कोरोना वाइरस

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Andaman and Nicobar Islands / 7534 Andhra Pradesh / 1962049 Arunachal Pradesh / 47477 Assam / 564030 Bihar / 724719 Chandigarh / 61948 Chhattisgarh / 1001781 Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu / 10646 Delhi / 1436144 Goa / 170900 Gujarat / 824829 Haryana / 769858 Himachal Pradesh / 205728 Jammu and Kashmir / 321207 Jharkhand / 347105 Karnataka / 2901247 Kerala / 3349365 Ladakh / 20324 Lakshadweep / 10162 Madhya Pradesh / 791796 Maharashtra / 6290156 Manipur / 96824 Meghalaya / 63745 Mizoram / 36397 Nagaland / 27653 Odisha / 974132 Puducherry / 120725 Punjab / 599005 Rajasthan / 953622 Sikkim / 26132 State Unassigned / 0 Tamil Nadu / 2555664 Telangana / 643716 Tripura / 77785 Uttar Pradesh / 1708373 Uttarakhand / 341982 West Bengal / 1526539

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अंतरराष्ट्रीय

  • इजराइल में 60 साल से ऊपर के लोगों को लगेगा वैक्सीन का तीसरी डोज, ऐसा करने वाला पहला देश
    इजराइल में 60 साल से ऊपर के लोगों को लगेगा वैक्सीन का तीसरी डोज, ऐसा करने वाला पहला देश

     

    यरूशलम. कोरोना वायरस को हराने के लिए इजराइल ने बड़ा कदम उठाया है. यहां 60 साल से ऊपर के लोगों को कोरोना वैक्सीन का तीसरा डोज दिया जाएगा. अगले हफ्ते से तीसरी खुराक मिलनी शुरू हो जाएगी. इजराइल ऐसा करने वाला पहला देश है, क्योंकि अभी तक सभी वैक्सीन के दो ही शॉट लोगों को दिए जा रहे हैं. इसके लिए बकायदा वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय  ने नई गाइडलाइन भी जारी कर दी है.

    इजरायल सिर्फ उन ही 60+ लोगों को वैक्सीन की तीसरी खुराक देगा, जिन्होंने कम से कम 5 महीने पहले दोनों खुराक ले ली थी. चैनल 13 के मुताबिक सरकार के इस कदम को डेल्टा वेरिएंट के प्रसार को धीमा करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है. इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले संक्रमण के खिलाफ टीके की प्रभावशीलता में गिरावट की सूचना दी थी.

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    3 महीने में वैक्सीन की इफेक्टिवनेस 16% घटी
    एक्सपर्ट पैनल ने बुधवार रात मीटिंग दौरान वैक्सीन की इफेक्टिवनेस से जुड़े डेटा साझा किए थे. इनमें बताया गया कि 60 साल से ऊपर के जिन लोगों को जनवरी में वैक्सीन लगी थी, उन्हें गंभीर संक्रमण से बचाने में वैक्सीन की इफेक्टिवनेस अप्रैल में 97% थी. जुलाई में यह घटकर 81% रह गई. यानी 3 महीने में इफेक्टिवनेस में 16% कमी आई है. हालांकि, पैनल में शामिल सभी एक्सपर्ट एकराय नहीं थे, लेकिन ज्यादातर इस पक्ष में थे कि 60 साल से ऊपर के लोगों को बूस्टर डोज दिया जाए.

    इजराइल में कोरोना के कितने केस?
    इजरायल में नए गंभीर मरीजों की संख्या पिछले दो दिन से लगातार बढ़ रही है. सोमवार को इनका आंकड़ा 20 था. मंगलवार को बढ़कर 33 और बुधवार को 41 पहुंच गया. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि अगस्त के आखिर तक गंभीर मरीजों का आंकड़ा 1,000 तक पहुंच जाएगा.

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    दुनिया में अब तक 19.7 करोड़ मामले
    दुनियाभर में अब तक कोरोनावायरस के 19 करोड़ 73 लाख मामले दर्ज हुए हैं. इससे 42 लाख 13 हजार लोगों ने जान गंवाई है, जबकि 17 करोड़ 82 लाख लोगों ने इस बीमारी को मात भी दी है. दुनिया में अभी कोरोना के 1 करोड़ 46 लाख एक्टिव केस हैं. इसमें से 87,074 क्रिटिकल हैं.(news18.com)

राष्ट्रीय

  • झारखंड के धनबाद में एक जज की मौत के मामले ने तूल पकड़ा
    झारखंड के धनबाद में एक जज की मौत के मामले ने तूल पकड़ा

    मोहम्मद सरताज आलम

     

    झारखंड से,

    झारखंड के धनबाद में एक जज की मौत का मामला सुर्ख़ियाँ बटोर रहा है. धनबाद के अपर ज़िला सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की बुधवार को एक ऑटो की टक्कर से मौत हो गई थी.

