छत्तीसगढ़

  •     देशविहीन, रिफ्यूजी होने की पीड़ा सालती है
    देशविहीन, रिफ्यूजी होने की पीड़ा सालती है

    छत्तीसगढ़ संवाददाता

     रायपुर, 10 दिसंबर। धर्मगुरु दलाई लामा को 10 दिसंबर को मिलने वाले नोबल पुरस्कार की वर्षगांठ पर खुशियों के संग जन्मभूमि से बिछडऩे, देशविहीन होकर रिफ्यूजी होने की पीड़ा छलकती नजर आई। 
     मैनपाट की ऊनी कारोबारी सोनम कहती हैं हम तिब्बतियों पर भारत ने बहुत उपकार किया है, लेकिन रिफ्यूजी होने की पीड़ा हमेशा सालती रहती है। अच्छे से पहन ओढ़ लो, तो लगता है हमारा तो देश ही नहीं है। किस चीज की खुशियां मनाएं? कई बार हमें चीनी, तिब्बती होने की उलाहना दी जाती है। तिब्बत को खो देने के बाद हमारा कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। भारत ने हम तिब्बतियों को कई तरह की सुविधाएं दी हैं, लेकिन अपना देश तो अपना देश ही होता है। तिब्बत से जब हम भारत आए तब मैं पांच साल की थीं। किसी की मां तिब्बत में रह गई तो किसी के पिता वहां रह गए। होशोहवास में तिब्बत नहीं देखा, लेकिन वहां की संस्कृति को अपनाए हुए हैं। 
    तिब्बतियों के बीच अम्मां के नाम से पहचान रखने वाली 70 वर्षीया छिम्मी ने बताया कि वह अपने मां-पिताजी के साथ छुपते छुपाते किसी तरह भारत आई थीं, लेकिन उनके दादा-दादी वहीं रह गए। यहां आने के बाद उनकी खोज-खबर भी नहीं मिल पाई। 
    वयोवृद्ध संगमों चार साल की उम्र में भूटान के रास्ते होते हुए तिब्बत से भारत आई थीं। उन्होंने बताया कि दिनभर छुपे रहने के बाद रात को छुपते-छुपाते उनका परिवार पहाड़ी रास्ते, नदी नालों को पार करते हुए भूटान होते हुए भारत आया था। भारत आते हुए बर्फीले रास्तों को पार करते हुए कई बार लोगों के अंग बेजान हो जाते थे। संगमो कहती हैं तिब्बत वापस जाने की उम्मीद तो आज भी जिंदा है।
     60 वर्षीया डेचंग ने बताया कि उनकी मां जब अपने भाई-बहन के साथ भारत आई थीं तब वह मां के पेट में थी। उनके पिता, मामा सब तिब्बत में ही रह गए। उनकी आज तक खोजखबर नहीं मिली। भूले भटके छानबीन करने पर उनके परिजनों को प्रताडि़त किया जाता है। तिब्बतियों को जड़ से खत्म करने के लिए गर्भवती तिब्बती महिलाओं का एबार्सन करा दिया जाता है। 

Daily Chhattisgarh News

 

Daily Chhattisgarh News

Daily Chhattisgarh News

राजनीति

  • महागठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होंगे-अखिलेश

    लखनऊ, 10 दिसम्बर । देश में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन की कवायद को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब उत्तर प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि वह दिल्ली में महागठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। अखिलेश यादव ने हालांकि गठबंधन की कवायद पर कहा कि बातचीत जारी है, 2019 से पहले एक अच्छा गठबंधन होगा।
    लेकिन पांच राज्यों के चुनाव परिणाम से पहले यह बैठक जल्दी है। सभी प्रयास कर रहे हैं कि एक अच्छा गठबंधन बने। हमारी कोशिश है कि ऐसा गठबंधन बने, जिससे बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान हो।
    अखिलेश ने कहा कि देश आज जो समस्याएं झेल रहा है, उसे देखते हुए सभी लोग एक साथ आ रहे हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है। वहीं गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने या नहीं होने के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई बात ही नहीं की गई है, इसलिए गठबंधन में उसके होने या नहीं होने पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
    मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव परिणाम के एक दिन पहले आज बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की बैठक होनी है। इसमें मुलायम सिंह यादव के शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है। खुद मुलायम सिंह यादव ने बैठक में शामिल होने की बात रविवार को कही।
    शिवपाल सिंह यादव की लखनऊ में हुई जनाक्रोश रैली में अपने संबोधन में मुलायम सिंह यादव ने दिल्ली में होने वाली कांग्रेस और विपक्षी दलों की बैठक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कल दिल्ली में सभी दलों की बैठक है। आज देश के सामने गंभीर समस्या है। साम्प्रदयिक शक्तियां फिर से सर उठा रही हैं। देश की जमीन पर पाकिस्तान और चीन कब्जा कर रहे हैं। मेरा जाना अनिवार्य है।
    विपक्ष की इस बैठक में महागठबंधन बनाने पर चर्चा होगी। हालांकि मुलायम सिंह से इतर उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अब बैठक से खुद को किनारे कर लिया है। उधर बहुजन समाज पार्टी की भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिन्होंने परंपरागत रूप से उत्तर प्रदेश के आम चुनावों के परिणामों को प्रभावित किया है।
    टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू इस बैठक का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने सभी गैर-बीजेपी दलों के नेताओं को शामिल होने का न्यौता दिया है। (न्यूज 18)

