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छत्तीसगढ़

  • टोप्पो की जगह अन्बलगन को जनसंपर्क
    टोप्पो की जगह अन्बलगन को जनसंपर्क

    रायपुर, 17 नवंबर। भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अफसरों के प्रभार बदले गए हैं। विशेष सचिव अन्बलगन पी को जनसंपर्क विभाग के साथ आयुक्त का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अब तक यह प्रभार संभाल रहे राजेश सुकुमार टोप्पो को विशेष सचिव, मंत्रालय के पद पर पदस्थ किया गया है।  
    एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद कांगे्रस पार्टी ने चुनाव आयोग से श्री टोप्पो को हटाने की मांग की थी। तबादला आदेश आने के बाद जनसंपर्क विशेष सचिव राजेश टोप्पो ने अपने सहयोगियों के नाम एक संदेश भेजकर अपनी बात रखी है। 
    उन्होंने लिखा है- प्रिय साथियों, दोस्तों, और मीडिया जगत के शुभचिंतकों, 
    ऐसा कहा जाता है कि दोस्तों के साथ उत्पादकता के साथ गुजारा हुआ एक दिन पूरी जिंदगी के लिए मायने रखता है। मैं खुदकिस्मत था कि छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग में मुझे तीन बरस से अधिक समय तक अपनी अधिकतम क्षमता से काम करने का मौका मिला। अब आगे बढ़ते हुए मैं इन तीन बरसों को अपने करियर में पूरी संतुष्टि देने वाले पाता हूं। इस दौरान आप सबसे मिले सहयोग के लिए मैं पूरी विनम्रता से आप सभी का आभारी हूं, इसके बिना इन बरसों में जो कुछ कर पाया हूं उसका सोचना भी मुमकिन नहीं होता। अब मैं रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता की इन पंक्तियों को गुनगुनाते हुए आगे बढ़ रहा हूं। 
    गहन सघन मनमोहक वन तरू मुझको आज बुलाते हैं
    किन्तु किये जो वादे मैंने याद मुझे वह आते हैं
    अभी कहां आराम बदा यह मूक निमंत्रण छलना है
    अरे अभी तो मीलों मुझको, मीलों मुझको चलना है...
    मेरे किसी काम से आपमें से किसी को तकलीफ हुई हो तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूं - राजेश सुकुमार टोप्पो

Daily Chhattisgarh News

 

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राजनीति

  • दोस्ती पक्की करने संयुक्त रैली करेंगे राहुल-चंद्रबाबू

    हैदराबाद, 17 नवम्बर ।  आम चुनाव और तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले अपनी दोस्ती को मजबूत करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू एकसाथ रैली करते हुए नजर आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं की संयुक्त रैली नवंबर के आखिरी सप्ताह में हैदराबाद में होगी, जिसमें दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व हिस्सा लेगा।
    तेलंगाना में 7 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में टीआरएस के खिलाफ लडऩे के लिए कांग्रेस, टीडीपी, तेलंगाना जन समिति और सीपीआई ने मिलकर महागठबंधन का निर्माण किया है। कांग्रेस जहां राज्य की अधिकतर सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं टीडीपी 14, टीजेएस आठ और सीपीआई तीन सीटों पर चुनाव मैदान में है।
    संयुक्त रैली का आयोजन, 2019 के आम चुनावों में बीजेपी विरोधी गठबंधन बनाने के लिए विपक्षी दलों की होने वाली अहम बैठक के दौरान हो सकता है। चंद्रबाबू नायडू इस तरह के गठबंधन को बनाने की कोशिश में लगे हैं और हाल के सप्ताह में ममता बनर्जी, देव गौड़ा, केडी कुमारस्वामी और एमके स्टालिन से मुलाकात कर चुके हैं। अब तक, कांग्रेस, टीडीपी, आम आदमी पार्टी, जेडी (एस), एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस बैठक में जाने के लिए हामी भर चुके हैं।
    आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न दिए जाने से खफा होकर चंद्रबाबू नायडू ने इस साल अपनी पार्टी को एनडीए से अलग कर लिया था। उन्होंने कहा कि मीटिंग में सभी पार्टी भविष्य की कार्रवाई पर चर्चा करेंगी। (न्यूज 18)

     

मनोरंजन

  • इमरान हाशमी ने देश की शिक्षा पर उठाए सवाल!

    बॉलीवुड के अभिनेता इमरान हाशमी बहुत दिनों बाद किसी फिल्म के जरिए पर्दे पर आने वाले हैं। उनकी अपकमिंग फिल्म ‘चिट इंडिया’ की शूटिंग जोर शोर से चालू है। जिसके लिए फिल्म का पूरा क्रू इस वक्त जी जान से मेहनत कर रहा है। ये इमरान हाशमी की पहली होम प्रोडक्शन फिल्म है, जो भारत की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल करती है। हाल ही में इस फिल्म का पोस्टर रिलीज किया था जिसके बाद अब फिल्म का टीजर भी रिलीज कर दिया गया है।
    इमरान हाशमी के होम प्रोडक्शन की फिल्म ‘चिंट इंडिया’ की शूटिंग लखनऊ में कुछ दिनों पहले ही शुरू हुई थी। फिल्म को इमरान हाशमी फिल्म्स, इलिप्सिस एंटरटेनमेंट और टी-सीरीज एकसाथ होकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। वहीं फिल्म का डायरेक्शन सौमिक सेन कर रहे हैं।
    पोस्टर के बाद अब इस फिल्म का टीजर रिलीज किया गया है। फिल्म का टीजर टी-सीरीज के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है। वीडियो इतनी तेजी से वायरल हुआ कि महज कुछ ही घंटों में लाखों व्यूज इकठ्ठा कर लिए हैं। टीजर के मुताबिक ये फिल्म 25 जनवरी 2019 में रिलीज होगी। देखिए इमरान हाशमी की इस फिल्म का टीजर।।।
    टी-सीरीज अब यूट्यूब पर दुनिया भर में नम्बर वन चैनल बनने से 4-5 लाख सब्स्क्राइबर दूर है। ये पड़ाव पार होते ही टी-सीरीज दुनिया का नम्बर-1 चैनल बन जाएगा।