    लेकिन इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद परिजन इसे हत्या बता रहे हैं और राज्य के एडवोकेट जनरल ने भी कहा है कि लगता है उन्हें जान-बूझकर मारा गया है.

    बुधवार की सुबह पाँच बजे धनबाद के रंधीर वर्मा चौक से एक ऑटो तेज़ रफ़्तार से गुज़रता हुआ मॉर्निंग वॉक पर निकले अपर ज़िला सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद को टक्कर मार कर निकल गया.

    जिसके बाद ख़ून में लथपथ 49 वर्षीय न्यायाधीश को कुछ स्थानीय युवकों ने अस्पताल पहुँचाया. लेकिन चंद घंटे बाद उनकी मौत हो गई.

    महत्वपूर्ण बात यह है कि धनबाद के एसपी का बंगला घटनास्थल से मात्र 150 मीटर की दूरी पर है. धनबाद सदर थाना उस स्थान से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित है. ख़ुद न्यायाधीश उत्तम आनंद का आवास भी घटना स्थल से कुछ ही क़दमों की दूरी पर है.

    इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस सीसीटीवी फ़ुटेज में साफ़ दिखाई दे रहा है कि न्यायाधीश हल्के-हल्के क़दमों से सड़क की बाईं तरफ़ बिल्कुल किनारे जॉगिंग कर रहे हैं. तभी एक ऑटो न्यायाधीश के पीछे से आता दिखाई देता है. ऑटो उनके क़रीब पहुँचते ही बाईं तरफ़ अचानक मुड़ जाता है और न्यायाधीश को टक्कर मारते हुआ आगे निकल जाता है.

    सीसीटीवी फ़ुटेज को लेकर न्यायाधीश के बहनोई प्रभात कुमार सिन्हा ने बीबीसी से कहा, "ये साफ़-साफ़ कोल्ड ब्लडेड मर्डर है. आप वीडियो को स्लो मोशन में देखिए तो साफ़ पता चलता है कि ऑटो जज साहब से टकराया ही नहीं है. दरअसल ऑटो में बैठे युवक ने किसी चीज़ से जज साहब पर प्रहार किया है. जिसने भी प्रहार किया है, वह बहुत ही सधा हुआ आदमी था, उसे पता था कि किस इम्पैक्ट से ये करना है. साथ ही एक मोटर साइकिल सड़क के डिवाइडर के दाहिने तरफ़ से आती दिखाई देती है. बाइक चलाने वाला उस ओर देखता हुआ आगे बढ़ जाता है. जो कुछ मिनट के बाद घूम कर हादसे की ओर आता है. गाड़ी चलाने वाला ज़मीन पर गिरे हुए न्यायाधीश की तरफ़ देखते हुए आगे बढ़ जाता है. अगर वह इस मामले में शामिल नहीं होता, तो 100 नंबर डायल करके प्रशासन को ज़रूर ख़बर करता, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया."

    क़ानूनी प्रक्रिया को लेकर न्यायाधीश के बहनोई प्रभात कुमार सिन्हा ने कहा, "हमने इस मामले की एफ़आईआर तो करवा दी है. अब पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन (प्रशासन) का काम है कि कैसे मामले की सही जाँच हो, कैसे दोषी को सज़ा मिल सकती है. रही बात जज साहब द्वारा संगीन मामलों की सुनवाई की, तो घर के लोग उनके ऑफ़िशियल कामों में इन्वॉल्व (शामिल) नहीं होते थे. इसलिए उनके कामों के बारे में किसी को कुछ नहीं पता है. लेकिन जो ख़बर सामने आ रही है, इसे रूल आउट नहीं किया जा सकता है."

    उन्होंने कहा, "मामले का हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया है इसलिए हाईकोर्ट को चाहिए कि अपनी निगरानी में इस पूरे मामले की जाँच करवाए. क्योंकि ये एक न्यायिक पदाधिकारी की हत्या का मामला है, इसकी जाँच नहीं होगी और दोषी को सज़ा नहीं मिलेगी तो भविष्य में न्यायिक अधिकारी कार्य करने में डरेंगे."

    न्यायधीश कर रहे थे धनबाद के कई संगीन मामलों की सुनवाई

    न्यायाधीश उत्तम आनंद कई संगीन मामलों की सुनवाई कर रहे थे. इनमें झरिया के रंजय सिंह की हत्या का मामला भी था.

    अदालत में यह मामला अभियोजन पक्ष की गवाही के लिए चल रहा है. जबकि दो दिन पहले नीरज सिंह हत्याकांड के कथित शूटर की ज़मानत अर्ज़ी भी ख़ारिज हुई थी.

