अंतर्राष्ट्रीय

  • पाक में लॉकडाउन न लागू करने पर क्यों अड़े हुए हैं इमरान
    पाक में लॉकडाउन न लागू करने पर क्यों अड़े हुए हैं इमरान

    इकबाल अहमद
    इस्लामाबाद, 5 अप्रैल। शनिवार (4 अप्रैल) रात 12 बजे तक पाकिस्तान में कोरोना वायरस के 2820 मामलों की पुष्टि हुई है और अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज़्यादा असर पंजाब प्रांत में है जहां अब तक 1131 मामलों की पुष्टि हुई है।
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि पूरे पाकिस्तान में लॉकडाउन लागू नहीं किया जा सकता है।
    जंग अखबार के अनुसार शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए इमरान खान ने कहा कि 22 करोड़ लोगों को बंद नहीं किया जा सकता है।
    इमरान का कहना था, कोई ये न समझे कि पाकिस्तान में कोरोना का ख़तरा नहीं है। लेकिन 22 करोड़ लोगों को बंद नहीं कर सकते, ये नामुमकिन चीज़ है। पाकिस्तान में एक तरफ़ कोरोना दूसरी तरफ़ भूख है। खौफ है कि यहां लोग भूख से मर जाएंगे। सिफऱ् उन्हीं जगहों पर पूरी तरह लॉकडाउन लागू किया गया है जहां भीड़ जमा होने की आशंका है।
    इमरान ने आम लोगों से पूरा एहतियात बरतने की अपील की और कहां कि 14 अप्रैल को इस पर दोबारा विचार विमर्श किया जाएगा कि आगे क्या क़दम उठाया जाए।
    शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान भी लोग अपने घरों में ही रहें और मस्जिदों में भीड़ नहीं दिखी।
    अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार सरकार ने मस्जिद में नमाज़ अदा करने पर पाबंदी लगा दी है या किसी-किसी मस्जिद में तीन से पाँच लोगों को जाने की इजाज़त दी है।
    पाकिस्तान में नमाज पढऩे के लिए झड़प
    लेकिन कराची की एक मस्जिद में जुमे की नमाज़ के दौरान ज़्यादा लोगों के पहुंचने के कारण पुलिस से झड़प हो गई जिसमें कई लोग जख़़्मी हो गए। पुलिस ने मस्जिद कमेटी के चार लोगों को गिरफ़्तार कर लिया और कई लोगों के ख़िलाफ़ केस भी दर्ज किया है।
    अब एक ख़बर पाकिस्तान की जेल में बंद चरमपंथी अहमद उमर सईद शेख की।
    अहमद उमर सईद शेख़ की रिहाई के आदेश पर पाकिस्तान सरकार ने फि़लहाल पाबंदी लगा दी है और उन्हें तीन महीने के लिए दोबारा गिरफ़्तार कर लिया है। अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार सरकार ने सिंध हाईकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी फ़ैसला किया है।