     

स्थायी स्तंभ

  • छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : वक्त तेजी से बदलता है

    भाजपा के चर्चित किसान नेता चंपू भैया मुश्किल में फंस गए हैं। अभनपुर सीट से उनका नाम घोषित होते ही कई पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ दी थी। उन्हें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि विधानसभा का समीकरण उनके अनुकूल था। वे यह कहते फिर रहे थे कि नाराज नेताओं के भाजपा छोडऩे से उन्हें फायदा होगा। उनका मुकाबला मौजूदा विधायक और उनके पुराने प्रतिद्वंदी धनेंद्र साहू से है, लेकिन कांग्रेस के बागी और जोगी कांग्रेस के प्रत्याशी दयाराम निषाद से उन्हें फायदा मिल रहा था। निषाद कांग्रेस के परंपरागत वोटों पर सेंध लगा रहे थे। निषाद आर्थिक रूप से सक्षम भी हैं। सुनते हैं कि कुछ दिन पहले निषाद की तबियत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों की सलाह पर प्रचार बंद कर दिया। ऐसे समय में जब चुनाव प्रचार शबाब पर है, जोगी पार्टी के उम्मीदवार का प्रचार कम होने से कांग्रेस को फायदा हो रहा है और कांग्रेस प्रत्याशी धनेंद्र मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। इन सबके चलते चंपू भैया के लिए एक बार फिर विधानसभा जाने का रास्ता कठिन हो चला है। 

    विरोधियों को भी मदद
    खबर है कि प्रदेश के एक ताकतवर नेता ने विरोधी दल के कई उम्मीदवारों को चुनावी चंदा उपलब्ध कराया है। विरोधी प्रत्याशी चंदे के लिए भटक रहे थे। पार्टी भी उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रही थी। ऐसे में नेताजी की सहयोग राशि से उन्हें काफी मदद मिली है। सुनते हैं कि बस्तर के कई प्रत्याशियों को 15-15 पेटी तक दिए गए। कहावत है कि दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते। ऐसे में मदद कहीं से भी मिले, गलत नहीं है।

    कर्जा माफ
    सरकार बनी तो कांग्रेस ने किसानों का कर्जा माफ करने का वादा किया है। महासमुंद जिले के एक विधानसभा के निर्दलीय प्रत्याशी ने भी कर्जा माफ की घोषणा की है। दरअसल वे छोटे-मोटे ब्याज का धंधा भी करते हैं। कई गरीब वोटरों ने इनसे कर्ज ले रखा है। इन वोटरों से वोट मांगते कहा कि वे जीत गए तो उनका कर्जा माफ, लेकिन हार गए तो उन्हें लौटाना होगा। क्योंकि हार जाने के बाद इन्हीं रुपयों से गुजारा होगा। तुरंत खुशी, तुरंत गम में डूबे ये वोटर समझ नहीं पा रहे क्या करें, क्या न करें?
    जनसैलाब शब्द का पतन
    चुनाव प्रचार घमासान है। हर नेता-प्रत्याशी ज्यादा समर्थन का दावा कर रहा है। अखबार के लिए विज्ञप्ति ई-मेल से जारी किए जा रहे हैं। किसी भी दल का प्रत्याशी हो इन विज्ञप्तियों में जिस शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, वह है-जन सैलाब।  प्रचार के दौरान किसी चौक या मुहल्ला हो या फिर गांव की गलियां, महज हजार-पांच सौ की भीड़, उन्हें जनसैलाब दिखने लगी है। रुपये की तरह अवमूल्यन का शिकार यह शब्द आने वाले दिनों में कहीं दर्जनों के लिए भी इस्तेमाल होने न लगे।
    बड़े सितारे को छोटों की मदद
    चुनावी सभाओं के लिए छत्तीसगढ़ी लोकगायक-कलाकार ज्यादा कारगर साबित हो रहे हैं, तभी तो  बसना विधानसभा के एक जनसभा में गई भाजपा की स्टार प्रचारक स्मृति ईरानी की सभा में भीड़ लाने के लिए छत्तीसगढ़ी लोककलाकारों को लगाया गया था। 
    रोजी पर रिश्तेदारों के घर
    बसना-सरायपाली विधानसभा का इलाका ओडिशा सीमा से लगा हुआ है। सीमावर्ती इलाके के लोगों का रोटी-बेटी का संबंध है। इस चुनाव ने इन दिनों ओडिशा के इन लोगों को काम दे दिया है। तीन सौ रुपये रोजी के साथ, खाना-पीना भी।  रिश्तेदारों के घर घूमना भी हो रहा है।  
    (rajpathjanpath@gmail.com)

