterate, the importance of water we need to remember the difference — this is the World Water Day in the age of climate change.

    This means we have to do everything that we know we need to do: Augment water availability by harvesting every drop of rainwater; use it much more efficiently so that every drop of that rainwater is valued in the food we eat or the water we flush; and ensure that every drop of that used water is reused and recycled and not degraded by pollution. This we already know and we practice.

    But this will not be enough in the age of climate change — we will have to do all we know at a faster pace, on a massive scale, and differently. Why do I say this?

    We know that climate change impacts are about heat — increased and scorching temperatures — and about variable and extreme rain. Both have a direct correlation with the water cycle. So climate change mitigation has to be about water and its management.

    Every year, we know now, is the hottest year in recorded history — till the next year comes around and breaks the record. In India, temperatures in parts of Odisha have crossed 40 degree Celsius as early as February — even before summer set in. North Indian states are breaking all records in terms of rising heat and higher than normal temperatures.

    And this is when 2021 is the year of La Niña — the Pacific water currents that are known to bring cooler temperatures globally as compared to El Niño. But Indian weather scientists say global warming has offset this cooling effect of La Niña.

    Rising heat has many implications for water security. First, it means that there will be greater evaporation from all waterbodies. It means that we need to work not just on storing water in millions of structures, but also plan for reducing losses due to evaporation. One option is to work on underground water storage — wells in other words.

    India has for too long discounted the management of groundwater systems as irrigation bureaucracies have been built on the planned canals and other surface water systems. But this will need to shift in this age of climate change and water scarcity.

    We need to find ways of reducing losses from tanks, ponds and canals as well. It’s not that evaporation losses didn’t happen in the past; but now the rates will increase with temperatures soaring. So we need to plan; we need to do more.

    Second, increased heat means that it will dry up the moisture in soils; it will make the land dusty and will increase the need for irrigation. In a country like India where the bulk of the food is still grown in rainfed regions — irrigated by rain — it will intensify land degradation and dust bowl formations. This means water management must go hand in hand with vegetation planning to improve the ability of soils to hold water, even in times of intense and prolonged heat.

    Thirdly, and obviously, heat will drive up the use of water — from drinking and irrigation to fighting fires in forests or buildings. We have already seen devastating forest fires rage in many parts of the world, and in the forests of India. This will only increase as temperatures go up. So the demand for water will increase with climate change, making it even more imperative that we do not waste — either water or wastewater.

    But this is not all. The fact is that climate change is already showing up in terms of the increasing number of extreme rain events. This means that we can expect rain to come as a flood, making the cycle of floods followed by droughts even more intense. India already has fewer rainy days in a year — it is said that it rains for just 100 hours on average in a year. Now the number of rainy days will further go down, but extreme rainy days will increase.

    This has a huge impact on our plans for water management. This means that we need to think more about flood management, not only to embank rivers but to optimise the floodwaters so that we can store them in underground and overground aquifers — wells and ponds. But it also means that we need to plan differently for the capture of rainwater.

    Currently, our water structures, the many millions that are being constructed under the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, for instance, are designed for normal rainfall. But now, as extreme rains become the normal, the structures will need to be redesigned so that they last over the seasons. The bottom-line is that we must plan deliberately to capture every drop, not just of rain but of floodwater, in this age of climate change.

    Let’s then be clear; we needed to be obsessive about water and its management yesterday because water is the basis of health and wealth. But now we need to be more than obsessive — we need to be determined and deliberate. This is the real make or break of our future. (downtoearth.org.in)

संपादकीय

  • 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय :  एक बहुत बड़ी मुसीबत,  एक बहुत ताकतवर फण्ड से जुड़े हुए खतरे भी देखें
    'छत्तीसगढ़' का संपादकीय : एक बहुत बड़ी मुसीबत, एक बहुत ताकतवर फण्ड से जुड़े हुए खतरे भी देखें

