गैजेट्स

अब जान बचाने होगा इमोजी का इस्तेमाल?

Posted Date : 12-Jun-2018



अगर आप किसी मुसीबत में फंसे हों तो क्या किसी को इमोजी भेजेंगे? संभव है कि आपका जवाब ना हो। लेकिन शोधकर्ताओं को लगता है कि भूकंप जैसी आपात स्थिति में- जहां एक-एक सेकंड कीमती होता है, इमोजी का इस्तेमाल करके बदलाव लाया जा सकता है।
वैज्ञानिकों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह भूकंप के लिए इमोजी को यूनिकोड सेट में जोडऩे की तैयारी कर रहा है। यह यूनिकोड सेट दुनियाभर में डिजिटल डिवाइस पर उपलब्ध आइकन का मानक समूह है, लेकिन क्या मुसीबत की स्थिति में इमोजी के इस्तेमाल से कोई बदलाव आएगा?
इमोजी-क्वेक
इमोजी-क्वेक कैंपेन के संस्थापक और साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के भूकंप विज्ञानी डॉक्टर स्टीफन हिक्स कहते हैं कि इससे शायद दुनिया की एक-तिहाई से भी ज्यादा आबादी को कुछ (भूकंप संबंधी) खतरों से अवगत करवाया जा सकता है। वास्तव में हम अलग-अलग क्षेत्र के लोगों से उनकी भाषा में संवाद करना चाहते हैं और इमोजी इसका एक बेहतरीन विकल्प है।
कैंपेन का मुख्य लक्ष्य है कि वो यूनिकोड में शामिल किए जाने के लिए भूकंप का एक उचित इमोजी डिजाइन मुहैया करवाये। डॉक्टल सारा मैकब्रिज यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के साथ कम्युनिकेटर स्पेशलिस्ट हैं और इसमें उनका भी योगदान है।
उन्होंने कहा कि इमोजी, लिखने की सीमा से परे हो सकता है। जिन्हें किसी खास भाषा को पढऩे में मुश्किल होती है, इसकी मदद से उन्हें किसी महत्वपूर्ण जानकारी पर संवाद करने में आसानी होगी। ये खतरे में फंसे लोगों के बीच तेजी से संवाद करने में भी मदद करते हैं।
डॉक्टर हिक्स कहते हैं कि भूकंप के साथ एक समस्या ये है कि ये एक बहुत ही आकस्मिक प्रक्रिया है। ये ज्वालामुखी या आंधी-तूफान की तरह नहीं होता, जिसका अनुमान लगाया जा सके।
कई अन्य मौसम और जलवायु से संबंधित घटनाओं में जहां पहले से चेतावनी दी जा सकती है, वहीं भूकंप अचानक आते हैं और आगे बढ़ते हैं।
डॉक्टर हिक्स बताते हैं कि हो सकता है आपके पास खुद को बचाने के लिए कुछ ही सेकेंड का समय हो। ऐसे में ये इमोजी कई मामलों में जान बचा सकते हैं। अगर आप अलर्ट के रूप में टेक्स्ट मैसेज भेजते हैं, तो वहां आप ज्यादा शब्द लिखना पसंद नहीं करते। भाषा के रूप में आपात स्थिति में इमोजी के इस्तेमाल पर कोई खास अध्ययन नहीं हुआ है।
हालांकि लिखित जानकारी से पिक्टोग्राफ (एक तरह का चिह्न जो किसी भावना/घटना आदि का प्रतीक हो) और अन्य विजुअल माध्यम ने तेजी से पहुंचने और समझने में आसान होने का रिकॉर्ड तोड़ा है। इसीलिए हवाई जहाज की सीट के पीछे सुरक्षा कार्ड में नियमों को संकेतों की भाषा में समझाया जाता है।
हालांकि वॉर्निंग सिस्टम में इमोजी फिलहाल केवल छोटी सी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन ये भूकंप वैज्ञानिक को ये समझने में मदद कर सकते हैं कि कब और कहां भूकंप आया। फिलहाल, कई लोग क्या मुझे अभी भूकंप जैसा लगा? का संस्करण अपनी भाषा में ट्वीट कर रहे हैं, लेकिन दुनियाभर में अब धीरे-धीरे अर्थक्वेक इमोजी का उपयोग किया जा रहा है।
डॉक्टर हिक्स ने बताया कि ट्वीट्स जियोटैग (भौगोलिक स्थिति के साथ तस्वीर का होना) हो सकते हैं। हम भूकंप की तरंगों से पहले सोशल मीडिया के जरिये इसका पता लगा सकते हैं। हम जानते हैं कि अभी भूकंप आया है, तो हम जानते हैं कि उस पर प्रतिक्रिया कैसे देनी है।
आपात स्थिति में इमोजी का संभावित उपयोग भूकंप के अलावा भी काफी बढ़ सकता है। सैन फ्रांसिस्को में एक डिजाइनर और वास्तुकार सारा डीन कहती हैं कि एक सार्वभौमिक भाषा के रूप में उनके पास ये कीमती चीज है।
वे आगे कहती हैं कि सोशल मीडिया पर आपातकाल में रिस्पॉन्स टूल के रूप में भाषा एक बहुत ही बड़ी बाधा होती है। और ये उस अंतर को कम करेगा।
डीन और अन्य डिजाइनरों की टीम ने इमर्जी की शुरुआत की है, जिसमें इमोजी का एक पूरा सेट जलवायु और पर्यावरण की घटनाओं के लिए समर्पित किया गया है।
डीन ने बताया कि लोग हर समय आपातकाल पर बात करने के लिए इमोजी का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन हमारे पास जलवायु आपदा से जुड़े इमोजी नहीं है, वे उन्हें अन्य इमोजी के साथ मिला रहे हैं। ट्विटर यूजर्स कैलिफोर्निया के जंगल में लगी आग के बारे में जानकारी साझा करने के लिए आग और पेड़ की इमोजी को एक साथ जोड़ कर इस्तेमाल कर रहे हैं।
डीन का कहना है मुश्किल वक्त में कई बार समझ नहीं आता कि लोग अलग-अलग इमोजी को मिलाकर क्या कहना चाहते हैं। बतौर डीन, सोशल मीडिया पर लोगों के पास संकट की स्थिति में जानकारी साझा करने के लिए संसाधन की कमी है। उन्होंने बताया कि ये वैश्विक मुद्दे हैं और हमें इन पर वैश्विक संवाद की जरूरत पड़ेगी। (बीबीसी)




Related Post

Comments