खेल

  • आईसीसी महिला विश्व टी-20: सेमीफाइनल में शान से पहुंची भारतीय टीम

    आदेश कुमार गुप्त
     
    वेस्ट इंडीज़ में जारी आईसीसी महिला विश्व टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट में भारतीय महिला टीम जीत के रथ पर सवार है.
    गुरूवार को लगातार तीसरी जीत हासिल करते हुए उसने आयरलैंड को 52 रन से मात दी. इसके साथ ही भारतीय टीम सेमीफाइनल में भी पहुंच गई है.
    आयरलैंड के सामने जीत के लिए 146 रनों का लक्ष्य था, लेकिन वह पूरे 20 ओवर खेलकर 8 विकेट खोकर मात्र 93 रन ही बना सकी.
    पूरे मैच के दौरान आयरलैंड के बल्लेबाज़ कसी हुई भारतीय गेंदबाज़ी के सामने तेज़ गति से रन नहीं बना सकीं.
    केवल इसोबेल जोयसे 38 गेंदों पर चार चौक्कों की मदद से 33 और सलामी बल्लेबाज़ क्लेयर शिलिंग्टन 23 रन बनाकर कुछ संघर्ष किया, बाकि बल्लेबाज़ तो बस मैदान पर आईं और वापस लौट गईं.
    बल्लेबाज़ किस तरह के दबाव में थीं इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि जोयसे और शिलिंग्टन के अलावा कोई भी खिलाड़ी दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंच सकीं.
    भारत की राधा यादव ने 25 रन देकर तीन और दीप्ती शर्मा ने 15 रन देकर दो विकेट हासिल किए.
    कप्तान हरमनप्रीत कौर ने बेहद कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए चार ओवर में केवल 10 रन देकर एक और पूनम यादव ने भी 14 रन देकर एक विकेट हासिल किया.
    इससे पहले आयरलैंड की कप्तान लौरा डेलनी ने टॉस जीतकर पहले फिल्डिंग करने का निर्णय किया.
    भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बल्लेबाज़ी की दावत पाकर निर्धारित 20 ओवर में छह विकेट खोकर 145 रन बनाए.
    भारतीय सलामी जोड़ी मिताली राज और स्मृति मंधाना ने पहले विकेट के लिए 67 रन जोडकर भारत को शानदार शुरूआत दी.
    मिताली राज ने इस इस विश्व टी-20 टूर्नामेंट में अपना लगातार दूसरा अर्धशतक जमाते हुए 51 रन बनाए. उन्होंने इस दौरान 56 गेंदों का सामना करते हुए चार चौक्के और एक छक्का लगाया.
    उनकी जोडीदार स्मृति मंधाना ने 29 गेंदों चार चौक्के और एक छक्के की मदद से तेज़तर्रार 33 रन बनाए.
    लेकिन इनके अलावा बाकि कोई भी बल्लेबाज़ बड़ी पारी नही खेल सकीं. जेमीमा रोड्रिग्स ने 18 रन बनाए. दीप्ती शर्मा 11 और राधा यादव एक रन बनाकर नाबाद रहीं.
    पहले ही मैच में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ शतक बनाने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर के बल्ले से केवल सात रन ही निकल सके.
    आयरलैंड की किम गार्थ ने 22 रन देकर दो विकेट हासिल किए.
    भारतीय टीम की जीत के बाद शानदार फॉर्म में चल रही मिताली राज ने कहा कि "इस टूर्नामेंट में पहले ही मैच में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ जीत से सभी खिलाड़ी बेहद उत्साहित है. टीम में बेहद युवा खिलाड़ी हैं."
    अब भारत अपना आखिरी पूल बी मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया से शनिवार को खेलेंगी.
    आस्ट्रेलियाई टीम भी इससे पहले लगातार तीन मैच जीतकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी है.
    सेमीफाइनल में पहुंचने से खुश भारत की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि उनकी टीम इसी आक्रामता से खेलना जारी रखेगी.
    भारत ने इस टूर्नामेंट में पहले मैच में बडा उलटफेर करते हुए न्यूज़ीलैंड को 34 और उसके बाद पाकिस्तान को सात विकेट से हराया था.
    साल 2009 और 2010 में आईसीसी महिला विश्व टी-20 टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद अब जाकर भारतीय टीम तीसरी बार सेमीफाइनल में पहुंची है.
    साल 2012, 2014 और 2016 में वह ग्रुप स्टेज में ही हारकर बाहर हो गई थी. (बीबीसी)