    जब कोई प्राकृतिक विपदा बहुत लंबी खिंचती है, जैसे कि आज की कोरोना की महामारी चल ही रही है, चलती ही जा रही है, तो ऐसे में जिंदगी के बाकी दायरों के जरूरी काम बहुत बुरी तरह बिछड़ जाते हैं। लोगों की जिंदगी में किसी भी तरह की परेशानी में दूसरों की मदद करने की क्षमता की एक सीमा रहती है, दानदाताओं की सीमा रहती है, बड़ी-बड़ी कंपनियों के भी समाजसेवा के बजट सीमित रहते हैं। जिस बरस ओडिशा में बड़ा तूफान आया, और बड़ी संख्या में मौतें हुईं, उस बरस देश के बाकी बहुत से जरूरी कामों के लिए दान ही नहीं मिला। अब जो लोग समाज से दान मिलने की उम्मीद में अनाथाश्रम या वृद्धाश्रम शुरू कर लेते हैं, उन्हें तो ऐसा अंदाज नहीं रहता कि किसी एक बरस उन्हें मिलने वाला दान तूफानपीड़ितों के लिए चले जाएगा या कि कोरोनाग्रस्त लोगों के लिए बनने वाले अस्थाई अस्पतालों के लिए चले जाएगा। दुनिया में बहुत किस्म के मदद के कार्यक्रम चलते हैं, और जब ऐसी कोई विकराल परेशानी आती है, तो बाकी सबके भूखों मरने की नौबत आ जाती है।

    समाज की मदद करने की एक सीमा रहती है, और वह मदद उस वक्त के, या कि उस बरस के, सबसे अधिक मानवीय लगने वाले मुद्दे की तरफ मुड़ जाती है, तो जरूरत के जो बाकी रास्ते रहते हैं उनके किनारे खड़े हुए जरूरतमंद लोग देखते रह जाते हैं, लेकिन मदद किसी एक तरफ जब मुड़ती है तो पूरी तरह मुड़ जाती है। जिन लोगों को उड़ीसा के समुद्री तूफान जैसी प्राकृतिक विपदा का तजुर्बा है वे जानते हैं कि एयरपोर्ट से निकलने के बाद तूफानग्रस्त इलाकों तक पहुंचने के रास्ते में बड़े-बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठन सबसे पहले अपने नाम और निशान वाले तंबू लगाना चाहते थे ताकि वहां पहुंचने वाले मीडिया और बाकी लोगों को सबसे पहले यह दिखे कि वे वहां पर काम कर रहे हैं। यह संगठन बहुत ही ईमानदार नीयत से काम करते हो सकते हैं, लेकिन उनके सामने सबसे पहले अपने खुद के अस्तित्व का सवाल रहता है। अगर उन्हें ही दान नहीं मिलेगा, तो वे आगे किसकी मदद कर पाएंगे? और फिर ऐसे बहुत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी संगठनों का ऑडिट बताता है कि कई संगठन तो उन्हें मिलने वाले दान का आधा हिस्सा तक अपने पर खर्च कर देते हैं। ऐसे संगठनों के लिए कुछ जानकार लोग तंज कसते हुए यह भी कहते हैं कि दूसरों के दर्द में इनकी दवा है, दूसरों के भूखों मरने में इनका पेट भरता है। यह देखने का एक नजरिया जरूर हो सकता है लेकिन यह बात पूरी तरह सच भी नहीं है।

