छत्तीसगढ़

  • एसईसीएल की बंद पड़ी एक नंबर पोखरी खदान के ओवरबर्डन की पहाड़ी में कोयले का अवैध उत्खनन कर रहे पति-पत्नी की मिट्टी धंसक जाने से मौत
    एसईसीएल की बंद पड़ी एक नंबर पोखरी खदान के ओवरबर्डन की पहाड़ी में कोयले का अवैध उत्खनन कर रहे पति-पत्नी की मिट्टी धंसक जाने से मौत

    एसईसीएल की बंद पड़ी एक नंबर पोखरी खदान के ओवरबर्डन की पहाड़ी में कोयले का अवैध उत्खनन कर रहे पति-पत्नी की मिट्टी धंसक जाने से मौत

    छत्तीसगढ़ संवाददाता 
    बिश्रामपुर, 8  दिसंबर।
    एसईसीएल की बंद पड़ी एक नंबर पोखरी खदान के ओवरबर्डन की पहाड़ी में कोयले का अवैध उत्खनन कर रहे पति-पत्नी की मिट्टी धंसक जाने से मौत हो गई। बताया गया कि मृतक दंपती जलावन के लिए कोयला एवं लकड़ी लेने बंद पोखरी खदान गए थे। 

    बताया गया कि उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से आकर कई वर्षों से नगर के तालाबपारा में अपनी दो पत्नियों एवं तीन बच्चों के साथ रह कर मजदूरी करने वाला मोहम्मद हनीफ अंसारी अपनी पत्नी मेहरून निशा के साथ सुबह करीब 11 बजे जलावन के लिए लकड़ी एवं कोयला लेने करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पैदल एसईसीएल बिश्रामपुर ओसीएम की बंद पड़ी एक नंबर पोखरी खदान गया था। जहां से मुस्लिम दंपती वापस नहीं लौटे थे। 

    पतासाजी के दौरान शनिवार को सुबह तालाब पारा शिवनंदनपुर के ही रहने वाले पड़ोसी आशीष सोनी एवं अन्य ने देखा कि बंद पोखरी खदान के ओवर बर्डन की पहाड़ी में करीब 50 फीट ऊपर बने गुफा नुमा स्थान पर मिट्टी धंसने से मोहम्मद हनीफ का शरीर मृत अवस्था में दबा पड़ा है। केवल उसका गर्दन से ऊपर हिस्सा दिख रहा था। घटना स्थल पर ही मृतक हनीफ का कपड़ा और उसकी पत्नी की चप्पल पड़ी है जिससे अनुमान लगाया गया कि पहाड़ी की धंसकी मिट्टी के नीचे दबने से दोनों की मौत हो गई है। जिसकी सूचना तत्काल बिश्रामपुर पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही थाना प्रभारी कपिलदेव पांडेय ने एएसआई विमलेश सिंह, राम सिंह, प्रधान आरक्षक इंद्रजीत सिंह, आनंद सिंह, वरुण तिवारी आदि की टीम के साथ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसईसीएल के सब एरिया मैनेजर एस. अहमद, मैनेजर राणा प्रताप भी मौके पर पहुंच गए। उसके पश्चात ग्रामीणों एवं रेस्क्यू टीम की मदद से अवैध उत्खनन के लिए पहाड़ी में बनाए गए गुफा नुमा स्थान के मिट्टी धंसने से मिट्टी में दबे मुस्लिम दंपति के शव को बाहर निकाल कर पहाड़ी से नीचे लाया गया। पंचनामा कार्रवाई के पश्चात स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के पश्चात मुस्लिम दंपत्ति के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इधर शिवनंदनपुर सरपंच विमला सिंह ने जनपद सदस्य पवन अग्रवाल एवं अन्य लोगों के समक्ष अंतिम संस्कार के लिए मृतक दंपति के परिजनों को चार हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है। 

    तीन पत्नी एवं 14 बच्चों का पिता था मृतक
    मृतक मोहम्मद हनीफ अंसारी की तीन पत्नियां और 14 बच्चे हैं। मृतक महिला मेहरून निसा उसकी तीसरी पत्नी थी। वह शिवनंदनपुर के तालाबपारा में अपनी दूसरी पत्नी कमरुल निशा व तीसरी पत्नी मेहरून निशा एवं तीन बच्चों के साथ रहकर मजदूरी का कार्य करता था। उसकी पहली पत्नी एवं अन्य बच्चे सुल्तानपुर उत्तरप्रदेश एवं झारखंड में रहते हैं। 

अंतरराष्ट्रीय

  • इराक के सबसे ताकतवर मौलवी के घर पर ड्रोन से हमला
    इराक के सबसे ताकतवर मौलवी के घर पर ड्रोन से हमला

