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अंतरराष्ट्रीय

  • बाइडन ने अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में ली शपथ
    बाइडन ने अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में ली शपथ

       पहली महिला उपराष्ट्रपति बनीं कमला हैरिस  

    वॉशिंगटन, 20 जनवरी। जो बाइडेन ने अमेरिका के 46वें राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ लेली है. उनसे पहले कमला हैरिस ने देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. वह देश की 49वीं उपराष्ट्रपति हैं.उन्‍हें अमेरिका की पहली महिला उप राष्‍ट्रपति बनने का गौरव भी हासिल हुआ है.अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शपथ लेने के बाद कहा कि हम अमेरिका को एकजुट करेंगे. यह लोकतंत्र का दिन है, यह अमेरिका का दिन है. यह उम्मीद, दोबारा खड़े होने और हर चुनौती से निपटने का दिन है. बाइडेन ने कहा कि अमेरिका में हर व्यक्ति की आवाज सुनी जाएगी. अमेरिका विभाजनकारी, धार्मिक भेदभाव, नस्लवाद को खारिज कर अपना एकजुट चेहरा पेश करेगा.

    शपथ ग्रहण के पहले बाइडेन (Joe Biden) ने कहा है कि 'यह अमेरिका के लिए नया दिन है.'बाइडेन ने निवर्तमान राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के राष्‍ट्रपति के तौर पर कार्यकाल खत्‍म होने के बाद व्‍हाइट हाउस छोड़ने के बाद ट्वीट लिखा, ''यह अमेरिका के लिए नया दिन है.''शपथग्रहण समारोह के आयोजन स्थल पर तथा आसपास 25,000 से अधिक नेशनल गार्ड तैनात हैं, ताकि सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीके से हो सके.बाइडन और हैरिस शपथ से पहले गिरजाघर में प्रार्थना सभा में शामिल हुए. बाइडेन अमेरिका के इतिहास में सबसे अधिक उम्र के राष्ट्रपति हैं. अमेरिका के राष्‍ट्रपति का पद संभालने के बाद पहले दिन उठाए जाने वाले कदमों के अंतर्गत वाइडेन, कई मुस्लिम बहुल देशों से आगंतुकों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को खत्‍म कर देंगे और अमेरिका-मैक्सिको बॉर्डर पर होने वाली दीवार के निर्माण को रोकेंगे. अवैध अप्रवासन को रोकने के लिए डोनाल्‍ड ट्रंप ने यह दीवार बनाने का आदेश दिया था.

    बाइडेन शपथ लेने के बाद पेरिस जलवायु समझौते और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन से अमेरिका को फिर से जोड़ेंगे. बाइडेन शपथ लेने के बाद 17 आदेशों पर हस्‍ताक्षर करेंगे, वे निवर्तमान राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के मुकाबले आव्रजन,  पर्यावरण, कोविड-19 के खिलाफ जंग और अर्थव्‍यवस्‍था से जुड़े मुद्दों पर अलग राह अख्तियार करेंगे. (khabar.ndtv.com)

राष्ट्रीय

  • कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने पर केंद्र तैयार, किसान यूनियनों ने कहा- ऑफर पर विचार करेंगे
    कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने पर केंद्र तैयार, किसान यूनियनों ने कहा- ऑफर पर विचार करेंगे

    नई दिल्ली, 20 जनवरी। तीनों कृषि कानूनों पर सरकार और आंदोलनरत किसानों के बीच गतिरोध खत्‍म होता नजर आ रहा है. केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि वह कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए रोकने  के तैयार है. इस पर किसान संगठनों ने कहा है कि वे इस प्रस्‍ताव पर विचार करने को तैयार हैं.ऑल इंडिया किसान सभा पंजाब के नेता बालकरण सिंह बरार ने बातचीत में कहा, 'भारत सरकार ने 10वें दौर की बैठक में हमारे सामने एक नया प्रस्ताव रखा है, इसमें कहा गया है कि वह एक विशेष समिति गठित करने को तैयार है जो तीनों नए कानूनों के साथ-साथ हमारी सारी मांगों पर विचार करेगी. सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जब तक समिति समीक्षा पूरा नहीं कर लेती, तीनों नए कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित रखा जाएगा. हमने आज की बैठक में सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है. हम अब भी अपनी मांग पर कायम है कि तीनों नए कानून रद्द किए जाएं.