    किसी देश या पूरी दुनिया में जरूरत के जितने प्रोजेक्ट चलते हैं, उनमें से अधिकतर बिना मदद के एक बरस भी नहीं गुजार सकते, और लोगों की हमदर्दी अगर किसी एक तरफ पूरी तरह मुड़ गई, तो बाकी प्रोजेक्ट बंद होने के कगार पर आ जाते हैं। ऐसे में ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकारों की जरूरत पड़ती है, ऐसे में ही संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था की जरूरत पड़ती है जो कि एक व्यापक नजरिए से ऐसे प्रोजेक्ट बचा सके। ऐसे प्रोजेक्ट बच्चों के हो सकते हैं, बीमारों और बूढ़ों के हो सकते हैं, बेघरों के हो सकते हैं, कुदरत और पशु पक्षियों के हो सकते हैं, और हो सकता है कि किसी लोक कला को या लोक भाषा को बचाए रखने के, संरक्षण वाले ऐसे प्रोजेक्ट हों जो कि कोरोना से हो रही मौतों के बीच में गैरजरूरी लगें लेकिन जब दुनिया की लंबी जिंदगी को देखते हैं, तो ऐसे कई मुद्दे जरूरी लगते हैं जिनका बंद होना एक संभावना के खत्म होने सरीखा हो जाएगा।

    देश-प्रदेश की सरकारों को यह भी देखना चाहिए कि उनकी तात्कालिक प्राथमिकता ऐसी ना हो जो कि दूसरे तमाम दीर्घकालीन महत्व के मुद्दों को कुचल कर रख दे। जब शासन से लेकर प्रशासन तक की प्राथमिकता किसी एक जलते हुए मुद्दे से निपटना हो, तो ऐसा कई बार होता है। पिछले बरस कोरोना के बीच जब प्रधानमंत्री राहत कोष से परे एक रहस्य में फंड पीएम केयर्स के नाम से बनाया गया, और उसे किसी भी जवाबदेही से मुक्त रखा गया, और उसे मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और साख से जोड़कर पेश किया गया. भारत सरकार की नवरत्न कंपनियों से लेकर देश की बड़ी-बड़ी निजी कंपनियों तक ने अपने साल भर के अधिकतर सीएसआर फंड इसी एक कोष में दे दिए। नतीजा यह हुआ कि इन कंपनियों से देशभर के दूसरे बहुत से समाजसेवी कामों के लिए जो मदद मिलती थी वह सिमट गई, और आज जब देश भर में मदद की जरूरत है करोना से बचाव के लिए भी पीएम केयर्स के उस फंड का क्या इस्तेमाल हो रहा है, लोगों की जानकारी में नहीं है। कुल मिलाकर देश की मदद करने की सारी निजी और सरकारी क्षमता का ऐसा केंद्रीकरण भी नहीं करना चाहिए जिससे मदद के हकदार दूसरे तमाम दायरे भूखे ही मर जाएं।(क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

सेहत-फिटनेस

  • इफ्तार में इसलिए खाते हैं खजूर, सेहत को मिलते हैं इतने फायदे
    इफ्तार में इसलिए खाते हैं खजूर, सेहत को मिलते हैं इतने फायदे

    रमजान में खजूर की बहुत अहमियत है. यही वजह है कि दुनिया भर के मुसलमान खजूर से रोजा खोलना पसंद करते हैं. वहीं सेहत के लिए भी खजूर कई तरह से फायदा पहुंचाता है. खजूर एक तरह का फल है. यह ज्‍यादातर मिस्र और फारस की खाड़ी क्षेत्र में पाया जाता है. दुनिया में सबसे अच्‍छी किस्‍म का खजूर, जो कई बीमारियों को ठीक करने में मददगार होता है सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना और इसके आस-पास पाया जाता है. खजूर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि रमजान में इफ्तार के दौरान खजूर का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि दिन भर जब रोजा रखने के बाद शरीर की एनर्जी कम होने लगती है, तो ऐसे में रोजा खोलने के लिए खजूर जैसे आसानी से पचने वाले फल की जरूरत होती है, जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा एनर्जी मिल सके.

    हाजमा रखता है दुरुस्‍त
    ईटीवी उर्दू की एक रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि इफ्तार में खजूर खाने के कई फायदे हैं. दिन भर जब रोजा में पाचन क्रिया सुस्‍त पड़ जाती है, तब खजूर भोजन को पचाने में मदद करता है.