    यही नहीं कांग्रेस के नगर अध्यक्ष वैभव सिन्हा के मामले का ट्रायल भी इसी कोर्ट में लंबित है. इन मामलों के अलावा जज उत्तम आनंद ने दो मामलों में तीन लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

    हाईकोर्ट ने धनबाद के एसएसपी को न्यायाधीश की मौत के मामले में पूरी रिपोर्ट के साथ तलब किया है. जबकि एसएसपी संजीव कुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम जाँच कर रहे हैं इसलिए फ़िलहाल कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं."

    जब बीबीसी ने एसएसपी से पूछा कि प्रथम दृष्टि में यह हत्या का मामला है या फिर हादसा?

    इस सवाल पर भी वह जवाब देने से बचते नज़र आए और कहा कि 'शाम तक इंतज़ार कीजिए, जाँच पूरी होने के बाद ही आपके सवालों का जवाब देंगे.'

    जबकि बोकारो रेंज के डीआईजी मयूर पटेल कन्हैया लाल ने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा कि एसएसपी धनबाद से बात कीजिए.

    झारखंड के एडवोकेट जनरल राजीव रंजन ने बताया, "देखने से लगता है कि जानबूझकर मारा गया है. प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऑटो में सवार दोनों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है. उनसे पूछताछ हो रही है. इस मामले की जाँच के लिए पुलिस के एडीजी लेवल के अधिकारी की अध्यक्षता में 14 लोगों की एसआईटी का भी गठन कर लिया गया है."

    राजीव रंजन ने कहा, "यह अदालत का विशेषाधिकार है कि वो सीबीआई से जाँच कराना चाहती है या नहीं लेकिन मुझे अपने पुलिस फ़ोर्स पर पूरा विश्वास है. एक जज का मारा जाना बहुत ही संवेदनशील मामला है. हमलोग सच जानने के लिए पूरी कोशिश करेंगे और जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं वो बचेंगे नहीं. त्वरित ट्रायल करके हमलोग अपराधियों को सज़ा दिलवाएँगे."

    असमय मौत के कारण दुनिया को अलविदा कह देने वाले न्यायाधीश उत्तम आनंद के परिवार में उनकी पत्नी, बुज़ुर्ग माता-पिता, छोटे भाई के अलावा 16 और 13 वर्ष की दो बेटियाँ और 11 वर्षीय पुत्र हैं.  (bbc.com/hindi)

राजनीति

  • कांग्रेस के भविष्य में अकेले चुनाव लड़ने वाले बयान से पलटे नाना पटोले, कहा- पार्टी आलाकमान करेगी फैसला
    कांग्रेस के भविष्य में अकेले चुनाव लड़ने वाले बयान से पलटे नाना पटोले, कहा- पार्टी आलाकमान करेगी फैसला

    अरुण सिंह

    मुंबई. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले मंगलवार को अपने उस बयान से पलटते नजर आए जिसमें वो लगातार कह रहे थे कि भविष्य में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा, 'मैंने कोई बयानबाज़ी नहीं की, सिर्फ अपनी पार्टी आगे बढ़ाने के लिए काम किया, यही काम एनसीपी करती है और यही काम शिवसेना भी करती है. सबको अपनी पार्टी आगे बढ़ाने का हक़ है.' उल्लेखनीय है कि शिवसेना-राकांपा और कांग्रेस तीनों मिलकर महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार चला रहे हैं.

    पटोले ने कहा, 'हमारी पार्टी महाराष्ट्र में क्यों नहीं सबसे बड़ी बनेगी? हमारा बेस रहा है महाराष्ट्र, उसको मज़बूत करना हमारा काम है. राहुल गांधी ने पार्टी को मज़बूत करने का प्लान दिया है.' इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि महाराष्ट्र में एमवीए सरकार 5 साल चलेगी और इसमें कोई दो राय नहीं है. पटोले ने बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के उतरेगी, जबकि आगामी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में पार्टी नेतृत्व फैसला करेगा चुनाव अकेले लड़ना है या गठबंधन में.

    पिछले विधानसभा चुनाव के संदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) पर परोक्ष हमला बोलते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने बीते 14 जुलाई को कहा था कि 2014 में उनकी पार्टी के साथ 'धोखा' किया गया था और वह अब उसी को ध्यान में रखकर 2024 के आम चुनाव की तैयारी कर रही है. पटोले ने यहां संवाददाताओं से यह भी कहा था कि उन्हें विपक्षी भाजपा को निशाना बनाने का दायित्व दिया गया था, शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा या शिवसेना को नहीं.