कारोबार

  • जांच में पता चला, बिन्नी का महिला के साथ आपसी सहमति से था संबंध

    अदिति श्रीवास्तव/समिधा शर्मा
    नई दिल्ली/मुंबई, 15 नवम्बर। फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल द्वारा कथित गंभीर व्यक्तिगत दुव्र्यवहार की एक स्वतंत्र जांच में पता चला है कि बंसल और महिला के बीच संबंध तो थे, लेकिन आपसी सहमति पर आधारित। ब्लूमबर्ग ने मामले से वाकिफ दो अनाम व्यक्तियों के हवाले से यह खबर दी थी। 36 वर्षीय बंसल ने मंगलवार को फ्लिपकार्ट के चेयरमैन एवं ग्रुप सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के पीछे फ्लिपकार्ट के नए मालिक वॉलमार्ट की साजिश का भी अंदेशा जताया जा रहा है। 
    ऑनलाइन बुकस्टोर से 2007 में फ्लिपकार्ट के सफर की शुरुआत करने वाले सचिन बंसल और बिन्नी बंसल को देश की अर्थव्यवस्था के नए ध्वज-वाहक के रूप में स्टार्टअप को मुख्यधारा में लाने का श्रेय दिया जाता है। फ्लिपकार्ट ने अपने निवेशकों की पूंजी में जो अभूतपूर्व बढ़ोतरी की, उसका देश के स्टार्टअप ईकोसिस्टम पर गहरा असर हुआ। इससे भारतीय स्टार्टअप्स में दुनिया-जहां के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। चंडीगढ़ के रहने वाले सचिन और बिन्नी की सफलता ने इंटरनेट उद्यमियों की एक नई पीढ़ी को प्रेरणा भी दी। 
    इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सचिन बंसल के फ्लिपकार्ट से जाने के बाद अब गलत बर्ताव के गंभीर आरोप में फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ पद से बिन्नी बंसल के इस्तीफे से युवा उद्यमियों के मनोबल और स्टार्टअप इंडस्ट्री के सेंटीमेंट पर बुरा असर पड़ सकता है। फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट के खरीदने के बाद कंपनी में अपनी भूमिका को लेकर नाखुश सचिन बंसल मई में कंपनी से अलग हो गए थे। सचिन और बिन्नी के साथ काम करने वाले और वॉलमार्ट के निवेश पहले फ्लिपकार्ट में पैसा लगाने वाले एक शख्स ने बताया, ऐसी स्थिति से ग्लोबल इनवेस्टर्स को लेकर आशंकाएं बढ़ती हैं।
    एक स्टार्टअप के फाउंडर ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि फ्लिपकार्ट से सचिन और बंसल की विदाई से उद्यमियों में अनिश्चितता बढ़ेगी। एक अन्य स्टार्टअप के संस्थापक ने बताया, मैं अपनी कंपनी शुरू करने के वक्त से सचिन और बिन्नी को आदर्श माना है। बिन्नी के इस्तीफे ने फ्लिपकार्ट डील के बाद बने खुशनुमा माहौल को खत्म कर दिया है। बिन्नी के इस्तीफे पर वॉलमार्ट ने एक बयान में कहा कि बिन्नी के खिलाफ आरोपों की जांच हो रही है। अभी तक आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन कुछ मामलों में उनकी गलती सामने आई है। इसमें खासतौर से पारदर्शिता को लेकर चूक है।
    बिन्नी ने एंप्लॉयीज को लिखी ईमेल में आरोपों को सिरे से नकारा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा, फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ पद से अलग होने के लिए सही समय के बारे में सोच रहे थे और उनकी योजना वॉलमार्ट के साथ डील पूरी होने के बाद कुछ और तिमाहियों तक कंपनी में अपनी मौजूदा भूमिका में बने रहने की थी। वॉलमार्ट के साथ के करीब 6 महीने बाद बिन्नी के इस्तीफे ने फ्लिपकार्ट के कर्मचारियों के बीच कई सवालों को खड़ा कर दिया है। 
    इकनॉमिक टाईम्स ने करीब आधा दर्जन फ्लिपकार्ट एंप्लॉयीज से बात की। उन सबने कहा कि वह इस खबर को सुनकर हैरान हैं। कंपनी के एक सीनियर प्रॉडक्ट मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, वॉलमार्ट के साथ डील के बाद कंपनी में हो रहे बदलावों के बीच उनका इस्तीफा परेशान करने वाला है। कर्मचारी उनसे बदलाव के दौर में कंपनी के साथ बने रहने की उम्मीद कर रहे थे।  (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

सेहत/फिटनेस

  • क्या ये दुनिया कभी पूरी तरह शाकाहारी हो सकती है?