     

मनोरंजन

  • उदयपुर पहुंचते ही जाह्नवी को याद आई धडक़

    जाह्नवी कपूर के लिए उनकी फिल्म ‘धडक़’ कई मायनों में खास रही है। एक तो ये कि ये फिल्म उनके करियर की पहली फिल्म थी। इसी फिल्म से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया। साथ ही ये एक बड़े प्रोडक्शन के बैन तले बनाई गई। हालांकि, इस फिल्म में जाह्नवी की एक्टिंग की भी काफी सराहना हुई लेकिन जाह्नवी अब तक इस फिल्म के सीन्स से बाहर निकल नहीं पाई हैं। उन्हें आज भी फिल्म के सीन की याद आ रही है।
    जाह्नवी कपूर हाल ही में उदयपुर पहुंची थीं। वो यहां एक बड़ी शादी में शरीक होने गई थीं लेकिन यहां उनकी पहली फिल्म ‘धडक़’ की शूटिंग की यादें ताजा हो गईं। जाह्नवी ने फिल्म के ज्यादातर हिस्सों की शूटिंग उदयपुर में ही की थी। इस दौरान उन्होंने सभी पलों को एंजॉय किया। शूटिंग के दौरान की दो तस्वीरें जाह्नवी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। इस तस्वीर में वो एककमरे में बैठी हुई नजर आ रही हैं और आराम कर रही हैं। साथ ही वो चाय की चुस्कियां लेते हुए खिडक़ी से बाहर की तरफ देख रही हैं। उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा है कि, ‘बैक होम’।
    जाह्नवी कपूर ने पहली फिल्म धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले की थी और अब अपने करियर की दूसरी फिल्म भी वो इसी प्रोडक्शन के बैनर तले करने जा रही हैं। फिल्म का नाम है ‘तख्त’ जिसमें कई सारे दिग्गज कलाकार जाह्नवी के साथ नजर आने वाले हैं। जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग शुरू होगी। (फस्र्टपोस्ट)

     

स्थायी स्तंभ

  • छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : राम तेरी गंगा मैली, की कसम

    भाजपा के कई नेता मानते हैं कि कांग्रेस नेताओं के हाथ में गंगाजल लेकर किसानों को बकाया बोनस-समर्थन मूल्य 25 सौ रूपए देने के वादे ने चुनाव में हलचल पैदा कर दी और एक तरह से किसानों के बीच कांग्रेस के पक्ष में माहौल बन गया। यह एक टर्निंग पाइंट था। 
    सुनते हैं कि चुनावी वादे को पूरा करने के लिए गंगाजल की सौगंध खाने का विचार पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरपीएन सिंह का था। उन्होंने राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल और राधिका खैरा के साथ राजीव भवन में प्रेस कॉफ्रेंस से पहले एक होटल में इसकी योजना तैयार की। इसकी जानकारी प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के नेताओं को भी नहीं थी। आरपीएन सिंह ने बिना कुछ बताए प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी को गंगाजल लाने के लिए भेजा। तिवारी गंगाजल के 8-10 डिब्बे लेकर सीधे राजीव भवन पहुंचे और प्रेस कॉफ्रेंस से पहले सभी के टेबल पर जमा दिया। थोड़ी देर बाद शैलेष नितिन त्रिवेदी वहां पहुंचे, तो गंगाजल के डिब्बे देखकर भड़़क गए और उन्होंने विकास तिवारी से डिब्बों को अंदर रखने के लिए कह दिया। बाद में आरपीएन सिंह प्रेस कॉफ्रेंस के लिए पहुंचे, तो उन्होंने विकास तिवारी से गंगाजल फिर मंगा लिया। इसके बाद आरपीएन सिंह और प्रेस कॉफ्रेंस में मौजूद नेताओं ने हाथ में गंगाजल धान बोनस- समर्थन मूल्य के चुनावी वादे को पूरा करने की कसम खाई, तो रायपुर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया। 
    चर्चा है कि शैलेष नितिन इसको लेकर असहज थे उन्होंने बाकी नेताओं के गंगाजल हाथ में लेने के बाद आखिरी में लिया। उन्हें बड़े विवाद की आशंका थी। यहां किसी भी तरह की अव्यवस्था और विवाद होने की दशा में पहली जिम्मेदारी संचार विभाग के प्रमुख होने के नाते उनकी ही बनती थी। हाईकमान ने उन्हेें चुनाव से पहले ही इसको लेकर दिशा निर्देश दिए थे। पर कांग्रेस नेताओं का गंगाजल की सौगंध खाने की रणनीति कामयाब हो गई। धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल के खिलाफ चुनाव आयोग में कांग्रेस की शिकायत करने के बजाए सीएम से लेकर पीएम तक भाजपा के छोटे-बड़े नेता अपने भाषणों में गंगाजल की सौगंध खाने को लेकर कोसते रहे। और कांग्रेस खूब प्रचार मिल गया। चूंकि इसकी चर्चा आम मतदाताओं के बीच खूब हुई। चुनाव नतीजों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि गंगाजल की सौगंध खाना कितना फायदेमंद था। अब यह एक अलग बात है कि असल जिंदगी में गंगा ऐसी मैली हो चुकी है कि उसके किनारे अपनी प्रतिमा बनने की बात सुनकर राम भी बहुत फिक्रमंद हैं कि रात-दिन इतने गंदगी कैसे बर्दाश्त करेंगे? (rajpathjanpath@gmail.com)