    अहमद उमर सईद शेख़ को अमरीकी खोजी पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या का दोषी पाते हुए पाकिस्तान की एक अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी।
    डेनियल पर्ल को साल 2002 में कराची से अग़वा कर बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। उस समय 38 साल के डेनियल पर्ल द वॉल स्ट्रीट जर्नल के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख थे।
    अदालत ने उमर के तीन साथियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी। लेकिन अब 18 साल बाद पाकिस्तान के सिंध हाईकोर्ट ने उमर शेख़ को केवल अपहरण का दोषी पाया है और हत्या के जुर्म से बरी कर दिया।
    उमर को अपहरण के लिए सात साल की सज़ा को हाईकोर्ट ने बरकऱार रखा लेकिन चूंकि वो ये सज़ा पूरी कर चुके हैं इसलिए अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दे दिया। उमर के तीन साथियों को अदालत ने बरी कर दिया है।
    अमरीका ने जताई थी नाराजगी
    हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद अमरीका ने नाराजग़ी जताई थी और इसे अपमानजनक कऱार दिया था। अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार अमरीकी विदेश विभाग में दक्षिण एशिया मामलों की प्रमुख एलिस वेल्स ने कहा था, डैनियल पर्ल की हत्या के दोषियों की सज़ा पलटना दहशतगर्दी को बढ़ावा देना है। 
    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भी अदालत के फ़ैसले पर हैरानी जताई थी।
    अख़बार नवा-ए-वक्त के अनुसार, अमरीकी ख़ुफिय़ा विभाग सीआईए के दबाव के कारण पाकिस्तान ने उमर शेख़ की तत्काल रिहाई पर रोक लगा दी है।
    सिंध की प्रांतीय सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा कि उमर शेख़ और उनके साथियों को क़ानून-व्यवस्था बिगडऩे की आशंका के कारण रिहा नहीं किया जा सकता।
    उमर शेख़ उस समय ज़्यादा सुर्खय़िों में आए जब भारतीय विमान आईसी-814 को 1999 में अपहरण कर कंधार ले जाया गया।
    उस विमान में सवार यात्रियों की रिहाई के लिए अपहरणकर्ताओं ने जिन तीन लोगों की रिहाई की मांग की थी उसमें एक नाम उमर शेख़ का था।
    भारत ने उमर शेख के अलावा मसूद अजहर और मुश्ताक जरगर को छोड़ दिया था। ये तीनों चरमपंथी उस समय भारतीय जेलों में बंद थे।
    उमर शेख़ पर भारत में कुछ विदेशी नागरिकों के अपहरण का आरोप था और वो उस समय गाजियाबाद जेल में बंद थे। (बीबीसी)

