विचार / लेख

धर्म और सरकार, एक-दूजे के लिए!
09-May-2021 2:40 PM (73)
धर्म और सरकार, एक-दूजे के लिए!

-संजय श्रमण

जो लोग भारत में धर्म और ईश्वर को सब समस्याओं की जड़ मानते हैं वे ध्यान दें। भारत का धर्म समस्याएं पैदा नहीं करता न ही उनके समाधान का रास्ता बताने का दावा करता है। भारत का धर्म केवल एक काम करता है, वह है आपके सुख या दुख का फायदा उठाकर आपके ऊपर अपना प्रभाव बनाए रखना।

इस प्रभाव को बनाए रखना इस धर्म का पहला और सबसे बड़ा लक्ष्य है। ठीक उसी तरह जिस तरह इस धर्म में डूबी राजनीति का पहला लक्ष्य सरकार बनाये और बचाए रखना है। यह धर्म प्रभाव बनाए रखना चाहता है, समस्या नहीं सुलझाना चाहता। इस धर्म की ढपली बजाने वाली सरकार देश में सत्ता में बने रहना चाहती है लेकिन देश के लिए, जनता बेहतरी के लिए काम नहीं करना चाहती।

जो लोग मानते हैं कि भारत का धर्म या इस धर्म के राष्ट्रवाद का झण्डा फहराने वाली सरकार निकम्मी या अकुशल है वे भी अपनी धारणाओं में सुधार करें। असल में भारत का धर्म और इस धर्म से संचालित संगठन एवं सरकारें बहुत कुशल हैं और बहुत दक्ष हैं।

हम इनकी कुशलता और दक्षता को ठीक से देख नहीं पाते हैं। जिन कामों को ये धर्म, संगठन एवं सरकार उचित एवं आवश्यक मानती है उन कार्यों में इनकी कुशलता देखिए। तब आप समझ सकेंगे कि ये लोग निकम्मे या अक्षम नहीं हैं। जिन मुद्दों पर इन्होंने चुनाव लड़ा, जिस मंदिर का मुद्दा बनाया, जिस सबसे बड़ी मूर्ति की बात की, जिस संसद भवन के निर्माण की प्लैनिंग की, जिस तरह का कांग्रेस या मुसलमानों से मुक्त समाज बनाने का वादा किया वह सब काम उन्होंने लगभग पूरा कर डाला है। इस धर्म और इसकी सरकार की कुशलता यहाँ से देखिए।

अगर आप कोरोना के प्रबंधन या रोजगार के निर्माण या समाज में वंचितों महिलाओं के सशक्तिकरण आदि के लिए किये गए काम के संदर्भ में इस सरकार का या इस धर्म का मूल्यांकन करेंगे तो आप गलत काम कर रहे हैं। न तो जनता ने इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के लिए वोट दिया है न इन सरकारों ने अपने ‘घोषणा पत्र’ (संकल्प पत्र नहीं) में इसका कोई वादा या दावा ही किया है।

अगर आप भारत में धर्म, ईश्वर या सरकार से कोई अपेक्षा करते हैं तो सबसे पहले आपको यह समझना चाहिए कि आप किस धर्म से किस ईश्वर से और किस सरकार से क्या उम्मीद कर रहे हैं। आपकी उम्मीद से पहले ही अगर उस धर्म, ईश्वर या सरकार का अपना कोई एजेंडा है तो वह धर्म, ईश्वर या सरकार पहले अपने प्राथमिकता वाले एजेंडा पर काम करेंगे फिर समय मिला तो आपकी उम्मीद पूरी होगी।

अभी भारतीयों ने जिस धर्म, ईश्वर या सरकार से कोई उम्मीद बांधकर रखी है उस धर्म, ईश्वर और सरकार का अपना अलग ही एजेंडा है जो नागरिकों के जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इसीलिए ये धर्म, ईश्वर और सरकार जिस मुद्दे को महत्वपूर्ण समझती हैं उसे ये पूरी कुशलता से अंजाम दे रहे हैं। जिस तरह से धार्मिक आयोजन या चुनाव रैलियाँ होते हैं उसमे इनकी कुशलता देखिए। कुल मिलाकर बात ये है कि जिन मुद्दों को यह धर्म, इससे जुड़े संगठन और ये सरकार महत्वपूर्ण मानती है उस पर ये पूरी ताकत और कुशलता से काम कर रहे हैं।

आखिर में असली समस्या ये है कि भारत की जनता ऐसे धर्म और सरकार को नहीं चुन पा रही है जिनके लिए आम जनता का जीवन पहली प्राथमिकता बन सके।

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