    इराक, 8 दिसंबर। इराक के सबसे ताकतवर मौलवी मुक्तदा अल सदर के नज़दीकी सूत्रों ने कहा कि नजफ शहर में उनके घर पर ड्रोन से मिसाइल हमला किया गया है।
    ड्रोन से होने वाले इस हमले के पीछे किसका हाथ हो सकता है, इसका पता नहीं चला है। हालांकि हमले में मुक्तदा अल सदर को कोई नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि माना जा रहा है कि हमले के वक़्त वे पड़ोसी मुल्क ईरान में थे।
    यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब इलाके में तनाव बढ़ा हुआ है। बीते शुक्रवार को अज्ञात बंदूक़धारियों ने बगदाद में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया था। उस घटना में कम से कम 19 लोग मारे गए थे। (बीबीसी)

राष्ट्रीय

  • भ्रष्ट नेताओं के संरक्षण की वजह से बढ़ती हैं रेप की घटनाएं-सुब्रमण्यम स्वामी
    भ्रष्ट नेताओं के संरक्षण की वजह से बढ़ती हैं रेप की घटनाएं-सुब्रमण्यम स्वामी

    नई दिल्ली, 8 दिसंबर । उन्नाव रेप पीडि़ता की मौत के बाद से सियासत में घमासान जारी है। एक तरफ विपक्ष जहां उत्तर प्रदेश सरकार को घेर रहा तो है वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि भ्रष्ट नेताओं के संरक्षण की वजह से रेप की घटनाएं बढ़ती हैं।

    स्वामी ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि पहली नजर में गुनाहगार नेताओं पर भी एक्शन होना चाहिए। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, रेप की बढ़ती घटनाएं भ्रष्ट नेताओं की सहिष्णुता के कारण हैं। जिन राजनेताओं ने बलात्कार किया है या हत्या की है, भले ही प्राइमा फेशिया में यह बात साबित हो चुकी है, उनसे किनारा कर लेना चाहिए।
    हाल ही में देश में कई रेप के मामले सामने आए हैं। तेलंगाना में डॉक्टर के साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया गया और इसके बाद उसकी हत्या कर जला दिया गया। वहीं उत्तर प्रदेश के उन्नाव में रेप पीडि़ता को जिंदा जलाने का मामला सामने आया। वहीं पीडि़ता की अब मौत हो चुकी है।
    इन घटनाओं के कारण देश में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। देश के कई इलाकों में लोग रेप की घटनाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही रेप को लेकर कड़े कानून की भी मांग की जा रही है।(आजतक)

स्थायी स्तंभ

  • इतिहास में 8 दिसंबर
    इतिहास में 8 दिसंबर

    आज के दिन 1980 में न्यूयॉर्क में बीटल्स बैंड के मुख्य गायक जॉन लेनन की हत्या कर दी गई थी. हत्यारे ने उन पर चार गोलियां दागी, लेनन की ऊर्जा भरी आवाज अब भी गूंजती है.
    आठ दिसंबर 1980 को जॉन लेनन की हत्या कर दी गई थी. न्यूयॉर्क में लेनन को मार्क डेविड चैपमैन नाम के शख्स ने गोली मारी. डेविड चैपमैन जॉन लेनन के घर पहुंचा. उसने खुद को लेनन का प्रशंसक बताया और ऑटोग्राफ मांगा. हर बार की तरह इस बार भी प्रशंसक की मांग को लेनन ठुकरा नहीं पाए. उन्होंने मुस्कुराते हुए ऑटोग्राफ दिया और चैपमैन के कंधे पर हाथ रखा. लेनन की जिंदगी के ये कुछ आखिरी लम्हे थे. हंसी और हल्की फुल्की बातचीत के बाद ऑटोग्राफ लेने वाले 25 साल के युवक ने लेनन पर लगातार चार गोलियां दाग दीं.
    लेनन का परिवार और हजारों प्रशंसक एक दिन बाद उनका जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन माहौल में मातम पसर गया. अस्पताल पहुंचने से पहले ही 40 साल के जॉन लेनन दुनिया से विदा हो गए. लेकिन उनके पोस्टर और गाने आज भी युवाओं की पंसद बने हुए हैं.

