सामान्य ज्ञान

पतझड़ में पत्तियों के रंग का बदलना

Posted Date : 16-May-2018



पतझड़ का मौसम आते ही पेड़ों की पत्तियों का रंग बदल जाता है और वे कुछ समय के बाद गिर जाती हैं। थोड़े दिनों के बाद उसके स्थान पर कुछ नई पत्तियां आती हैं। पतझड़ के मौसम को ध्यान में रखकर पेड़ों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है। पहले प्रकार में वे पेड़ आते हैं, जिनके पत्ते हर महीने  हर वर्ष  एक विशेष महीने में झड़ते हैं।  दूसरे वर्ग में वे सदाबहार पौधे आते हैं, जिनके पत्ते धीरे-धीरे झड़ते हैं। इस प्रकार वे साल भर तक हरे बने रहते हैं। ऐसा नहीं है कि सदाबहार पेड़ों पर पतझड़ का प्रभाव नहीं होता है। इसमें इसका असर एक साथ न होकर क्रम में होता है। इसमें एक ही समय में कुछ पत्तियां झड़ती हैं और यह प्रक्रिया साल भर तक चलती रहती है। 
पतझड़ के मौसम को पेड़ों के आराम करने का मौसम कहा जाता है।  इस मौसम में धीरे-धीरे  उनकी पत्तियां पीली होने लगती हैं और ऐंठकर नीचे गिर जाती हैं।  इस समय पेड़ लगभग निष्क्रिय रहता है।  इसके बाद वसंत ऋतु आने पर वे एक बार फिर सक्रिय हो जाते हैं।  पत्ते झडऩे से पेड़ों को नवजीवन प्राप्त होता है। यह क्रिया पेड़ों के लिए आवश्यक भी है। पत्तियां ही उसके लिए भोजन बनाती हैं और वे ही कुछ समय के बाद निष्क्रिय हो जाती हैं। 
पतझड़ के पहले पत्तियों का रंग पीला, भूरा और लाल हो जाता है। पौधे जीव वर्ग में आते हैं। जीवित प्राणियों को भोजन की जरूरत होती है।  यह भोजन उन्हें पत्तियों के कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त होता है।  जिस तरह से जीवित जंतु अपशिष्टï पदार्थ पैदा करते हैं, उसी तरह से पेड़-पौधे भी करते हैं। जंतुओं की तरह पेड़-पौधों के भी अपशिष्टï पदार्थों को त्यागना पड़ता है। वे तत्काल ऐसा करने में असमर्थ होते हैं । पतझड़ की ऋतु तक उन्हें  अपशिष्टï पदार्थों को अपनी पत्तियों के ऊतकों (टिश्यू) में रखना पड़ता है। जब पत्तियों के गिरने का समय आता है, तब तक पत्तियों के सभी उपयोगी पदार्थों को पेड़ अवशोषित कर लेता है और उनमें केवल अपशिष्टï पदार्थ ही छोड़ते हैं। इन्हीं अपशिष्टï पदार्थों के कारण पत्तियों का रंग पीला, भूरा और लाल हो जाता है।
इस प्रकार पतझड़ यानी पत्तियों का गिरना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से पेड़ अपशिष्टï पदार्थों का त्याग करते हैं।  जब पुरानी पत्तियां गिर जाती हैं, तो पत्तों के गिरने के स्थान पर एक पतली सी परत बन जाती है । यहां पर एक छोटा सा निशान बन जाता है। यह निशान जाड़ों में आसानी से देखा जा सकता है। इसलिए पतझड़ एक ऐसा मौसम है, जिसमें पेड़ अपशिष्टï पदार्थों से छुटकारा पाते हैं। 




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