    जिस्‍म को देता है ताकत

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो जब हम खजूर से अपना रोजा खोलते हैं तो इसकी मिठास तुरंत मुंह की लार झिल्ली में जज्‍ब होकर ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाती है, जिससे शरीर में हरारत आती है और ताकत मिलती है.

    कई बीमारियों से बचाता है
    खजूर सर्दी के असर से होने वाली कई बीमारियों से बचाता है. साथ ही यह मस्तिष्क की कमजोरी से छुटकारा दिलाता है और भूलने की बीमारी को दूर करने में भी मददगार होता है.

    खून की कमी दूर करता है
    खजूर दिल को मजबूती देता है. साथ ही शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करता है. इससे सेवन से गुर्दे मजबूत बनते हैं और श्वसन रोगों में उपयोगी होता है. आमतौर पर अस्थमा में.

    खजूर कई पोषक तत्‍वों से भरपूर
    अरबों में एक पुरानी कहावत है कि साल में जितने दिन होते हैं, उतने ही खजूर के इस्‍तेमाल और फायदे होते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खजूर में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन सी, विटामिन के और अन्य पोषक तत्‍व भरपूर मात्रा में होते हैं. (news18.com)

मनोरंजन

  • स्वरा भास्कर ने उड़ाया अपने पैरेंट्स का मजाक! शेयर किया फैमिली व्हाट्सऐप ग्रुप के चैट का स्क्रीनशॉट
    स्वरा भास्कर ने उड़ाया अपने पैरेंट्स का मजाक! शेयर किया फैमिली व्हाट्सऐप ग्रुप के चैट का स्क्रीनशॉट

     

    मुंबई: बॉलीवुड की संजीदा एक्ट्रेस स्वरा भास्कर न सिर्फ शानदार एक्टिंग के लिए बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं. अक्सर स्वरा बेबाक अंदाज में अपनी बातों को सोशल मीडिया र शेयर करती रहती हैं. अब एक्ट्रेस ने अपने ही माता-पिता की पर्सनल बात को सार्वजनिक कर दिया है, क्योंकि एक्ट्रेस के पैरेंट्स फैमिली व्हाट्सऐप ग्रुप में फ्लर्ट करते हुए दिखाई दिए थे.

    स्वरा भास्कर ने ट्विटर पर अपने मोबाइल फोन का स्क्रीनशॉट शेयर किया है. इस पोस्ट में स्वरा ने अपने ही मम्मी-पापा की सीक्रेट बातों को दुनिया के सामने ला दिया. अपने फैमिली चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है जिसमें उनके मम्मी-पापा के वॉयस मैसेज हैं. इस चैट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए स्वरा ने लिखा, ‘समय डार्क है, लेकिन पैरेंट्स के साथ व्हाट्सऐप चैट काफी मजेदार होता है’. पहले उनके पापा ने फिर उनकी मां ने वॉयस मैसेज भेजा है. इस पर स्वरा ने कमेंट करते हुए अपने मम्मी-पापा का हिदायत दी कि ‘प्लीज आप यह सब आप अपने पर्सनल चैट पर करो’. इसके साथ ही हंसते हुए और मुंह बनाए हुए और हाथ जोड़े हुए इमोजी शेयर किए हैं.

    बता दें कि स्वरा भास्कर ने 'रांझणा', 'तनु वेड्स मनु', 'निल बटे सन्नाटा' और 'वीरे दी वेडिंग' जैसी कई शानदार फिल्मों में अपना टैलेंट दिखाया है. इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म के कई प्रोजेक्ट में काम कर रही हैं. पिछले साल स्वरा अमेजन प्राइम वीडियो सीरीज 'रसभरी',  इरोज़ नाउ सीरीज 'फ्लैश' और नेटफ्लिक्स सीरीज 'भाग बीनी भाग'  में देखी गई थी. अभी हाल ही में, उन्होंने एमएक्स प्लेयर सीरीज 'आपके कमरे में कोई रहता है' में भी दिखाई दी थीं.