राष्ट्रीय

  • कोरोना के खिलाफ एकजुट भारत, मोदी की अपील के बाद घरों के बाहर जलाए दीये और मोमबत्ती
    कोरोना के खिलाफ एकजुट भारत, मोदी की अपील के बाद घरों के बाहर जलाए दीये और मोमबत्ती

    नई दिल्ली, 5 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद देशभर के लोगों ने रविवार रात 9 बजे कोरोनावायरस के खिलाफ एकजुटता दिखाई। लोगों ने इस दौरान घरों के लाइट बंद कर दिए और कैंडल और दीये जलाए। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तेलंगाना के सीएम केसीआर, बाबा रामदेव, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दीये जलाकर कोरोना के खिलाफ एकजुटता दिखाते नजर आए। इस दौरान देश के कई शहरों में दिवाली जैसा नजारा दिखा। बता दें कि लोगों ने दीये के साथ-साथ पटाखे भी जलाए। कई जगहों से पटाखों की आवाजें भी सुनाई पड़ीं। (एनडीटीवी)

राजनीति

  • शिवराज सिंह चौहान को ही मिलेगी मध्य प्रदेश की कमान
    शिवराज सिंह चौहान को ही मिलेगी मध्य प्रदेश की कमान

    शिवराज सिंह चौहान को ही मिलेगी मध्य प्रदेश की कमान

    हेमंद्र शर्मा/रवीश पाल सिंह
    भोपाल, 23 मार्च :
    मध्य प्रदेश की कमान एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान के हाथों में जा सकती है. सूत्रों से खबर है कि शिवराज सिंह चौहान को आज विधायक दल का नाम चुन लिया जाएगा. विधायक दल की इस बैठक की निगरानी ऑब्जर्वर दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करेंगे.
    वहीं मध्य प्रदेश में सियासी घमासान के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है. इसके साथ ही राजभवन ने मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के लिए रात 9 बजे का वक्त दिया है. रात 9 बजे मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली जाएगी.
    इसके बाद शिवराज सिंह चौहान आज शाम चौथीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. कोरोना वायरस के कारण शपथ ग्रहण सादगी के साथ होगा. राजभवन के भीतर शपथ की तैयारी शुरू हो गई है. उनके साथ मिनी कैबिनेट भी शपथ ले सकती है. माना जा रहा है कि इस शपथ ग्रहण में कम ही लोग हिस्सा लेंगे.
    चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगे शिवराज
    शिवराज सिंह चौहान अगर आज सीएम पद की शपथ लेते हैं तो वह चौथीं बार मध्य प्रदेश की कमान संभालेंगे. पहली बार वह 29 नवंबर 2005 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद वह 12 दिसंबर 2008 में दूसरी बार सीएम बने. 8 दिसंबर 2013 को शिवराज ने तीसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी.
    क्यों गिरी थी कमलनाथ सरकार
    हाल में ही मध्य प्रदेश से कमलनाथ सरकार की विदाई हुई है. दरअसल कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. इसमें 6 मंत्री शामिल थे. स्पीकर ने मंत्रियों का इस्तीफा कबूल कर लिया था, लेकिन 16 विधायकों का इस्तीफा कबूल नहीं किया था. विधायकों के इस्तीफे के कारण कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी, लेकिन फ्लोर टेस्ट कराने की बजाए सदन को स्थगित कर दिया गया था.
    SC के आदेश के बाद कमलनाथ का इस्तीफा
    इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ सरकार को तुरंत फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया. आदेश के बाद स्पीकर ने सभी 16 विधायकों का इस्तीफा मंजूर किया और फ्लोर टेस्ट पहले ही कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
    सिंधिया ने बिगाड़ा कमलनाथ का खेल
    कमलनाथ सरकार पर संकट के बाद उस दिन से मंडराने लगे थे, जब कांग्रेस पार्टी से कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का मोहभंग हो गया. सिंधिया के करीबी विधायक बेंगलुरु चले गए और सिंधिया दिल्ली आए. फिर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इसके बाद सिंधिया ने बीजेपी ज्वॉइन कर लिया. (aajtak)

संपादक की पसंद

संपादकीय

  • दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 5 अप्रैल :  तांत्रिक हत्याएं क्यों नहीं होंगी, इस अंधविश्वासी हिंदुस्तान में?
    दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 5 अप्रैल : तांत्रिक हत्याएं क्यों नहीं होंगी, इस अंधविश्वासी हिंदुस्तान में?

    छत्तीसगढ़ के सरगुजा इलाके से सुबह-सुबह ही दिल दहलाने वाली खबर आई, एक आदमी ने आधी रात अपनी माँ और तीन बुजुर्ग पड़ोसियों का कत्ल कर दिया, कई बैल और मुर्गे काट डाले। यह सब एक तांत्रिक पूजा के बाद किया बताया जा रहा है। देश में जगह-जगह तांत्रिक पूजा, और बलि के नाम पर कत्ल की कई वारदातें सामने आती हैं, छत्तीसगढ़ में हर महीने ही ऐसा कुछ-ना-कुछ होते ही रहता है। इससे परे महिलाओं को टोनही कहकर मारना भी छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में बहुत बार होता है। इक्कीसवीं सदी चल रही है, इस देश में कहीं जाति के नाम पर, कहीं धर्म के नाम पर, कहीं सगोत्र विवाह करने पर, तो कहीं दूसरी जाति में विवाह करने पर कत्ल किए जाते हैं, और लोग उन्हें इज्जत के लिए किए गए कत्ल भी कहते हैं, ऑनर -किलिंग!

