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थकान, सांस लेने में तकलीफ एक साल तक कोविड मरीजों को प्रभावित कर सकती है: शोध
27-Aug-2021 3:27 PM (228)
थकान, सांस लेने में तकलीफ एक साल तक कोविड मरीजों को प्रभावित कर सकती है: शोध

कोविड-19 के जिन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, उनमें से लगभग आधे मरीज अभी भी कम से कम एक लगातार लक्षण से पीड़ित हैं.

  (dw.com)

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल द लांसेट फ्राइडे में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि कोविड-19 के लिए अस्पताल से छुट्टी मिलने वाले लगभग आधे मरीज अभी भी कम से कम एक लगातार लक्षण से पीड़ित हैं. एक साल बाद भी उनमें थकान या मांसपेशियों में कमजोरी रहती है.

महामारी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों की बेहतर समझ के लिए किए गए चीनी शोध के मुताबिक कोविड-19 के जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनमें से आधे के करीब एक साल बाद भी थकान और सांस की तकलीफ से जूझ रहे हैं.

द लांसेट फ्राइडे में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 के लगभग आधे मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक साल बाद भी वे लगातार कम से कम एक लक्षण से पीड़ित हैं. शोध में कहा गया- मरीजों में सबसे अधिक बार थकान या मांसपेशियों में कमजोरी के लक्षण पाए गए.

एक साल बाद भी गंभीर असर
गंभीर कोविड इंफेक्शन होने के बाद हफ्तों या महीनों तक उसका असर झेलने वाले लाखों लोग हैं. ऐसे लोगों को सुस्ती और थकान से लेकर ध्यान भटकने या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण हो सकते हैं. लॉन्ग कोविड के रूप में जानी जाने वाली स्थिति पर अब तक के सबसे बड़े शोध में कहा गया है कि निदान के एक साल बाद भी तीन रोगियों में से एक को सांस की तकलीफ है. बीमारी से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित रोगियों में यह संख्या और भी अधिक है. 

द लांसेट ने अध्ययन के साथ प्रकाशित एक संपादकीय में कहा, "बिना किसी सिद्ध उपचार या पुनर्वास मार्गदर्शन के लंबे समय तक कोविड मरीजों की सामान्य जिंदगी को यह फिर से शुरू करने और काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है."

संपादकीय में कहा गया, "अध्ययन से पता चलता है कि कई मरीजों के लिए कोविड-19 से पूरी तरह से ठीक होने में एक साल से अधिक समय लगेगा."

मध्य चीनी शहर वुहान में जनवरी और मई 2020 के बीच कोरोना वायरस के लिए लिए अस्पताल में भर्ती लगभग 1,300 लोगों पर यह शोध किया गया. कोरोना महामारी वुहान से ही फैला था जिसने करोड़ों लोगों को संक्रमित किया और जो कि 40 लाख से अधिक लोगों की मौत का जिम्मेदार है.

शोध के मुताबिक कम से कम एक लक्षण वाले रोगियों की हिस्सेदारी छह महीने के बाद 68 प्रतिशत से घटकर 12 महीने के बाद 49 प्रतिशत हो गई.

लॉन्ग कोविड एक और चुनौती
शोध कहता है कि छह महीने के बाद 26 प्रतिशत रोगियों में सांस लेने में तकलीफ 12 महीने के बाद बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई. शोध में पाया गया कि प्रभावित पुरुषों की तुलना में प्रभावित महिलाओं में थकान या लगातार मांसपेशियों में कमजोरी से पीड़ित होने की संभावना 43 प्रतिशत अधिक है.

लेकिन शोध ने कहा कि रोग निर्णय से पहले काम करने वाले 88 प्रतिशत रोगी एक साल बाद अपनी नौकरी पर लौट आए थे.

संपादकीय में लिखा गया है, "लॉन्ग कोविड पहले क्रम की एक आधुनिक चिकित्सा चुनौती है." इस स्थिति को समझने और इससे पीड़ित रोगियों की बेहतर देखभाल के लिए और अधिक शोध करने की जरूरत है.

एए/वीके (एएफपी)

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