    1983-  ब्रितानी उच्च सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स ने सदन की सीधी कार्यवाही टेलिविजऩ पर दिखाने के पक्ष में मतदान किया था।
    1987- विश्व की दो महाशक्तियों अमरीका और सोवियत संघ के नेताओं ने ऐसी पहली संधि पर दस्तख़त किया जिसमें भूमि आधारित परमाणु हथियारों के जख़ीरे को कम करने का प्रावधान था। सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचोव और अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के बीच वॉशिंगटन में तीन दिन तक बैठक चली। इसके बाद परमाणु हथियारों की संख्या घटाने की संधि पर दस्तख़त कर हथियारों की होड़ की दिशा पलटने की पहली कोशिश की गई थी।
    1993 -अमेरिकी सैन्य सैक्रेटरी ने घोषणा की कि जी.पी.एस. (ग्लोबल पोज़ीशनिंग सिस्टम) 100 मीटर के अन्दर सही स्थिति दर्शाता है।
    1994 -पीटर आर्मब्रस्टर के नेतृत्व में जर्मन वैज्ञानिकों के दल ने तत्व-111 की खोज की जिसका नाम अनअनअनियम रखा गया।
    1995 - चीन द्वारा विवादास्पद रूप से 6 वर्षीय बालक झेनकेन नोरबू की पंचेन लामा के अवतार के रूप में ताजपोशी एवं मान्यता।
    1998 - पूर्व लेफ़्िटनेंट कर्नल ह्यूगो शावेज वेनेजुएला के नए राष्ट्रपति बने।
    2000 - ब्रिटेन और रूस के बीच रक्षा समझौता सम्पन्न, फ्रांस के वैज्ञानिकों ने अल्जाईमर का नया उपचार  गोलनेटमाइन खोजा।
    2002 - भारत की पारम्परिक जैव सम्पदा नीम, हल्दी और जामुन के बाद गौमूत्र को संयुक्त राज्य अमेरिका ने पेटेंट किया।
    2003 - निलम्बन की अवधि बढ़ाये जाने के बाद जिम्बाव्वे ने राष्ट्रकुल से अपने को अलग करने की घोषणा की।
    2004 - पाकिस्तान ने 700 कि.मी. की दूरी तक मार करने वाली शाहीन-1 मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
    2005 - रेडक्रास और रेड क्रीसेंट सोसाइटी ने सफ़ेद पृष्ठभूमि में हीरे के आकार के एक लाल क्रिस्टल को नए अतिरिक्त चिह्न के रूप में स्वीकार किया।
    2007 - अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबन्धन सेना और नाटो की सेनाओं ने दक्षिणी अफग़़ानिस्तान के मूसा कला जि़ले में तालिबानी आतंकवादियों पर हमले किये। 
    1935 -भारतीय अभिनेता धर्मेन्द्र का जन्म हुआ। 
    1946 - भारतीय अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का जन्म हुआ। 
    1924-अंग्रेज़ सूक्ष्म जीव विज्ञानी  जॉन स्मिथ का जन्म हुआ, जो न्यूक्लिक अम्ल पर अनुसंधान करने वाले अग्रणी वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। जिन्होंने आर.एन.ए. की संरचना स्थापित करने में, तथा जीवाणु के डी.एन.ए. के क्षार के मिथाइलीकरण में योगदान दिया। (निधन-22 नवम्बर 2003) 
    1730-जर्मनी के वनस्पति विज्ञानी  जोहान हेड्विग का जन्म हुआ, जिन्होंने हरिता (मॉस) के बारे में जानकारी को सुविकसित और समृद्ध किया।(निधन-18 फरवरी 1799)  
    1970 - अमेरिकी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट  फिलिप एडवर्ड स्मिथ का निधन हुआ, जिन्होंने पीयूष गं्रथि का महत्व बताया। (जन्म 1 जनवरी 1884)
    1986 -अमेरिकी भूरसायनज्ञ हैरिसन स्कॉट ब्राउन का निधन हुआ,  जो प्लूटोनियम के पृथक्करण के लिए जाने जाते हैं।(जन्म 26 सितम्बर 1917)।

राजनीति

  • बीजेपी के लिए झारखंड जीतना इस बार मुश्किल क्यों?
    बीजेपी के लिए झारखंड जीतना इस बार मुश्किल क्यों?