    भविष्य में कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने की प्राय: बात करते रहने वाले पटोले ने कहा था, 'हमें (कांग्रेस) 2014 में धोखा दिया गया था. उसे ध्यान में रखते हुए हम अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं.' पटोले का इशारा महाराष्ट्र में 2014 के विधानसभा चुनाव में राकांपा के अकेले लड़ने के कदम की ओर था.
    कांग्रेस के एक तबके का मानना है कि राकांपा के निर्णय से भाजपा को लाभ हुआ जिसने 122 सीट जीती थीं और सरकार बनाने का दावा किया था. (इनपुट भाषा से भी)(news18.com)

संपादक की पसंद

  • Editor's Choice : This heatwave is not a weather blip
    Editor's Choice : This heatwave is not a weather blip

    -By Sunita Narain

    This heatwave is not a weather blip; illustration: Ritika Bohra

    Searing heat, touching 50 degrees Celsius in the otherwise cold regions of Canada and in the western regions of the United States, has brought home the message — once again and loudly — that climate change is here and is about to get worse.

    The heat was so unbearable and off the charts that it killed an estimated 500 people in Canada’s British Columbia province. Then there are reports of the savage damage it has done to animals and other creatures. The inferno is now adding to the challenge of wildfires, threatening lives and properties.

    Europe is seeing a similar heatwave; it is predicted that this year’s temperatures will be the highest since records have been kept. Yet another year when we have broken the previous year’s heat record! 

    The fact is this heatwave is not incidental or accidental — a mere weather blip. Scientists working with the World Weather Attribution initiative conclude that this heatwave “was virtually impossible” without human-caused climate change. They find that the temperatures were so extreme that they lie outside the range of historically observed heat records. They conclude that the frequency of this once-in-a-thousand-year event would increase with temperature rise, and when the world touches 2°C increase over pre-industrial ages, it would become a five- to 10-year event. 

    What then is clear is this: One, climate change is happening faster than expected and we are certainly unprepared. Two, climate change is a great leveller — extreme and variable rain, increased frequency of tropical cyclones and heat and cold are hitting the world’s poorest. Each event cripples them and makes them even more vulnerable and marginalised. But the rich are also not excluded from this revenge of nature. The death of people from heatwaves in Canada must keep reminding us of the tragedy that awaits everyone.

    Even as I write this, perhaps for the umpteenth time (my readers must forgive me), we have still not seen the writing on the wall. Our actions still do not match our words. The technologies to combat climate change are available — but they require application at a disruptive and transformative scale. This is what we are missing. 

    I say this because every extra day of procrastination will make the task even more difficult. Take the case of rising heat. To adapt and survive, the rich in otherwise temperate regions will now invest more in devices like air conditioners to cool their homes. This will, in turn, add to the energy demand and, given that countries are still fiddling around with fossil fuel-based electricity, it will add to greenhouse gas emissions.

    We know that heating and cooling devices take up the bulk of the power demand in our cities today. In Delhi, research by my colleagues at the Centre for Science and Environment (CSE) shows as soon as the temperature crosses 27-28°C, the cooling demand increases exponentially — electricity demand rises by 190 MW for every degree rise in mercury. With more electricity generation, there will be more emissions, increasing the temperatures even more. The vicious cycle will spiral out of control.

    This direct relationship between heat and energy has another dimension to it — thermal comfort or discomfort. This is not just about temperatures but also about how well-designed and ventilated our living spaces are. This is why even when temperatures are not so high, but there is humidity or lack of air, we feel uncomfortable and “hot”. The fan makes air conditioner more efficient as it evaporates moisture from our bodies.

    It is about cooling but also about design. Just consider how traditional buildings were designed to keep out the heat; by designing for the sun and wind, and not against nature. They used orientation and shades on window — what we now call passive architecture — to ensure that buildings are protected from the glare; they used courtyards and open windows for ventilation. Trees provided shade, as much as other environmental benefits.

    Sadly, modern architecture built on glass facades and closed spaces for air cooling has shunned and dismissed this knowledge as unnecessary and backward.

    Then there is also the fact that more heat will add to water stress — for irrigation, for drinking and for fighting forest fires. As we pump more water from the ground or use electricity for transporting water, we will need more energy — further reinforcing the vicious cycle. This is why we must go back to finding ways of optimising local water resources; harvesting the rain where and when it falls so that we can reduce dependence on pumped- and energy-dense water. 

    In the heating planet, this knowledge of living with extreme heat and cold without increasing the energy footprint of our living spaces and cities will be crucial. So, as much as we need to move away from fossil fuels, we need to make sure we can do much more with much less energy — this is the climate change challenge. The scorched world should teach us this. (downtoearth.org.in)

संपादकीय

  • ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : भगवान जगन्नाथ के घर से निकली एक मिसाल पर बाकी हिंदुस्तान भी चले...
    ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : भगवान जगन्नाथ के घर से निकली एक मिसाल पर बाकी हिंदुस्तान भी चले...