    देश में पढ़ाई-लिखाई, राजनीतिक-चेतना, और शहरीकरण के साथ लोगों की सोच में जो वैज्ञानिकता आनी थी, वह आनी तो दूर रही, रही-सही भी बुरी तरह घटती दिख रही है। अब लोग और अधिक कट्टर, धर्मांध, नफरतजीवी होते दिख रहे हैं। वैज्ञानिकता के साथ एक दिक्कत है, जब वह जाती है, तो पूरी तरह से जाती है, और अन्धविश्वास बारात लेकर आता है, डेरा जमा लेता है, घरजमाई होकर बैठ जाता है। आप लोगों से गणेश को दूध पिलवा दें, उनके भीतर की वैज्ञानिकता चल बसती है,  फिर उनसे आगे चलकर दूसरे पाखंड करवाना आसान हो जाता है। हिंदुस्तान में हम देखते हैं कि कुछ ताकतें लगातार बीच-बीच में परखती रहती हैं कि लोगों में सोचने-समझने की ताकत बची हुई तो नहीं है? ऐसा हो तो फिर कोई और पाखंड खड़ा कर दिया जाता है। जैसे कोरोना पॉजिटिव मरीज की बार-बार जाँच करके देख लिया जाता है कि कोरोना चल बसा है या नहीं, उसी तरह हिंदुस्तान में राजनीतिक ताकतें, धर्मांध ताकतें बार-बार देख लेतीं हैं कोई वैज्ञानिकता बच तो नहीं गई है। इसके लिए अन्ना हजारे, श्री-श्रीरविशंकर, बाबा रामदेव, सदगुरु, बलात्कारी आसाराम जैसे कई लिटमस पेपर इस्तेमाल किए जाते हैं। आसाराम जब लोगों को ऐसा पाते हैं कि वे अपनी नाबालिग लड़की को भी ऐसे बाबा के पास छोड़ सकते हैं, तो फिर यह समाज की एक अच्छी परख  हो जाती है कि यह समाज, यह देश अब और अधिक दूर तक बेवकूफ बनाने के लायक फिट है। फिर राम-रहीम नाम का एक और लिटमस पेपर और लोगों से बलात्कार करके, मर्दों को बधिया बनाकर और परख लेता है। ये सारे लोग फिर निर्मल बाबा की तरफ भी देखते रहते हैं कि लोग वहां मोटा भुगतान करके बेवकूफ बनने का सर्टिफिकेट खरीद रहे हैं या नहीं। 

    नेहरू ने इस देश में बड़ी कोशिश करके जो वैज्ञानिक सोच विकसित की थी, उसे तबाह करना तो उनकी बेटी ने ही मचान पर टंगे देवरहा बाबा के पाँव तले अपना सर धरकर शुरू कर दिया था, और बाद में बहुत सी पार्टियों ने, बहुत से नेताओं ने यही काम किया. और तो और दिग्विजय सिंह जैसे धर्मान्धता-विरोधी नेता भी आसारामों जैसों के चरणों में बिछते रहे, गलत मिसालें कायम करते रहे। अभी-अभी दिल्ली में मुस्लिमों के एक संगठन ने जिस तरह कोरोना-चेतावनी को अनदेखा करके, खतरे को अनसुना करके पूरे देश पर कोरोना-खतरे को दुगुना कर दिया है, वह वैज्ञानिक सोच पर अन्धविश्वास, धर्मान्धता की जीत रही। 

    जब देश की सोच से तर्क निकाल दिए जाएँ, सवाल निकाल दिए जाएँ, तो फिर उस खाली जगह पर अन्धविश्वास, धर्मान्धता तेजी से घुसकर काबिज हो जाते हैं। ऐसे में पहले से जिनकी आस्था अंधविश्वासों पर हो, वे तो अपनी इस सोच को और पुख्ता बना बैठते हैं। इसी सरगुजा में पिछली भाजपा सरकार के गृहमंत्री जिस तरह से एक कम्बल-बाबा के कम्बल में किए जाने वाले इलाज को स्थापित करते रहे, उससे बाकी पाखंडियों को और बाजार मिला। बीती रात सरगुजा में जो इतने क़त्ल हुए, वे उसी किस्म के बाजार की उपज हैं, वे रातों-रात नहीं हुए हैं, वे लंबी मेहनत की फसल की उपज हैं। फिलहाल आज रात दिए जलते देखने की तैयारी करें।
    -सुनील कुमार

स्थायी स्तंभ

  • छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : निजामुद्दीन से हिन्दू नाम कैसे?
    छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : निजामुद्दीन से हिन्दू नाम कैसे?