    उन्‍होंने कहा कि कल किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है जिसमें सरकार के प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी और इस पर अंतिम फैसला होगा. बरार ने कहा कि सरकार डरी हुई है और अपनी नाक बचाने के लिए रास्ते तलाश रही है. उन्‍होंने बताया कि कल हमारी दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ भी बैठक है, जिसमें 26 जनवरी के हमारे विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम को पर चर्चा होगी ट्रैक्टर रैली निकालने का हमारा फैसला अभी कायम है 22 जनवरी को दिन में 12:00 बजे अगली बैठक होगी.

    कीर्ति किसान यूनियन के नेता राजेंद्र सिंह ने कहा, 'सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कानून सस्पेंड कर दिया है. हम उस सस्पेंशन को और आगे एक्सटेंड करने के लिए तैयार हैं और इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देने के लिए भी तैयार हैं लेकिन हमने कहा कि हमारे शुरू से यह मांग है कि तीनों कानून रद्द किए जाएं. हमने एनआईए की तरफ से जो नोटिस जारी हुए हैं उस पर सख्त नाराजगी भी आज की बैठक में जताई है. सरकार ने कहा कि आप हमें लिस्ट दीजिए जिन लोगों का एनआईए की नोटिस दी गई है लिस्ट मिलने पर हम उनके खिलाफ नोटिस वापस लेने के लिए सोचेंगे. (khabar.ndtv.com)

राजनीति

  • दिग्विजय का मोदी को पत्र : विहिप राममंदिर के लिए पहले जुटाए गए चंदे का हिसाब दे
    दिग्विजय का मोदी को पत्र : विहिप राममंदिर के लिए पहले जुटाए गए चंदे का हिसाब दे

    भोपाल, 18 जनवरी | मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को राममंदिर के लिए पूर्व में जुटाए गए चंदे का हिसाब देने के लिए बाध्य करने का आग्रह किया है। सिंह ने खुद एक लाख 11 हजार 111 रुपये का चेक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि विहिप द्वारा 15 जनवरी, 2021 से अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए 44 दिनों के राष्ट्रव्यापी चंदा अभियान की शुरुआत की गई है। इसके पहले से भी भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए अनेक ज्ञात और अज्ञात लोगों द्वारा देश के अनेक स्थानों पर चंदा एकत्रित करने का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है।

    उन्होंने कहा, "भगवान राम, भारत सहित विश्व में कहीं भी रहने वाले प्रत्येक सनातनधर्मी की आस्था के केंद्र हैं और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद हम सब अयोध्या में शीघ्र ही भव्य राममंदिर देखना चाहते हैं।"

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने धर्म को निजी आस्था का विषय बताते हुए लिखा है कि "मध्यप्रदेश के राघौगढ़ में मेरे घर में 400 वर्षो से भगवान राम (राघौजी महाराज) का मंदिर है, जहां प्रतिदिन उनकी सेवा होती है। राम मेरे रक्त के कण-कण में मौजूद होने के बावजूद मैंने उनके नाम को अपनी राजनीति में कभी मिश्रित नहीं किया।"

    प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है, "मैं आपको यह भी अवगत कराना चाहता हूं कि कुछ संगठन बहुत बड़े पैमाने पर लाठी, बल्लम, तलवारें लेकर मंदिर निर्माण के लिए चंदा वसूल कर रहे हैं। सांप्रदायिक भावना भड़काने में लगे हैं। मध्यप्रदेश में इसकी वजह से तीन अप्रिय घटनाएं हो चुकी हैं तथा इससे सामाजिक ताने-बाने को क्षति हुई है।"

    पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा है, "आप देश के प्रधानमंत्री है। आप भलीभांति जानते हैं कि राममंदिर के निर्माण कार्य में अन्य धर्म के लोगों का कोई विरोध नहीं है। यह आपकी जिम्मेदारी है कि भगवान राम के मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा एकत्रित करने का जो कार्य हो रहा है, वह सौहार्दपूर्ण वातावरण में हो। आप ऐसे संगठनों को मंदिर निर्माण का चंदा एकत्रित करने से तत्काल रोकें, जो अन्य धर्म के लोगों के खिलाफ नारेबाजी करके हथियारों को लेकर चंदा एकत्रित कर रहे हैं। देश की सभी राज्य सरकारों को भी यह निर्देश दें कि वे इस तरह की अप्रिय घटनाओं को अपने राज्य में होने से रोकें।"