    वेरोनिका ग्रीनवुड, बीबीसी कैपिटल
    रिचर्ड बकले ब्रिटेन के बाथ में एकॉर्न रेस्तरां के मालिक हैं। यह एक शानदार जगह है, जहां मांस नहीं परोसा जाता। बकले खुद शाकाहारी हैं। हाल में उन्होंने एक दिलचस्प चीज महसूस की, 80-90 और पिछली सदी के आखिरी दशक में लोग उनसे पूछते थे कि आप बेकन के बिना कैसे जिंदा हैं। क्या आपने कभी हैमबर्गर नहीं खाया? आप क्रिसमस लंच पर क्या खाते हैं?
    वह कहते हैं, मुझमें कमी देखी जाती थी। ऐसा लगता था कि मैं अजीब हूं और वे सब सामान्य हैं। अब जब मैं लोगों से कहता हूं कि मैं शाकाहारी हूं तो वे बताते हैं- ठीक है, मैं भी ज़्यादा मांस नहीं खाता और मेरी बेटी शाकाहारी है। मिशेलिन गाइड से मान्यता प्राप्त रेस्तरां के मालिक कहते हैं, संतुलन पलट गया है। अब मैं सबसे अलग नहीं हूं।
    हिटलर और एक नाबालिग यहूदी लडक़ी की दोस्ती की दास्तान
    शाकाहारी विकल्प बढ़ रहे हैं। खाद्य कंपनियों और मार्केट रिसर्च फम्र्स ने भी मांग में बदलाव को पहचान लिया है। साल 2018 में 1,68,000 लोगों ने वेगन्यूरी अभियान के तहत एक महीने के लिए शाकाहार अपनाया। साल 2014 में जब यह कैंपेन शुरू हुआ था तब केवल 3,300 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया था।
    सैंडविच के लिए मशहूर प्रेट ए मॉन्जे ने 2016 में लंदन में एक महीने के लिए वेगी प्रेट नाम से ब्रांच खोली। यह इतना लोकप्रिय हो गया कि अब इसके चार स्टोर हैं।
    नेस्ले ने पिछले साल विश्लेषकों से कहा कि पौधों से मिलने वाले आहार की मांग हमेशा रहेगी। गोश्त की जगह लेने वाले जायकेदार विकल्पों की मांग बढ़ी है। इसका बाजार 2025 तक 7.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
    एक मार्केट रिसर्च फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी के 44 फीसदी उपभोक्ता कम मांस वाले आहार खा रहे हैं। साल 2014 से अब तक इसमें 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अमरीका में पहले से ज़्यादा लोग अपनी पहचान शाकाहारी बता रहे हैं।
    ऐसे निजी फैसलों की वजह अलग-अलग होते हैं। मेलबर्न की एलेना स्टेपको ने चार-पांच साल पहले जूलॉजी की पढ़ाई के दौरान मांस खाना छोड़ दिया था। वह कहती हैं, यह सब इंटरनेट पर कुछ दुखद वीडियो को देखने से शुरू हुआ। उनमें जानवरों की फार्मिंग और उनके साथ होने वाले सलूक को दिखाया गया था।
    एलेना जानवरों से प्रेम करती हैं और उनके प्रति चिंता ने ही उनको शाकाहार अपनाने को प्रेरित किया है। कुछ लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसा करते हैं तो कुछ सेहत सुधारने के लिए। मानवाधिकार संरक्षण के यूरोपीय समझौते के अनुच्छेद-9 में शाकाहार को मानव अधिकार के रूप में संरक्षित किया गया है।
    मांस और अन्य पशु उत्पादों को छोडक़र दूसरे आहार अपनाने के आर्थिक प्रभाव क्या हैं? क्या यह किसी व्यक्ति के लिए सूझबूझ भरा आर्थिक फैसला हो सकता है? यदि ज्यादा लोग अपना खानपान बदलते हैं तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
    यह कोई रहस्य नहीं है कि मांस उत्पादन में ढेरों संसाधन लगते हैं। चारा तैयार करने के लिए जमीन, खाद और पानी चाहिए। चारे और पशुओं की ढुलाई के लिए ईंधन भी जरूरी है।
    स्विट्जरलैंड के कृषि अनुसंधान संस्थान एग्रोस्कोप और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने एक अध्ययन में पाया कि प्रति 100 ग्राम पशु प्रोटीन उत्पादन के लिए 370 वर्ग मीटर भूमि और 105 किलो कार्बन डायऑक्साइड समकक्ष की जरूरत होती है।
    इतना ही प्रोटीन अगर बीन्स, मटर या दूसरे पौधों से प्राप्त किया जाए तो केवल एक वर्ग मीटर भूमि और 0.3 किलो कार्बन डायऑक्साइड समकक्ष का इस्तेमाल होता है।
    मांस की थोड़ी-सी मात्रा के उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में फसलों का इस्तेमाल होता है। इन्हीं वजहों से दूध, अंडे और चीज का उत्पादन बहुत संसाधन मांगता है। एक पाउंड चीज बनाने के लिए 10 पाउंड दूध की जरूरत होती है।
    2015 के एक अध्ययन में सुझाव दिया गया था कि यदि सभी 9 अरब लोग शाकाहार अपना लें तो खेती के पारंपरिक तरीकों की जगह ऑर्गेनिक खेती अपनाकर उनका पेट भरा जा सकता है।