    रजनीश कुमार

    रांची से, 8 दिसंबर। राँची में चर्च कॉम्पलेक्स के पास एक फ़ुट ओवरब्रिज है। इस पर बीजेपी का एक विशाल होर्डिंग लगा है। इस होर्डिंग में रघुबर दास और पीएम मोदी की तस्वीर है जिसके बग़ल में लिखा है- झारखंड के साथ मोदी है, तो किसी और के बारे में क्या सोचना। इसी फुट ओवरब्रिज के नीचे से दुबले-पतले शरीर वाले 50 साल के वीरेंद्र महतो रिक्शा खींचते हुए निकलते हैं। 50 की उम्र में ही महतो 60 के लगते हैं।
    चुनाव के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने रिक्शे के पैंडल को और तेज़ चलाना शुरू कर दिया और कहा, दिन भर हाड़ तोड़ मेहनत करो तो पाँच सौ कमाते हैं। उनमें से डेढ़ सौ रुपया रोज रहने-खाने में खर्च हो जाता है। जो बचता है उससे किसी तरह परिवार का गुजारा हो रहा है। क्या फर्क पड़ता है कोई चुनाव जीते। जब झारखंड बिहार था तब भी रिक्शा खींच रहा था अब भी वही कर रहा हूँ। सरकार से क्या चाहिए हमको। अरे एक रिक्शा ही दे देती। हमारे लिए तो रघुबर दास ने कुछ नहीं किया है।
    झारखंड के चुनाव में राम मंदिर, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होना और एनआरसी कोई मुद्दा नहीं है। निचले तबके खासकर आदिवासी और श्रमिक वग रोजगार, बिजली-पानी, सडक़, घर और स्कूल की बात कर रहे हैं। उच्च मध्यम वर्ग में बीजेपी और पीएम मोदी को लेकर सहानुभूति जरूर है लेकिन उसे भी लगता है यह लोकसभा चुनाव के लिए ठीक है।
    बीजेपी अगर होर्डिंग पर- झारखंड के साथ मोदी है तो किसी और के बारे में क्या सोचना के बजाय ये लिखती कि झारखंड के साथ रघुबर है तो किसी और के बारे में क्या सोचना तो यह उस आत्मविश्वास का भी परिचायक होता कि पार्टी अपने प्रदेश नेतृत्व को लेकर आश्वस्त है।
    हालाँकि रघुबर दास को लगता है कि इस चुनाव में बीजेपी को राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने का फायदा मिलेगा। रघुबर दास ने बीबीसी से कहा, हमें अनुच्छेद 370 और अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का फायदा जरूर मिलेगा क्योंकि कांग्रेस ने इन मुद्दों को फँसाकर रखा था।
    रघुबर दास भी चाहते हैं कि चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों की बात हो लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा। दास अपने राजनीतिक करियर का सबसे मुश्किल चुनाव लड़ रहे हैं। इस चुनाव में उनके खिलाफ विपक्ष गोलबंद है तो पार्टी के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है।
    2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा जमशेदपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर खरसांवा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार थे। वो यहाँ से चार बार विधायक चुने गए थे। प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे थे। मुंडा स्टार कैंपेनर थे और बड़े आश्वस्त थे कि खरसांवा में उन्हें बहुत मेहनत की जरूरत नहीं है। वो बाकी के विधानसभा क्षेत्रों में व्यस्त रहे और उन्हें जेएमएम के दशरथ कृष्ण गगरई ने हरा दिया और रघुबर दास को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल गया। इस बार लोकसभा चुनाव में मुंडा को बीजेपी ने खुंटी से उम्मीदवार बनाया और वो किसी तरह हारते-हारते जीते।
    खरसांवा से इस बार अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा टिकट चाहती थीं और वहाँ की स्थानीय बीजेपी को भी लगता था कि मीरा उम्मीदवार होतीं तो बीजेपी की झोली में ये सीट होती। लेकिन वहां बनरा के उम्मीदवार बनने से एक बार फिर से जेएमएम के गगरई की लड़ाई आसान हो गई है।
    जमशेदपुर में एक बड़े अखबार के स्थानीय संपादक ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि मीरा को टिकट नहीं देने के पीछे रघुबर दास ही हैं। उनका कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा और रघुबर दास की प्रतिद्वंद्विता किसी से छुपी नहीं थी और इस बार भी उससे कहीं ज़्यादा है। इसी प्रतिद्वंद्विता को कम करने के लिए अर्जुन मुंडा को केंद्र में मंत्री बना दिया गया लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री बनने का मोह उनका खत्म नहीं हुआ है।
    वो कहते हैं, बीजेपी के बागी नेता सरयू राय जमशेदपुर पूर्वी से रघुबर दास को कड़ी टक्कर दे रहे हैं तो इसमें अर्जुन मुंडा की भी भूमिका है। जमशेदपुर पूर्वी से सरयू राय बड़ा उलटफेर करते हैं तो इसमें केवल उनकी ही भूमिका नहीं होगी बल्कि अर्जुन मुंडा और पार्टी के एक धड़े की भी बड़ी भूमिका होगी। खरसांवा की हार को अर्जुन मुंडा अब तक पचा नहीं पाए हैं और उन्हें लगता है कि उनकी हार में रघुबर दास की भी भूमिका थी।
    राँची में बीजेपी को लंबे समय से करव करने वाले पत्रकारों का कहना है कि सरयू राय और रघुबर दास के बीच की कलह सतह पर खुलकर आ गई थी लेकिन मुंडा और रघुबर दास की कलह भीतर ही भीतर कभी थमी नहीं। अर्जुन मुंडा खुंटी विधानसभा क्षेत्र से भी नीलकंठ सिंह मुंडा को टिकट देना नहीं चाहते थे लेकिन रघुबर दास ने उन्हें ही दिया।
    रघुबर दास से पूछा कि आपके अर्जुन मुंडा से संबंध अच्छे नहीं हैं और उनकी पत्नी मीरा को आपने खरसांवा से टिकट नहीं दिया तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है और कोई विवाद नहीं है।