    अभी चार दिन पहले हिंदुस्तान में बड़ी अहमियत वाली एक बात हुई लेकिन उसे खबरों में ठीक से जगह भी नहीं मिल पाई क्योंकि वह सनसनीखेज नहीं थी, वह राजनीति या क्रिकेट नहीं थी, जुर्म नहीं थी, सेक्स नहीं थी, उससे अधिक जगह राज कुंद्रा की पॉर्नोग्राफी को मिलती रही, उससे अधिक जगह राजनीति के ओछे आरोपों को मिलती रही। लेकिन यह मुद्दा ऐसा है जिस पर लिखना सोचना और अमल करना जरूरी है। देश में जो एक पिछड़ा हुआ राज्य माना जाता है, उस ओडिशा के पुरी को यह फख्र  हासिल हुआ है कि वह हिंदुस्तान का ऐसा पहला शहर बना है जहां नल के पानी को पिया जा सकता है। भारत के शुद्ध और साफ पानी के जो पैमाने हैं, उन पर जगन्नाथपुरी शहर के नलों का पानी खरा उतरा है। और ऐसा भी नहीं कि नल से साफ पानी कुछ गिने-चुने घंटे आता है कि लोग उन्हें घरों में भर लें। चौबीसों घंटे पुरी के नलों से ऐसा साफ पानी आ रहा है कि जिसे पूरी तरह भरोसे के साथ पिया जा सकता है। वहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पहल पर पूरे प्रदेश में इस सुजल योजना का विस्तार किया जा रहा है। और ओडिशा राज्य सरकार का यह कहना है कि पुरी की ढाई लाख आबादी और साल भर में वहां पहुंचने वाले दो करोड़ पर्यटकों को यह शुद्ध पानी पूरे वक्त हासिल रहेगा जिसे पूरे भरोसे के साथ पिया जा सकेगा। सरकार का यह अंदाज है कि इससे हर बरस करीब तीन करोड़ प्लास्टिक बोतलें बचेंगी जिनमें भरा हुआ पानी साल भर में यहां खर्च होता है। सरकार का यह भी अंदाज है कि इससे करीब 400 टन प्लास्टिक कचरा बचेगा।

    आज हिंदुस्तान की किसी भी किस्म की सरकारी तस्वीरों को देखें, जिनमें कोई कार्यक्रम हो रहा हो या मंच पर कुछ चल रहा हो, या कोई सरकारी बैठक हो रही हो, तो उनमें से हर मेज पर प्लास्टिक की बोतल में पानी लोगों के सामने दिखता है। सरकारी दफ्तरों में बड़े अफसरों के लिए, या नेताओं के बंगलों में अधिकतर लोगों के लिए, ऐसी बोतलों के बक्से भरे रहते हैं। और लोग अब आदी हो गए हैं कि कौन खतरा उठाएं, उसके बजाय बाजार का बोतल बंद महंगा ब्रांड पानी खरीद कर अपनी हिफाजत का ख्याल रखा जाए। नतीजा यह हो रहा है कि प्लास्टिक की बोतलों का अंबार बढ़ते ही चल रहा है. प्लास्टिक प्रदूषण का एक तरफ पहाड़ बन रहा है और दूसरी तरफ समंदर के पानी में ऐसी खाली बोतलें पहुंचकर किनारों को इतना प्रदूषित कर रही है कि वहां जल जीवन खत्म होते जा रहा है क्योंकि इन बोतलों को पार करके सांस लेना पानी के जानवरों के लिए मुमकिन नहीं रह गया है। फिर जैसा कि प्लास्टिक का विज्ञान बतलाता है ये बोतलें धरती पर हजारों बरस तक खत्म नहीं होनी हैं। और आज प्लास्टिक के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बोतलबंद पानी हो गया है जो कि पूरी तरह से गैरजरूरी था। अगर स्थानीय सरकारें साफ पानी उपलब्ध करा सकतीं तो इन बोतलों की किसी को जरूरत ही नहीं पड़ती।