    क्या इससे खाने का खर्च घट जाएगा? पौधों से मिले आहार पशुओं से मिले आहार से सस्ते हैं। खानपान पर मांसाहारियों के मुकाबले शाकाहारियों का खर्च कम है।
    स्वीडन के उपभोक्ताओं के खर्च की आदतों पर विस्तृत अध्ययन करने वाली अर्थशास्त्री जेनिना ग्राब्स ने पाया कि शाकाहार अपनाने पर खाने-पीने पर होने वाला खर्च 10 फीसदी तक घट जाता है। इससे पहले के अध्ययनों में भी पाया गया था कि कम मांस और कम संवर्धित उत्पाद खाने से लागत में 15 फीसदी की कमी आती है।
    ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ऑक्सफोर्ड मार्टिन प्रोग्राम के अर्थशास्त्री मार्को स्प्रिंगमैन कहते हैं, ऊंची आय वाले देशों में पौधों से मिलने वाले संतुलित आहार अन्य आहार से लगभग एक तिहाई सस्ते हैं।
    शाकाहार अपनाने से आपका खर्च घटता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप इसे कैसे अपनाते हैं। एक अपवाद वे लोग हैं जो खुद को शाकाहारी बताते हैं, फिर भी मांस या मांस से बने उत्पाद खरीदते हैं क्योंकि उनके घर में किसी को बीफ बर्गर पसंद है।
    पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के जेसन लस्क और ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी के बैले नॉरवुड के अध्ययन से पता चला कि ऐसे लोग घोषित मांसाहारियों और शुद्ध शाकाहारियों से अधिक खर्च करते हैं, भले ही उनका परिवार चाहे जिस आय वर्ग में हो।
    एक और पेंच यह है कि यदि शाकाहारी उपभोक्ता ऑर्गेनिक उत्पाद खरीदते हैं तो वे परंपरागत मांसाहार करने वाले उपभोक्ताओं से ज्यादा खर्च करेंगे। संवर्धित आहार भी महंगे हो सकते हैं।
    एलेना स्टेपको दो साल से शुद्ध शाकाहारी हैं। उनके लिए इसे अपनाना खर्चीला है और इसमें समय भी लगता है। खाने-पीने की चीजें खरीदने के लिए एलेना को शाकाहारी उत्पाद बेचने वाले सुपरमार्केट तक जाना पड़ता है, जिनकी तादाद मेलबर्न में बहुत कम है।
    कई बार डिब्बाबंद शाकाहारी उत्पाद मांसाहारी उत्पादों के दोगुने, तिगुने, चौगुने दाम पर मिलते हैं। छोटी चीजें जैसे मक्खन वाला चाय बिस्कुट 2 डॉलर का होता है, लेकिन इसका शुद्ध शाकाहारी संस्करण 6 डॉलर में मिलता है।
    स्टेपको के मुताबिक मांस-युक्त खाद्य उत्पादों के शाकाहारी संस्करण ढूंढऩे या डिब्बाबंद उत्पाद खरीदने की जगह यदि सामान्य सब्जी करी को अपनाया जाए तो सस्ता पड़ेगा। लेकिन यह सबको पसंद नहीं आ सकता।
    ग्राब्स कहती हैं कि पशु उत्पादों को छोडऩा कुछ मामलों में थोड़े पैसे बचा सकता है, लेकिन पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए लोगों को सोचना होगा कि बचे हुए पैसे कहां खर्च हो रहे हैं।
    अगर आपकी आमदनी में एक डॉलर जुड़ जाए तो आप उस पैसे को कहां खर्च करेंगे?
    यदि आपका जवाब कार्बन उत्सर्जन बढ़ाने वाले प्लेन टिकट या कार खरीदने का है तो सिर्फ शाकाहारी बन जाने से आपका व्यक्तिगत कार्बन उत्सर्जन कम नहीं होने वाला।
    ग्राब्स ने स्वीडन के उपभोक्ताओं पर किए गए अध्ययन में पाया कि यदि लोग शाकाहारी बन जाएं लेकिन दूसरी आदतें पहले जैसी रखें तो वे 16 फीसदी कम ऊर्जा खर्च करेंगे और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन 20 फीसदी कम करेंगे। लेकिन यदि वे बचाए हुए पैसे को अमीरों की तरह खर्च करें तो ऊर्जा की कोई बचत नहीं होगी और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन सिर्फ 2 फीसदी घटेगा।
    खपत के तौर-तरीके में बदलाव से कार्बन उत्सर्जन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। लेकिन बात इतनी भर नहीं है। किसी की जीवनशैली के बड़े फलक को देखना महत्वपूर्ण है। मांसाहार छोडक़र शाकाहार अपनाने के बारे में ग्राब्स कहती हैं, यह अच्छा विचार है, लेकिन यही पूरी रणनीति नहीं होनी चाहिए।
    कम मांस खाने से देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जैसे कि स्वास्थ्य सेवाओं पर?
    रेड मीट कम खाने और फल-सब्जियां ज्यादा खाने से हृदय रोग, कैंसर और अन्य बीमारियों से होने वाली मौतें कम होंगी। मोटे लोगों की तादाद भी घटेगी।
