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अंतरराष्ट्रीय

  • पाक में इमरान के लिए गहराता राजनीतिक संकट
    पाक में इमरान के लिए गहराता राजनीतिक संकट

         (dw.com)

    पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के एक नेता की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है. अर्धसैनिक बलों पर आरोप लगा है कि उन्होंने जबरन नेता की गिरफ्तारी करवाई.

    अब एक प्रांतीय पुलिस अधीक्षक के अपहरण की खबर आ रही है, सेना ने जिसकी जांच के हुक्म दे दिए हैं. सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को जांच का हुक्म मजबूर हो कर देना पड़ा, जब कुछ स्थानीय नेताओं ने यह आरोप लगाया कि सिंध प्रांत के पुलिस के मुखिया मुश्ताक अहमद महर को अर्धसैनिक बलों ने पहले तो विपक्ष के एक नेता को गिरफ्तार करने पर मजबूर किया और फिर उनका अपहरण कर लिया.
     
    विपक्षी पार्टी पीएमएलएन के नेता मोहम्मद सफ्दर को सिंध की राजधानी कराची में आयोजित हुई एक रैली के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था. सफ्दर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज के पति हैं. पिछले सप्ताह पीएमएलएन ने दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ मिल कर इमरान खान की सरकार के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की थी. पुलिस ने सफ्दर को पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्नाह की कब्र पर नारे लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया था.

    सिंध की सरकार ने कहा था कि उसने सफ्दर की गिरफ्तारी का आदेश नहीं दिया था और सिंध की पुलिस पर दबाव डाल कर उन्हें गिरफ्तार करवाया गया था. सफ्दर की पत्नी मरियम नवाज ने मीडिया से कहा, "पुलिस प्रमुख के फोन जब्त कर लिए गए थे. उन्हें सेक्टर कमांडर के दफ्तर ले जाया गया और गिरफ्तारी के आदेश पर हस्ताक्षर करने को कहा गया." खबरों में कहा गया था कि आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद महर को जाने दिया गया था. 


    मीडिया से बात करते पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी.

    सिंध में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार है जो इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी का विरोध करती है. पीपीपी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने सार्वजनिक रूप से सेना और देश की खुफिया सेवा के मुखियाओं से कहा कि मामले की जांच की जाए क्योंकि इस घटना ने सारी हदें पार कर दी हैं.
    एक अभूतपूर्व घटना में, महर के कथित अपहरण के विरोध में सिंध के दर्जनों पुलिस अधिकारियों ने छुट्टी की अर्जी दे दी थी. लेकिन सेना प्रमुख द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद सिंध पुलिस ने कहा कि महर ने अपनी छुट्टी की अर्जी को टालने का फैसला किया है और अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे जांच के नतीजे आने तक अपनी अपनी अर्जियां टाल दें. सीके/एए (रॉयटर्स)

राष्ट्रीय

  • '1 लक्ष्य, 5 सूत्र और 11 संकल्प' संग बीजेपी का 'आत्मनिर्भर बिहार' का वादा
    '1 लक्ष्य, 5 सूत्र और 11 संकल्प' संग बीजेपी का 'आत्मनिर्भर बिहार' का वादा

    भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में ये संकल्प पत्र पटना में जारी किया गया.

    बीजेपी ने बिहार के लोगों के लिए 11 संकल्प लिया है जिसे उसने सत्ता में आने पर बिहारवासियों से पूरा करने का वादा किया है.
    "आत्मनिर्भर बिहार" के लक्ष्य के साथ जारी अपने संकल्प पत्र में बीजेपी ने "लक्ष्य 1- आत्मनिर्भर बिहार, सूत्र 5- गांव, शहर, उद्योग, शिक्षा, कृषि का विकास, 11 संकल्प" की बात कही है. इसमें ग्यारह अहम संकल्पों के साथ अन्य कई वादे भी किए गए हैं.