    "पूर्व में राममंदिर निर्माण के लिए हुए चंदा संग्रह का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा है कि पूर्व में भी विहिप द्वारा राममंदिर के नाम से चंदा एकत्रित किया गया था। मैं आपसे यह भी अनुरोध करूंगा कि आप विश्व हिंदू परिषद को पूर्व में एकत्रित किए गए चंदे का लेखा-जोखा आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करें।" (आईएएनएस)

     

संपादक की पसंद

  • Editor's Choice : Biden’s transformational challenge
    Editor's Choice : Biden’s transformational challenge

    Though the US is no longer addicted to coal, it is completely sold on the idea of cheap energy, writes Sunita Narain

    -Sunita Narain

    It’s time to exhale. Donald Trump is now a former US president. President-elect Joe Biden and his vice president-elect, Kamala Harris, have stated they will rejoin the Paris Agreement on climate change.

    So denial of this existential threat to the Planet is now past. And we can move decisively on actions. Or, so we hope.

    This is where we need a dose of realism. I am not undermining the Biden-Harris triumph, but reminding us of the troubled paths ahead. The world is hurtling down to a climate change-led catastrophe. We cannot afford coy and small answers.

    This is where introspection of the Biden-Harris victory must start. The fact is they won, but Trumpism did not lose. What is shocking to most of us, watching from the outside, is that close to half of America voted for him.

    He got more votes in 2020 than in 2016, notwithstanding his failure in managing the uncontrolled pandemic, his rejection of climate change and his exacerbation of race and gender conflicts. We need to remember this.

    The United States is a divided nation and the deep rift has its foundations on what nearly half of the American people want. You can say Biden-Harris won because they said they would control the virus; they would listen to scientific advice on the need to wear masks; and, impose lockdowns when necessary.

    But it is also a fact that people voted for Trump because they did not want any of these. They believe the economy is more important than the virus. You can argue that the virus does not discriminate, but it hits poor people more. But they are not listening.

    Let’s also be clear that, more than ever before, this US election had climate change denial or action on the ballot. It was an issue that was on the table — Trump made sure of that. He was belligerent about his opposition to this “fake” science.

    He swore by coal and, more importantly, he pushed his country to manufacture more: made in the USA was his slogan. Pushing against climate change — in spite of the terrible fires and hurricane damages — was his way of putting the economy above everything else. His people saw this.

    We need to take off our rose-tinted glasses that shows ‘all is well’. The US has always been a renegade nation as far as climate action is concerned — the abysmally insignificant targets it has set for itself under the Paris Agreement are a testimony to this.

    It is of course another matter that Biden-Harris will, at least, do something and not work against action. But this is only because Trumpism took us down to depths that we never imagined before.

    It is also a fact that Trump is right (and completely wrong) on one thing. He says his country’s energy emissions were lowest during his term; this is right. The US energy sector’s emissions declined by a massive 30 per cent in the past decade.

    The shift was primarily because market factors moved the power sector away from coal to shale and natural gas. In the last year alone, coal-fired power generation fell by 18 per cent, according to data from private research firm, Rhodium Group. This is where the good news ends.

    The fact is that cheap shale gas took off where coal left — and it left behind the renewable energy surge as the cost of gas has fallen to a record low.

    It is no wonder then that Biden has strayed off the New Green Deal agenda of his deputy to argue that he will not stop fracking of gas on private lands, where the bulk of the gas is found.


    The bigger problem is that other sectors of the US economy are now reversing gains made from the transition from polluting coal. The transportation sector has overtaken energy emissions and industrial sector emissions have grown.

    The bottom line is that even though US emissions fell by some 2 per cent in 2019 and there was a cumulative decline of 12.3 per cent on its 2005 baseline, the country is still way off the mark to meet its targets.

    By the Copenhagen Accord target it signed, the US agreed to be 17 per cent below 2005 levels by the end of 2020; and as per the Paris Agreement, 26-28 per cent below 2005 levels by 2025. In fact, net US greenhouse gas emissions in 2019 were higher than at the end of 2016 — the beginning of the Trump presidency.

