राजनीति

अर्थव्यवस्था के चार टायरों में से तीन पंक्चर- चिदंबरम

Posted Date : 12-Jun-2018



नई दिल्ली, 12 जून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री पी। चिदंबरम ने सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार में देश की अर्थव्यवस्था की हालत खराब होने का दावा किया और कहा कि अर्थव्यवस्था के चार टायरों में से तीन टायर- निर्यात, निजी निवेश और निजी उपभोग- पंक्चर हो चुके हैं। 
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सरकारी खर्च रूपी 'टायरÓ चल रहा है, लेकिन चालू खाता घाटे और वित्तीय घाटे की वजह से इस पर दबाव बढ़ रहा है।
चिदंबरम ने कहा कि जिन चार टायरों के आधार पर अर्थव्यवस्था चलती है उनमें से तीन टायर- निर्यात, निजी निवेश और निजी उपभोग- पंक्चर हो चुके हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह स्थिति सरकार की नीतिगत गलतियों और गलत कदमों के कारण पैदा हुई है।
चिदंबरम ने कृषि, जीडीपी, रोजगार सृजन, व्यापार और अर्थव्यवस्था के कुछ दूसरे मानकों के आधार पर सरकार को घेरा। चिदंबरम ने कहा कि जीएसटी को गलत ढंग से लागू करने की वजह आज भी कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, मई 2014 के बाद बहुत सारी बातें की गई, लेकिन अर्थव्यवस्था की हालत खराब होती चली गई। चिदंबरम ने कहा, किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुताबिक उपज के दाम नहीं मिल रहे हैं। हर किसान जानता है कि लागत से 50 फीसदी से अधिक की बात जुमला है।
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के सर्वेक्षण के मुताबिक 48 फीसदी लोगों ने माना कि अर्थव्यवस्था की हालत खराब हुई है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से आज देश में गुस्सा है।
उन्होंने कहा कि अच्छे दिन के वादे के तहत हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन कुछ हजार नौकरियां ही पैदा की गईं। श्रम ब्यूरो के सर्वेक्षण (अक्टूबर-दिसंबर, 2017) का डेटा जारी क्यों नहीं किया है?
चिदंबरम ने कहा कि विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्था का असर कुछ हद तक देश की अर्थव्यवस्था पर होता है, लेकिन इन दिनों अमरीका की अर्थव्यवस्था अच्छा कर रही है। यूरोप में स्थिति ठीक है। भारत में हमारी नीतिगत गलतियों और कुछ गलत कदमों की वजह से अर्थव्यवस्था की हालत खराब हुई है।
उन्होंने कहा कि 2015-16 में विकास दर 8. 2 फीसदी थी जो 2017-18 में घटकर 6.7 फीसदी हो गई। चिदंबरम ने कहा कि पिछले चार वर्षों में एनपीए 2,63,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,30,000 करोड़ रुपये हो गया तथा आगे और बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि की कि 2017-18 में राज्य में 50,000 छोटे एवं मझोले कारोबार बंद हो गए, जिससे 5 लाख नौकरियां खत्म हो गईं और एसएमई सेक्टर में पूंजी के निवेश में 11,000 करोड़ रुपये की कमी आई। यदि पूरे देश के लिए इन आंकड़ों की गणना की जाए, तो यह नुकसान कई गुना ज्यादा होगा। इससे नोटबंदी से हुए नुकसान का अनुमान लगाया जा सकता है।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, महंगाई (इन्फ्लेशन) बढ़ती जा रही है। कुछ दिन पहले रेपो रेट में की गई वृद्धि इसका प्रमाण है। अब ब्याज दरें बढ़ेंगी, जिससे उपभोक्ताओं और उत्पादकों के कंधों पर भार बढ़ेगा। उन्होंने दावा किया कि इस सरकार में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कानून और कार्यक्रमों की उपेक्षा की जा रही है। (भाषा)




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