    संकल्प पत्र में बीजेपी के 11 वादे
    1. बिहार को नेक्सट जेनरेशन आईटी हब के रूप में विकसित करेंगे, अगले 5 वर्षों में 5 लाख से ज़्यादा रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराएंगे.
    2. मत्स्य संपदा के तहत अगले दो वर्षों में इनलैंड यानी मीठे पानी में पलने वाली मछलियों के उत्पादन में बिहार को देश का नंबर एक राज्य बनाएंगे.
    3. आने वाले एक वर्ष में सभी प्रकार के स्कूल और उच्च शिक्षा क्षेत्र के यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों में तीन लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति करेंगे.
    4. राज्य में दवा उद्योगों की स्थापना पर बल देंगे और टैक्स इंसेंटिव समेत अनुदानित दरों पर ज़मीन, बिजली उपलब्ध कराएंगे. इससे निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकेगा.
    5. कोऑपरेटिव और कोम्फेड को प्रोत्साहित करते हुए अगले दो वर्षों में निजी और कोम्फेड आधारित 15 नए दुग्ध प्रोसेसिंग उद्योग खड़े किए जाएंगे.
    6. माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के माध्यम से पचास हज़ार करोड़ रुपये की व्यवस्था के साथ एक करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएंगे.
    7. राज्य में लघु, कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा, पांच सौ करोड़ रुपये का बिहार शिल्प एवं कारीगर उत्थान फंड का निर्माण किया जाएगा. इस फंड से राज्य के विभिन्न कारीगर समूहों जैसे मूर्तियों के लिए कुम्हार, लाह के लिए लहेरी, लोहे के लिए लोहार, कास्ठ के लिए बढ़ई, बुनकर आदि समुदायों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराकर उनके कला के प्रोत्साहन के लिए बाज़ार उपलब्ध कराया जाएगा.
    8. मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत अन्य सभी तकनीकी शिक्षा को हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराएंगे.
    9. बिहारवासियों के लिए कोरोना वैक्सीन का निशुल्क टीकाकरण करवाया जाएगा. एक लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाएंगे. 2024 तक दरभंगा एम्स को चालू करवाएंगे.
    10. धान और गेहूं के बाद दलहन की ख़रीद भी एमएसपी की दरों पर की जाएगी. किसान उत्पाद संघों की बेहतर सप्लाई चेन बनाई जाएगी, जिससे 10 लाख रोज़गार पैदा होंगे. अत्याधुनिक कृषि अवसंरचना विकसित करेंगे. मोबाइल पशु चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी. पशुपालकों, मत्स्य पालकों को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त लोन दिया जाएगा. किसानों को 21वीं सदी के अनुरूप ढाल सकें इसके लिए चयनित किसानों को स्कैंडेनेविया और इजराइल जैसे देशों में प्रवास सुनिश्चित किया जाएगा.
    11. एनडीए सरकार ने 6 वर्षों में 28,33,089 आवास बनाए हैं. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के और तीस लाख लोगों को 2022 तक पक्के मकान देंगे.

    इसके अलावा कुछ अन्य वादे भी किए गए हैं. जैसे- आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत स्थानीय उद्यमशीलता को बढ़ावा देते हुए खिलौना, डेकोरेटिंग लाइट्स, ऑटो पार्ट्स, छोटे इलेक्ट्रिकल तथा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स जैसे उत्पादों की छोटी इकाइयां जो कम ज़मीन तथा कम पूंजी में खड़ी हो सकती है उनको राज्य के हर कोने में विकसित करने का वादा किया गया है.

    देश की सुरक्षा में शहीद होने वाले जवानों के आश्रितों को राज्य सरकार में एक नौकरी और 25 लाख रुपये का शहीद सम्मान राशि देने का वादा किया गया है. भूमि सुधार क़ानून को और मजबूत करने का भी वादा किया गया है.

    कांग्रेस के घोषणापत्र में किए गए 12 बड़े वादे
    बुधवार को बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस ने भी अपना घोषणापत्र 'बदलाव पत्र 2020' जारी किया था.
    पटना में मौजूद कांग्रेस मुख्यालय में घोषणापत्र जारी करते हुए पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि "बिहार पेयजल और सस्ती बिजली चाहता है, अपराधियों की सरपरस्ती से मुक्ति चाहता है, बदहाली की जंजीरों को तोड़ना चाहता है, बिहार नई सोच, नया रास्ता चाहता है. इसलिए हमने कहा है कि 'बोले बिहार- बदले सरकार'."
    वहीं कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, "मेनिफेस्टो में किसानों का ऋण माफ़ करने, उनके बिजली के बिल माफ़ करने, किसानों के लिए सिंचाई की बेहतर सुविधाएं विकसित करने की बात की गई है."
    उन्होंने कहा कि अगर बिहार में कांग्रेस सत्ता में आई तो वो पंजाब की तरह यहां एनडीए सरकार की पेश की गई कृषि क़ानूनों को खारिज करेगी और राज्य के लिए अगल कृषि बिल लाएगी.

