संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : बच्चों के यौन शोषण में चर्च से लेकर घर तक कोई पीछे नहीं
06-Oct-2021 5:26 PM (222)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय :  बच्चों के यौन शोषण में चर्च से लेकर घर तक कोई पीछे नहीं

फ्रांस के कैथोलिक चर्च के पादरियों ने 1950 से लेकर अब तक इन 70 वर्षों में कम से कम सवा दो लाख नाबालिग बच्चों का का सेक्स शोषण किया। वहां पर चर्च ने इसके लिए एक जांच आयोग बनाया था जिसने ढाई साल तक जांच करने के बाद 25 सौ पेज की रिपोर्ट में इस पूरे भयानक सिलसिले का ब्यौरा दिया है। अब वहां पर सवाल यह खड़ा हो गया है कि इनमें से अधिकांश पादरी या तो मर चुके हैं, या मरने के करीब कब्र में पैर लटकाए हुए हैं, तो क्या उन्हें अदालत में खींचने से कुछ साबित हो पाएगा? लेकिन इसके साथ-साथ एक दूसरी बड़ी चीज है कि पादरियों से परे चर्च के दूसरे कर्मचारियों, चर्च के स्कूलों के शिक्षकों ने बच्चों का जो देह शोषण किया होगा, उनके बारे में एक अंदाज लगाया जा रहा है कि ऐसे बच्चों की गिनती 10 लाख से अधिक पहुंच सकती है। कहने के लिए कैथोलिक चर्च के मुखिया पोप फ्रांसिस ने जांच के नतीजों पर गहरी तकलीफ जाहिर की है और इन नतीजों को भयानक बताया है। यह सिलसिला दुनिया भर के उन तमाम चर्चों में चलते ही आया है जहां पर पादरियों को शादी से दूर रहने को कहा जाता है और चर्च ने अपनी पूरी कोशिश करके ऐसे मामलों को दबाने का काम किया है। धर्म से जुड़े हुए लोगों के हाथों बच्चों का, महिलाओं का, और आदमियों का भी शोषण, कोई नई बात नहीं है। हिंदुस्तान में भी ऐसा देखने में बहुत आता है। आसाराम जैसे लोग और उसके साथ ही उसका बेटा भी, भक्तों और अनुयायियों का सेक्स शोषण करते आए हैं, और बाबा राम रहीम नाम का एक नौटंकीबाज भी बलात्कार में जेल की सजा काट रहा है। लेकिन यह सिलसिला नया नहीं है और इसे दुनिया के ऐसे कुछ एक और मामलों से जोडक़र देखना चाहिए, जिनमें कुछ बरस पहले का हिंदुस्तान का एक केरल का मामला ऐसा था जहां कई मुस्लिम लोग ऐसे पाए गए थे जो अपने बच्चों से 4 वर्ष की उम्र तक बलात्कार करने को जायज मानते थे।

केरल में तीन चार बरस पहले  पुलिस ने लोगों के एक ऐसे समूह को पकड़ा था जो कि आपस में अपने बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर, उनकी नग्न तस्वीरें खींचकर शेयर करते थे, और इस समूह को चलाने वाले ने ऐसे पांच हजार लोगों को जुटा लिया था। यह सरगना मुस्लिम नौजवान इस बात की वकालत करता था कि जब तक बच्चियां चार बरस की रहें, उनसे बलात्कार करने में कोई हर्ज नहीं है क्योंकि इस उम्र की बातें उनको याद नहीं रहती। यह आदमी अपनी ही बच्चियों से बलात्कार करते उनके भी वीडियो पोस्ट करता था। केरल पुलिस ने इन पांच हजार लोगों को पकडऩे की पूरी कोशिश की है, लेकिन ये लोग मोबाइल फोन के एक ऐसे मैसेंजर, सिग्नल, का इस्तेमाल करते हुए जहां किसी को पकड़ा नहीं जा सक रहा है। इन लोगों ने अपने सरीखे हजारों लोगों के साथ ऐसे वीडियो शेयर करने का काम कर रखा था और इसमें गिरफ्तारियां हुई थीं।