    What should concern us is that further decline will be hard. This is not only because of the increase in Trump’s vote share; it is because there are no easy answers for rapid and transformational emission cuts in the country.

    Though the US is no longer addicted to coal; it is completely sold on the idea of cheap energy. It also wants to reclaim its role as the economic powerhouse — take back its position from China.

    This will mean burning more fuel for industrial growth and using more energy that will negate all the gains of cleaner fuels. This, when we need transformational answers. So, let’s not kid ourselves that all will be well now that Biden-Harris are in power. We need to push more and force them to run, and not walk, the talk. (downtoearth.org.in)

संपादकीय

  • ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : अमरीकी घरेलू चुनौती झेलती  बाइडन-हैरिस सरकार, और  हिंदुस्तानी बेवजह उम्मीद से !
    ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : अमरीकी घरेलू चुनौती झेलती बाइडन-हैरिस सरकार, और हिंदुस्तानी बेवजह उम्मीद से !

    अमरीका चार बरस की गंदगी और हिंसा के बाद आज फिर इंसानियत के एक दौर में पांव रखने जा रहा है जब डोनल्ड टं्रप नाम का कलंक वहां के राष्ट्रपति भवन से आज किसी समय हट जाएगा, और दुनिया के बाकी देशों, बाकी नस्लों, बाकी रंगों, बाकी अल्पसंख्यकों के प्रति एक उदार भाव रखने वाले जो बाइडन और कमला हैरिस राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का काम संभालेंगे। अब से कुछ घंटों बाद, भारतीय समय के मुताबिक आधी रात के पहले अमरीका अपनी नई सरकार को शपथग्रहण करते देखेेगा, और यह समारोह पच्चीस हजार से अधिक सिपाहियों-सैनिकों के घेरे में होने जा रहा है क्योंकि चुनाव हारने के बाद जाते-जाते भी ट्रंप ने अपने हिंसक और नस्लभेदी समर्थकों से संसद भवन पर हमला करवा दिया था। ऐसा राष्ट्रपति अमरीका के इतिहास में कोई दूसरा नहीं हुआ था, और उम्मीद करनी चाहिए कि दुनिया के किसी भी देश को ऐसा हिंसक और नस्लभेदी मुखिया न देखना पड़े। 

    हिंदुस्तान सहित दुनिया के तमाम देशों को बात-बात पर जंग के सनकी फतवे देने वाले ट्रंप से छुटकारा पाकर राहत मिलेगी। जिस हिंदुस्तान में तमाम परंपराओं को तोडक़र इस ट्रंप की चुनावी-मेहमाननवाजी की, नमस्ते ट्रंप नाम का सबसे बड़ा चुनावी जलसा अहमदाबाद में कोरोना का खतरा उठते हुए भी किया, उसी मेहमान के नमस्ते के बढ़े हुए हाथ पर मानो इस ट्रंप ने थूक दिया था। अमरीका लौटते ही उसने अपने पर फिदा नेताओं वाले हिंदुस्तान को लेकर गंदे शब्द इस्तेमाल किए। दूसरी तरफ अपने पूरे कार्यकाल में ट्रंप ने अमरीका में, और अमरीका के लिए काम करने वाले हिंदुस्तानियों के पेट पर लात ही मारी। आज खबरें उबल रही हैं कि नए राष्ट्रपति जो बाइडन अपने पहले फैसलों में ही हिंदुस्तानी कामगारों को राहत पहुंचाने जा रहे हैं। 

    ट्रंप नाम की जो गंदगी आज अमरीकी सरकार से हट रही है, वह इस बात की एक बड़ी मिसाल रही कि किसी देश के प्रमुख को कैसा-कैसा नहीं होना चाहिए। बुरे लोग भी इस बात की अच्छी मिसाल हो सकते हैं कि उनके बाद कोई उनकी तरह के न हों। अमरीकी राजनीति हिंदुस्तान से इस मायने में बहुत अलग है कि वहां निर्वाचित शासनप्रमुख पर उसकी पार्टी का मानो कोई काबू ही नहीं रह जाता है। ट्रंप अपनी रिपब्लिकन पार्टी के नाम खासी शर्मिंदगी लिखकर जा रहे हैं, और इस संकीर्णतावादी पार्टी में वे, और उतने ही लोग ट्रंप के इतिहास से खुश रहेंगे जो कि नफरतजीवी हैं, नस्लोन्मादी हैं, जंगखोर हैं, महिला-विरोधी हैं, और गरीबों को मिटा देना चाहते हैं। ट्रंप की पार्टी में भी जो लोग थोड़ी सी बेहतर सोच रखते हैं, वे आज भी शर्मिंदा हैं और संसद पर हमला करवाने वाले ट्रंप के खिलाफ संसद के निचले सदन में वोट दे चुके हैं।