    बिहार के लिए 12 ख़ास स्कीम
    बिहार में कांग्रेस सत्तर सीटों पर चुनाव लड़ रही है. साथ ही कांग्रेस ने आरजेडी और वामपंथी दलों के साथ मिल कर महागठबंधन बनाया है जो बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहा है.
    रणदीप सुरजेवाला ने कांग्रेस के मेनिफेस्टो में किए गए वादों की फेहरिस्त से 12 बड़ी स्कीम या निर्णय के बारे में भी बताया.
    - छत्तीसगढ़ की तर्ज़ पर कांग्रेस राजीव गांधी कृषि न्याय योजना लाएगी. इसके तहत दो एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों के खाते में सीधा पैसा पहुंचाया जाएगा.
    - बिहार के लोगों को पानी का अधिकार होगा और सरदार वल्लभभाई पटेल पेयजल योजना लागू की जाएगी.
    - वृद्ध, विधवाओं, एकल महिलाओं के लिए डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद वृद्ध सम्मान योजना के तहत आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके तहत 800 रुपये प्रति महीना पेंशन होगी और 80 साल से अधिक की उम्र वाले को 1000 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जाएगी.
    - केजी से पीजी तक बिहार की बेटियों की शिक्षा मुफ़्त होगी.
    - राज्य से बाहर जा कर काम करने वाले हर व्यक्ति के लिए अन्य राज्यों में कर्पूरी ठाकुर सुविधा केंद्र योजना के तहत केंद्र बनाए जाएंगे. अलग-अलग राज्यों में उनकी मदद के लिए सरकारी व्यवस्था की जाएगी.
    - श्रीकृष्ण सिंह खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत पांचवी से बारहवीं के उन बच्चों को प्रोत्साहन दिया जाएगा जो खेल के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करेंगे.
    - पदक लाओ और पद पाओ योजना के तहत बिहार के जो युवा देश के लिए पदक ले कर आएंगे, बगैर इंटरव्यू उन्हें नौकरी दी जाएगी.
    - मां सावित्री बा फूले शिक्षा योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की बच्चियों को उच्च शिक्षा के लिए मदद दी जाएगी. कांग्रेस सत्ता में आई तो देश के किसी भी कॉलेज में पढ़ने पर बच्चियों की 80 फ़ीसदी फीस सरकार देगी.
    - बाबू जगजीवन राम पेयजल योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के घरों में पानी की टंकी और एक नल सरकार लगाएगी.
    - इंदिरा गांधी कन्या योजना के तहत लड़कियों की शादी के लिए सरकार 21,000 रुपये की मदद देगी.
    - राजीव गांधी रोज़गार मित्र योजना के तहत रोज़गार मित्र बनाए जाएंगे. युवाओं को रोज़गार देने में और उनके लिए रोज़गार मुहैया कराने वाली योजना बनाने में रोज़गार मित्र सरकार की तरफ से उनके लिए सुविधा बनाने का काम करेगा.


    चिराग का वादा, बनाएंगे 'कोचिंग सिटी'
     

    बुधवार को ही एनडीए से अलग हो कर बिहार चुनाव में अकेले दम पर अपनी किस्मत आज़माने के लिए उतरी लोक जनशक्ति पार्टी ने भी अपना चुनाव मेनिफेस्टो जारी किया.
    पार्टी प्रमुख चिराग पासवान ने अपने मेनिफ्सेटो 'नया बिहार, युवा बिहार' में वादा किया है कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो उसकी कोशिश होगी कि छात्रों को पढ़ाई के लिए राज्य के बाहर न जाना पड़े.
    वे कहते हैं कि पार्टी राजस्थान के कोटा, दिल्ली के मुखर्जी नगर और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की तर्ज पर बिहार में भी वो एक "कोचिंग शहर" बनाएगी. इसमें छात्रों के लिए रहने की सुविधा के साथ-साथ लाइब्रेरी होगी और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबकों के लिए सीटें भी रिज़र्व होंगी.
    साथ ही पार्टी ने वादा किया है वो राज्य में सीता का एक बड़ा मंदिर बनाएगी, महिलाओं को बसों में मुफ़्त सफर की सुविधा भी देगी.

    एलजेपी इस बार एनडीए से हट कर अकेले बिहार में चुनाव लड़ रही है. चिराग पासवान एनडीए की सहयोगी पार्टी जदयू के नीतीश कुमार को लेकर काफी आक्रामक रहे हैं लेकिन अब तक मोदी के प्रति उन्होंने अपनी पूरी आस्था दिखाई है.

    मोनिफेस्टो जारी तरहे वक्त भी वो नीतीश कुमार पर हमलावर नज़र आए. उन्होंने कहा, "अगर ग़लती से मौजूदा मुख्यमंत्री फिर से चुनाव जीत जाते हैं तो हमारा प्रदेश हार जाएगा और फिर से बर्बादी की कगार पर जाकर खड़ा हो जाएगा." (bbc.com/hindi)

राजनीति

  • यूपी : उपचुनाव के लिए भाजपा के स्टार प्रचारक आज से मैदान में
    यूपी : उपचुनाव के लिए भाजपा के स्टार प्रचारक आज से मैदान में

    लखनऊ, 22 अक्टूबर| कोरोना संकट के बंदिशों के बीच उत्तर प्रदेश में हो रहे उपचुनाव के लिए भाजपा गुरुवार से प्रचार अभियान में जुटेगी। पार्टी के स्टार प्रचारक मैदान में होगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह तीन क्षेत्रों में जनसभा करेंगे। वहीं उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या और डा. दिनेश शर्मा भी चुनाव मैदान में प्रचार के लिए कूदेंगे। भाजपा के प्रदेश् मीडिया प्रभारी मनीष दीक्षित ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वतंत्रदेव सिंह अमरोहा की नौैगांव सादात विधानसभा, बुलंदशहर, और टूंडला में पार्टी के समर्थन में जनसभा करेंगे।

    उन्होंने बताया कि 24 अक्टूबर को उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा बुलंदशहर में जनसभा को संबोधित करेंगे। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कानपुर की घाटमपुर तथा उन्नाव की बांगरमउ सीट के लिए प्रचार करेंगे। 28 को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद दो चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। केशव मौर्या 29 को तीन सभाएं करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 31 अक्टूबर को मल्हनी और देवरिया की जनसभाओं में प्रत्याशियों के लिए वोट मांगेगे।