    इस बार झारखंड में बीजेपी के खिलाफ विपक्ष गोलबंद है। कांग्रेस ने जेएमएम को 43 सीटें दी हैं और खुद महज 31 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इसके साथ ही आरजेडी के हिस्से में सात सीटें आई हैं। महागठबंधन ने जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन को अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है।
    81 सीटों वाली झारखंड विधानसभा में 28 सीटें आदिवासियों के लिए रिजर्व हैं और महागठबंधन ने मुख्यमंत्री का उम्मीदवार आदिवासी को ही बनाया है। दूसरी तरफ बीजेपी के रघुवर दास गैर-आदिवासी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आदिवासी वोट बीजेपी के खिलाफ गोलबंद हो सकता है।
    राँची के जेवियर कॉलेज से अगपित बीकॉम कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि रघुबर दास आदिवासियों के बीच बहुत अलोकप्रिय हुए हैं। अगपित ईसाई आदिवासी हैं। वो कहते हैं, आदिवासियों के बीच रघुबर दास की छवि बहुत ठीक नहीं है। काश्तकारी कानून में बदलाव पर भले सरकार विवाद के बाद रुक गई लेकिन आदिवासियों के मन में यह बात घर कर गई है कि रघुबर दास आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को देना चाहती है।
    रघुवर दास की सरकार प्रदेश के काश्तकारी कानून में बदलाव को लेकर काफी विवाद का सामना कर चुकी है। इसे दास के आदिवासी विरोधी छवि के तौर पर भी पेश किया गया। पुराने काश्तकारी कानून से आदिवासियों को अपनी जमीन की सुरक्षा मिलती है। विवाद इतना बढ़ा कि बीजेपी को इसमें बदलाव से हाथ पीछे खींचने पड़े। इसके बावजूद यह मुद्दा अब भी जिंदा है। आदिवासियों ने इस कानून को लेकर बहुत ही तीव्र विरोध प्रदर्शन किया था। खूँटी में तो मुख्यमंत्री रघुवर दास पर लोगों ने जूते और चप्पल भी फेंके थे।
    2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा और 37 सीटों पर जीत मिली थी। तब आजसू ने बीजेपी के साथ चुनाव लड़ा था और उसे आठ में से पाँच सीटों पर जीत मिली थी। बीजेपी का वोट शेयर 31.26 फीसदी था।
    तब विपक्ष एकजुट नहीं था और सबने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। कांग्रेस को केवल छह सीटों पर जीत मिली थी और जेएमएम को 19। बाबूलाल मरांडी को आठ सीटों पर जीत मिली थी। बाद में मरांडी के छह विधायक दल बदल बीजेपी में शामिल हो गए थे।
    2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी विरोधी वोट एकजुट नहीं पाई थी और विपक्ष की एकजुटता भी नाकाम रही थी। लेकिन विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में वोट देने का पैटर्न अलग-अलग रहता है। इसलिए रघुवर दास की राह आसान नहीं है। इस पैटर्न को हरियाणा और महाराष्ट्र से भी समझा जा सकता है जहां बीजेपी 2014 के नतीजे दोहराने में नाकाम रही।
    बीजेपी के लिए आजसू और लोक जनशक्ति पार्टी से भी परेशानी हो सकती है। आजसू पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ थी और उसने आठ में पाँच सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार आजसू ने 19 सीटों की माँग रख दी लेकिन बीजेपी तैयार नहीं हुई। ऐसे में आजसू का बीजेपी से गठबंधन टूट गया। आजसू ने 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। एलजेपी को 2014 में बीजेपी ने एक सीट दी थी लेकिन उस पर भी हार मिली थी। लेकिन इस बार एलजेपी अकेले ही सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
    लोकसभा चुनाव के नतीजों से बीजेपी को लगता है कि वो अकेले भी चुनाव जीत सकती है। दुमका जेएमएम कि किला माना जाता है लेकिन इस बार के चुनाव में बीजेपी के सुनील सोरेन ने जेएमएम के संस्थापक सिबू सोरेन को 48 हजार मतों से हरा दिया था। उसी तरह कोडरमा को पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का गढ़ माना जाता है लेकिन वहाँ भी बीजेपी ने बड़े अंतर से चुनाव जीता। मरांडी को आरजेडी से बागी होकर बीजेपी में आईं अन्नपूर्णा देवी ने हरा दिया था। तब अन्नपूर्णा देवी आरजेडी के झारखंड प्रमुख थीं। मरांडी कोडरमा से महागठबंधन के उम्मीदवार थे और उन्हें साढ़े चार लाख से ज़्यादा मतों से हार मिली थी।
    15 नवंबर 2000 में झारखंड बनने के बाद से यहाँ अब तक नौ मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इनमें राष्ट्रीय पार्टियों से लेकर क्षेत्रीय पार्टियों और यहाँ तक कि निर्दलीय विधायक के हाथ में भी झारखंड की सत्ता आई। खंडित जनादेश के कारण यहाँ राजनीतिक अस्थिरता रही और सत्ता आती जाती रही। इसमें राजनीतिक मौकापरस्ती का भी बड़ा रोल रहा। पहचान आधारित राजनीति झारखंड में लंबे समय से रही है। यहाँ के लोग मतदान मुख्य रूप से जाति, धर्म और नस्ल के आधार पर करते हैं।
    राँची में उर्दू दैनिक रोजनामा अलहयात के संपादक मोहम्मद रहमतुल्लाह को लगता है कि इस बार रघुबर दास के नेतृत्व में बीजेपी 30 से ज़्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी। वो कहते हैं, रघुबर दास सीएम तभी बन पाएँगे जब बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलेगा। इस बार कहीं से भी लग नहीं रहा कि बीजेपी बहुमत का आँकड़ा छू पाएगी। रघुबर दास को भरोसा है कि पीएम मोदी के नाम पर लोग बीजेपी को जीता देंगे लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा। अगर बीजेपी 30-35 सीटों तक रह गई तो आजसू रघुबर दास के नाम पर समर्थन नहीं देगी। ऐसे में बीजेपी को रघुबर दास के अलावा किसी और को सीएम बनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
    हालाँकि रघुबर दास को लगता है कि उन्हें किसी  (बीबीसी)