     

खेल

  • नांदगांव ब्यास ने की 1 के मुकाबले 3 गोल जीत दर्ज

    विकासखंड स्तरीय मैराथन दौड़ 12 को 

    धमतरी, 10 दिसंबर। खेल व युवा कल्याण विभाग द्वारा 12 दिसंबर को विकासखंड स्तरीय मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया है। विकासखंड क्रीड़ा प्रभारी मगरलोड ने बताया कि मैराथन में भाग लेने वाले इच्छुक प्रतिभागी धावक 10 दिसंबर तक शासकीय उमावि भोथीडीह में व्यायाम शिक्षक बेदराम साहू, मोहंदी स्कूल में आरके नेताम, करेली छोटी में आरके शुक्ला, हसदा नं. 1 में बिरेन्द्र साहू, अमलीडीह विद्यालय में गैंदलाल धीवर के पास पंजीयन करा सकते हैं। इसमें शामिल होने वाले धावकों को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति अनिवार्य रुप से लेकर पहुंचना होगा। दौड़ नपं मगरलोड के सामने सुबह 7 बजे शुरु होगी। मैराथन दौड़ की दूरी पुरुषों के लिए 10 किलोमीटर व महिलाओं के लिए 5 किमी रखी गई है। 
    विकासखंड स्तर पर प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले महिला-पुरुष प्रतिभागी (धावकों) को नकद राशि पुरस्कार स्वरुप दी जाएगी। 