    इसके अलावा सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों व पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की सभाएं और बैठक तय की गयी है। ये नेता पार्टी की योजना के अनुरूप पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार अभियान को गति देंगे। वहीं दूसरी ओर संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी उपचुनाव वाले क्षेत्रों में पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकतार्ओं के साथ लगातार बैठकों को सिलसिला जारी कर रखा है। (आईएएनएस)

संपादक की पसंद

  • Editor's Choice : Last straw to stubble burning
    Editor's Choice : Last straw to stubble burning

    Straw can be converted into fuel for use in vehicles. It can also replace coal in old power plants, reducing environmental costs 

    -Sunita Narain

    Should farmers get paid for not burning their fields? This is an extremely contentious issue today as the northern Indian region stares at another winter, when stubble is burnt in fields and winds bring the pollution to cities like Delhi — already choking from the spit of vehicles and local sources of pollution. The logic behind this is that rewarding farmers with cash would dissuade them from burning their fields.  

    My logic, as an environmentalist and campaigner for clean air, is that this will be a perverse incentive. In other words, it will get easily abused so that there is more stubble burning as there will be the promise of the reward; and each year the amount of the reward will have to be raised. The incentive will become the perverse reason for doing what is clearly wrong. But, I am being screamed at in social media platforms; the taglines being that “I am elitist, ignorant, out of touch with reality” and, of course, “anti-farmer”.

    That said, it is a fact when the reward was given last year — the Punjab government disbursed some Rs 29 crore to 31,231 farmers — the number of stubble fires actually went up from the previous year. But that is not even the point.

    Farmers need assistance — there is no question about that. I am not even talking about the larger problem of agrarian distress, where farmers are caught in the pincer between high prices of inputs as against the need to depress food prices for consumers. This system that discounts the labour of farmers ends up discounting their soil and water systems as well. It needs to be fixed.

    We need to recognise the problem and find the way ahead — one that provides income to farmers and improves environmental sustainability.

    We know farmers burn stubble because they have a short period between when they harvest paddy and when they have to sow the next wheat crop. We also know that this period has been shortened because the government has notified a delay in planting paddy — postponed by roughly a month so that it is planted closer to when the monsoon arrives in the region; all this has been done so that farmers do not overexploit groundwater.

    You can argue that farmers should not plant paddy in these water-scarce regions. You would be correct. But the answer is complicated as governments procure paddy with an assured minimum support price (MSP).

    Farmers then are caught in the pernicious pecuniary trap — the stubble of basmati paddy is not burnt as it can be used for fodder. But basmati paddy is not under MSP because it can be traded internationally. So, farmers still grow non-basmati paddy for MSP and then have no alternative but to burn the stubble. They choke, we choke.

    The answer then is three-fold: One, use machines to plough back the straw into the ground and do so without impinging on the time that is needed for sowing the wheat crop. But these agricultural equipment are expensive (they were not available also till a few years back). So, in the past two years, the Union government has provided funds so that state governments can procure these machines and make them available to farmers at no cost or at minimal cost of operation.

    By the beginning of stubble-burning season 2020, in Punjab alone, some 50,000 machines had been given at 80 per cent subsidy to custom hiring centers and to individual farmers. Tilling biomass back into the ground would also improve soil fertility.

    The second part of the solution is to provide value to the biomass — farmers will not burn if they can be paid for the straw. There is huge potential here — from generating power to using straw to make compressed biogas (CBG). Much is happening here as well. The first CBG project should go online by early 2021; many more are in the pipeline.

    Last month, the Reserve Bank of India included CBG in its list of priority sector lending; the State Bank of India has circulated a loan scheme; and, oil companies have agreed on a buy-back rate of Rs 46 per kilogramme for five years. So, straw burnt today, will be converted into fuel for use in vehicles.

    Then there is also the option of using straw to replace coal in old power plants — this would not only help to extend the life of the built infrastructure, but will also reduce environmental costs.

    The third option is to wean farmers away from growing paddy and to diversify their cropping options. This, obviously, is more challenging but needs to be done.

    The fact is that we need to do much more to provide real options to farmers. For instance, they could be paid for their ecosystem service of soil organic carbon sequestration. But all this needs to be done in ways that it builds the foundation for doing what is right. (downtoearth.org.in)

संपादकीय

  • ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : आंकड़ों से निकाला अंदाज सही हो या न हो, आज का वक्त अपनी फिक्र करने का
    ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : आंकड़ों से निकाला अंदाज सही हो या न हो, आज का वक्त अपनी फिक्र करने का

