विचार / लेख

बेर की बदौलत सैर
20-Oct-2021 6:15 PM (59)
बेर की बदौलत सैर

-प्रकाश दुबे

कोलंबो और रेडिओ सीलोन वाली लंका से परिचित लोग जानते होंगे कि भारत में कई जगह लंका होने का दावा किया जाता है। दावा तो रावण होने का भी किया जा सकता है। पौराणिक कालीन शबरी ने वर्तमान महाराष्ट्र में बेर खिलाए या गुजरात में? दावे करते रहें। नरेन्द्र मोदी सरकार आदिवासी बहुल डांग जिले में शबरी धाम बनवा चुकी है। शबरी के वंशज होने के दावेदार भूपेन्द्र पटेल सरकार की मेहरबानी से राम की अयोध्या मुफ्त में देख सकेंगे। भूपेन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्री पूर्णेश मोदी ने रामजन्म भूमि दिखाने के लिए प्रत्येक आदिवासी को पांच हजार रुपए सरकारी खजाने से दिलाने का ऐलान कर दिया। पर्यटन के साथ पूर्णेश के पास तीर्थस्थान विकास का दायित्व भी है। इतनी राशि में पुष्पक विमान या उडऩ खटोले में नहीं बैठ सकते। फिलहाल आदिवासी सैलानियों को रेलगाड़ी या बस का ही आसरा है। पूर्णेश भाई की योजना में गुजरात के राम- कथा से जुड़े स्थलों में हर साल दशहरा मनाना शामिल है।  

 

लड्डू प्रसाद
मंत्रियों की भरमार से कुछ लोगों को भ्रम हो सकता है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक जम्मू-कश्मीर में तो नहीं है? होने को तो राष्ट्रपति भी थे। बहुत खुश थे। इससे पहले दो बार करगिल जाने की तैयारी से आते थे। कभी मौसम ने पानी फेर दिया कभी कुछ अलग संकट। तीसरी यात्रा में सफल रहे। इस खुशी में उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को लड्डू भेंट किए। सारे लड्डू उप राज्यपाल ने गुपचुप अकेले नहीं खाए। उन्होंने कुछ पत्रकारों को लड्डू उत्सव में सहभागी बनाया। पत्रकारों से उपराज्यपाल की पहले से गहरी छनती है। नौकरशाह चेतावनी देते रहे। पद ग्रहण करने के बाद उन्होंने सारे पत्रकारों को बुलाकर बातचीत की। तीन मर्तबा मिल चुके हैं। केन्द्रशासित इकाई में सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना करती हैं। पत्रकार हैरान परेशान हैँ। आतंक से और कानून-कायदों की कड़ाई से भी। पत्रकार के टिफिन में बमगोला मिलने पर परेशानी सारे पत्रकार जगत को होती है। खबरों और खबरचियों के हालात बदलकर लड्डू की मिठास बढ़ाना आसान नहीं, और असंभव भी नहीं।

वाह रे शेर
इंसान को करिश्मा बनाने में छोटी सी भीड़ का हाथ रहता है। आम फहम भाषा में यूं समझें। नेता, अभिनेता आगे आगे। उनके आगे आगे चलने वाले बैंड बाजे की धुन पर या उसके बगैर जोर से चिल्लाते हैं-वाह रे शेर। आया रे शेर। नाचने गाने वाले शेरों से कभी कभार बब्बर शेर मुसीबत में फंस जाते हैं। मोठा भाई यानी तीसरे सरदार पटेल गृह मंत्री को वाह रे शेर वाले बैंड बाजे की जरूरत नहीं है। पणजी में अमित शाह ने  कहा-मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में सर्जिकल स्ट्राइक हुआ। पर्रिकर ने बता दिया कि भारत को जवाब देना आता है। अमित भाई सरल-सुबोध हिंदी बोलते हैं। खबर भेजने वाले मेहरबान और गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश तक छापने वाले हितैषी कलमजीवियों ने मिर्च-मसाला मिलाया। सुर्खियों में खबरें छपीं-गृहमंत्री की चेतावनी। अगली स्ट्राइक। दुरुस्त कर देंगे—आदि-आदि। विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय तक हलचल मची।  साजिश की जांच की गई। निष्कर्ष-चापलूसों से बच कर रहें।    

पहलगाम में भाईजान
सोमवार की सुहानी धूप में सलमान खान का जिक्र आते ही आपको हिरन से लेकर मुंबई के फुटपाथ तक बहुत कुछ याद आएगा। गाने, कुछ हीरोइनें। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी को बजरंगी भाईजान याद आया। सलमान की फिल्म की शूटिंग में अनंतनाग के पास हुई थी। योजना आयोग से लेकर नीति आयोग तक की यात्रा में अमिताभ ने दुनिया में प्रसिद्ध हिंगुल हिरण से लेकर बहुत कुछ देखा है। अकेले भी। सपरिवार भी। दर्जनों सरकारी और असरकारी योजनाओं, संस्थानों और विभागों में जिम्मेदारियां संभल रहे कांत ने नीति आयोग में पांच वर्ष छह महीने पूरे किए हैं। भारत में बहुत अधिक लोकतंत्र पर फब्ती कसकर कांत ने बखेड़ा मोल लिया था।
बहरहाल लोकशाही का इतना फायदा तो है। जहां भी चले जाते हैं, किसी न किसी दायित्व से वहां का संबंध जुड़ता है। बजरंगी भाईजान में शामिल स्थल को देखने के लिए अमिताभ कांत आतुर थे। भारत के 50 प्रभावशाली नौकरशाहों में शामिल कांत प्रधानमंत्री के नवरत्नों में शामिल हों या नहीं, दस भरोसेमंदों में जरूर गिने जाते हैं। इसलिए उनकी जियारत मायने रखती है।
 (लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)

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