    भारत के प्रति ट्रंप का रूख कैसा रहेगा इसे लेकर कई लोगों के मन में एक फिक्र भी है। इसकी एक वजह यह है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रंप के आखिरी कई महीनों में उसके चुनाव प्रचारक सरीखा काम किया था, और भारत सरकार अबकी बार ट्रंप सरकार का इश्तहार करते दिख रही थी। लेकिन बाइडन पिछले डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा की विरासत के साथ हैं। वे ओबामा के उपराष्ट्रपति भी थे, और उनकी पार्टी की अपनी सोच भी आप्रवासियों के लिए एकदम साफ है। इसलिए ट्रंप के साथ एक निहायत गैरजरूरी घरोबा कायम करके उसके चुनाव में हाथ बंटाकर भारत के प्रधानमंत्री ने नाजुक कूटनीतिक रिश्तों को खतरे में डालने का काम किया था, लेकिन नए अमरीकी राष्ट्रपति से यह उम्मीद की जा सकती है कि वे भारत के साथ दीर्घकालीन व्यापक रिश्तों के हित में, और खुद अमरीका के हित में भारत के लोगों के साथ नरमी का रूख बरतेंगे। फिलहाल भारत के लोग इस बात को लेकर ही खुशियां मना सकते हैं कि ट्रंप की टीम में बहुत से लोग भारतवंशी हैं, और उनकी उपराष्ट्रपति कमला देवी हैरिस तो आधी भारतवंशी हैं ही। भारत को अपने तात्कालिक स्वार्थ से परे अमरीका को देखना चाहिए, और पिछले महीनों में रिश्तों की संभावनाओं पर जो आंच आई है, उसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। 

    जिस तरह एक उन्मादी, आत्ममुग्ध, महत्वोन्मादी, नस्लवादी सिरफिरे का राज देश को बांटकर ही खत्म होता है, अमरीका आज बुरी तरह बंटा हुआ है। टं्रप के हिंसक और हथियारबंद समर्थकों की तरफ से वहां इतना बड़ा खतरा है कि आज राजधानी में शपथग्रहण के वक्त किसी हथियारबंद हमले से निपटने की भी तैयारी की गई है। नई सरकार को इस देश को फिर से एक करने पर बड़ी मेहनत करनी होगी और जैसा कि कुछ दिन पहले बराक ओबामा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमरीकी समाज में इतना विभाजन कर दिया गया है कि उसे एक करना बहुत बड़ी चुनौती होगी।
     
    बाइडन-प्रशासन में भारतवंशी चेहरों को लेकर भारत को और यहां के लोगों को गैरजरूरी खुशी का शिकार नहीं होना चाहिए। वे तमाम लोग अमरीकी हैं, भारत के नहीं। और अमरीका देश ही ऐसा है कि वहां दुनिया भर से पहुंचे हुए अलग-अलग नस्लों के लोग मिलकर ही उसे एक ताकतवर और कामयाब देश बनाते हैं। हर धर्म, हर नस्ल, हर राष्ट्रीयता के लोगों को मिलकर किस तरह एक देश दुनिया का सबसे कामयाब बनता है, इसकी मिसाल अमरीका में देखकर हिंदुस्तानी उससे अगर कुछ सीखें, तो वे अपने देश को बेहतर बना सकते हैं, जो कि आज बदतर बनने की राह पर है। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

सेहत-फिटनेस

  • छोटी सी दिखने वाली दालचीनी सेहत पर करती है ऐसा जादू, होते हैं ये 4 बड़े फायदे
    छोटी सी दिखने वाली दालचीनी सेहत पर करती है ऐसा जादू, होते हैं ये 4 बड़े फायदे