    आंकड़े बड़े दिलचस्प होते हैं। अगर नीयत सही हो, हिसाब लगाने की काबिलीयत हो, तो उनसे भविष्य का अंदाज लगाया जा सकता है। लेकिन नीयत और काबिलीयत में से एक भी बात गड़बड़ हो, तो लोगों को एक नाजायज खुशी दी जा सकती है, या नाजायज दहशत में डाला जा सकता है। जिस तरह हिन्दुस्तान में एक गलत वैज्ञानिक हिसाब लगाया गया, और जुलाई के पहले-दूसरे हफ्ते में शुरू होने वाले कोरोना-वैक्सीन ट्रायल के बाद 15 अगस्त को वैक्सीन की घोषणा का हिसाब भी लगा लिया गया था। खैर, उस बात को छोड़ें, और एक नई दिलचस्प बात पर सोचें कि आने वाले बरसों में नौकरियों और काम के मामले में इंसानों और मशीनों का कैसा मुकाबला होगा। 

    विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम) की एक ताजा रिपोर्ट कहती है कि आने वाले बरसों में दुनिया में 8.7 करोड़ लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। उसका हिसाब है कि 2025 तक ही 8.7 करोड़ नौकरियां इंसानों से छिनकर मशीनों में चली जाएंगी, लेकिन 9.7 करोड़ नए काम पैदा भी होंगे। अब पहली नजर में देखने पर तो ये आंकड़े खुशी के लगते हैं कि जितने इंसानों की नौकरियां जाएंगी, उनसे अधिक नौकरियां खड़ी हो जाएंगी। लेकिन यह भी समझने की जरूरत है कि आज धरती की जो आबादी है वह पांच बरस बाद कितनी होगी? इतनी आबादी तो इन पांच बरसों में अकेले हिन्दुस्तान की बढ़ जाएगी। इसलिए बढ़ती हुई आबादी के मुकाबले बढ़ती हुई नौकरियां अगर अधिक नहीं होंगी, तो वे किसी काम की नहीं रहेंगी, और मशीनें तो रोज लोगों को बेरोजगार करेंगी ही। 

    अब जैसे आज की यह बात हम एक कम्प्यूटर पर टाईप कर रहे हैं जिसमें टाईपिंग के लिए एक ऑपरेटर की जरूरत पड़ रही है। लेकिन जैसा कि आज अंग्रेजी के साथ है, बिना की-बोर्ड छुए बोलकर टाईप करना चलन में आ चुका है, वैसा ही अगर बाकी भाषाओं में होते चलेगा, होने लग भी गया है, तो बोलकर टाईप करवाने के लिए एक कर्मचारी की जरूरत खत्म हो जाएगी। ऐसे अनगिनत काम हैं जिनमें से इंसानों को हटाया जा रहा है। एयरपोर्ट और विमानों में कर्मचारियों को घटाया जा रहा है, ऐसा भी नहीं कि उनमें से हर काम के लिए मशीन खड़ी हो रही हैं, दरअसल जब कंपनियां घाटे में चल रही हैं, तो वे अपने काम में सुधार करके कहीं बिजली बचा रही हैं, कहीं कर्मचारी घटा रही हैं, और कहीं सामानों की बर्बादी कम कर रही हैं। बुरा वक्त अच्छा सबक लेकर आता है, दुनिया के सारे उद्योग-धंधे आज अपने खर्च को घटाने में लगे हुए हैं, और जाहिर है कि इसकी पहली मार कर्मचारियों पर ही पड़ती है।
     
    वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम की रिपोर्ट कहती है कि 2025 तक दुनिया में काम कर रहे लोगों में 9 फीसदी से लेकर 15.4 फीसदी तक की कमी आएगी, और इसी दौरान 7.8 फीसदी से लेकर 13.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। इन आंकड़ों को बहस के लिए सही मान लें, तो भी यह है कि बढ़ती आबादी का हिसाब न लगाने पर भी नौकरियां घटने वाली हैं। अब जैसे आज के इसी एक घंटे की एक दूसरी खबर है कि हांगकांग की कैथे पैसेफिक एयरलाइंस ने साढ़े 8 हजार पदों को खत्म करने की घोषणा की है। इससे कुछ तो खाली पड़े पद खत्म हो जाएंगे, लेकिन करीब 6 हजार कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी। खुद हिन्दुस्तान में केन्द्र सरकार ने और कई राज्य सरकारों ने लॉकडाऊन से उबरने के लिए, और कारोबारों को पटरी पर लाने के लिए मजदूर कानूनों में भयानक बदलाव किया है, जिनसे मजदूरों के हक छिन गए हैं, मालिकों के लिए उन्हें नौकरी से निकालना आसान हो गया है, उनसे मुफ्त में ओवरटाईम करवाने का हक मिल गया है, और इसके खिलाफ कही और लिखी जा रही बातों का न केन्द्र सरकार पर असर है, न अलग-अलग राजनीतिक दलों की राज्य सरकारों पर। हुआ यह है कि जब केन्द्र और राज्य सरकारें पूंजीनिवेश पाने की कोशिश करती हैं, तो संभावित उद्योगपति उन्हें मजदूर कानून, जमीन कानून, पर्यावरण कानून की अड़चनों को गिनाना शुरू कर देते हैं कि किन वजहों से वे हिन्दुस्तान या इसके किसी प्रदेश में जाना नहीं चाहते। ऐसे में सरकारें खुलकर कानूनों को खत्म कर रही है, देश में हाल के कुछ बरसों में पर्यावरण कानून को बेअसर सा कर दिया गया है, मजदूर कानूनों का कोई मतलब नहीं रह गया है, और यह सिलसिला रूकते नहीं दिख रहा है। 