    यूरोप के देशों में आमतौर पर यह दिखता है कि सार्वजनिक जगहों पर नल लगे हुए हैं जिनसे लोग पानी पीते ही रहते हैं और अपनी बोतलों में भरते रहते हैं। बहुत से विकसित देश ऐसे हैं जहां होटलों के बाथरूम में यह तख्ती लगी रहती है कि बाथरूम के नल से पीने के लिए पानी लिया जा सकता है, पानी एकदम साफ और सुरक्षित है। दूसरी तरफ आज हिंदुस्तान में अतिसंपन्न तबका ऐसा भी है जो अपने घर के भीतर फिल्टर का पानी भी नहीं पीता है, और घर के भीतर भी कारखाने की बोतलों का महंगा पानी पीता है। एक तरफ सचिन तेंदुलकर और हेमा मालिनी जैसे लोग संसद में एक-एक कुर्सी पर कब्जा करके बरसों तक बैठे रहते हैं, और पीने के पानी के ब्रांड का इश्तिहार करते हैं, वाटर फिल्टर का   इश्तिहार करते हैं, दूसरी तरफ इन लोगों ने संसद के इतने बरसों में देश के गरीब लोगों को साफ पानी मिलने के हक के बारे में कभी एक शब्द नहीं कहा, ना संसद के भीतर कहा, ना संसद के बाहर का है। देश के लोगों को साफ़ पानी मिलने लगेगा तो इनके इश्तिहार ख़त्म न हो जायेंगे?

    इस देश की तकलीफ यह है कि जिन लोगों के कंधों पर सरकारी योजनाएं बनाने और उन पर अमल करने का जिम्मा है, ऐसे नेता और अफसर अपने खुद के लिए जनता के पैसों पर महंगा पानी खरीद लेते हैं, और फिर जनता को गंदे पानी के हवाले कर देते हैं। अगर जनता के दबाव में ऐसा होने लगे कि सरकारी और राजनीतिक बैठकों में, और सार्वजनिक कार्यक्रमों में तमाम नेताओं और अफसरों को वहीं मौजूद नल का पानी ही परोसा जाएगा, तो हो सकता है कि बड़ी रफ्तार से नलों का पानी साफ होने लगे। यह कुछ उसी किस्म का है कि अगर सरकारी दफ्तरों में नेताओं और बड़े अफसरों को भी आम शौचालयों में जाना पड़े, आम पेशाबघरों में जाना पड़े, तो वे शौचालय और पेशाब घर साफ रहने लगेंगे। इसलिए देश की किसी हौसलामंद सरकार को सबसे पहले तो यह करना चाहिए कि वह एक तारीख की मुनादी कर दे किस तारीख के बाद किसी के लिए बोतलबंद पानी का इंतजाम नहीं किया जाएगा, और मंत्री, अफसर और दूसरे लोग सरकारी इमारतों में या सार्वजनिक कार्यक्रमों में आम नलों का ही पानी पिएंगे।

    ओडिशा का जगन्नाथपुरी इस देश के ही एक पिछड़े राज्य का एक हिंदू तीर्थ स्थान है जहां कि अंधाधुंध पर्यटक भीड़ रहती है, और जहां बहुत साफ-सफाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे में ओडिशा सरकार ने पूरे देश में एक पहल करके दिखाई है, और ओडिशा तो अपने बाकी शहरों के लिए इस इंतजाम को बढ़ा रहा है, लेकिन बाकी प्रदेशों को अपने बारे में सोचना चाहिए। हिंदुस्तान के उन बड़े शहरों को भी अपने बारे में सोचना चाहिए जो कि स्मार्ट सिटी नाम के केंद्र सरकार के पाखंड के तहत हजारों करोड़ों रुपए पा चुके हैं, और इनमें से अधिकांश हिस्सा मनमानी के दिखावे में बर्बाद भी कर चुके हैं। जबकि किसी भी स्मार्ट सिटी को सबसे पहले अपनी सिटी के ढांचे में आम जनता के लिए पीने का साफ पानी, सडक़ और नाली की सफाई, और रोशनी का इंतजाम, इन दो-तीन बुनियादी चीजों का इंतजाम सबसे पहले करना था। लेकिन जिन कामों में भ्रष्टाचार सबसे अधिक अनुपात में हो सकता है, स्मार्ट सिटी वैसे ही कामों में लग गईं और जनता का पैसा बर्बाद होते चले गया। जिन शहरों में लोग जागरूक हैं वहां लोगों को अपनी स्थानीय संस्था को पुरी की यह मिसाल देते हुए सार्वजनिक रूप से उन्हें चुनौती देनी चाहिए कि वे ओडिशा के इस शहर की कामयाबी का मुकाबला करके दिखाएं तब अपने आपको स्मार्ट कहें। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

सेहत-फिटनेस

  • 6 कप से ज्यादा कॉफी पीने पर 53% तक याद्दाश्त घटने का खतरा, पढ़ें ये रिसर्च
    6 कप से ज्यादा कॉफी पीने पर 53% तक याद्दाश्त घटने का खतरा, पढ़ें ये रिसर्च

     

    केनबरा. कॉफी को लेकर एक नई रिसर्च चौंकाती है. ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का कहना है कि रोजाना 6 कप से अधिक कॉफी पीते हैं, तो इसका सीधा असर ब्रेन पर पड़ता है. ज्यादा कॉफी पीने वालों में याद्दाश्त घटने (डिमेंशिया) का खतरा 58 फीसदी तक रहता है. इससे स्ट्रोक का डर भी बना रहता है.