कारोबार

  • विजय माल्या का प्रत्यर्पण ब्रिटेन की कोर्ट ने मंज़ूर किया

    लंदन, 10 दिसंबर। भारतीय कारोबारी विजय माल्या का प्रत्यर्पण ब्रिटेन के कोर्ट ने मंज़ूर कर दिया है। इसका मतलब ये कतई नहीं है कि विजय माल्या को तुरंत लंदन से भारत लाया जा सकेगा। मैजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने के लिए विजय माल्या के पास 14 दिनों का समय होगा।
    अगर संबंधित व्यक्ति अपील नहीं करता और विदेश मंत्री अदालत के फैसले से सहमत होते हैं तो वह व्यक्ति 28 दिनों के भीतर प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा।
    इससे पहले कोर्ट में सुनवाई के लिए जाते हुए माल्या ने कहा था, जो भी जजमेंट आएगा मेरी लीगल टीम उसका अध्ययन करेगी। वे उसके बाद उठाये जाने वाले कदमों पर ग़ौर करेंगे। हां मैंने ट्वीट कर कहा है कि मैं अपना सारा कजऱ् बैंकों, कजऱ्दाताओं को लौटाना चाहता हूँ, साथ ही अपने कर्मचारियों की बकाया सैलरी भी देना चाहता हूँ। कजऱ् लौटाने का इस प्रत्यर्पण केस से कोई संबंध नहीं है। ये दोनों बिल्कुल अलग-अलग मामले हैं।
    विजय माल्या मार्च 2016 से भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। उन पर आरोप हैं कि उन्होंने अपनी किंगफि़शर एयरलाइन कंपनी के बैंकों से कजऱ् लिया और उसे बिना चुकाए वे विदेश चले गए। कजऱ् की यह रकम करीब 10 हज़ार करोड़ रुपए बताई जाती है। किंगफि़शर एयरलाइन ख़स्ताहाल होने के बाद बंद हो चुकी है।
    अगर माल्या को भारत लाया जाता है तो उन्हें मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा। सुनवाई के दौरान इस जेल को भी बचाव पक्ष ने मुद्दा बनाया गया।
    बचाव पक्ष ने जेल की हालत बुरी होने का दावा करते हुए मानवाधिकारों के आधार पर मामले पर विचार करने की अपील की थी। जज ने इस संबंध में मुंबई की आर्थर रोड स्थित जेल का वीडियो मंगाया था और उसके बाद इस संबंध में और जानकारी की ज़रूरत होने से इनकार कर दिया था।
    12 सितंबर को विजय माल्या ने एक और दावा करके भारत में खलबली मचा दी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि 2016 में भारत छोडऩे से पहले उनकी वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाक़ात हुई थी। हालांकि वित्त मंत्री ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया था।
    समाचार एजेंसी पीटीआई ने ब्रिटेन में रह रही क़ानून विशेषज्ञ पावनी रेड्डी के हवाले से कहा है कि अगर जज सारी प्रक्रियागत ज़रूरतों से संतुष्ट होते हैं और पाते हैं कि प्रत्यर्पण में कोई वैधानिक रुकावट नहीं है तो वह मामले को विदेश मंत्री के पास भेज देंगे, जिनके पास प्रत्यर्पण पर फ़ैसला लेने का हक़ है।
    भारत सरकार माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी रही है। इसके लिए भारतीय एजेंसियाँ ब्रिटेन के कोर्ट में क़ानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।
    इसी साल सितंबर में लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में माल्या के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई हुई थी।
    कोर्ट में इस बात पर विचार किया गया था कि माल्या मामले की सुनवाई मुंबई में की जा सकती है या नहीं।
    उस समय कोर्ट की जज ने कहा था कि वे दिसंबर में इस मामले पर अपना फ़ैसला सुनाएंगी, उन्होंने यह भी कहा था कि कोर्ट भारतीय जेलों की हालत भी जानना चाहेगी।
    एक अलग मुक़दमे में माल्या की संपत्ति को पहले ही हर जगह फ्ऱीज़ किया जा चुका है, वहीं 13 भारतीय बैंक माल्या पर बकाए अपने दो बिलियन डॉलर वसूलने की कोशिश कर रहे हैं।
    माल्या का दावा है कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया और दावा कर रहे हैं कि वे अपना कजऱ् चुकाना चाहते हैं।
    वहीं कोर्ट में सुनवाई के बाद विजय माल्या ने यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि वे देश छोडऩे से पहले भारतीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे। हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया था कि वह कोई औपचारिक मुलाक़ात नहीं थी, वित्त मंत्री ने भी माल्या से किसी प्रकार की मुलाक़ात से इंकार किया था।
    माल्या को पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ़्तार किया गया था, लेकिन कुछ ही देर में उन्हें ज़मानत भी मिल गई थी। (बीबीसी)

सेहत/फिटनेस

  • क्या नाश्ता करना सचमुच फायदेमंद होता है?