    हर रसोई में पाई जाने वाली छोटी सी दालचीनी न जाने कितने गुणों से भरपूर होती है. इसका पौधा जितना छोटा है, इसके गुण उतने ही ज्यादा होते हैं. दालचीनी की सूखी पत्तियां तथा छाल मसाले (Spices) के रूप में खाने का स्वाद बढ़ाते हैं और लोगों को सेहमंद बनाएं रखते हैं. इसकी छाल थोड़ी मोटी, चिकनी तथा हल्के भूरे रंग की होती है. दालचीनी खून को साफ करता है, वजन घटाता है (Weight Loss) और साथ ही कई बीमारयों को कोसों दूर भगाता है. दिन भर की थकान से होने वाले सिर दर्द से लेकर माइग्रेन के दर्द तक सभी बीमारियों का इलाज इसके पास है. आइए जानते हैं दालचीनी के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में.

    पेट की समस्या करे दूर

    लोगों को अक्सर पेट से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं हो जाती हैं और पाचन तंत्र गड़बड़ाते ही शरीर में न जाने कितनी नई बीमारियां होने लगती हैं. इसके लिए एक चम्मच शहद के साथ थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर खाने से पेट दर्द और एसिडिटी में आराम मिलता है. साथ ही भोजन भी आसानी से पच जाता है.

    वजन कम करने में मददगार

    आज के समय में बढ़ता वजन लोगों की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन ये छोटी सी दालचीनी आपके बढ़ते वजन को कम करने में मदद कर सकती है. इसके लिए नाश्ते के आधे घंटे पहले एक गिलास पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर उबालें. फिर इसे कप में डालकर दो बड़े चम्मच शहद मिलाकर पिएं. इस प्रक्रिया को रात में सोने से पहले भी दोहराएं.

    दिल का रखे ख्याल

    दालचीनी आपके दिल का ख्याल रखने में भी आपकी मदद करता है. इसके लिए दालचीनी पाउडर और शहद का पेस्ट बनाकर रोटी के साथ खाएं. इससे धमनियों में कोलेस्‍ट्रॉल जमा नहीं होगा, जिससे हार्ट संबंधी बीमारियों की संभवना भी कम हो जाएगी. जिन लोगों को दिल से जुड़ी कोई बीमारी है, उनके लिए ये उपाय रामबाण है.

    त्वचा के लिए फायदेमंद

    अपनी सुगंध से सबको आकर्षित करने वाली दालचीनी त्‍वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद है. त्वचा में न जाने कितनी तरह की समस्याएं हो जाती हैं, जैसे खाज, खुजली. इसके लिए दालचीनी पाउडर में शहद मिलाकर इसका लेप बनाकर लगाएं और सूखने पर अच्छे से धो लें. दालचीनी के पाउडर में थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से पिंपल्स भी दूर होते हैं.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें. (news18)

मनोरंजन

  • ट्विटर पर 'सस्पेंड कंगना रनौत' ट्रेंड, कंगना ने दिया जवाब
    ट्विटर पर 'सस्पेंड कंगना रनौत' ट्रेंड, कंगना ने दिया जवाब

    मुंबई, 20 जनवरी | कंगना रनौत ने ट्विटर पर बुधवार को उनके खिलाफ ट्रेंड कर रहे हैशटैग पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दरअसल माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर उनके सत्यापित खाते को निलंबित करने की मांग की जा रही है। नेटिजंस उनके कथित हेट स्पीच की वजह से उनका खाता निलंबित करने की मांग कर रहे हैं। अभिनेत्री ने कहा कि अगर उनका खाता निलंबित कर दिया जाता है तो वह आभासी दुनिया से बाहर निकल जाएंगी और वास्तविक दुनिया को वास्तविक कंगना रनौत दिखाएगी।

    ट्विटर पर 'हैशटैग सस्पेंड कंगना रनौत' पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अभिनेत्री ने कहा, " एंटी नेशनल इसे ट्रेंड करवा रहे हैं। कृपया ऐसा करें, जब वे इसे सस्पेंड कर देंगे तो मैं आऊंगी और उनके जीवन को और मुश्किल बना दूंगी। अब अगर वे मुझे निलंबित करते हैं तो मैं आभासी दुनिया से बाहर निकल जाऊंगी और असली दुनिया में असली कंगना रनौत दिखाऊंगी-जो कि सभी पिताओं की मां है। हैशटेग बब्बर शेरनी।"