    वर्क फ्रंट की बात करें तो स्वरा भास्कर ‘चार यार’ में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में स्वरा के साथ शिखा तल्सानिया, मेहर विज और पूजा चोपड़ा नजर आएंगी. इसके अलावा ‘शीर कोरमा’ में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में स्वरा के साथ दिव्या दत्ता लीड रोल में हैं. ये फिल्म समलैंगिकता जैसे मुद्दे पर आधारित है. (news18.com)

खेल

  • हैदराबाद की हार की हैट्रिक पर संजय मांजरेकर बोले-इन 3 खिलाड़ियों को एक साथ खिलाकर जीत नहीं सकते
    हैदराबाद की हार की हैट्रिक पर संजय मांजरेकर बोले-इन 3 खिलाड़ियों को एक साथ खिलाकर जीत नहीं सकते

     

    नई दिल्ली. आईपीएल के 9वें मुकाबले में सनराजइर्स हैदराबाद को मुंबई इंडियंस ने 13 रन से हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज है. वही सनराइजर्स हैदराबाद की आईपीएल के 14वें सीजन में यह लगातार तीसरी हार है. एक बार फिर हैदरबाद की टीम चेन्नई के चेपॉक मैदान पर 150 के लक्ष्य का पीछा करने में असफल रही. रोहित शर्मा (32) और मैन ऑफ द मैच कायरन पोलार्ड की (35 रन) पारी के दम पर मुंबई इंडियंस ने 20 ओवर में पांच विकेट पर 150 रन बनाने के बाद सनराइजर्स को 19.4 ओवर में 137 रन पर ऑल आउट कर दिया.

    हैदराबाद ने चार युवा खिलाड़ियों को दिया मौका
    लगातार दो मैच गंवाने के बाद सनराइजर्स हैदराबाद ने इस मैच में चार बदलाव करते हुए विराट सिंह, अभिषेक शर्मा, खलील अहमद और मुजीब उर रहमान जैसे युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया. हालांकि हैदराबाद का यह दांव उनके काम नहीं आया. भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने हैदराबाद की टीम और डेविड वॉर्नर की कप्तानी पर सवाल उठाया है. हैदराबाद की हार के बाद उन्होंने ट्वीट किया, 'माफी चाहूंगा लेकिन जब कोई अपनी प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, विराट सिंह और अब्दुल समद को एक साथ खिलाता है तो वह टीम जीतना डिजर्व नहीं करती है.' अभिषेक शर्मा ने इस मैच में सिर्फ एक ओवर गेंदबाजी की जबकि दो रन बनाकर आउट हो गए. झारखंड के आक्रामक बल्लेबाज विराट सिंह अपने आईपीएल डेब्यू पर 12 गेंदों पर महज 11 रन बना सके. वहीं अब्दुल समद सात रन बनाकर आउट हो गए.

    बेयरस्टो और वॉर्नर की पारी गई बेकार
    इससे पहले जॉनी बेयरस्टो और कप्तान डेविड वॉर्नर ने 7.2 ओवर में 67 रन की साझेदारी कर के सनराइजर्स को शानदार शुरुआत दिलायी लेकिन क्रुणाल पंड्या की गेंद पर बेयरस्टो के हिट विकेट होने के बाद मुंबई ने शानदार वापसी कर मैच पर पकड़ बना ली. बेयरस्टो ने 22 गेंद में 43 रन की पारी के दौरान चार छक्के और तीन चौके जड़ें. वॉर्नर ने 34 गेंद में 36 रन बनाये. बेयस्टो के आउट होने के बाद मुंबई की टीम मैच में वापसी करने लगी और राहुल चाहर ने मनीष पांडे (02) को पोलार्ड के हाथों कैच कराकर मुंबई को दूसरी सफलता दिलायी. वॉर्नर ने इसके बाद 11वें ओवर की पहली गेंद पर छक्का लगाकर रन गति को बनाये रखने की कोशिश की लेकिन अगले ही ओवर में एक रन चुराने की कोशिश में वह हार्दिक पंड्या के थ्रो पर रन आउट हो गये.