    जेसिका ब्राउन
    पुरानी कहावत है-सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का खाना राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह का होना चाहिए। मतलब ये कि सुबह का नाश्ता भरपूर होना चाहिए। इससे आप को दिन भर दिमागी और शारीरिक मेहनत के लिए ऊर्जा मिल जाती है। नाश्ता न करना एशिया से लेकर अमरीका तक सेहत के लिए बुरा माना जाता है। जबकि दुनिया में बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं, जो सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं।
    तीन चौथाई अमरीकी ही नियमित रूप से सुबह का नाश्ता करते हैं। वहीं, केवल दो तिहाई ब्रिटिश नागरिक नियमित रूप से सुबह का नाश्ता करते हैं। ब्रेकफास्ट यानी रात भर भूखे रहने के सिलसिले को ब्रेक करना। हमारा शरीर रात में बदन में संचित ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर के विकास और पुनर्निर्माण में करता है।
    ब्रितानी डायटीशियन सारा एल्डर कहती हैं कि संतुलित नाश्ता करने से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। इससे हमें शरीर के विकास के लिए जरूरी प्रोटीन और कैल्शियम मिलते हैं।
    क्या सच में नाश्ता इतना जरूरी है?
    पर, अब विशेषज्ञों के बीच इस बात पर गहरे मतभेद उभर रहे हैं कि नाश्ते को इतनी अहमियत दी जाए या नहीं। हाल के दिनों में भूखे रहने का चलन बढ़ा है। फिर सुबह के नाश्ते में खाए जाने वाले डिब्बाबंद सेरेल्स में बहुत चीनी होने को भी लोग सेहत के लिए नुकसानदेह मानते हैं। एक रिसर्च ने तो सुबह के नाश्ते को खतरनाक तक करार दे दिया है।
    तो, आखिर सच क्या है? क्या दिन की शुरुआत करने के लिए नाश्ता जरूरी है? या फिर सुबह के नाश्ते के लिए सेरेल्स बेचने वाली कंपनियों की ये साजिश है?
    सुबह के नाश्ते को लेकर जो रिसर्च सबसे ज्यादा होती है वो है इसके मोटापे से ताल्लुक की। वैज्ञानिकों की इस बारे में अलग-अलग थ्योरी हैं। अमरीका में 50 हजार से ज्यादा लोगों पर हुई रिसर्च कहती है कि जो लोग सुबह भारी-भरकम नाश्ता करते हैं, उनका बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स संतुलित रहता है।
    इनके मुकाबले रात में देर से खाना खाने वालों का बीएमआई ज्यादा निकला। रिसर्चर कहते हैं कि नाश्ता करने से आप तसल्ली महसूस करते हैं। आपकी रोजाना की कैलोरी की खपत कम होती है। नाश्ते से हमारा खान-पान भी बेहतर होता है। सुबह के नाश्ते की चीजें अक्सर रेशे वाली और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इससे बाद के खानों को लेकर इंसुलिन की संवेदनशीलता भी बढ़ती है। ये डायबिटीज के मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन, इस रिसर्च से ये साफ नहीं हुआ कि ब्रेकफास्ट न करने की वजह से लोग मोटे हुए या उनकी ब्रेकफास्ट न करने की आदत और मोटापे का साथ होना महज इत्तेफाक था।
    52 मोटी महिलाओं पर इस बारे में अलग से रिसर्च हुई। ये सारी महिलाएं दिन भर में एक बराबर कैलोरी की चीजें लेती थीं। लेकिन, इनमें से आधी ही कैलोरी नाश्ते के रूप में लेती थीं। नतीजे के तौर पर सामने ये आया कि ब्रेकफास्ट की वजह से लोगों के वजन कम नहीं हुए। उनकी रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से मोटापा कम हुआ। कई महिलाओं के नाश्ता कम करने से भी वजन नहीं घटा।
    अब अगर वजन घटाने के लिए नाश्ता छोडऩे से काम नहीं चलेगा, तो मोटापे और ब्रेकफास्ट न लेने के बीच क्या रिश्ता है?
    ब्रिटेन की एबरडीन यूनिवर्सिटी की एलेक्जेंड्रा जॉन्सटन कहती हैं कि नाश्ते का परित्याग करने वाले अक्सर, इस खाने की अहमियत से नावाकिफ होते हैं। एलेक्जेंड्रा कहती हैं कि नाश्ता करने वालों में आदत होती है कि वो सेहतमंद चीजें खाएं। इससे उनकी सेहत पर अच्छा असर पड़ता है। जैसे कि सुबह नियमित रूप से नाश्ता करने वाले धूम्रपान नहीं करते।
    2016 में नाश्ते और वजन घटाने की मुहिम के बीच ताल्लुक को समझने के लिए हुए 10 तजुर्बों का जोड़ निकाल कर एक नतीजे पर पहुंचने की कोशिश हुई। इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि नाश्ता नियमित रूप से करने से वजन कम होता है।
    खाएं या व्रत रहें?
    रात भर भूखे रहकर सुबह खाने का चलन काफी बढ़ चला है। खास तौर से अपना वजन घटाने में जुटे लोगों के बीच। साल 2018 में एक स्टडी के मुताबिक कभी-कभार व्रत रहने से खून में चीनी की मात्रा संतुलित रहती है। इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ती है। ब्लड प्रेशर भी इससे कम होता है।
