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एंटीबायोटिक का ज्यादा डोज, कहीं मजबूत तो नहीं कर रहा बैक्टीरिया को
13-May-2021 6:01 PM (67)
एंटीबायोटिक का ज्यादा डोज, कहीं मजबूत तो नहीं कर रहा बैक्टीरिया को

कोविड-महामारी के दौरान इंसान की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने पर खूब जोर दिया जा रहा है. इसी के साथ एंटीबायोटिक का उपयोग भी खूब बढ़ा जिससे उसके फायदे नुकसान पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. जहां अब तक कोविड-19 का इलाज दुनिया के सामने नहीं आया है. ऐसे में लोग एंटिबायोटिक के ही सहारे हैं.  वहीं एंटीबायोटिक का लंबे समय तक सेवन उसका बैक्टीरिया पर प्रभाव को कम कर देता है. ऐसे में एंटिबायोटिक डोज बढ़ाने के फायदे नुकसान पर एक शोध ने प्रकाश डाला है.

बैक्टीरिया बनता है तंदुरुत

हाल ही में हुए इस शोध में पाया गया है कि दवा के प्रतिरोध से निपटने के लिए एंटी बायोटिक का डोज बढ़ाया जाना कुछ बैक्टीरिया को ही तंदुरुस्त बना सकता है. इससे पहले इस तरह के जोखिम के बारे में विचार नहीं किया गया था. संयुक्त राष्ट्र ने सूक्ष्मजीवी के खिलाफ प्रतिरोध को वैश्विक समुदाय के तौर पर सामान कर रहे हमारे सबसे बड़े खतरों में से एक बताया है.

डोज बढ़ाने से सूक्ष्मजीवों पर क्या असर
अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक इसकी वजह से एक करोड़ मौतें हो जाएगीं. पिछले शोध ने दर्शाया था कि  बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक डोज बढ़ाने से उसमें प्रतिरोध विकसित करने की क्षमता धीमी कर सकता है. लेकिन इस बात पर बहुत कम ध्यान दिया गया था कि डोज बढ़ाने से समग्र तौर पर सूक्ष्मजीवियों की संपूर्ण स्वास्थ्य पर क्या असर होगा.

यह बड़ा बदलाव

ब्रिटेन और यूरोप के शोधकर्ताओं ने ई. कोली नाम के बैक्टीरिया के जनसंख्या की तीन आम एंटीबायोटक पर प्रतिक्रिया का अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि जहां अधिक एंटीबायोटिक डोज ने बैक्टीरिया के प्रतिरोध की दर को कम किया, वहीं दूसरी ओर समग्र तौर पर बैक्टीरिया का स्वास्थ्य बेहतर हुआ यानि उनकी प्रजनन की दर में भी वृद्धि देखी गई.

बेहतर स्वास्थ्य का कारक

यूनिवर्सिटी ऑफ मानचेस्टर्स स्कूल ऑफ बायोलॉजीकल साइंसेस के शोधकर्ता और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक माटो लैगेटर ने एएफपी को बताया, “एक स्ट्रेन जो तेजी से बढ़ता है वह जल्दी ही पूरी जनसंख्या पर हावी हो जाता है इस धारणा के आधार पर हम इस वृद्धि दर को बेहतर स्वास्थ्य होने का कारक मानते हैं.”

ज्यादा जुझारू हो सकते हैं बैक्टीरिया

यह अध्ययन रॉयल सोसाइटी बायोलॉजी लैटर्स में प्रकाशित हुआ है. इसके शोधकर्ताओं ने दर्शाया कि कैसे एंटीबायोटिक का ज्यादा डोज एक दुविधा पैदा कर रहा है और इसका अंतिम परिणाम और ज्यादा जुझारू बैक्टीरिया हो सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि नए विकसित हो रहे स्ट्रेंस की तंदुरुस्ती इस समस्या को एक नया आयाम दे रही है.

यह भी हो सकता है असर

लैगेटर का कहना है कि नई दवाओं को एक ही बात को ध्यान में रखकर विकसित किया जाता है कि वे कितना प्रभावी रूप से संक्रमण से मुक्ति दिला सकते हैं. लेकिन इस बात पर बहुत ही कम ध्यान दिया जाता है कि लक्षित बैक्टीरिया इन दवाओं के लिए प्रतिरोध विकसित करने के साथ तंदुरुस्त स्ट्रेन में विकसित हो सकते हैं.

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दुनिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी सुपरबग्स के द्वारा और ज्यादा लोगों के मरने के अनुमान के बीच लैगेटर कहते हैं कि इस मामले में और ज्यादा शोध के ज्यादा जरूरत है. हमें लंबे समय के नतीजों पर भी ध्यान देना होगा. ये बहुत ही जटिल नतीजे हैं. लैगेटर के सामान्य से अध्ययन ने बताया है कि अधिक डोजों से प्रतिरोध तो धीमा हो जाता है, लेकिन स्ट्रेन बेहतर हो जाते हैं. (news18.com)

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