संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : मौत के ऐसे बड़े खतरे के बीच लोग शादी से बचें, बच्चों से भी...
09-May-2021 5:46 PM (155)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : मौत के ऐसे बड़े खतरे के बीच लोग शादी से बचें, बच्चों से भी...

देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारें कोरोना के खतरे को देखते हुए शादी जैसे पारिवारिक समारोह, या अंतिम संस्कार जैसे सामाजिक कार्यक्रमों पर भी अलग-अलग रोक लगा चुकी हैं। आज किसी भी राज्य में शादी में 10-20 लोगों से अधिक की मौजूदगी की इजाजत नहीं है और मौत होने पर भी ऐसे ही गिनती के लोगों को जाने की छूट है। लेकिन सोशल मीडिया पर बड़े दिलचस्प वीडियो सामने आ रहे हैं, किसी में बैंड पार्टी ना होने पर कोई दूल्हा खुद ही नगाड़ा बजाते दिख रहा है, किसी वीडियो में एक दूल्हा घोड़ी वाले के साथ घोड़ी पर सवार शादी के लिए अकेले ही चले जा रहा है। कल ऐसी खबर आई कि एक दूल्हा कार चलाकर खुद ही चले गया और शादी करके दुल्हन को ले आया। दूसरी तरफ उत्तर भारत की ऐसी कई खबरें हैं जिनमें 20 लोगों की इजाजत मिली और 200 लोगों की दावत चल रही थी जिस पर छापा मारकर लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक कार्यक्रम तो खबर में ऐसा आया जिसमें शादी की दावत चल रही थी और खाने वालों में झगड़ा हुआ, गोली चली तो एक मेहमान की मौत हो गई, और बाकी वहां से भाग निकले।

पिछले बरस जब कोरोना मामूली फैला हुआ था और लॉकडाउन लगा हुआ था, उस वक्त हमने लोगों के लिए यह नसीहत इसी जगह पर लिखी थी कि लोगों को अभी बच्चे पैदा करने का सिलसिला शुरू नहीं करना चाहिए क्योंकि इस बात का कोई ठिकाना नहीं है कि आने वाला वक्त कैसा रहेगा और यह बीमारी कब तक चलेगी। उस वक्त भी हमने लोगों को शादी से बचने को भी कहा था लेकिन तब दुनिया इतनी बड़ी बर्बादी नहीं देख रही थी जैसी कि आज देख रही है। आज तो हालत यह है कि घर में किसी एक को कोरोना हो रहा है तो बाकी लोग भी उस संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में शादी के लिए लडक़ी के घर जाना और फिर दुल्हन को ससुराल लेकर आना, इस फेर में दर्जनों लोगों का तो एक-दूसरे से सामना होता ही होगा, साथ में खाना या खिलाना होता होगा, और सबके लिए खतरा बढ़ता होगा।  यह वक्त सिवाय अंतिम संस्कार के और किसी भी निजी कार्यक्रम का नहीं है। बिहार के कुछ जिम्मेदार पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर अपने प्रदेश के लोगों से हाथ जोडक़र प्रार्थना की है कि वे मुंडन, जनेऊ संस्कार, और बाकी किसी भी किस्म के पारिवारिक समारोहों से बचें, जिनके लिए बाद में बहुत वक्त रहेगा। एक बार महामारी की मार कम हो तो उसके बाद ऐसे कार्यक्रम करते रहें। आज इन कार्यक्रमों में मौजूद लोगों, घर के लोगों, और रिश्तेदारों को खतरे में डालने के साथ-साथ सार्वजनिक स्तर पर भी बीमारी बढ़ाने का काम भी इससे हो रहा है। 

लेकिन हिंदुस्तान की हकीकत यह है कि जब बड़े-बड़े नेता लाखों की भीड़ वाली आमसभा को देखकर खुश होते हैं और यह कहते हैं कि जहां तक नजर जा रही है वहां तक लोग ही लोग दिख रहे हैं, और जहां चुनावी रैली में, रोड शो में, लोगों के रेले में, धक्का-मुक्की होते रहती है, और कोई भी मास्क नहीं दिखता, वहां तो लोगों के सामने कोई ऐसी मिसाल पेश नहीं होती है कि देश खतरे में है, लोगों की जिंदगी खतरे में हैं, और लोगों को बचकर घर में रहना चाहिए, किसी कार्यक्रम से बचना चाहिए। जब चुनाव प्रचार जैसे गैरजरूरी कार्यक्रमों में और कुंभ जैसे निहायत जरूरी कार्यक्रम में दसियों लाख की भीड़ जुटती है तो आम लोगों को 100-200 लोगों की भीड़ से कैसे रोका जा सकता है ? नतीजा यह होता है कि देश के नेताओं के स्तर से जो पैमाने तय होते हैं, नीचे तक वे ही चलते जाते हैं और खतरा बढ़ता ही जाता है।

आज यहां पर इस बारे में लिखने का मकसद यह है कि हम लोगों को एक बार फिर याद दिलाना चाहते हैं कि यह बीमारी कब तक रहेगी इसका कोई ठिकाना नहीं है और लोगों को आज शादी-ब्याह को जहां तक टाल सकें टालना चाहिए, किसी सगाई वगैरह को भी टालना चाहिए क्योंकि जिंदगी का ठिकाना तो है नहीं और इस बार कोरोना जवान लोगों को भी शिकार बना रहा है, तो ऐसे में क्या फायदा कि जहां रिश्ता तय किया जाए वहां कोई मौत हो जाए और फिर लोगों के मन में एक संदेह बना रहे कि रिश्ता होने की वजह से ऐसा हुआ है। फिर जो शादीशुदा लोग हैं और जिनके बच्चे की गुंजाइश है जिनकी तैयारी है, उन्हें भी बहुत सावधान रहना चाहिए क्योंकि आज के समय में महिला को कोई सुरक्षित अस्पताल मिले या ना मिले, और वहां पर संक्रमण के खतरे के बिना इंतजाम हो सके या नहीं। ऐसी नौबत को देखते हुए आज लोगों को अपनी भावनाओं पर काबू पाना चाहिए और नए रिश्ते बनाने से, परिवार में नए लोगों को लाने से, खुद नए परिवारों में आने-जाने से, और बच्चे पैदा करने से अपने को रोकना चाहिए। आज जब जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं है तो इस बात का क्या मतलब है कैसी शादी की जाए जिसमें कुछ ही दिनों में किसी एक की मौत हो जाए और दूसरे के लिए पहाड़ सी बाकी जिंदगी अकेले के सामने खड़ी रहे। अभी कई ऐसी खबरें आई है कि शादी के दो-चार दिन के भीतर ही किसी एक को कोरोना हो गया, मौत हो गई। इसलिए आज का वक्त बहुत सावधानी से रहने का है, यह ना किसी समारोह का वक्त है, ना लापरवाही से खाना खिलाने का है, और जिंदगी भर के रिश्ते बनाने का वक्त तो बिल्कुल ही नहीं है, साथ ही अगले एक बरस तक लोगों को बच्चे पैदा करने के बारे में भी नहीं सोचना चाहिए।

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