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सोनिया गांधी के पीएम बनने को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का चौंकाने वाला बयान, जानें क्या कहा
26-Sep-2021 7:06 PM (90)
सोनिया गांधी के पीएम बनने को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले का चौंकाने वाला बयान, जानें क्या कहा

केंद्रीय मंत्री और आरपीआई (RPI) नेता रामदास अठावले ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के देश का प्रधानमंत्री बनने को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाला बयान दिया है. अठावले ने कहा है कि 2004 में जब पहली बार संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन (यूपीए) की सरकार सत्ता में आई थी तब सोनिया गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए था. साथ ही अठावले ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के होने की बात को भी बचकाना करार दिया और कहा कि वो भारतीय नागरिक और लोकसभा की सदस्य हैं. अठावले ने तर्क दिया कि जब कमला हैरिस अमेरिका की उपराष्ट्रपति बैन सकती हैं तो सोनिया गांधी देश की प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकतीं. 

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने ये बात कही. उन्होंने कहा, "जब साल 2004 के आम चुनावों में यूपीए को बहुमत मिला तब मैंने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव दिया था. मेरा उस वक्त भी यही मानना था कि उनका विदेशी मूल का होना कोई मुद्दा नहीं है. अगर कमला हैरिस अमेरिका की राष्ट्रपति बन सकती हैं तो सोनिया गांधी भी देश को प्रधानमंत्री बन सकती हैं. सोनिया गांधी भारतीय नागरिक होने के साथ साथ पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी की पत्नी और लोकसभा के लिए चुनी गई सांसद भी हैं इसलिए वो प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती हैं."

मनमोहन की जगह शरद पवार को बनाया जाना चाहिए था पीएम 

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने ये भी कहा कि, "अगर उस वक्त सोनिया गांधी को पीएम का पद स्वीकार नहीं था तो तब ऐसे में शरद पवार को पीएम बनाया जाना चाहिए था जो कि उस वक्त पार्टी के वरिष्ठ नेता भी थे. अगर 2004 में मनमोहन सिंह की जगह पवार को पीएम बनाया जाता तो कांग्रेस पार्टी के हालात इतने खराब ना होते जितने आज हो रहे हैं."

जातिगत जनगणना के पक्ष में है मेरी पार्टी

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने साथ ही कहा कि उनकी पार्टी जातिगत जनगणना के पक्ष में है. पार्टी का मत है कि सरकार को जाति के आधार पर नागरिकों की गिनती पर विचार करना चाहिए. यह बयान उस वक्त आया है, जब सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पिछड़े वर्गों की जाति आधारित जनगणना 'प्रशासनिक रूप से कठिन औऱ दुष्कर' है और जनगणना के दायरे से इस तरह की सूचना को अलग करना 'नीतिगत निर्णय' है. ( abplive)

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