    आज घरेलू कामकाज से लेकर दफ्तर और दुकान-कारखानों के काम तक, मालिक यह सोचने लगे हैं कि कर्मचारी और मजदूर घटाकर कैसे मशीनों पर काम डाला जा सकता है जो कि न हड़ताल करतीं, न लेबर कोर्ट जातीं, और न कामचोरी करतीं। मशीनों को रात-दिन काम पर झोंका जा सकता है, और कई किस्म के कारखानों में किया भी जा रहा है। और तो और बिना ड्राइवर चलने वाली कार, बस, ट्रेन के प्रयोग बरसों से सडक़ और पटरियों पर हैं, और कुछ बरसों के भीतर कारें खुद अपने को चलाने लगेंगीं, वे ड्राइवरों की नौकरियां खा जाएंगी, और उनमें बैठे लोग पूरे सफर अपने कम्प्यूटर पर काम करते हुए कुछ और लोगों की नौकरियां घटाएंगे। 

    वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम का अंदाज चाहे जो हो, हमारा यह मानना है कि न सिर्फ मशीनों की वजह से, बल्कि दूसरी कई वजहों से भी नौकरियां घटती चलेंगी, खासकर इस लॉकडाऊन का तजुर्बा देखकर लोगों को खर्च घटाना होगा, और इसका पहला तरीका घटी हुई तनख्वाह रहेगी। आज हिन्दुस्तान में पिछले छह महीनों में बढ़ी हुई बेरोजगारी के आंकड़े देखें, और इन छह महीनों में बढ़ी हुई आबादी के साथ मिलाकर उसे देखें, तो कई करोड़ लोग बढ़ गए हैं, और कई करोड़ नौकरियां खत्म हो गई हैं। 

    आने वाला वक्त महज नौकरियों पर निर्भर दुनिया का वक्त नहीं रहेगा, लोगों को तरह-तरह से नए रोजगार सोचने पड़ेंगे, और हो सकता है कि नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चलन बढ़े, और लोग अपनी मेहनत के अनुपात, अपने हुनर के अनुपात में कमाने लगें, जैसा कि आज ओला या उबेर नाम की टैक्सी कंपनियों के साथ जुडक़र कमा रहे हैं। हिन्दुस्तान में आज शहरी सडक़ों पर दसियों लाख लोग खाना पहुंचाने का काम कर रहे हैं, या कूरियर एजेंसियों के मार्फत आने वाले सामान को पहुंचाने का काम। ये काम 10-15 बरस पहले हिन्दुस्तान में नहीं थे, लेकिन अब हैं, और मोटरसाइकिल चलाने के मामूली से हुनर के साथ ऐसे लोग जितनी मेहनत करते हैं, उतना कमाते हैं। 

    इस पूरी तस्वीर से यह समझने की जरूरत है कि नौकरियों की किस्म बदल जाएंगी, नौकरियां स्वरोजगार में बदल जाएंगी, मशीनें लोगों को बेदखल करेंगी, लेकिन एक बात बनी रहेगी, कोई भी सेक्टर ऐसा नहीं रहेगा कि जिससे सौ फीसदी नौकरियां खत्म हो जाएं। नतीजा यह होगा कि जिस दुकान, दफ्तर-घर, कारखाने-कारोबार में जिन लोगों का काम सबसे अच्छा रहेगा, वे नौकरियों पर आखिरी तक बने रहेंगे। जो कम काबिल, कम मेहनती, कम हुनरमंद रहेंगे, वे सबसे पहले बेरोजगार होंगे। यह नौबत हर किसी को, हर कर्मचारी को अपने काम को बेहतर बनाने का एक मौका भी दे रही है। लोगों को नए हुनर सीखने चाहिए, या अपने मौजूदा हुनर में काम को बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा करने से कम से कम आज के कामगारों की पीढ़ी की जिंदगी तो निकल सकती है, अगली पीढ़ी अपने रोजगार और अपने स्वरोजगार के बारे में खुद सोचेगी। लेकिन अपने जीते जी, अपनी कामकाजी उम्र के चलते हुए बेरोजगार होने के खतरे से बचने के लिए लोगों को अधिक मेहनत तो करनी पड़ेगी, जब छंटाई होती है, तो सूखी डालें जिनसे कुछ हासिल नहीं होता, उन्हें सबसे पहले काटा जाता है। 
    (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)  

सेहत-फिटनेस

  • अनचाहे गर्भ के जोखिम से महिलाओं को बचाने पर जोर
    अनचाहे गर्भ के जोखिम से महिलाओं को बचाने पर जोर