    दरअसल, कॉफी में कैफीन नाम का तत्व पाया जाता है. यह सीधे दिमाग के नर्वस सिस्टम पर अपना असर छोड़ता है. नतीजा इंसान रिलैक्स महसूस करने लगता है. लेकिन, जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो ये दिमाग पर बुरा असर छोड़ने लगता है. इससे व्यक्ति को नींद न आने की दिक्कत होती है.

    वहीं, एक और रिसर्च में कॉफी से आंखों में नुकसान की बात कही गई है. न्यूयॉर्क स्थित माउंट सिनाई के आइकन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च की है. यह रिसर्च ऑप्थेलमोलॉजी नामक जर्नल में छपी है. इस रिसर्च में बताया गया है कि बहुत अधिक मात्रा में कैफीन का इस्तेमाल ग्लूकोमा की आशंका बढ़ा सकता है. रिसर्च के अनुसार, ग्लूकोमा की वजह हमारे खान-पान की आदतें और आनुवांशिक हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों के परिवार में किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा है तो ऐसे लोगों को कैफीन का इस्तेमाल कम करना चाहिए.

    अन्य कारण ये भी है कि चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, जो कि आंखों की रोशनी में धुंधलापन का कारण बनता है. कैफीन से ग्लूकोमा होने का सीधा संबंध नहीं है लेकिन यह आंखों में इस तरह की परिस्थितियां बना देता है कि उससे ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है. (news18.com)

मनोरंजन

  • कविता कृष्णमूर्ति ने शेयर की 'हवा हवाई' के बोल के पीछे की कहानी
    कविता कृष्णमूर्ति ने शेयर की 'हवा हवाई' के बोल के पीछे की कहानी

    मुंबई, 29 जुलाई| प्रसिद्ध गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने पिछले कुछ वर्षो में कई चार्टबस्टर ट्रैक दिए हैं। फिल्म 'मिस्टर इंडिया' का उनका गाना 'हवा हवाई' सबसे लोकप्रिय ट्रैक में से एक है जो अभी भी लोगों को नाचने और गाने के लिए मजबूर कर सकता है। गायक ने अब खुलासा किया है कि गाने की शुरुआती लाइनें कैसे बनीं।

    कविता ने गाने के निर्माण से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य साझा किए और इस ट्रैक में 'असी-तुस्सी' और 'मुंबासा' जैसे शब्दों को कैसे शामिल किया गया।

    कविता ने गीत के बोल और रिकॉर्डिग के बारे में बात करते हुए कहा, इस गाने के पीछे एक छोटी सी कहानी है। लक्ष्मीजी ने तीन से चार शब्दों की रचना की थी। जब मैं बैठा था, प्यारे भाई संगीतकारों को तैयार कर रहे थे। वास्तव में चार शब्द थे। जब संगीतकार दरवाजा खोलकर लक्ष्मीजी को 'नमस्ते' कहते थे, तो कोई कहता था 'असी-तुस्सी' शब्द नोट कर लो, 'लस्सी-पिस्सी' जोड़ दो। दूसरे ने कहा, हांगकांग है तो राजा भी होना चाहिए-कांग।

    उन्होंने कहा, फिर अंत में, लगभग 1.30 से 2 बजे के बीच जावेद साहब आए और कहा कि कल रात उन्हें लगा कि 'मुंबासा' अंतिम शब्द होना चाहिए और इस तरह यह पूरी बात गाने के लिए एक प्रारंभिक परिचय बन गई।

    कविता सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर 'इंडियन आइडल 12' के एपिसोड 'दोस्ती स्पेशल विद कुमार शानू और कविता कृष्णमूर्ति' में मुख्य अतिथि बनने जा रही हैं।  (आईएएनएस)

खेल

  • Tokyo Olympics: दीपिका कुमारी ने रचा इतिहास, ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय तीरंदाज
    Tokyo Olympics: दीपिका कुमारी ने रचा इतिहास, ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय तीरंदाज

     

    नई दिल्ली. दुनिया की नंबर एक तीरंदाज दीपिका कुमारी ने पूर्व विश्व चैम्पियन रूसी ओलंपिक समिति की सेनिया पेरोवा को रोमांचक शूट ऑफ में हराकर टोक्यो ओलंपिक  महिला सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया. पांच सेटों के बाद स्कोर 5-5 से बराबरी पर था. दीपिका ने दबाव का बखूबी सामना करते हुए शूट ऑफ में परफेक्ट 10 स्कोर किया और रियो ओलंपिक की टीम रजत पदक विजेता को हराया.