    रिचर्ड बकले कहते हैं कि हम 80 के दशक से आगे बढ़े हैं। उनके बचपन में बाल कल्याण की वकालत करने वालों ने उनके माता-पिता से कहा था कि शाकाहारी भोजन बच्चे का उत्पीडऩ है, और उसका विकास रूक जाएगा। बकले 6 फीट से ज्यादा लंबे हैं और उनका 100 किलो से ज्यादा है।
    पीएनएएस में 2016 के एक अध्ययन में स्प्रिंगमैन और उनके सहयोगियों ने गणना की थी कि खानपान में बदलाव का दुनिया भर में क्या असर पड़ेगा। कुछ देशों में लोग ज्यादा सब्जियां खाने लगेंगे। कुछ अन्य देशों में लोग ज्यादा सब्जियां खाएंगे और कम रेड मीट खाएंगे। शोधकर्ताओं ने उन मॉडल्स को देखा जिसमें लोग वर्तमान आहार मानकों को पूरा करते हुए मांसाहार से शाकाहार और फिर पूर्ण शाकाहार में चले गए।
    यदि लोग शाकाहार अपना लें और दुनिया की आर्थिक तरक्की मौजूदा दर से ही चलती रहे तो 2050 तक वैश्विक मृत्यु दर 6 से 10 फीसदी तक घट जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च में 28 हजार अरब डॉलर की बचत होगी। उत्पादकता में होने वाली कमी 30 हजार अरब डॉलर तक कम होगी। यह अनुमानित वैश्विक जीडीपी के 12 से 13 फीसदी है। आधे से ज़्यादा बचत विकसित देशों में होगी, जहां स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हैं। आशंकित मौतों में आधे से ज़्यादा कमी विकासशील देशों में होगी।
    शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि ये मॉडल विचारों के प्रयोग की तरह हैं जो दिखाते हैं कि क्या-क्या संभव हो सकते हैं। हम अभी जरूरत के मुताबिक सब्जियों और फलों का उत्पादन नहीं कर रहे हैं। स्प्रिंगमैन का अनुमान है कि फलों और सब्जियों की न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने के लिए 2050 तक इनका उत्पादन 50 फीसदी बढ़ाना होगा।
    यदि उपभोक्ता मांस-युक्त आहार को छोड़ते हैं तो उत्पादन की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर बदल जाएगी। स्प्रिंगमैन का अनुमान है कि फल और सब्जियों के क्षेत्र में ज्यादा रोजगार मिल सकते हैं, लेकिन रोजगार मौसमी होंगे।
    मांस उत्पादक किसानों के लिए शाकाहार बढऩा एक बड़ी चोट होगी। जेसन लस्क कहते हैं, पशु प्रोटीन मूल्य वर्धित उत्पाद हैं। उत्पादक चारे जैसे अपेक्षाकृत कम लागत वाले उत्पादों को मांस में बदलते हैं, जिसे वे ज्यादा कीमत पर बेचते हैं।
    स्वीडन में भोजन के पर्यावरण पर प्रभाव का अध्ययन करने वाली एनिका कार्लसन-कन्यामा कहती हैं कि मांस की मांग थोड़ी कम होने से उत्पादकों की प्रतिक्रिया अच्छी नहीं रही है। स्वीडन में किसानों के संगठन इसे खतरा समझते हैं। वे इस बारे में ज्यादा बातें नहीं करते, लेकिन वे ऐसे विज्ञापन बना रहे हैं, जिनमें मांस के विकल्पों को नकारात्मक रूप में दिखाया जा रहा है।
    स्वीडन में जरूरत के मांस का आधा हिस्सा आयात किया जाता है, इसलिए खपत घटने का घरेलू उत्पादकों पर असर पड़े ही, यह जरूरी नहीं।
    वह यह भी बताती हैं कि मांस के विकल्पों और बीन्स के आटे से बनने वाले पास्ता जैसे उच्च प्रोटीन वाले नये खाद्य पदार्थों का उद्योग बढ़ रहा है। मैं इसे स्वीडन के किसानों के लिए एक मौके के रूप में देखती हूं कि वे नये उत्पादों का उत्पादन करें।
    उदाहरण के लिए, स्वीडिश जई से बनने वाला वेजन दूध, जिसे ओटली नाम की कंपनी बनाती है, ना सिर्फ स्थानीय बाजार में, बल्कि विदेशों में भी बिकता है। चीजें आज जैसी हैं, वैसी हमेशा नहीं रह सकतीं। खेती और पशुपालन में ग्रीन हाउस गैसों का एक तिहाई उत्सर्जन होता है। चीन जैसे देशों में मांस की खपत बढऩे से इसके और बढऩे की आशंका है।
    कार्लसन-कन्यामा कहती हैं, चीजें बदलने लगी हैं। बकले की तरह वे भी महसूस करती हैं कि लोगों के नजरिये बदल रहे हैं।
    वह कहती हैं, 90 के दशक के दौरान जब मैं अपने रिसर्च के बारे में बात करती थी तो कुछ लोग चिढ़ जाते थे। वे मुझसे खफा हो जाते थे, मुझे बुरा-भला कहते थे। लेकिन आज कोई वैसा नहीं करता।
    इस बात के बहुत सबूत हैं कि पशु प्रोटीन कम खाने से ना सिर्फ हम पर्यावरण को बचा रहे हैं, बल्कि अपनी सेहत भी सुधार रहे हैं। मुझे लगता है कि हम बहुत आगे बढ़े हैं।
    कार्लसन-कन्यामा कहती हैं, यकीनन यह मांस और डेयरी उत्पादों के उत्पादकों के लिए चुनौती है। लेकिन धरती के लिए और अपनी सेहत के लिए इस पर विचार होना चाहिए।  (बीबीसी)