    विश्व गर्भ निरोधक दिवस

    लखनऊ, 26 सितम्बर (आईएएनएस)| छोटे और सुखी परिवार के लिए लोगों में परिवार नियोजन के प्रति रुझान बढ़ रहा है। अनचाहे गर्भ के जोखिम से महिलाओं को उबारने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग का परिवार कल्याण कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने पर पूरा जोर है। स्थायी और अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों की मौजूदगी के बाद भी अनचाहे गर्भधारण की यह स्थिति किसी भी ²ष्टिकोण से उचित नहीं प्रतीत होती, क्योंकि इसके चलते कई महिलाएं असुरक्षित गर्भपात का रास्ता चुनती हैं जो बहुत ही जोखिम भरा होता है। महिलाओं को इन्हीं जोखिमों से बचाने के लिए हर साल 26 सितंबर को विश्व गर्भनिरोधक दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश के अपर मिशन निदेशक हीरा लाल का कहना है कि गर्भ निरोधक साधनों को अपनाकर जहां महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है वहीं मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को भी कम किया जा सकता है।

    उन्होंने बताया कि गर्भ निरोधक साधनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा युवा दम्पति को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर सूचित विकल्प देकर अपने परिवार के प्रति निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। नवविवाहित को पहले बच्चे की योजना शादी के कम से कम दो साल बाद बनानी चाहिए ताकि इस दौरान पति-पत्नी एक दूसरे को अच्छे से समझ सकें और बच्चे के बेहतर लालन-पालन के लिए कुछ पूंजी भी जुटा लें। इसके अलावा मातृ एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से भी दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम तीन साल का अंतर अवश्य रखना चाहिए।

    प्रदेष में तिमाही गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा और गर्भनिरोधक गोली छाया की बढ़ती डिमांड को देखते हुए घर के नजदीक बने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक इसकी सुविधा को मुहैया कराया जा रहा है । 'नई पहल' परिवार नियोजन किट आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नव विवाहित जोड़ों को मिशन परिवार विकास के अंतर्गत लिए गए 57 जिलों में उपलब्ध कराई जा रही है । गर्भ निरोधक साधन कंडोम की लगातार उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जिलों के चयनित स्थानों पर कंडोम बॉक्स लगाए गए हैं।

    प्रदेश के 13 जिलों में एक अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक 'दो गज की दूरी, मास्क और परिवार नियोजन है जरूरी' अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान आगरा, अलीगढ़, एटा, इटावा, फतेहपुर, फिरोजाबाद, हाथरस, कानपुर नगर, कानपुर देहात, मैनपुरी, मथुरा, रायबरेली और रामपुर जिले में चलाया जाएगा।

    कोविड-19 के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी कामगारों की घर वापसी से भी अनचाहे गर्भधारण की स्थिति को भांपते हुए क्वेरेंटाइन सेंटर से घर जाते समय प्रवासी कामगारों को गर्भ निरोधक सामग्री प्रदान की गई।

    पिछले तीन साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो गर्भ निरोधक साधनों को अपनाने वालों की तादाद हर साल बढ़ रही थी किन्तु 2020-21 सत्र की शुरुआत ही कोविड के दौरान हुई, जिससे इन आंकड़ों का नीचे आना स्वाभाविक था किन्तु अब स्थिति को सामान्य बनाने की भरसक कोशिश की जा रही है । पुरुष नसबंदी वर्ष 2017-18 में 3,884, वर्ष 2018-19 में 3,914 और 2019-20 में 5,773 हुई ।

    महिला नसबंदी वर्ष 2017-18 में 25,8182, वर्ष 2018-19 में 281955 और 2019-20 में 295650 हुई । इसी तरह वर्ष 2017-18 में 300035, वर्ष 2018-19 में 30,52,50 और 2019-20 में 35,87,64 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी की सेवा ली । वर्ष 2017-18 में 23,217, वर्ष 2018-19 में 16,13,65 और 2019-20 में 34,45,32 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन को चुना।

मनोरंजन

  • गौहर खान ने इस्माइल दरबार के बेटे के साथ शादी की अफवाहों का किया खंडन
    गौहर खान ने इस्माइल दरबार के बेटे के साथ शादी की अफवाहों का किया खंडन

    मुंबई, 22 अक्टूबर| अभिनेत्री गौहर खान ने उन खबरों का खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि वह नवंबर में अपने कथित प्रेमी जैद दरबार से शादी कर सकती हैं। जैद, बॉलीवुड संगीतकार इस्माइल दरबार के बेटे हैं और एक कोरियोग्राफर हैं। गौहर द्वारा इंस्टाग्राम पर फोटो और वीडियो की श्रृंखला पोस्ट किए जाने के बाद से ही इन अफवाहों का दौर चल पड़ा है। इन पोस्ट को देखकर ऐसा लगता है कि ये दोनों करीबी रिलेशनशिप में हैं।

    हालांकि, गौहर ने आईएएनएस से बात करते हुए इस तरह की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, "ये सिर्फ अफवाहें हैं। अगर कुछ होगा तो मैं खुद आपको इस बारे में बता दूंगी।"

