संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : सात बरस की उम्र से बच्चों को कांग्रेसी बनाने की यह कवायद
26-Sep-2021 5:18 PM (178)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : सात बरस की उम्र से बच्चों को कांग्रेसी बनाने की यह कवायद

कांग्रेस पार्टी ने उसके कुछ नेताओं के मातहत चलने वाले जवाहर बाल मंच को कल पार्टी के एक विभाग की मान्यता दी है। और इसके लिए दक्षिण भारत के एक पार्टी नेता डॉ जीबी हरि को पहला राष्ट्रीय चेयरमैन नियुक्त किया है, जो कि केरल में इस मंच को कई बरस से चलाते आ रहे थे। कांग्रेस की खबर के मुताबिक यह संगठन 7 से 17 वर्ष के बच्चों के बीच काम करेगा और जाहिर है कि यह कांग्रेस की विचारधारा को फैलाने का भी काम करेगा। इस पार्टी का वर्तमान बड़ा खराब चल रहा है, भविष्य अनिश्चित है, लेकिन इसके पास इतिहास सबसे बुलंद है। हिंदुस्तान में अगर किसी पार्टी के पास सबसे गौरवशाली इतिहास है तो वह कांग्रेस पार्टी ही है जो कि गांधी के वक्त से चली आ रही है। जो गांधी की निगरानी में चलती रही, और गांधी के पसंदीदा नेहरू ने जिसे आजादी के आंदोलन से जोडक़र देश के इतिहास की सबसे अधिक शहादत देने वाली पार्टी बनाकर रखा। ऐसे में देश के छोटे बच्चों को अगर सांप्रदायिकता से परे, और धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक सद्भाव, और समानता की नसीहत देनी है तो उसके लिए कांग्रेस के पास अपना सबसे संपन्न इतिहास है। और शायद आज उसे जिंदा रहने के लिए अपने इतिहास के नगदीकरण की जरूरत भी है क्योंकि इसके अलावा उसके पास और बहुत कुछ बचा नहीं है।

लेकिन जैसा कि कांग्रेस के बहुत से दूसरे संगठनों या मोर्चों के साथ हो होता है, उनमें राष्ट्रीय स्तर से लेकर राज्य तक ऐसे लोगों को मनोनीत किया जाता है जिनका उस दायरे से बहुत कम लेना-देना रहता है। कांग्रेस के मजदूर संगठनों के मुखिया की जगह करोड़पति, अरबपति संपन्न कांग्रेसी काबिज हो जाते हैं। मजदूरों के बाच ऐसे संगठनों का काम धरा रह जाता है, और लोगों के बीच कांग्रेस पार्टी की विश्वसनीयता भी खत्म होती है। दूसरी तरफ पिछले बरस कोरोना और लॉकडाउन से जूझने में कांग्रेस के नौजवान संगठन युवक कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के मातहत दिल्ली में जितना काम किया था, उससे पार्टी को बड़ी वाहवाही भी मिली थी। अब देखने की बात यह है कि कल बनाया गया यह नया विभाग बच्चों के बीच कितना काम कर सकता है।

बच्चों का मामला कुछ अधिक नाजुक इसलिए है कि जब कांग्रेस पार्टी के बैनर तले बच्चों के लिए कोई काम संगठित रूप से करने की नीयत पार्टी की है तो उसे पूरी की पूरी पार्टी को एक आदर्श के रूप में भी बच्चों के सामने रखना होगा। ऐसा नहीं हो सकता कि पार्टी के बहुत से नेता आज गंदी जुबान में बात करें, बहुत से नेता सार्वजनिक रूप से सरकारी कर्मचारियों को पीटें और उसके बाद पार्टी बच्चों को शहादत और महानता का इतिहास पढ़ाए। बच्चों को पढ़ाने के लिए इतिहास तो ठीक है लेकिन बच्चों को आज की मिसाल भी देनी होगी और अगर वह अखबारों के पन्नों पर, या अपने परिवार के लोगों से, या टीवी की खबरों पर कांग्रेस के लोगों की गुंडागर्दी पढ़ते रहेंगे, तो गांधी और नेहरू कहां से आकर कांग्रेस को बचा पाएंगे? इसलिए हम कांग्रेस के मजदूर संगठन, या उसके महिला मोर्चा, या युवक कांग्रेस इन सबसे परे बच्चों के लिए बनाए गए इस विभाग को लेकर उलझन में हैं कि क्या कांग्रेस सचमुच बच्चों के बीच काम करने लायक, और बच्चों को प्रभावित करने लायक पार्टी अपने आपको बना पाएगी?

इतने छोटे बच्चों के लिए काम करने वाले संगठनों को देखें तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ याद पड़ता है जो मुहल्लों के मैदानों पर या स्कूलों के अहातों में कहीं-कहीं पर सुबह से शाखा लगाता है, बच्चों और बड़ों को राष्ट्रप्रेम की बात सुनाता है, और कहीं पर परेड करवाता है, कहीं उन्हें खेल खेल पाता है। दूसरी तरफ बस्तर जैसे इलाकों में नक्सल संगठन भी छोटे-छोटे बच्चों के बीच काम करते हुए दिखते हैं। इस तरह कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करना कोई नई बात नहीं है और दुनिया के इतिहास में कई जगहों पर राजनीतिक संगठन या दूसरे अपने-आपको सांस्कृतिक कहने वाले संगठन ऐसा करते ही आए हैं। इनका मोटा मकसद अपने बड़े संगठन की तरफ बच्चों को मोडऩे का रहता है, और क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने पिछले 10-15 बरस से चले आ रहे इस संगठन को अब कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन के एक विभाग की तरह दर्जा दिया है, तो जाहिर है कि अब यह एक राजनीतिक पार्टी का एक मोर्चा है, जो कि सबसे कम उम्र के लोगों के लिए है। ऐसे संगठन का काम करना बड़ा नाजुक हो सकता है क्योंकि पार्टी संगठन यह उम्मीद कर सकता है कि इसमें उसके नेताओं को प्रमुखता से पेश किया जाए, और बच्चों के बीच उन्हें लोकप्रियता मिले। दूसरी तरफ ऐसे संगठन को एक व्यापक लोकतांत्रिक के हित में काम करना चाहिए और किसी व्यक्ति को बढ़ावा देने के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय मूल्यों की समझ बच्चों के बीच मजबूत करनी चाहिए। कांग्रेस के भीतर रहते हुए यह संगठन पता नहीं कितना कुछ कर पाएगा, लेकिन बच्चों के बीच इसे अगर पार्टी की प्रोपेगेंडा मशीन का एक हिस्सा ही बनाकर रखा जाएगा तो इससे लोग शायद ही जुड़ेंगे। इसे पार्टी के चुनावी मकसद से परे रखा जाएगा तो हो सकता है कि यह बच्चों के भी अधिक काम आए और खुद कांग्रेस के भी।
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