    नेटिजंस दरअसल कंगना द्वारा डिलीट किए गए ट्वीट, "अब उनका गला काटने का समय है।" पर ऐसी जबदस्त प्रतिक्रिया दे रहे थे।

    कंगना ने यह ट्वीट कथित तौर पर वेब सीरीज तांडव के निर्माताओं को लेकर किया था। इस वेब सीरीज को हिंदू देवी देवताओं के अपमान करने की वजह से काफी विरोध झेलना पड़ रहा है।

    --आईएएनएस

खेल

  • क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने सफल द्विपक्षीय सीरीज के लिए बीसीसीआई का आभार जताया
    क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने सफल द्विपक्षीय सीरीज के लिए बीसीसीआई का आभार जताया

    सिडनी, 20 जनवरी | क्रिकेट आस्ट्रेलिया (सीए) ने दोनों देशों के बीच सफल द्विपक्षीय सीरीज के समापन के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का बुधवार को आभार जताया। सीए ने सोशल मीडिया पर एक पत्र पोस्ट किया है, जिसमें उसने सफल सीरीज के लिए बीसीसीआई को धन्यवाद दिया है।

    सीए ने अपने पत्र में कहा, "आस्ट्रेलियाई क्रिकेट अपनी दोस्ती, विश्वास और प्रतिबद्धता के लिए हमेशा बीसीसीआई का आभारी रहेगा, जिन्होंने एक सीरीज के आयोजन में मदद करके दुनिया के लाखों लोगों को मुश्किल समय में खुशी मनाने का मौका दिया। वैश्विक महामारी के दौरान अंतर्राष्ट्रीय दौरे से जुड़ी कई चुनौतियां हैं और हम इसके लिए भारतीय खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ का आभार व्यक्त करते हैं।"

    पत्र सीए के अंतरिम सीईओ निक हॉकले और अध्यक्ष अर्ल इडिंग्स के संबोधन के साथ शुरू किया है, जिसमें कोविड-19 महामारी के बावजूद सफलतापूर्वक दौरा करने के लिए बीसीसीआई का आभार व्यक्त किया गया है।

    भारत का आस्ट्रेलिया दौरा पिछले 27 नवंबर से शुरू हुआ था और यह मंगलवार तक चला। इस दौरान भारत ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से और टी-20 सीरीज जीती। वहीं, आस्ट्रेलिया ने वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम किया।

    सीए ने आगे कहा, "पिछले नौ हफ्तों में, भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमों ने वनडे और ट्वेंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय सीरीज पूरी की। इसके बाद सबसे बड़ी बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट श्रृंखला में से एक में भाग लिया। कई सार्वजनिक स्वास्थ्य और लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद, बीसीसीआई ने सहयोग की भावना के साथ अंतर्राष्ट्रीय खेल के सबसे बड़े राजदूतों में से एक के रूप में अपनी स्थिति को बरकरार रखा। सार्वजनिक स्वास्थ्य और साजो सामान से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद बीसीसीआई ने अंतर्राष्ट्रीय खेल के सबसे बड़े दूत की अपनी ख्याति के अनुरूप सहयोग की भावना बनाए रखी। हम इसे संभव बनाने के लिए बीसीसीआई में अपने मित्रों के बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे।"

    बोर्ड ने कहा, "सभी की तरफ से हम बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी बरकरार रखने के लिए इस सीरीज में दिखाए गए साहस, दृढ़ता और कौशल के लिए भारतीय टीम को बधाई देते हैं।"

    --आईएएनएस

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  • कैट ने केन्द्रीय वित्त मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
    कैट ने केन्द्रीय वित्त मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

    रायपुर, 20 जनवरी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि कैट सी.जी. चैप्टर का एक प्रतिनिधी मंड़ल  अमर पारवानी के नेतृत्व में बी.बी. महापात्रा,  प्रधान आयुक्त, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और केंद्रीय जी.एस.टी. एवं एस.के. बंसल, संयुक्त आयुक्त, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और केंद्रीय जी.एस.टी.  से मुलाकात कर केन्द्रीय वित्त मंत्री सीतारमण के नाम से ज्ञापन सौपा। 
     

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