सामान्य ज्ञान

मनुस्मृति
12-May-2021 12:24 PM (55)
मनुस्मृति

भारत में वेदों के बाद सर्वाधिक मान्यता और प्रचलन ‘मनुस्मृति’ का ही है । इसमें चारों वर्णों, चारों आश्रमों, सोलह संस्कारों तथा सृष्टि उत्पत्ति के अतिरिक्त राज्य की व्यवस्था, राजा के कर्तव्य, भांति-भांति के विवादों, सेना का प्रबंध आदि उन सभी विषयों पर परामर्श दिया गया है जो कि मानव मात्र के जीवन में घटित होने सम्भव हैं। यह सब धर्म-व्यवस्था वेद पर आधारित है। उसके बाद  इसके इतने संस्करण प्रकाशित हुए कि उनका नाम देना सम्भव नहीं है। इस ग्रंथ में निर्णयसागर के संस्करण एवं कुल्लूकभट्ट की टीका का उपयोग हुआ है। मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद कई बार हो चुका है।  
मनुस्मृति का रचना काल ई.पू. एक हज़ार वर्ष से लेकर ई. पू. दूसरी शताब्दी तक माना जाता है। इसकी रचना के संबंध में कहा गया है कि धर्म, वर्ण और आश्रमों के विषय में ज्ञान प्राप्ति की इच्छा से ऋषि गण स्वयं मनु के समक्ष उपस्थित हुए। मनु ने उनको कुछ ज्ञान देने के बाद कहा कि मैंने यह ज्ञान ब्रह्मा से प्राप्त किया था और मरीचि आदि मुनियों को पढ़ा दिया। ये भृगु (जो वहां उपस्थित थे) मुझसे सब विषयों को अच्छी तरह पढ़ चुके हैं और अब ये आप लोगों को बताएंगे। इस पर भृगु ने मनु की उपस्थिति में, उनका बताया ज्ञान, उन्हीं की शब्दावली में अन्य  को दिया। यही ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा में  मनुस्मृति या  मनु-संहिता के नाम से प्रचलित हुआ। भारत में मनुस्मृति का सर्वप्रथम मुद्रण 1813 ई. में कलकत्ता में हुआ था। 2694 श्लोकों का यह ग्रंथ 12 अध्यायों में विभक्त है।

विषुव क्या है
विषुव वर्ष का वह समय  है, जब सूर्य भूमध्य रेखा पर दोपहर में ऊध्र्वाधर होता है और पृथ्वी पर  दिन और रात , दोनों- बारह - बारह घंटे के होते हैं। ऐसी स्थिति में सूर्य ठीक पूर्व से निकलता है और ठीक पश्चिम में अस्त होता है।  21 मार्च और 22 सितंबर के आस- पास यह स्थिति होती है । इन्हें क्रमश:  बसंत विषुव और शरद विषुव कहा जाता है। 
 

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