    कुछ लोग इस बात से हैरान परेशां हैं कि वे दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में गए थे लेकिन तबलीग़ी जमात की मरकज में नहीं गए थे, फिर भी उनका फ़ोन नंबर दिल्ली पुलिस ने राज्य पुलिस को भेज दिया है कि उनकी सेहत पर नजर रखी जाये. दरअसल मरकज में जितनी बड़ी संख्या में लोग थे, और उनसे देश बाहर में जिस तरह कोरोना फ़ैल रहा है, उसे देखते हुए, पुलिस ने उस इलाके में उन नाजुक दिनों में जाने वालों के नंबर भी मोबाइल टावर लोकेशन हिस्ट्री से निकाल लिए हैं और राज्यों को भेज दिए हैं. इस लिस्ट में छत्तीसगढ़ के हिन्दू भी हैं, आदिवासी भी हैं, सभी लोग हैं, क्योंकि कोरोना मज़हब पूछ-पूछकर नहीं दबोच रहा. इस लिस्ट में देश भर के दसियों हज़ार लोग हैं, और उनमें से वक़्त, उस इलाके में ठहरने, या वहां वक़्त गुजरने के हिसाब से खतरे में पड़े लोगों के नंबर छांटे गए हैं. 

    बेशर्मी की भला कैसी सीमा?
    एक तरफ देश भर से ख़बरें आ रही हैं कि कि़स तरह डॉक्टर, नर्सें, पुलिसवाले और दूसरे लोग घर के बाहर रह रहे हैं, दरवाजे के बाहर से खाना खा रहे हैं, होटलों में सो रहे हैं क्योंकि वे रूबरू कोरोना से ऐसे जूझ रहे हैं कि परिवार को उनसे ख़तरा हो सकता है. छत्तीसगढ़ की राजधानी की एक संपन्न कॉलोनी में बैठे यह टाइप करते हुए एक बहुत बूढ़ा सफाई कर्मचारी नाली साफ़ करने के लम्बे-लम्बे बांस लिए जुटा दिख रहा है, सूनी सड़कों पर भी एक महिला झाड़ू लगती दिख रही है. ऐसे में देश भर में इन कर्मचारियों के परिवार के कई लोग भी मदद कर रहे हैं, छत्तीसगढ़ में पुलिस-परिवारों की महिलाएं सिलाई मशीनों पर मास्क सिलते दिख रही हैं. सिख समाज, जैन समाज सहित बहुत से लोग लोगों को खाना पहुंचाने में लगे हुए हैं. लेकिन इस बीच म्युनिसिपल परेशान है कि बहुत से करोड़पति भी फ़ोन करके खाना बुला रहे हैं कि उनके घर खाना बनाने वाली नहीं आयी है. बेशर्मी की कोई हद नहीं होती है. जब कुछ दूसरे लोग जान को खतरे में डालकर जरूरतमंदों की मदद को निकले हुए हैं, तब बहुत से रईस इस तरह बेईमानी कर रहे हैं ! वैसे भी यह पैसेवालों की बीमारी है जो गरीबों पर लाद दी गयी है !(rajpathjanpath@gmail.com)

सेहत/फिटनेस

  • भोजन में जरूर शामिल करें ये 5 सब्जियां, नहीं रहेगी पोषण की कमी
    भोजन में जरूर शामिल करें ये 5 सब्जियां, नहीं रहेगी पोषण की कमी

    जब सारा परिवार साथ होता है, तो उनके लिए संतुलित आहार बनाने का सुख ही कुछ और है। इन दिनों आप अपने घर के भोजन में हरी सब्जियों को जरूर शामिल करें। ये पोषण से भरपूर होती हैं।    