    बुमराह ने की किफायती गेंदबाजी
    राहुल ने इसके बाद एक ही ओवर में विराट सिंह (11) और अभिषेक शर्मा (02) को आउट कर मैच पर मुंबई का शिकंजा कस दिया. उनके इस 15वें ओवर से सिर्फ दो रन बने जिससे सनराइजर्स को आखिरी पांच ओवर में जीतने के लिए 47 रन चाहिये थे. विजय शंकर ने 16 ओवर में क्रुणाल के खिलाफ दो छक्के जड़कर रन और गेंद के अंतर को कम किया लेकिन बुमराह ने 17वें ओवर में सिर्फ चार रन खर्चकर सनराइजर्स पर फिर से दबाव बना दिया.

    हार्दिक ने इसके बाद अब्दुल समद (07) के रूप में दूसरा रन आउट किया तो वही बुमराह की गेंद पर विजय शंकर ने सूर्यकुमार को कैच थमा पवेलियन लौटे. विजय शंकर ने 25 गेंद में 28 रन बनाये. रही सही कसर बोल्ट ने आखिरी ओवर में भुवनेश्वर (01) और खलील अहमद (01) को बोल्ड कर पूरी कर दी. मुंबई के लिए राहुल चाहर और ट्रेंट बोल्ट ने तीन-तीन विकेट लिये जबकि जसप्रीत बुमराह ने चार ओवर में मजह 14 रन खर्च कर एक सफलता हासिल की. (news18.com)

कारोबार

  • स्पाइसजेट ने कुछ बदलाव के साथ 'जीरो चेंज फी' ऑफर फिर से पेश किया
    स्पाइसजेट ने कुछ बदलाव के साथ 'जीरो चेंज फी' ऑफर फिर से पेश किया

    नई दिल्ली, 17 अप्रैल | एयरलाइन प्रमुख स्पाइसजेट ने शनिवार को घरेलू नेटवर्क के लिए 'जीरो चेंज फी' ऑफर को नए सिरे से जारी करते हुए इसमें कुछ बदलाव किया है। कंपनी की ओर से दिया गया नया प्रस्ताव यात्रियों को सात दिनों के बजाय प्रस्थान की तारीख से कम से कम पांच दिन पहले अपने टिकट में परिवर्तन करने का अधिकार देता है।

    दरअसल, लो-कॉस्ट एयरलाइन स्पाइसजेट की ओर से यह अपने घरेलू यात्रियों के लिए एक स्कीम है, जिसका नाम जीरो चेंज फी है। ये ऑफर उन यात्रियों के लिए है, जिन्हें अपनी यात्रा में किसी कारण से कोई बदलाव करना पड़ गया हो।

    कंपनी के अनुसार, नई पेशकश यात्रियों को एक बार के शुल्क के साथ टिकटों को संशोधित करने की अनुमति देती है।

    इसके अतिरिक्त एयरलाइन ने सीटों, स्पाइसमैक्स और यू फस्र्ट जैसी ऐड-ऑन सेवाओं के लिए विशेष रियायती मूल्य भी पेश किया है।

    एयरलाइन के अनुसार, इस प्रस्ताव का उद्देश्य सभी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण लचीलेपन और लागत बचत का विस्तार करना है।

    कंपनी ने एक बयान में बताया है कि नई पेशकश के तहत, 17 अप्रैल 2021 से 10 मई, 2021 तक सीधी घरेलू उड़ान के टिकट बुक करने वाले यात्री 17 अप्रैल, 2021 और 15 मई, 2021 के बीच यात्रा की अवधि के लिए परिवर्तन शुल्क पर एक बार की छूट का आनंद ले सकते हैं।

    ऐसे में वन टाइम वेवर यानी फीस से छूट मिलेगी। हालांकि इस दौरान किरायों में जो भी अंतर होगा, उसे यात्री को चुकाना होगा।(आईएएनएस)

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