    जिन वीडियो के कारण ये अफवाहें सामने आईं हैं, उसमें उन दोनों को नेहा कक्कड़ और परमिश वर्मा के गाने 'डायमंड दा छल्ला' पर डांस करते देखा जा सकता है। क्लिप के आखिर में जैद अपने घुटनों पर आते हैं फिर गौहर की उंगली में अंगूठी जाती हुई नजर आती है। इससे प्रशंसकों को लगता है कि यह असल प्रपोजल है।

    गौहर ने इस पोस्ट को कैप्शन दिया था, "ये है गाने का असर है या मन की बात .. ??? जल्दी बताओ..." (आईएएनएस)

खेल

  • अगले महीने इंग्लैंड की मेजबानी करेगा दक्षिण अफ्रीका
    अगले महीने इंग्लैंड की मेजबानी करेगा दक्षिण अफ्रीका

    जोहान्सबर्ग, 22 अक्टूबर| दक्षिण अफ्रीका अगले महीने तीन टी-20 और इतने ही मैचों की वनडे सीरीज के लिए इंग्लैंड की मेजबानी करेगा। टी-20 मैच 27, 29 नवंबर और एक दिसंबर को खेले जाएंगे। वनडे सीरीज की शुरुआत चार दिसंबर से होगी। दूसरा मैच छह और तीसरा नौ दिसंबर को खेला जाएगा।

    दो टी-20 और दो वनडे न्यूलैंड्स स्टेडियम में खेले जाएंगे। एक वनडे और एक टी-20 मैच यूरोलक्स बोलैंड पार्क में खेला जाएगा।

    क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) ने सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद इस दौरे की योजना बनाई।

    इयोन मोर्गन की कप्तानी वाली इंग्लैंड 16 नवंबर को चार्टड फ्लाइट से लंदन से रवाना होगी। टीम केपटाउन में रहेगी। टी-20 सीरीज से पहले टीम वेस्टर्न प्रोविंस क्रिकेट क्लब में ट्रेनिंग करेगी। वह तीन इंट्रा-स्कायड मैच खेलेगी।

    सीएसए के कार्यकारी मुख्य अधिकारी कुगैंड्रीग गोवेंडर ने कहा, "यह क्रिकेट के लिए बहुत अच्छी बात होगी।"

    उन्होंने कहा, "इंग्लैंड विश्व विजेता है और इससे हमारे खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्ररेणा मिलेगी।"

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के सीईओ टॉम हैरिसन ने कहा, "हम इस खेल के कर्जदार हैं और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को बचाए रखने के लिए हम सब कुछ करेंगे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली सीरीज हमेशा रोमांचक होती है।" (आईएएनएस)

कारोबार

  • खराब प्रदर्शन के बाद वीडियो ऐप क्विबी का संचालन हुआ बंद
    खराब प्रदर्शन के बाद वीडियो ऐप क्विबी का संचालन हुआ बंद

    सैन फ्रांसिस्को, 22 अक्टूबर| मुश्किल से 6 महीने पहले लॉन्च की गई शॉर्ट-फॉर्म वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस क्विबी ने गुरुवार को अपना कारोबार बंद करने और अपना कंटेन्ट, टेक्नॉलॉजी से जुड़ी संपत्तियों को बेचने की घोषणा कर दी। कोविड महामारी की शुरूआत के समय लॉन्च हुई इस सर्विस ने इतने कम समय में 74 लाख सब्सक्राइबर प्राप्त कर लिए थे।

    क्विबी के संस्थापक जेफरी कटजेनबर्ग और मेग व्हिटमैन ने एक खुले पत्र में कहा, "हमारी नाकामी इसलिए नहीं है कि हमारी कोशिशें कम थीं, हमने हमारे लिए उपलब्ध हर विकल्प पर विचार किया। फिर भी ऐसे परिणाम मिले जो हममें से कोई नहीं चाहता था। हमें गर्व है हमारी प्रतिभाशाली टीम ने दो साल इस बिजनेस में अपना सब कुछ दिया।"

    कंपनी अब निवेशकों को पैसा लौटाने पर फोकस कर रही है, जिसमें हॉलीवुड के कई प्रमुख लोगों ने निवेश किया है। क्विब में लगभग 1.75 बिलियन डॉलर का निवेश किया गया है।

    उन दोनों ने कहा, "हमने सबसे रचनात्मक और कल्पनाशील दिमाग से काम किया, नतीजे भी हमारी उम्मीदों से ज्यादा थे फिर भी क्विबी सफल नहीं हो सका। संभवत: इसके दो कारण हैं - जिसमें से एक यह है कि शायद यह आइडिया इतना मजबूत नहीं था कि एक स्टैंडअलोन स्ट्रीमिंग सेवा काम कर सके या इस आइडिया के लिए हमारा समय उचित नहीं था।"

    संस्थापकों ने कहा कि वे "इन मूल्यवान संपत्तियों के लिए खरीदारों को खोजने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं ताकि खरीददार उनकी क्षमता का लाभ उठा सकें"। (आईएएनएस)

     

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