    तो, अगर नाश्ता न करना फायदेमंद है, तो क्या नाश्ता करना नुकसान करता है? कुछ रिसर्चर यही दावा करते हुए नाश्ते को खतरनाक बताते हैं।
    लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के खान-पान के विशेषज्ञ फ्रेडरिक कार्पे कहते हैं कि बात वो नहीं, जो लोग सोच रहे हैं। वो कहते हैं कि सुबह का नाश्ता तो स्किप करना ही नहीं चाहिए।
    सुबह का नाश्ता हमारे शरीर के मीटर को चालू करने के लिए बहुत अहम है। फ्रेडरिक कहते हैं कि हमारे शरीर की पेशियां खान-पान के प्रति अच्छा रिस्पॉन्स देती हैं। इसके लिए आप को कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट से शुरुआत करनी चाहिए। इंसुलिन जाए तो शरीर प्रतिक्रिया दे, इसके लिए ब्रेकफास्ट जरूरी है।
    नाश्ता न करने से हमारे शरीर की घड़ी यानी सिर्केडियन क्लॉक भी डिस्टर्ब हो जाती है। रात में देर से खाने पर शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ जाता है। जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते वो रात का खाना ढंग से खाते हैं। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो देर रात खाना खाते हैं। जो लोग रात में देर से खाना खाते हैं, उनके मोटे होने की आशंका बढ़ जाती है। वो दिल की बीमारियों और डायबिटीज के भी शिकार हो सकते हैं।
    तो, जानकारों का मानना है कि सुबह के नाश्ते से ज्यादा अहम रात का खाना है। एलेक्जेंड्रा कहती हैं कि हमारे खून में चीनी की तादाद सुबह सबसे संतुलित होती है। जब हम देर रात खाना खाते हैं, तो उस वक्त शरीर में चीनी की तादाद बढ़ जाती है। हालांकि वो ब्रेकफास्ट को छोडक़र डिनर पर जोर देने के लिए और रिसर्च की जरूरत बताती हैं।
    एलेक्जेंड्रा कहती हैं कि हमारी बॉडी क्लॉक असल में ऑर्केस्ट्रा की तरह है। एक मास्टर घड़ी है जो दिमाग में है। फिर दूसरी घडिय़ां शरीर के हर अंग में हैं। इन पर बाहर की रोशनी दूसरी बातों का असर पड़ता है। खाते वक्त आप को अच्छी रोशनी नहीं मिल रही है, तो इससे शरीर की घड़ी का संतुलत बिगड़ता है। तब शरीर के दो ऑर्केस्ट्रा एक-दूसरे से तालमेल कर के नहीं, बल्कि अपनी डफली अपना राग करने लगते हैं।
    अब किस वक्त खाने का क्या फायदा-नुकसान होता है, इस पर ब्रिटेन की सरे और एबरडीन यूनिवर्सिटी में रिसर्च हो रही है। फिर इसका मोटापे और मोटापे को काबू करने से ताल्लुक तलाशा जाएगा।
    सुबह के नाश्ते का ताल्लुक सिर्फ शरीर के वजन से नहीं। नाश्ता छोडऩे से दिल की बीमारियों के होने की आशंका 27 प्रतिशत बढ़ जाती है। डायबिटीज की आशंका 21 और 20 फीसदी आशंका दूसरी बीमारियों की हो जाती है। इसकी वजह शायद नाश्ते में छुपा सेहत का खजाना है। जो लोग सेरेल्स यानी ओट्स वगैरह खाते हैं, उन्हें इनके जरिए विटामिन, आयरन और कैल्शियम मिलते हैं, जो सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। ऐसी रिसर्च ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा और अमरीका में हो चुकी हैं।
    सुबह का नाश्ता करने से दिमाग बेहतर चलने की बात भी कही जाती है। इससे ध्यान लगाने और भाषा में महारत हासिल करने में भी मदद मिलती है। इससे याददाश्त बेहतर होने की बात भी एक रिसर्च में पता चली है।
    देखना ये होगा कि हम नाश्ते में क्या खाते हैं। जो लोग ज्यादा प्रोटीन और कैल्शियम वाला नाश्ता करते हैं। उन्हें इसका ज्यादा फायदा मिलता है। हलवा और पूरी-कचौरी वाले नाश्ते से तो हमें उतना पोषण मिलने से रहा।
    सुबह के नाश्ते में डिब्बाबंद चीजें न ही लें तो अच्छा। इनमें चीनी अलग से मिलाई गई होती है। इजराइल की तेल अवीव यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि सुबह की भूख पर काबू पाना आसान होता है। वैसे 54 रिसर्च का निचोड़ निकाल कर भी जानकार इस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं कि किस तरह का नाश्ता सेहत के लिए सब से अच्छा होता है।
    जानकारों का मानना है कि भले ही ये पता न हो कि नाश्ते में क्या खाया जाए, पर ये जरूर पता है कि खाया तभी जाए, जब भूख महसूस हो। जिन्हें सुबह भूख लग जाती है, वो नाश्ता जरूर करें। जो रात के वक्त भूख लगना महसूस करते हैं, वो डिनर अच्छे से करें। हर शरीर की अपनी खासियत होती है। उसके हिसाब से ही फैसला करना ठीक होगा। किसी एक खाने पर पूरी तरह से निर्भरता ठीक नहीं। चाहे वो डिनर हो या ब्रेकफास्ट। संतुलित ब्रेकफास्ट और संतुलित डिनर की सलाह तो सभी जानकार देते हैं। (बीबीसी)