    1-पालक एक तरह से हरी सब्जियों में सुपरवेजिटेबल कही जा सकती है। इसमें विटामिन ए, सी, फोलिक एसिड, कैल्शियम वगैरह क्य नहीं होता। इसे आप दाल में मिलाएं, पालक के कोफ्ते बनाएं, पालक पनीर तो सबका फेवरिट होता ही है, पालक को हल्का उबालकर उसे आटे में मिलाकर भरवां पराठे बनाएं। 
     
    2-खीरा गर्मियों के लिए तो रामबाण मानिए। विटामिन ई से भरपूर खीरा त्वचा को निखारता है। शरीर में नमी बनाए रखता है और कब्ज में राहत देता है। खीरे का रायता, खीरे का सलाद या फिर यूं ही स्नैक्स के तौर पर खाएं। इसे वजन कम करने वाली डाइट में शामिल किया जाता है।
     
    3-ब्रोकोली को डायबिटीज में आदर्श आहार माना जाता है। इसे कैंसररोधी कहा जाता है। इसे हल्का चलाते हुए ही पकाएं। इसे एग भुर्जी में डालें। इमली, मसाले व काली मिर्च और करी पत्ता डालकर चटपटा बनाएं या चीज के साथ सैंडविच में लगाकर दें।
     
    4-परवल रक्त को शुद्ध करता है। शुगर के मरीजों को खासतौर पर परवल खाने की सलाह दी जाती है। परवल में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो असमय बुढ़ापे के लक्षणों को दूर रखते हैं। भरवां परवल या आलू-परवल की सब्जी का तो जवाब ही नहीं है स्वाद में।

    5-जुकीनी भी पोषण के मामले में कम फायदेमंद नहीं है। इस सब्जी की अच्छी बात यह है कि फ्रिज में यह काफी दिन टिकी रह जाती है और इसे आप सब्जी या सलाद, दोनों तरह से खा सकते हैं। इसमें पेक्टिन नामक तत्व पाया जाता है, जो शोधों की मानें तो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसमें खूब फाइबर होता है, इसीलिएइसे वजन कम करने वाली डाइट में शामिल किया जाता है। हाईबीपी व एस्थमा के रोगियों के लिएभी यह अच्छी होती है।

     

     

     

मनोरंजन

  • मुकेश खन्ना की सोनाक्षी को दो टूक जरूर देखें रामायण और महाभारत
    मुकेश खन्ना की सोनाक्षी को दो टूक जरूर देखें रामायण और महाभारत

    सेलेब्स की जनरल नॉलेज कई बार मजाक का पात्र बनी है। फिर चाहे वो आलिया भट्ट हों या हों सोनाक्षी सिन्हा। दोनों ने कई मौकों पर ऐसी बाते की है जिसके चलते उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल होना पड़ा। अब एक्टर मुकेश खन्ना ने भी सोनाक्षी सिन्हा पर निशाना साधा है। उन्होंने इशारों में ही सोनाक्षी पर तंज कसा है।

    इस समय मुकेश खन्ना खासा खुश हैं क्योंकि लॉकडाउन के चलते लोगों को फिर टीवी पर रामायण और महाभारत देखने को मिल रही है। इसी बात को लेकर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की है, लेकिन साथ में सोनाक्षी सिन्हा को भी ये शो देखने की हिदायद दे दी है।

    मुकेश खन्ना ने कहा है कि रामायण और महाभारत का प्रसारण उन लोगों के लिए अच्छा है जिन्होंने ये पहले नहीं देखें हैं। वे कहते हैं- मुझे लगता है सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोगों को रामायण और महाभारत देखनी चाहिए जिन्हें हमारी पौराणिक कथाओं के बारे में कुछ नहीं पता है।