बच्चों के साथ बलात्कार के मामले तो सामने आते रहते हैं, लेकिन जब उनके मां-बाप ही उनसे बलात्कार करने लगें, और उसकी फोटो या वीडियो दूसरों में बांटने लगें, तो यह एक बहुत ही गंभीर जुर्म भी है, और शायद मानसिक बीमारी भी है। भारत में अधिकतर लोगों का यह मानना रहता है कि बच्चों के साथ आसपास के लोग, परिवार के लोग ऐसा सुलूक नहीं कर सकते और महज अनजान लोग ही उनका यौन शोषण कर सकते हैं। अधिकतर परिवारों में अगर बच्चे किसी पारिवारिक सदस्य या करीबी के बारे में कोई शिकायत भी करते हैं, तो मां-बाप उन्हें डांटकर चुप कर देते हैं। ऐसे में बच्चों के पास कहीं और जाकर शिकायत करने की कोई गुंजाइश बचती नहीं है। लेकिन पूरी दुनिया की तरह भारत में भी चाईल्ड पोर्नोग्राफी का खतरा है जो कि मौजूद है, और बच्चों का यौन शोषण एक हकीकत है। दुनिया के किसी भी दूसरे गरीब देश की तरह भारत में भी गरीब बच्चे इसके शिकार अधिक होते हैं, लेकिन केरल से यह जो मामला सामने आया है, इसमें वहां तो ऐसी गरीबी भी नहीं है, वहां तो लोग पढ़े-लिखे भी हैं, और अगर ऐसे गिरोह में मुस्लिम लोग ही सरगना हैं, तो फिर उनके धर्म की रोक-टोक भी उनके गलत कामों को नहीं रोक पाई। इसलिए बच्चों का यौन शोषण संपन्नता से परे, शिक्षा से परे, धर्म से परे एक अलग किस्म का खतरा है जिससे कोई भी बच्चा सुरक्षित नहीं है।

बच्चों को ऐसे शोषण से बचाने के लिए उनको जागरूक बनाना, उनके आसपास के माहौल को तरह-तरह की निगरानी से सुरक्षित रखना, और बच्चों के मां-बाप को भी जागरूक करना एक समाधान हो सकता है। इस बारे में सरकारों को पहल करनी चाहिए, समाज को शामिल करना चाहिए, और फिर अलग-अलग किस्म के संगठन अपने-अपने सदस्यों को इस खतरे की तरफ से जागरूक करते चलें, इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। श्रीलंका या बैंकाक की तरह ही भारत में भी गोवा में पर्यटकों की बड़ी मौजूदगी के बीच बच्चों के यौन शोषण की बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब एक दूसरा बड़ा पर्यटक-राज्य केरल ऐसी भयानक खबर लेकर आया है। पूरे देश को इससे चौकन्ना होने की जरूरत है, ऐसी खबरों को अनदेखा करना कोई इलाज नहीं होगा, लोगों को अपने आसपास के लोगों से इस खतरे के बारे में खुलकर बात करनी होगी, और हर किसी को अपने आसपास के बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कोशिश करनी होगी। हर राज्य सरकार को अपने नागरिक संगठनों को साथ लेकर तुरंत ही ऐसी जागरूकता का अभियान चलाना चाहिए। दूसरी बात यह कि देश में आईटी एक्ट तो बहुत मजबूत है, लेकिन वह अदालत में किसी को सजा नहीं दिला पा रहा है। ऐसे में इंटरनेट या सोशल मीडिया पर, या कि किसी मैसेंजर सर्विस पर इस तरह के वीडियो आगे बढ़ाकर जो लोग समाज को एक खतरनाक जगह बना रहे हैं, उन्हें अपने बच्चों के बारे में भी सोचना चाहिए। कुल मिलाकर यह दुनिया एक भयानक जगह है, और लोगों को अपने बच्चों को बचाने के लिए इस पूरी दुनिया को सुरक्षित बनाना पड़ेगा, महज अपने घर को सुरक्षित रखकर, महज अपने बच्चों को सुरक्षित रखकर कुछ भी नहीं हो सकेगा।
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