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आज ही के दिन जन संघ की हुई थी स्थापना, जानिए कैसे बनी थी भाजपा की यह पितृ पार्टी?
21-Oct-2021 12:47 PM (59)
आज ही के दिन जन संघ की हुई थी स्थापना, जानिए कैसे बनी थी भाजपा की यह पितृ पार्टी?

Bharatiya Jana Sangh Sthapna Diwas: बीते करीब तीन दशक से देश की राजनीति का केंद्र रही ‘भारतीय जनता पार्टी’ से पहले भी एक दक्षिणपंथी दल था जिसका नाम था ‘भारतीय जन संघ’. भारतीय जन संघ को बोलचाल में जन संघ के नाम से जाना जाता था. आज उस पार्टी का स्थापना दिवस है. आज ही दिन 21 अक्टूबर 1951 को उस वक्त के प्रखर दक्षिणपंथी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस पार्टी की स्थापना की थी. हालांकि करीब तीन दशक बाद 1977 में इस पार्टी को भंग कर दिया गया था.

क्यों बनाई गई जन संघ
वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार में देश के सभी विचारधारा के नेताओं की भागीदारी थी. इसमें उस वक्त के प्रखर दक्षिणपंथी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी शामिल थे. वह उस वक्त हिंदू महासभा के नेता थे और नेहरू कैबिनेट में उनको उद्योग और आपूर्ति मंत्रालय दिया गया था. लेकिन प्रधानमंत्री नेहरू के साथ विवाद और लियाकत-नेहरू समझौते के विरोध में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

इसके बाद उन्होंने हिंदू महासभा भी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मदद से 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जन संघ की स्थापना थी. यह पार्टी संघ परिवार का एक राजनीतिक मंच था.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर भारत सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध किया. नेहरू की सरकार ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के साथ उसे कई विशेषाधिकार दिए थे. इन्हीं विशेषाधिकारों का श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विरोध किया और इसके लिए उनको जेल जाना पड़ा. जेल में ही उनका दिल का दौरा पड़ने की वजह से 1953 में निधन हो गया.

कैसे हुआ जन संघ का जन्म
1950 के दशक की शुरुआत में देश के दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी नेताओं ने आरएसएस के सहयोग से जन संघ की स्थापना की. उस वक्त श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्रखर हिंदू राष्ट्रवाद के चेहरा थे. उन्होंने करीब-करीब उसी वक्त उस हिंदू महासभा को छोड़ दिया था जिसेके लंबे समय तक अध्यक्ष रहे थे. हिंदू महासभा में गैर हिंदू समुदाय के लोगों को सदस्य बनाए जाने पर पार्टी में विवाद हो गया था.

इसके बाद मुखर्जी ने दिल्ली में 21 अक्टूबर 1951 को जन संघ बनाने की घोषणा की. इस पार्टी की विचारधारा मध्यमार्गी हिंदुत्व थी. 1951 के पहले आम चुनाव में इस पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे और उसके तीन नेता जीतकर संसद पहुंचे. उनमें से एक खुद श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे. संसद में यह पार्टी चक्रवर्ती राजगोपालचारी की स्वतंत्र पार्टी के साथ मिलकर जोरदार तरीके से मुद्दे उठाती थी. 1953 में मुखर्जी के निधन के बाद आरएसएस के नेताओं ने इसकी कमान संभाली.

देश की राजनीति में इस पार्टी का जनाधार लगातार बढ़ता रहा. वर्ष 1957 के आम चुनाव में इसे चार, 1962 में 14 और 1967 में चौथी लोकसभा के चुनाव में इस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया और उसे 35 सीटों पर जीत मिली. इसके बाद पांचवीं लोकसभा चुनाव में इसे 22 सीटों पर जीत मिली.

आपातकाल के बाद पार्टी का जनता पार्टी में विलय
देश में 1975 में घोषित आपातकाल के देश के सभी बड़े विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. इसमें जनसंघ के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल थे. आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव से पहले जन संघ भी कांग्रेस विरोध राष्ट्रीय मोर्चे का हिस्सा बनी और जनता पार्टी में उसका विलय हो गया.

लेकिन केंद्र में जनता पार्टी की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई और देश में समय से पहले ही आम चुनाव हुए. इसी बीच दोहरी सदस्यता यानी आरएसएस और जनता पार्टी की सदस्यता के मसले पर विवाद के बाद पुराने जन संघ के नेता जनता पार्टी से अलग हो गए और 1980 में एक नई राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की.(news18.com)

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