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500 साल बाद कैसी हो जाएगी हमारी पृथ्वी
12-Oct-2021 6:56 PM (66)
500 साल बाद कैसी हो जाएगी हमारी पृथ्वी

हमारी पृथ्वी हर क्षण बदल रही है. कुछ प्रक्रियाएं इसे तेजी से प्रभावित कर रही हैं तो अधिकांश बहुत ही धीरे-धीरे. लेकिन आज से 500 साल बाद पृथ्वी कैसी दिखेगी इसका पूर्वानुमान लगाना मुश्किल इसलिए है क्योंकि इसमें बहुत सारे कारक ऐसे भी हैं जो खुद अगले 500 सालों में बदल सकते हैं जिनका भी अनुमान लगा पाना आसान काम नहीं है. यह बिलकुल वैसा ही है 15वीं सदी के लोग आज की दुनिया के बारे में किस तरह से सही अनुमान लगा पाते. इसमें दो तरह की प्रक्रियाएं शामिल हैं. एक वो जिनमें प्राकृतिक चक्र शामिल हैं और दूसरी में मानव सहित जीवन की वजह से होने वाली प्रक्रियाएं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: 

पृथ्वी खुद भी गतिमान और लगातार बदल रही है. उसके घूर्णन और सूर्य की परिक्रमा के अलावा, उसके डगमगाने की प्रक्रिया, उसकी अपनी धुरी पर झुकाव में बदलाव, यहां तक कि कक्षा में बदलाव उसकी सूर्य से दूरी बदल देता है. ये बदलाव हजारों लाखों सालों में होते हैं और इनकी वजह से ही हिम युग जैसी घटनाएं होती हैं. भूगर्भीय लिहाज से 500 साल बहुत बड़ा समय नहीं है. 

दूसरी तरफ जीवन की प्रक्रियाएं भी पृथ्वी में बदलाव ला रहे हैं. जीवन का ग्रह पर असर का अनुमान लगाना मुश्किल है. पारिस्थितिकी तंत्र के एक हिस्सा में बदलाव दूसरे बदलावों को शुरुआत काफी बड़ा अंतर ला सकता है. इसमें मानवजनित प्रक्रियाएं पृथ्वी को बहुत से मायनों में बदल रही हैं और यह असर जीवन के प्रभावों में सबसे बड़ा है. जंगलों का साफ होना, कृषि के लिए वन्यजीवों के आवासों का टूटना, शहरों का बेतरतीब निर्माण, जैसे बहुत से कारक है जिन परिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है.

मानव जनित गतिविधियां ग्लोबल वार्मिंग में बड़ा योगदान दे रहीं हैं जिससे जलवायु में स्थायी बदलाव तक हो रहे हैं. ऐसा जीवाश्म ईंधन के जलाने और अन्य क्रियाओं के कारण अधिकाधिक ग्रीन हाउसगैसों के उत्सर्जन हो रहा है जिसे हमारा वायुमंडल सहन और वहन नहीं कर सकता है. ग्रीनहाउस गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा को अवशोषित कर लेती हैं जो एक अच्छी प्रक्रिया है, लेकिन यह इतनी ज्यादा बढ़ रही है जिससे नुकसान होने लगा है. ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड होने से तापमान बढ़ता है जिससे गर्मी के दिन ज्यादा गर्म हो जाते हैं और आर्कटिक और अंटार्कटिका में बर्फ की चादरें तेजी से पिघल रही हैं जिससे समुद्र तटों पर बसे इलाकों में बाढ़ आने का खतरा है.

लेकिन ये सारी चीजें वो हैं जिनका पृथ्वी अभी सामना कर रही है. ये बदलाव 500 साल बाद पृथ्वी में बहुत ज्यादा अंतर ला सकते हैं. लेकिन काफी कुछ इस पर निर्भर करता है कि इंसान पृथ्वी के प्रति अपने तौर तरीके कैसे बदलता है. गर्म होता ग्रह जमीन पर चरम मौसम जैसे गर्म लहर, तूफान और सूखे जैसे हालाता ला सकता है. पूरी पृथ्वी पर जीवन जोखिम में है. वैसे भी पृथ्वी पर सारे बदलाव इंसान के कारण नहीं होंगे. हां इंसान ने उन्हें खराब जरूर किया है. 

500 साल पहले लोग आज की पृथ्वी की जीवनचर्या की कल्पना भी नहीं कर पाते थे. वे चलती कारें या मोबाइल फोन उनकी सोच के दायरे से बहुत बाहर की चीज रही होगी. जहां तकनीक ने तरक्की कर अकल्पनीय सुविधाएं दी हैं. तकनीक जलवायु समस्या का समाधान तक ला सकती है. तकनीक ने जलवायु परिवर्तन  जैसी समस्याएं पैदा की है. 1980 के दशक में पहचाना गया ओजोन होल का बनना मानव निर्मित तकनीक पैदा हुए क्लोरोफ्लोरो कार्बन जैसे प्रदूषकों की वजह से ही बना था. और तकनीक ने ही उस समस्या के हमारा परिचय कराकर उसके निदान और उपचार के लिए प्रेरित भी किया था. अगर इंसान ने सही दिशा में कदम ना उठाए तो पृथ्वी पर जीवन और दूभर होने वाला है यह तय माना जाना चाहिए. 

(news18.com)

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