मनोरंजन

  • बीवी-बच्चे और लोन, अरहान का फूटा भांडा तो खूब रोईं रश्मि, सलमान ने संभाला
    बीवी-बच्चे और लोन, अरहान का फूटा भांडा तो खूब रोईं रश्मि, सलमान ने संभाला

    नई दिल्ली, 8 दिसंबर । बिग बॉस 13 में इस हफ्ते वीकेंड का वार इस सीजन का सबसे धमाकेदार और इमोशनल एपिसोड रहा है। घरवालों की हिंसा और खराब हरकतों से परेशान सलमान खान ने सभी कंटेस्टेंट्स की जमकर क्लास लगाई। लेकिन इन सबके के बीच जिस तरह सलमान खान ने अरहान खान को रश्मि देसाई के सामने बेनकाब किया, उसे देखकर फैन्स की सांसें थमीं रह गईं।

    सलमान ने रश्मि को यूं संभाला
    सलमान खान रश्मि देसाई को अरहान खान के मैरिड होने और उनके पहले से बच्चा होने की बात बताते हैं। सलमान की ये बात सुनकर रश्मि समेत सभी घरवाले शॉक्ड हो जाते हैं। सलमान रश्मि से भी पूछते हैं कि क्या अरहान ने उन्हें अपनी शादी, बच्चे और लोन्स के बारे में कुछ भी बताया है, तो रश्मि साफ करती हैं कि अरहान ने उन्हें कभी कुछ नहीं बताया।
    अरहान की सच्चाई सामने आने के बाद रश्मि देसाई शॉक्ड होने के साथ काफी इमोशनल भी हो जाती हैं। सलमान अरहान से कहते हैं कि उन्हें रश्मि को पहले ही सब कुछ बता देना चाहिए था। सलमान खान के अरहान की सच्चाई सामने लाने के बाद रश्मि का ब्रैकडाउन हो जाता है। अब शो के अपकमिंग एपिसोड में सलमान खान रश्मि को संभालने और अरहान संग उनके रिश्ते को बेहतर करने के लिए इस सीजन में पहली बार बिग बॉस के घर में एंट्री करेंगे।
    सलमान खान रश्मि को संभालने के साथ अरहान को हमेशा अपने रिश्ते में सच बोलने की सलाह भी देंगे। लेकिन अरहान की सच्चाई जानने पर रश्मि इतना टूट गई हैं कि वो अब घर से जाना चाहती हैं। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि अरहान की सच्चाई सब के सामने आने के बाद रश्मि उनके साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाएंगी या नहीं।(आज तक)

सेहत/फिटनेस

  • वजन बढ़ाने में कारगर हैं ये 4 घरेलू नुस्खे! पाएं हेल्दी और फिट बॉडी
    वजन बढ़ाने में कारगर हैं ये 4 घरेलू नुस्खे! पाएं हेल्दी और फिट बॉडी