     

सामान्य ज्ञान

  • हर दिन हॉट शीट 10 दिसंबर

    1. प्रकाश तरंग किस प्रकार की तरंग है?
    (अ) अनुप्रस्थ तरंग (ब) अनुदैध्र्य तरंग (स) अनुप्रस्थ और अनुदैध्र्य तरंग दोना (द) इनमें से कोई नहीं
    2. निम्नलिखित में से किस घटना के आधार पर प्रकाश तरंगों के अनुप्रस्थ होने की पुष्टि होती है?
    (अ) न्यूटन के द्वारा (ब) हाइगेन्स के द्वारा (स) प्लांक के द्वारा (द) फैराडे के द्वारा
    3. निम्नलिखित में से कौन सी घटना प्रकाश और ध्वनि दोनों में घटित नहीं होती है?
    (अ) विवर्तन (ब) धु्रवण (स) परावर्तन (द) अपवर्तन
    4. किसी अवरोध की कोर (किनारे) के प्रकाश का मुडऩा क्या कहलाता है?
    (अ) विक्षेपण (ब) विवर्तन (स) अपवर्तन (द) व्यतिकरण
    5. लोकसभा का कार्यकाल?
    (अ) किसी परिस्थिति में नहीं बढ़ाया जा सकता (ब) एक बार में छह महीने तक के लिए बढ़ाया जा सकता है (स) आपातकाल की घोषणा के दौरान एक बार में एक वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है (द) आपातकाल की घोषणा के दौरान एक बार में दो वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है
    6. लोकसभा का पहला आमचुनाव कब हुआ था?
    (अ) 1949 में (ब) 1952 में (स) 1950 में (द) 1954 में
    7. राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में कितने व्यक्ति मनोनीत किए जाते हैं?
    (अ) 10 (ब) 15 (स) 12 (द) 20
    8. यदि सरकार राज्यसभा में पराजित हो जाए, तो क्या होता है?
    (अ) प्रधानमंत्री त्यागपत्र दे देता है (ब) संसद भंग हो जाती है (स) राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है (द) इनमें से कोई नहीं
    9. समस्त रेडियो सक्रिय पदार्थ क्षय होने के पश्चात किसमें अंतिम रूप से बदल जाते हैं?
    (अ) कोरेण्डम (ब) सीसा (स) कैडमियम (द) जस्ता
    10. किस रेडियोएक्टिव तत्व का नाम उसके खोजकर्ता के देश के नाम पर रखा गया है?
    (अ) रेडियम (ब) यूरेनियम (स) पोलोनियम (द) पेलेडियम
    11. निम्नलिखित देशों में से उच्चतम जनसंख्या वृद्धि दर है?
    (अ) इंडोनेशिया की (ब) जापान की (स) फिलीपीन्स की (द) सिंगापुर की 
    12. बाहट किस देश की मुद्रा है?
    (अ)तुर्की की (ब)थाइलैंड की (स) वियतनाम की (द) ईरान की 
    13. ढाका नगर डेल्टा प्रदेश की किस नदी के तट पर बसा है?
    (अ) पद्मा (ब) मेघना (स) जमुुना (द) मधुमती
    14. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पाकिस्तान में नहीं बहती है?
    (अ) व्यास (ब) रावी (स) चिनाब (द) सतलज
    15. दक्षिण-पूर्वी एशिया में क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा देश है?
    (अ) म्यांमार (ब) इंडोनेशिया (स) थाईलैंड (द) सिंगापुर
    16. भारतीय संविधान के अनुसार अवशिष्ट शक्तियां किसको सौंपी गई है?
    (अ) राष्ट्रपति (ब) संघीय संसद (स) राज्य विधानमंडल (द) राज्यपाल
    17. भारतीय संविधान में केंद्र व राज्य सरकारों के कार्यक्षेत्र को संघ सूची और समवर्ती सूची द्वारा स्पष्ट किया गया है, जो कार्य इन सूचियों में वर्णित नहीं है, वह किसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं?
    (अ) राज्य के (ब) संघ के (स) संघ व राज्य के (द) किसी के कार्यक्षेत्र में नहीं
    18. इनमें से किसे श्वेत हाथियों का देश कहा जाता है?
    (अ) थाइलैंड (ब) कुवैत (स) दक्षिण अफ्रीका (द) भारत 
    19. किस देश के डाक टिकट पर हेलवेशिया लिखा होता है?
    (अ) फिनलैंड (ब) स्पेन (स) स्विट्जरलैंड (द) ऑस्ट्रिया
    20. जियाना- किस देश की संवाद एजेंसी है?
    (अ) लीबिया (ब) जिम्बाब्वे (स) सूडान (द) मोरक्को
    21. निम्नलिखित में से कौन सा एक रेडियाधर्मी पदार्थ नहीं है?
    (अ) यूरेनियम (ब) रेडियम (स) प्लूटोनियम (द) सोडियम 
    22. पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित करने का उद्देश्य सुनिश्चित करना है?
    (अ) महिलाओं व बच्चों का आर्थिक कल्याण (ब) ग्रामीण समाज में लिंग समानता (स) सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी (द) व्यक्तिगत रूप से महिलाओं का सशक्तिकरण
    23. लोकायुक्त व उपलोकायुक्त अधिनियम सर्वप्रथम पारित किया गया?
    (अ) महाराष्टï्र में (ब) पश्चिम बंगाल में (स) कर्नाटक में (द) उड़ीसा में
    24. भारत में स्थानीय स्वशासन का पिता किसे कहा जाता है?
    (अ) महात्मा गांधी (ब) लॉर्ड कैनिंग (स) लॉर्ड रिपन (द) लॉर्ड वैलेजली
    25. अशोक मेहता समिति ने निम्नलिखित में से किसकी स्थापना की सिफारिश की?
    (अ) नगर पंचायत की (ब) पंचायत समिति की (स) मंडल पंचायत की (द) ग्राम पंचायत की 
    26. प्रतिवर्ष उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है?
    (अ) 1 अप्रैल (ब) 23 अक्टूबर (स) 15 मार्च (द) 5 दिसम्बर
    27. विश्व स्वास्थ्य दिवस कब मनाया जाता है?
    (अ) 7 अप्रैल को (ब) 9 अप्रैल को (स) 18 अप्रैल को (द) 20 अप्रैल को   
    28. मेयर इन काउंसिल प्रकार की सरकार का अर्थ है?
    (अ) म्यूनिसिपल स्तर पर मंत्रिमंडल प्रकार की सरकार (ब) म्यूनिस्पल स्तर पर परंपरागत प्रीफेक्ट प्रकार की सरकार (स) मेयर अपने सहकर्मी के प्रति उत्तरदायी नहीं होता (द) म्यूनिसिपल स्तर पर राष्टï्रपति प्रकार की सरकार
    29. अफ्रीका के निम्नलिखित में से किस अश्वेत राष्ट्र को सर्वप्रथम स्वाधीनता मिली?
    (अ) माली (ब) घाना (स) चाड (द) नाइजर 
    ---
    सही जवाब- 1.(अ) अनुप्रस्थ तरंग, 2.(स) प्लांक के द्वारा, 3. 3.(ब) धु्रवण, 4.(ब) विवर्तन, 5.(स) आपातकाल की घोषणा के दौरान एक बार में एक वर्ष तक के लिए बढ़ाया जा सकता है, 6.(ब) 1952 में, 7.(स) 12, 8.(द) इनमें से कोई नहीं, 9.(ब) सीसा, 10.(स) पोलोनियम, 11.(अ) इंडोनेशिया की, 12.(ब) थाइलैंड की, 13.(अ) पद्मा, 14.(अ) व्यास,  15.(ब) इंडोनेशिया, 16.(ब) संघीय संसद, 17.(ब) संघ के, 18.(अ) थाइलैंड, 19.(स) स्विट्जरलैंड, 20.(ब) जिम्बाब्वे, 21.(द) सोडियम, 22.(द) व्यक्तिगत रूप से महिलाओं का सशक्तिकरण, 23.(द) उड़ीसा में, 24.(ब) लॉर्ड कैनिंग, 25.(ब)पंचायत समिति की, 26.(स)15 मार्च, 27.(अ)7 अप्रैल को, 28.(अ)म्यूनिसिपल स्तर पर मंत्रिमंडल प्रकार की सरकार, 29.(ब) घाना।