     

सामान्य ज्ञान

  • हर दिन हॉट सीट 16 नवंबर

     1. निम्नलिखित में से कौन सा एक व्यंग्य लेखक है?
    (अ) श्यामसुन्दर दास (ब) विद्या निवास (स) हरिशंकर परसाई (द) राहुल सांकृत्यायन
    2. पंचवटी कौन-सा समास है?
    (अ) द्विगु (ब) द्वन्द्व (स) कर्मधारय (द) तत्पुरुष
    3. भारत के दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार पर मिलने वाली वनस्पतियों पर निम्न में से किस कारक का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है?
    (अ) मिट्टी (ब) वर्षा (स) भूमध्यरेखा से दूरी (द)ऊंचाई 
    4. भूगोल को एक अलग अध्ययन शास्त्र के रूप में स्थापित करने का श्रेय निम्न में से किस विद्वान को है?
    (अ) इरैटोस्थनीज (ब)हिप्पार्कस (स)हेरोडोटस(द)हिकैटियस
    5. शीतल शीतोष्ण प्रदेशों में लकड़ी काटना एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है, क्यों?
    (अ) बड़ी मात्रा में श्रमिकों की आपूर्ति (ब) कार्ययोग्य नर्म लकड़ी के वृक्ष (स) आसान परिवहन (द) वृक्षों का बृहत समूह
    6. निम्नलिखित में से कौन सा खाद्य पदार्थ विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्रोत कौन सा है?
    (अ) यूरिया (ब) सूर्य द्वारा चिकित्सित शिव की सूखी घास (स) हरा मोटा चारा (द) मूंगफली की खली
    7. निम्नलिखित दुग्ध उत्पादों में से किस उत्पाद में प्रोटीन का सबसे अधिक प्रतिशत पाया जाता है?
    (अ) गाय के संपूर्ण दुग्ध चूर्ण (ब) भैंस के दूध का छैना (स) गाय के दूध का खोवा (द) गाय के मखनियां दुग्ध चूर्ण
    8. मनुष्य की त्वचा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में  कौन सा विटामिन बनाती है?
    (अ)विटामिन ए (ब) विटामिन बी (स) विटामिन डी (द) विटामिन ई
    9. ऊंट की कूबड़ उसके लिए किस काम आती है?
    (अ)जल संग्रह के लिए (ब)  वसा संग्रह के लिए (स) शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए (द) तापमान नियंत्रित रखने के लिए
    10. भारत की राष्ट्रीय आय में किस क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक अधिक है?
    (अ) प्राथमिक (ब) द्वितीयक (स) तृतीयक (द) तीनों का योगदान समान है
    11. किस क्षेत्र में सर्वाधिक रोजगार श्रम शक्ति को प्राप्त है?
    (अ) प्राथमिक (ब) द्वितीयक  (स) तृतीयक (द) तीनों क्षेत्रों में रोजगार समान है
    12. लाल बहादुर शास्त्री को मरणोपरांत भारत रत्न कब दिया गया?
    (अ) वर्ष 1965 (ब)वर्ष 1966  (स) वर्ष 1967 (द)वर्ष 1968 
    13. इंग्लिश चैनल पार करने वाले पहले भारतीय निम्नलिखित में से कौन हैं?                                                                                                                                            
    (अ) मिहिर सेन (ब) शंकर (स) राकेश शर्मा (द) इनमें से कोई नहीं
    14. भारत में संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत का स्रोत निम्र में से क्या है?
    (अ) भारत का संविधान (ब) न्यायिक व्याख्या (स) संसदीय कानून (द) न्यायविदों के मत
    15. विक्रमशिला महाविहार की स्थापना का श्रेय किसे दिया जाता है?
    (अ) हर्ष (ब) पुष्य मित्र शुंग (स) धर्मपाल (द) विजयसेन 
    16. रिजर्व मुद्रा में सम्मिलित होते हैं?
    (अ) केवल बैंकों में सावधि जमा (ब) जनता की चलन मुद्रा तथा बैंकों के पास नकदी (स) केवल बैंकों के पास नकदी (द) बैंकों के पास नकदी तथा डाकघर बचत बैंक जमा
    17. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की स्थापना कब की गई थी?
    (अ) 1993 में (ब) 1992 में (स) 1988 में (द) 2002 में
    18. डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष कब बनाया गया?
    (अ) 9 दिसंबर, 1946 (ब) 10 दिसंबर, 1946 (स) 11 दिसंबर, 1946 (द) 12 दिसंबर, 1946
    19. विस्तृत पशु चारागाह फार्म एस्टान्शिया निम्नलिखित में से किस देश में है?
    (अ) संयुक्त राज्य अमेरिका (ब) ऑस्ट्रेलिया (स) हॉलैण्ड (द) अर्जेण्टिना
    20. हीरा निम्नलिखित में से किस देश का प्रमुख खनिज है?
    (अ) जिम्बाब्वे (ब) नाइजर (स) सियरालियोन (द) घाना
    21. डेयरी फार्मिंग का सर्वाधिक विकास मुख्य रूप से किन देशों में हुआ है?
    (अ) समशीतोष्ण जलवायु वाले देशों में (ब) शीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु वाले देशों में (स)शीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु वाले देशों में (द) शीत कटिबंधीय जलवायु वाले देशों में
    22. पृथ्वी के सभी ताप कटिबंधों में उगाई जाने वाली कृषि फसल क्या है?
    (अ) गेहूं (ब) चावल (स) मक्का (द) कहवा
    23. जापान विश्व में अग्रणी औद्योगिक देश बन गया है, क्योंकि?
    (अ) उसके पास प्रचुर खनिज है (ब) वहां औद्योगिक क्रांति का जन्म हुआ (स) उसके पास उच्च तकनीकी क्षमता है (द) उसके पास जैव ईधन का बाहुल्य है
    24. नीम के वृक्ष ने औद्योगिक महत्व प्राप्त कर लिया है?
    (अ) जैवकीटनाशी और प्रजननरोधी यौगिक के स्रोत के रूप में (ब) प्रजननरोधी यौगिक, जैव उर्वरक और कैंसर रोधी औषधी के रूप में  (स) जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी और प्रजननरोधी यौगिक के रूप में  (द) कैंसर रोधी औषधि, जीव कीटनाशी और जैव उवर्रक के स्रोत के रूप में
    25. निम्नलिखित में से किसने ग्रह कक्षा नियमों की खोज की?
    (अ) गैलीलियो गैलिली (ब) निकोलस कॉपर्निकस (स) जोहान्स कैप्लर (द) आइजक न्यूटन
    26. भारत में पंचवर्षीय योजनाएं अंतिम रूप से किसके द्वारा अनुमोदित होती है?
    (अ) केंद्रीय मंत्रिमंडल (ब) प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्टï्रपति (स) राष्टï्रीय विकास परिषद (द) योजना आयोग 
    --
    सही जवाब- 1.(स) हरिशंकर परसाई, 2.(अ) द्विगु, 3.(द)ऊंचाई, 4.(द)हिकैटियस, 5.(स)आसान परिवहन, 6.(ब) सूर्य द्वारा चिकित्सित शिव की सूखी घास, 7.(द) गाय के मखनियां दुग्ध चूर्ण, 8.(स) विटामिन डी, 9.(अ)जल संग्रह के लिए,10.(ब) द्वितीयक, 11.(अ) प्राथमिक, 12.(ब) वर्ष 1966, 13.(अ)मिहिर सेन, 14. (ब) न्यायिक व्याख्या, 15.(स) धर्मपाल, 16.(द) बैंकों के पास नकदी तथा डाकघर बचत बैंक जमा, 17.(स)1988 में, 18.(स)11 दिसंबर, 1946, 19.(द) अर्जेण्टिना, 20.(स) सियरालियोन, 21.(अ) समशीतोष्ण जलवायु वाले देशों में, 22.(अ) गेहूं, 23.(स) उसके पास उच्च तकनीकी क्षमता है, 24.(स) जैव उर्वरक, जैव कीटनाशी और प्रजननरोधी यौगिक के रूप में, 25.(स) जोहान्स कैप्लर, 26.(स)राष्टï्रीय विकास परिषद।

अंग्रेज़ी

  • The English Corner 16 November 2018

    Common Mistakes and
     Confusing Words in English
    come over /over come
    Come over is a phrasal verb, that can mean several things.
    To move from one place to another, or move towards someone.
    For example: "Come over here." To seem to be a particular type of person.
    For example: "Politicians often come over as arrogant." To be influenced suddenly and unexpectedly by a strange feeling.
    For example: "Don't stand up too quickly or you may come over dizzy."
    Overcome is a verb, which means to defeat or succeed in controlling or dealing with something.
    For example: "Using technology can help many people overcome any disabilities they

    Tongue Twister
    There those thousand thinkers were thinking how did the other three thieves go through.
    He threw three free throws.
    (Repeat it loudly a few times to check   if you could say it fast, without a slip)

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