    पिछले साल सोनाक्षी सिन्हा को काफी ट्रोल किया गया था क्योंकि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं कि भगवान हनुमान संजीवनी बूटी किस के लिए लेने गए थे। सोनाक्षी से ये सवाल कौन बनेगा करोड़पति में पूछा गया था। अब इस संजीवनी बूटी वाले सवाल पर भी सोनाक्षी सिन्हा को लाइफलाइन लेनी पड़ गई थी। इसके चलते सोनाक्षी को काफी ट्रोल किया गया। वैसे मुकेश खन्ना हमेशा से ही टीवी पर दिखाई गईं महाभारत और रामायण को लेकर सख्त रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर इस बात का जिक्र किया है कि कई लोग सीरियल बनाने के नाम पर कुछ भी दिखाते हैं।

खेल

  • लारा ने सचिन को बताया महान
    लारा ने सचिन को बताया महान

    नई दिल्ली, 5 अप्रैल । वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा का मानना है कि सचिन तेंदुलकर उन महान खिलाडिय़ों में से एक है, जिनके साथ वह खेले हैं। लारा ने इंस्टग्राम पर कहा, सचिन तेंदुलकर हमारे शानदार खेल में महान खिलाडिय़ों में से एक हैं। सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट क्रिकेट में 16 साल की उम्र में डेब्यू कर लिया था। वह करीब 24 साल तक टेस्ट क्रिकेट खेले और दुनिया में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। सचिन तेंदुलकर के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 34,357 रन दर्ज हैं।

    ब्रायन लारा ने सचिन की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2004 में सिडनी में खेली गई 241 रनों की नाबाद का वीडियो भी शेयर किया। लारा ने सचिन की इस पारी को उनके टेस्ट करियर की सबसे अनुशासित और दृढ़ पारी बताया है और कहा है कि लोग भी सचिन की तरह ही अनुशासन में रहकर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ सकें।

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मुकाबले में सिडनी में सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए गए नाबाद 241 रन उनकी बेहतरीन यादगार पारियों में से एक है। सचिन तेंदुलकर ने 613 मिनट तक 436 गेंदों का सामना कर 33 चौकों की मदद से नाबाद 241 रन बनाए थे।

    ब्रायन लारा ने इस पारी के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 241 रनों की नाबाद अनुशासित और दृढ़ पारी की तरह ही हम जीवन में किसी भी चीज से लड़ सकते हैं।

    भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शुमार सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 53.78 की औसत से 15,921 रन बनाए हैं। उन्होंने वनडे क्रिकेट में 463 वनडे मैचों में 44.83 के औसत से 18,426 रन बनाए। सचिन के नाम 100 इंटरनेशनल शतक भी दर्ज हैं, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है।(लाइव हिन्दुस्तान)

कारोबार

  • फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड  ने प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए 5 करोड़
    फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड ने प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए 5 करोड़

    कर्मचारियों ने भी दिया एक दिन का वेतन

    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    भिलाईनगर, 5 अप्रैल। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 5 करोड़ दिए, वहीं सभी कर्मचारियों ने भी एक दिन का वेतन दिया है। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजीब भट्टाचार्य ने अपने कर्मचारियों को जारी एक संदेश में कहा है कि, कोविड-19 फैलने की वजह से वर्तमान में पूरा देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है और इस जानलेवा वायरस के फैलने को रोकने के लिए भारत सरकार एवं सभी राज्य सरकारों द्वारा समुचित सावधानिया बरती जा रही हैं।

    श्री भट्टाचार्य ने संदेश के माध्यम से कहा है कि-कोविड-19 से होने वाली हानियों को कम करने की दिशा में जारी समस्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन हेतु एफएसएनएल कृत संकल्पित है ।

    इस्पात मंत्रालय से प्राप्त अनुदेश को ध्यान में रखते हुए एफएसएनएल द्वारा निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के तहत प्रधान मंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष में पांच करोड़ की अनुदान राशि जमा की गई है। श्री भट्टाचार्य ने बताया कि एफएसएनएल  कर्मचारियों ने इस आपात स्थिति से निपटने के लिए एक दिन के वेतन का अनुदान उपरोक्त कोष में जमा करने हेतु सहर्ष अपनी स्वीकृति दी है।

     

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