     

अंग्रेज़ी

  • Myth and Reality

    Case 1: 
    "Ma'm if I don't get Married to this guy, I will never get a guy. Ma'm shaadi Ho jaye sab theek Ho jayega" 
    Case 2: 
    "Ma'm I have become violent and angry because of my fiancee, she has driven me Mad. Ma'm shaadi Ho jaye sab theek Ho jayega" 
    Case 3: 
    "Ma'm I don't feel treated well by my future husband, But family Says Shaadi kar le, sab theek Ho jayega"

    The worst Myth about Mental-llnesses:
    #Myth
    1) Get him /Her Married OR have children and He/She shall start leading a Fully responsible and Normal Life.

    #Facts: Pl Understand 
    A) Someone who is diagnosed with Disorders like Bipolar or Personality Disorders or Schizophrenia etc. (IN short Psychoses OR Severe Mental Illnesses) needs to be treated, rehabilitated IN various areas of the required LikeSkills, SelfAcceptance and Socialization process with the help of 360 degree Family and Social support. Post these interventions initiating a Relationship or Marriage or any other kind of added responsiblity Or association can be looked into.

    b) Someone who has been Diagnosed with Anxiety, Depression, Phobias, Fears etc. (IN short Neuroses or Common Mental Disorders) also requires regular help and support. Plans like Marriage, bearing children or taking up some big responsibility OR accountability can further aggravate the condition and trigger a more severe form of Illness in future.

    In both #Neuroses or #Psychoses #DearIndians (settled in Rural or cities), getting a person married, taking up parenthood or initiating a fullfledged Responsibility like Job or work is not the #Solution. Basic needs fulfillment can be looked into after the proper Treatment or along with Treatment measures as the Clients gets ready over the period of time. Just like Flu, Heart condition or Malaria... Mental Illnesses also require Treatment, Preventive, AfterCare as well as Support.

    Let's stop following these Age old blind #MythicalBeliefs and start accepting the #ProgressiveFacts. Asking or receiving Help is not a Weakness or a Sign of it. In fact it's part of #SelfCare and wanting to have a better Life. 
    (Inspired by three real Cases wherein the girl/boy and their Families are Stuck in this Myth, and are on the Verge of getting married their kids thinking that's the Solution. Despite Doctors saying No-No-No)
    Nimisha Rastogi
     Mind Life Consultant
    Ahmedabad · 

फोटो गैलरी


विडियो गैलरी