साहित्य/मीडिया

'ज़माना हो गया ख़ुद से मुझे लड़ते-झगड़ते...' पढ़ें इफ़्तिख़ार आरिफ़ के शेर
22-Oct-2021 10:18 AM (114)
'ज़माना हो गया ख़ुद से मुझे लड़ते-झगड़ते...' पढ़ें इफ़्तिख़ार आरिफ़ के शेर

ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है, ऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है

तुम से बिछड़ कर ज़िंदा हैं, जान बहुत शर्मिंदा हैं

दिल पागल है रोज़ नई नादानी करता है, आग में आग मिलाता है फिर पानी करता है

ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं,फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं

वफ़ा की ख़ैर मनाता हूँ बेवफ़ाई में भी,मैं उस की क़ैद में हूँ क़ैद से रिहाई में भी

ज़माना हो गया ख़ुद से मुझे लड़ते-झगड़ते,मैं अपने आप से अब सुल्ह करना चाहता हूँ 

(news18.com)

अन्य पोस्ट

Comments