सामान्य ज्ञान

मुंडक उपनिषद

Posted Date : 16-May-2018



मुंडक उपनिषद, तीन मुंडक यानी अध्याय में पद्य में रचा गया है। इसमें  ब्रह्मïा द्वारा ब्रह्मï विद्या का उपदेश दिया गया है।  प्रथम भाग वेदों की व्याख्या से, दूसरा ब्रह्मï के स्वभाव से और तीसरा ब्रह्मï ज्ञान के साधनों से संबंधित है। इस उपनिषद में अपने मंतव्य बताने के लिए एक वृक्ष में निवास करने वाले दो पक्षियों के आख्यान का सहारा लिया गया है। परा और अपरा विद्याओं का भी इसमें उल्लेख है।

बीमार उद्योग किसे कहा जाता है? 
 एक वित्तीय वर्ष के दौरान निवेशित पूंजी के बराबर का घाटा दर्शाने वाले उद्योग को बीमार उद्योग कहा जाता है। लगातार तीन वर्षों तक यदि यही स्थिति रही , तो उस उद्योग को बीमार उद्योग मान लिया जाता है।  भारत में औैद्योगिक रुग्णता  यानी इंडस्ट्रीयल सिकनेस की  समस्या पर विचार करने के लिए वर्ष 1981 में तिवारी समिति गठित की गई । उसकी सिफारिशों के आधार पर  वर्ष 1985 में  रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम पारित किया गया। बाद में एक सांविधिक संस्था औद्योगिक और वित्तीय पुननिर्माण बोर्ड की स्थापना की गई।  बीमार उद्योग की समस्या के समाधान के लिए इस बोर्ड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। 
वैरागी
हिंदू धर्म में एक ऐसे धार्मिक तपस्वी को वैरागी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु के किसी एक स्वरुप की पूजा करता है। वैरागी सामान्यत: स$फेद वस्त्र पहनते हैं, जो शैव साधकों के गेरुए वस्त्र के विपरीत हंै। ये अपने तिलक (माथे पर लगा संप्रदाय संबंधी चिह्नï) से भी अलग दिखाई पड़ते हैं, जो शैव साधकों के विपरीत भस्म से नहीं बनाया जाता तथा लंबवत होता है। अधिकांश वैरागी जब भ्रमण या तीर्थयात्रा पर नहीं होते, तो 'स्थानÓ नामक मठीय संप्रदायों में रहते हैं; लेकिन नग्न रहने वाले नागा वैरागी, जो वैष्णव साधकों में अलग होते हैं, अपना पृथक समूह बनाते हैं, जिसे अखाड़ा कहते हैं। पहले भिन्न मतों के नागा वैरागियों के समूहों के बीच मुख्यत: कुंभ मेले जैसे अवसरों पर स्नान और जुलूस के अधिकार को लेकर युद्ध होते थे। 
 




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