    एक तीर के शूट ऑफ में शुरुआत करते हुए रूसी तीरंदाज दबाव में आ गई और सात ही स्कोर कर सकी जबकि दीपिका ने दस स्कोर करके मुकाबला 6-5 से जीता. तीसरी बार ओलंपिक खेल रही दीपिका ओलंपिक तीरंदाजी इवेंट के अंतिम आठ में पहुंचने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई. क्वार्टर फाइनल में दीपिका का सामना कोरिया की अन सान से होगा जिसने एक सेट से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए जापान की रेन हायाकावा को 6-4 से हराया. रैंकिंग दौर में कोरिया की सान ने 25 साल पुराना ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़कर आखिरी तीन तीर पर परफेक्ट 10 स्कोर किया था. दीपिका और अन सान का सामना इसी जगह पर टोक्यो 2020 टेस्ट टूर्नामेंट में 2019 में हुआ था लेकिन भारतीय खिलाड़ी को पराजय का सामना करना पड़ा था.

    मैच के बाद दीपिका ने कहा, ‘‘अब आगे और कठिन होता जायेगा. मुझे बेहतर प्रदर्शन करना होगा. उम्मीद है कि ऐसा कर सकूंगी. नर्वस होने पर जीत नहीं पाऊंगी. ’’ सेनिया के खिलाफ 4-2 और 5-3 से बढ़त बनाने के बावजूद मुकाबला शूट ऑफ तक जाने के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘ मैं नर्वस हूं. मैंने शुरुआत अच्छी की लेकिन ओलंपिक का दबाव होता है.’’ दीपिका ने शानदार शुरुआत करके 2-0 से बढ़त बना ली थी और दूसरे तीर पर परफेक्ट स्कोर किया जबकि रूसी खिलाड़ी सात ही स्कोर कर सकी. दूसरे सेट में 19-17 की बढ़त लेने के बाद दीपिका को नौ की जरूरत थी जिससे उनकी बढ़त 4-0 हो जाती लेकिन उन्होंने सात स्कोर किया जबकि रूसी खिलाड़ी ने 10 अंक लेकर स्कोर 2-2 कर दिया. चौथे सेट में दीपिका एक भी 10 नहीं लगा सकी जिससे मुकाबला पांचवें सेट तक खिंचा.

    टोक्यो ओलंपिक Live: दीपिका कुमारी अंतिम-8 में, मनु भाकर-राही सरनोबत फाइनल्स से चूकीं

    दीपिका ने पांचवें सेट में 5-3 की बढ़त बना ली थी लेकिन फिर दबाव उन पर हावी हो गया और उन्होंने सेट गंवा दिया जिससे मुकाबला शूट ऑफ तक चला गया. शूट ऑफ में पेरोवा ने सात का स्कोर किया जबकि दीपिका ने परफेक्ट 10 लगाया. दीपिका के पति अतनु दास शनिवार को अंतिम 16 के मैच में जापान के ताकाहारू फुरूकावा से खेलेंगे जो 2012 ओलंपिक में रजत पदक और यहां टीम कांस्य जीत चुके हैं.(news18.com)

कारोबार

  • रोटरी रायपुर ग्रेटर 26वां स्थापना समारोह, 2021-22 अध्यक्ष रोट संकल्प वरवंदकर
    रोटरी रायपुर ग्रेटर 26वां स्थापना समारोह, 2021-22 अध्यक्ष रोट संकल्प वरवंदकर

    रायपुर, 29 जुलाई। रोटरी रायपुर ग्रेटर का 26वां स्थापना समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। रोटेरियन संकल्प वरवंदकर को 2021-22 के लिए अध्यक्ष मनोनित किया गया। श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल से रवि किरण विशेष रूप से आमंत्रित थे जिन्होंने आरसी ग्रेटर ग्लोबल ग्रांट प्रोजेक्ट मदर एंड चाइल्ड केयर सेंटर का संक्षिप्त विवरण दिया। निवर्तमान अध्यक्ष ऋषि गुप्ता ने 2020-21 के कार्यों की जानकारी दी। 

    अध्यक्ष वरवंदकर ने अपने बोर्ड का परिचय दिया।  23 नए सदस्यों को शशांक शाह, रंजीत सिंह सैनी और शशि वरवंदकर ने रोटरी रायपुर ग्रेटर में शामिल किया। सदस्यों ने श्री सत्य साई अस्पताल में बच्चों के दिल के इलाज में काम आने वाली मशीन कैथलैब, ओटी, ब्लडबैंक लगवाया था। इस साल मदर एण्ड चाइल्ड प्रोजेक्ट के द्वारा मदद पहुंचाई जाएगी। अध्यक्ष संकल्प के नेतृत्व में सदस्यों ने अरिहंत कालोनी एवं ग्राम माटा में 1000 से ज्यादा पौधे लगाए। 

     

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