    कई लोग जहां वजन घटाने को लेकर परेशान हैं वहीं कुछ लोग अपने दुबले-पतले शरीर को पसंद नहीं करते हैं. दुबले-पतले लोग वजन बढ़ाने के लिए न जाने क्या-क्या ट्राई करते हैं लेकिन उनका वजन नहीं बढ़ता है. ऐसे में वह वजन कैसे बढ़ाएं घरेलू उपाय ढूंढते हैं. अपने दुबलेपन से परेशान कुछ लोग तो ये सवाल करते हैं कि किशमिश से वजन कैसे बढ़ाएं, शरीर का वजन कैसे बढ़ाएं (How To Gain Body Weight) लोग अपने पतलेपन से इतने परेशान हो जाते हैं कि वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक दवा (Weight Gain Medicine) ढूंढने लगते हैं. तो कई लोग वजन बढ़ाने के लिए व्यायाम (Weight Gain Exercise) के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं. जब आप खुद को कमजोर महसूस करते हैं तो आपका आत्मविश्वास भी कम होने लगता है. कई तो वजन बढ़ाने के लिए जिम शुरू कर देते हैं. आसानी से वजन बढ़ाने के क्या उपाय हो सकते हैं, और वजन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए. इनके लिए आपको कई सुझाव मिल जाएंगे, लेकिन अगर आपको हेल्दी तरीके से वजन बढ़ाना है तो हम आपको कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बता रहे हैं जो आसानी से वजन बढ़ाने में आपकी मदद कर सकते हैं.... 
    1. जीरा 
    जीरा तो हर घर के किचन में मौजूद होता है. यह एक सामान्य मसाला है, जिसके इस्तेमाल आप दाल, सब्जी आदि में तड़का, छौंक लगाते हैं. स्वाद के अलावा, जीरा का इस्तेमाल चिकित्सीय रूप में भी किया जाता है. यह इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने में मददगार हो सकता है. साथ ही पाचन के लिए भी फायदेमंद हो सकता है और भूख को बढ़ाने में भी कारगर है.

    2. शतावरी 
    परंपरागत रूप से इसका कई स्त्री रोगों में लाभ पाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह वजन बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. यह जड़ी-बूटी भूख बढ़ाने में भी कमाल हो सकती है. साथ ही इसके सेवन से थकान और तनाव भी दूर हो सकती है.

    3. सौंफ 
    सौंफ में भूख बढ़ाने वाले गुण मौजूद होते हैं. यह एनोरेक्सिया यानी भूख ना लगने की समस्या को भी दूर करने में भी कारगर है. इसके अलावा यह भूख भी बढ़ाता है. आप इसे अपने भोजन में भी मिला सकते हैं या फिर ऐसे भी चबाकर खा सकते हैं.

    4. सफेद मुसली 
    यह स्ट्रेंथ बढ़ाती है. कमजोरी को कम करने में मदद कर सकती है. यह मांसपेशियों को भी मजबूत बनाने में भी सहायक हो सकती है. इसे तनाव और अवसाद को कम करने के लिए भी प्राकृतिक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. तनाव काफी हद तक भूख ना लगने का कारण बनता है.

खेल

  • भारत और इंडीज के बीच दूसरा टी20 आज
    भारत और इंडीज के बीच दूसरा टी20 आज

    तिरुवनंतपुरम, 8 दिसंबर। भारत और वेस्ट इंडीज की बीच जारी तीन टी20 मैचों की सिरीज का दूसरा मुकाबला रविवार को केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित ग्रीनफ़ील्ड स्टेडियम में खेला जाएगा।
    भारत ने पहले मैच में मेहमान टीम को छह विकेट से मात दी थी। उस मैच में भारत के कप्तान विराट कोहली ने नाबाद 94 रनों की पारी खेली थी।
    भारत ने वेस्टइंडीज की तरफ से मिले 208 रनों का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया था। यह टी20 क्रिकेट में भारत की तरफ से हासिल किया गया सबसे बड़ा लक्ष्य है।
    रविवार को होने वाले मैच में भी बड़े स्कोर की उम्मीद की जा रही है। वेस्ट इंडीज की टीम मौजूदा टी20 चैंपियन है जबकि भारत अपने घर में काफी मजबूत है। (बीबीसी)

कारोबार

  • तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उड़ान भरता सीएसआईटी, इनोवेशन काउंसिल के माध्यम से सीएसआईटी के विद्यार्थियों ने फार्मूला रेसिंग कार एवं ऑफरोड व्हीकल डिजाईन, निर्माण एवं सफलतापूर्वक टेस्टिंग कर इस कार को बुद्धा इन्टरनेशनल सर्किट, नोयडा में आयोजित राष्ट्र स्तरीय फार्मूला कार रेसिंग स्पर्धा में प्रदर्शन कर कॉलेज एवं राज्य को गौरवान्वित किया है
    तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उड़ान भरता सीएसआईटी, इनोवेशन काउंसिल के माध्यम से सीएसआईटी के विद्यार्थियों ने फार्मूला रेसिंग कार एवं ऑफरोड व्हीकल डिजाईन, निर्माण एवं सफलतापूर्वक टेस्टिंग कर इस कार को बुद्धा इन्टरनेशनल सर्किट, नोयडा में आयोजित राष्ट्र स्तरीय फार्मूला कार रेसिंग स्पर्धा में प्रदर्शन कर कॉलेज एवं राज्य को गौरवान्वित किया है

    तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उड़ान भरता सीएसआईटी, इनोवेशन काउंसिल के माध्यम से सीएसआईटी के विद्यार्थियों ने फार्मूला रेसिंग कार एवं ऑफरोड व्हीकल डिजाईन, निर्माण एवं सफलतापूर्वक टेस्टिंग कर इस कार को बुद्धा इन्टरनेशनल सर्किट, नोयडा में आयोजित राष्ट्र स्तरीय फार्मूला कार रेसिंग स्पर्धा में प्रदर्शन कर कॉलेज एवं राज्य को गौरवान्वित किया है

    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    दुर्ग, 7 दिसंबर। छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में जबसे कदम रखा है, तब से नित नये आयाम तय करते हुए अपनी एक विशेष पहचान बरकरार रखी हुई है। तकनीकी शिक्षा एवं इनोवेशन में सीएसआईटी लगातार उड़ान भरता जा रहा है। अपनी इस उड़ान में सीएसआईटी ने अनेक ऊंचाईयां हासिल की है। इसी कड़ी में हाल ही में एमएचआरडी (भारत सरकार) द्वारा जारी सूची में सीएसआईटी द्वारा नित नये इनोवेशन के लिए थ्री स्टार रेटिंग से नवाजा गया है। छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी वर्ष1999 में अजय प्रकाश वर्मा द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में उच्च कोटि की इंजीनियरिंग शिक्षा यहां के विद्यार्थियों को मिल सके इसी उद्देश्य को लेकर इस कॉलेज की नींव रखी गई थी। शुक्रवार को सीएसआईटी में एकाडेमिक क्षेत्र के अलावा विद्यार्थियों का सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया जाता है। सीएसआईटी में स्थापित इनोवेशन काऊंसिल के तत्वावधान में विद्यार्थियों के टेक्नोलॉजिकल आइडियॉस को मूर्तरूप प्रदान किया गया है, जिसे विद्यार्थी स्टार्ट-अप में तब्दील कर चुके हैं। सीएसआईटी के एमएचआरडी (भारत सरकार) द्वारा मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल का अनवरत प्रयास रहता है कि कॉलेज के विद्यार्थी उसके माध्यम से अपने इनोवेटिव आडियॉस को साकार होते हुए देखे और उसे सफल व्यवसाय में तब्दील कर राष्ट्र निर्माण में सहयोगी बने। इनोवेशन काउंसिल के माध्यम से सीएसआईटी के विद्यार्थियों ने फार्मूला रेसिंग कार एवं ऑफरोड व्हीकल डिजाईन, निर्माण एवं सफलतापूर्वक टेस्टिंग कर इस कार को बुद्धा इन्टरनेशनल सर्किट, नोयडा में आयोजित राष्ट्र स्तरीय फार्मूला कार रेसिंग स्पर्धा में प्रदर्शन कर कॉलेज एवं राज्य को गौरवान्वित किया है।

    हाल ही में राजस्थान के मरूस्थल में आयोजित ऑफरोड कार रेसिंग प्रतियोगिता में सीएसआईटी के जाबांज विद्यार्थियों द्वारा रेतीली भूमि में कार रेसिंग कर एवं विभिन्न बाधाओं को सफलतापूर्वक पार कर भारत में चतुर्थ स्थान प्राप्त किया तथा कार लागत की श्रेणी में भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा थ्री डी प्रिन्टर, इनवर्टर बल्ब, होम ऑटोमेशन सिस्टम एवं रिमोटली कंट्रोल्ड सबमर्सिबल पम्प का भी विद्यार्थियों द्वारा स्टार्ट-अप के माध्यम से सफलतापूर्वक व्यवसाय किया जा रहा है। इन स्टार्टअप्स में कॉलेज के अध्ययनरत और अध्ययन प्राप्त विद्यार्थियों का समावेश है। सीएसआईटी एलुमिनाईस द्वारा स्टार्ट-अप के तहत इंडस्ट्रीज में एनर्जी ऑडिट का भी कार्य वृहद रूप से किया जा रहा है। सीएसआईटी के चेयरमैन अजय प्रकाश वर्मा ने कहा कि पासआउट विद्यार्थियों को स्टार्ट-अप के तहत रिसर्च करने हेतु सर्वसुविधा एवं जरूरी अधोसंरचना, तकनीकी सहयोग तथा सलाह प्रदान की जाती है।

     

     

     

     

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