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वो रेनबो आईलैंड जहां मसाले की तरह खाई जाती है वहां की मिट्टी
22-Oct-2021 9:09 PM (58)
वो रेनबो आईलैंड जहां मसाले की तरह खाई जाती है वहां की मिट्टी

दुनिया में कई जगह अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं. इनके लिए पर्यटन भी खूब होते हैं, फिर भी ऐसे कई इलाके हैं जो खतरनाक ना होते हुए भी बहुत खूबसूरत हैं पर दुनिया के पर्यटकों को उनकी जानकारी आमतौर पर नहीं है. इसमें ईरान का होर्मोज द्वीप कई लिहाज से आकर्षक जिसे रेनबो द्वीप भी कहा जाता है. इस भूभाग की खासियत इसें बिखरे हर तरह के रंग हैं जो इसे बहुत ही खूबसूरत बनाते हैं. पारस की खाड़ी में स्थित इस रहस्यमयी द्वीप के पहाड़ों के अवाला खूबसूरत समुद्री किनारे एक अलग ही छटा बिखेरते हैं, लेकिन इस द्वीप की मिट्टी भी मसालेदार होती है.

खनिज भी हैं यहां की खासियत
यह द्वीप खूबसूरती के साथ यहां मिलने वाले खनिजों आदि की वजह से भी जाना जाता है इसी लिए इसे भूगर्भशास्त्रियों का डिजनीलैंड भी कहा जाता है. यहां के टूरिस्ट गाइड यहां की मिट्टी चखने की सलाह भी देते हैं. इस द्वीप पर कई जगह नमक के टीले दिखते हैं जिनमें शेल, मिट्टी और लौह समृद्ध आग्नेय चट्टानों की परतें पाई जाती हैं. इन्हीं चट्टानों की परतों की वजह से यह क्षेत्र कई जगहों पर लाल पीला और नारंगी रंगों से चमकता दिखाई देता है.

70 प्रकार के खनिज
बताया जाता है कि यहां 70 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं. यहां के गाइड बताते हैं 42 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में हर इंच की जगह की अपनी कहानी है. ब्रिटिश जियोलॉजीकल सर्वे की प्रमुख भूवैज्ञानिक डॉ कैथरीन गुडइनफ पहले ईरान के साथ कामकरती थीं. उनका कहना है कि करोड़ों साल पहले फारस की खाड़ी और उसके आसपास उथले सागरों में नमक की मोटी पर बन गई थी.

रंगीन भूभाग का निर्माण
इन परतों का धीरे धीरे आपस में टकराव हुआ और यहां की खनिज समृद्ध ज्वालामुखी धूल की परतें भी इसमें मिली गईं. जिससे यहां रंगीन भूभाग बन गया. पहले नमक की परतें ज्वालामुखी अवसाद से ढक गईं. फिर समय के साथ नमक दरारों से ऊपर आ गया और नमक के टीले बन गए. गुडइनफ बताती है कि नमक की मोटी परतें जमीन में कई किलोमीटर नीचे तक हैं और फारस की खाड़ी के बड़े इलाके में फैली हैं.

चखने योग्य रेनबो आइलैंड
यहां के भूभाग की आकृति इस तरह से बनी हैं जिससे यहां बहुत खूबसरत तट, पहाड़ और गुफाएं बन पड़ी हैं. इसी लिए होरमूज को प्रायः इंद्रधनुषी द्वीप यानि रेनबो आइलैंड भी कहते हैं. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा द्वीप है जहां खाने योग्य पहाड़ हैं. जिन्हें चखने के लिए यहां के गाइड कहते रहते हैं.

मसाले की तरह उपयोग
यहां की कई जगहों की मिट्टी को मसालों की तरह उपयोग में लाया जाता है. इनमें यहां के पहाड़ों की गीलैक नाम की लाल मिट्टी, जो हीमैटाइट नाम के लौह अयस्क से बनती है, के बारे में कहा जाता है कि वह आग्नेय चट्टानों से बनी है. दिलचस्प बात है कि गीलैक का उपयोग उद्योगों के अलावा स्थानीय भोजन में मसाले के तौर पर भी किया गया जाता है. इस मसाले को लोग यहां की स्थानीय ब्रेड के साथ भी खाते हैं.

और सॉस की तरह भी
यहां के लोग बताते हैं कि यहां कि लाल मिट्टी को सॉस की तरह भी उपयोग में लाया जाता है. इस खास सॉस को सूरखा कहा जाता है.  इसके अलावा लाल मिट्टी का उपयोग पेंटिंग, रंगरोन, कॉस्मेटिक्स और सिरेमिक आदि में भी किया जाता है. माणिक लाल पहाड़ के अवाला होरमूज के पश्चिम में नमक का पहाड़ भी है. माना जाता है कि इस नमक में औषधीय गुण भी हैं.

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इन सबके बावजूद इस  द्वीप के बारे में दुनिया के बहुत कम लोग जानते हैं. साल 2019 में यहां केवल 1800 पर्यटक ही आए थे. यहां के लोग यहां पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने का भी प्रयास कर रहे हैं. वे इस  क्षेत्र को वैश्विक स्तर की पहचान के रूप में देखना चाहते हैं. लेकिन हैरानी की बात है कि दुनिया की एकमात्र जगह जहां की मिट्टी खाई जाती है अब भी लोगों के लिए अनजान है. (news18.com)

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