विचार / लेख

हर्षमन्दर आज फिर सुर्खियों में हैं
17-Sep-2021 1:09 PM (339)
हर्षमन्दर आज फिर सुर्खियों में हैं

-डॉ. परिवेश मिश्रा
1990 की दशक की शुरुआत में श्री हर्षमन्दर रायगढ़ जिले (तब के मध्यप्रदेश) में कलेक्टर बन कर आये थे।

उन दिनों की प्रचलित व्यवस्था के अनुसार जिले की शराब दुकानों के लिए साल भर के लिए ठेका होता था। बोलियां लगाने वाले कई होते थे किन्तु सफल होने वाले बहुत कम- वर्षों से जमे घाघ किस्म के लोग।

रायगढ़ जिले में पिछले अनेक वर्षों से पांच लोगों का एक समूह ठेका लेता आ रहा था। इस बीच कलेक्टर और दूसरे अधिकारी आते रहे जाते रहे पर शराब दुकानें यही समूह चलाता रहा।

समूह के अंदर मौके पर रहकर काम देखने वाला पार्टनर केवल एक था। बाकी चार वे थे जिन्हे ‘स्लीपिंग पार्टनर’ कहा जाता है- रहते भी थे दूसरे शहरों में। पांचों में बहुत अच्छी मित्रता और आपसी समझ और विश्वास था। पहला व्यक्ति ही पैसों का हिसाब किताब रखता था। उनमें ‘ऊपरी’ खर्च का विवरण भी शामिल रहता। अलग अलग अधिकारियों और कार्यालयों की ‘दरें’ तय थीं सो अविश्वास या धोखाधड़ी का अवसर नहीं बनता था। इसलिए सब कुछ ठीक चल रहा था।

और तभी कलेक्टर के रूप में हर्षमन्दर पहुंचे। हर्षमन्दर को आज तक न मालूम होगा पर वे इन पांचों ठेकेदार की बरसों पुरानी दोस्ती और पार्टनरशिप टूटने का कारण बन गये थे।  

हुआ यूं कि साल के अंत में पहले पार्टनर ने बाकी चार के सामने जब बही-खाता रखा तो उसमें कलेक्टर के नाम पर पहले सालों की तरह 25,000 की राशि दर्ज थी।

हर्षमन्दर की रेपुटेशन इतनी जबरदस्त साबित हुई कि बाकी चारों ने पार्टनरशिप तोडऩा स्वीकार कर लिया पर पहले पार्टनर के हिसाब पर विश्वास नहीं किया। हर्षमन्दर ने पैसे लिए यह बात वे किसी कीमत पर हजम नहीं कर पाये।

उस वर्ष के बाद जिले के ठेकेदार बदल गये।

हर्षमन्दर का मन समाज सेवा में अधिक था। सो ज्यों ही सरकारी सेवा के बीस वर्ष पूरे हुए और उन्हें पेन्शन की पात्रता मिली, उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और सामाजिक गतिविधियों के मैदान में कूद पड़े।

हर्षमन्दर इस बीच अक्सर समाचारों में रहे। कभी गुजरात के दंगा पीडि़तों के बीच काम करते तो कभी दिल्ली के दंगा पीडि़तों के लिए तो कभी लॉकडाऊन में पैदल घर लौटते मजदूरों के लिए अपनी वकील बेटी सुरूर के साथ आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते, तो कभी फुटपाथ पर जीवन बसर करते बच्चों का जीवन सुधारते।

आज फिर वे सुर्खियों में हैं। ई.डी. (ऐन्फोर्समेन्ट डायरेक्टोरेट) ने उनके निवास और कार्यालय में रेड की है।

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