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अमेरिकी दूतावासों में रहस्यमय ‘हवाना सिंड्रोम’: हम क्या जानते हैं?
23-Oct-2021 8:05 PM (69)
अमेरिकी दूतावासों में रहस्यमय ‘हवाना सिंड्रोम’: हम क्या जानते हैं?

कोलंबिया में ‘हवाना सिंड्रोम’ के पांच मामले सामने आए हैं. अगस्त महीने में, अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की वियतनाम यात्रा में भी इसी वजह से देरी हो गई थी. सिंड्रोम कैसे आया, यह स्पष्ट नहीं है.

डॉयचे वैले पर कार्ला ब्लाइकर की रिपोर्ट- 

कोलंबिया में बोगोटा स्थित अमेरिकी दूतावास में कथित हवाना सिंड्रोम के कई मामले सामने आए हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल में रिपोर्ट किए जाने के बाद, कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक ने एएफपी समाचार एजेंसी से इस तथ्य की पुष्टि की. न्यूयॉर्क की यात्रा के दौरान उन्होंने कहा, "बेशक हमें इस स्थिति की जानकारी है, लेकिन मैं इसे अमेरिकी अधिकारियों पर छोड़ना चाहता हूं, जो खुद इसकी जांच में लगे हैं और यह मामला उनके अपने कर्मचारियों से संबंधित है.”

ऐसा माना जा रहा है कि कोलंबिया में अमेरिकी दूतावास से जुड़े कम से कम पांच परिवारों ने इस रहस्यमयी सिंड्रोम के लक्षणों का अनुभव किया है. बोगोटा का अमेरिकी मिशन दुनिया के सबसे बड़े मिशनों में से एक है. राजनयिकों और कर्मचारियों के अलावा, कई खुफिया एजेंट और ड्रग प्रवर्तन प्रशासन के अधिकारी भी वहां तैनात हैं.

अगस्त में हनोई में भी कई मामले सामने आए

वियतनाम में यह सिंड्रोम इसी साल अगस्त महीने में चर्चा में आया. अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस 24 अगस्त को सिंगापुर से वियतनाम के लिए उड़ान भरने वाली थीं, जहां वियतनाम के राष्ट्रपति गुयेन जुआन फुक के साथ उनकी एक बैठक थी. लेकिन वियतनाम की राजधानी में हवाना सिंड्रोम के दो संभावित मामलों के बारे में उनकी टीम को सूचित किए जाने के बाद उनकी उड़ान में तीन घंटे से अधिक की देरी हुई.

हनोई में अमेरिकी दूतावास के एक बयान में कहा गया कि हैरिस के कार्यालय ने पूरी समीक्षा के बाद फैसला किया था कि उप राष्ट्रपति यात्रा कर सकती हैं और उसमें किसी भी तरह की सुरक्षा का कोई संकट नहीं है. उसके बाद हैरिस ने हनोई में योजना के अनुसार बात की.

दूतावास के बयान ने हाल ही में ‘असंगत स्वास्थ्य घटना' की बात की. हवाना सिंड्रोम के बारे में बात करते समय अमेरिकी राजनयिक हमेशा भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन वास्तव में इसका क्या मतलब है?

पहली बार क्यूबा में दिखा

इस सिंड्रोम के बारे में पहली बार साल 2016 में पता चला था जब क्यूबा की राजधानी में अमेरिका और कनाडा के राजनयिकों और उनके परिवार के सदस्यों के बीच ऐसे दर्जनों मामलों का पता चला था. प्रभावित लोगों को सुस्ती, थकान, सिरदर्द और सुनने और देखने संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा. पीड़ित लोगों में से कुछ की सुनने की क्षमता भी स्थाई रूप से चली गई.

क्यूबा में ऐसी घटनाओं के बाद रूस, चीन, ऑस्ट्रिया और हाल ही में बर्लिन में भी अमेरिकी राजनयिकों और खुफिया अधिकारियों में ऐसे लक्षणों की बार-बार सूचना दी गई है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है कि घटना से प्रभावित लोगों ने उलटी, चक्कर आना, गंभीर सिरदर्द, कान दर्द और थकान की सूचना दी और उनमें से कुछ तो काम करने में भी असमर्थ दिखे.

अखबार के मुताबिक, हवाना सिंड्रोम वाले अमेरिकी प्रतिनिधियों को अन्य यूरोपीय देशों में भी पंजीकृत किया गया है. प्रभावित लोगों में से कुछ गैस निर्यात, साइबर सुरक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों से जुड़े थे.

कंपकंपी जैसे लक्षण

ये लक्षण अचानक प्रकट होते हैं. जीक्यू मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में मॉस्को में रात में बिस्तर पर लेटे हुए एक मरीज प्रभावित हुआ था. चक्कर आने के कारण उसने शुरू में सोचा कि उसे फूड पॉइजनिंग हुई है, लेकिन फिर उसे इतना चक्कर आया कि वह बाथरूम में जाने की कोशिश करते हुए गिर पड़ा.

सीआईए के एक कर्मचारी ने मैगजीन को बताया, "उस व्यक्ति को ऐसा महसूस हुआ कि जैसे वो एक ही उलटी आने और बेहोश होने का सामना कर रहा हो.”

हालांकि, साल 2016 में हवाना में दूतावास में कुछ अमेरिकी नागरिकों के विपरीत, उस व्यक्ति का कहना था कि उसने कोई तेज आवाज नहीं सुनी.

पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर ब्रेन इंजरी एंड रिपेयर के विशेषज्ञों ने क्यूबा में घायल हुए कुछ अमेरिकी नागरिकों का अध्ययन किया और साल 2018 में अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में इससे संबंधित एक रिपोर्ट को प्रकाशित किया.

रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने लिखा है कि इसमें रोगी अपना संतुलन और विवेक खो बैठते हैं. साथ ही पीड़ित लोगों में चालक और संवेदी तंत्रिकाओं में भी विकार आ जाता है. ये लक्षण काफी कुछ उसी तरह होते हैं जैसे गंभीर चोट लगने के बाद कुछ लोगों में देखे जाते हैं.

लेकिन मस्तिष्काघात के विपरीत, ये लक्षण गायब नहीं हुए बल्कि कुछ समय के लिए शांत हो गए लेकिन जब वापस दिखे तो और भी ज्यादा तीव्रता के साथ दिखे.

कारण अज्ञात है

अमेरिकी खुफिया समन्वयक एवरिल हैन्स ने हाल ही में कहा था कि अधिकारी इस बारे में दुविधा में हैं कि इस तरह की ‘असामान्य स्वास्थ्य घटनाएं' किस वजह से हो रही हैं. लेकिन अनुमान लाजिमी है, स्पष्ट है.

अमेरिका में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग और मेडिसिन के विशेषज्ञों ने दिसंबर 2020 में सुझाव दिया कि इन लक्षणों के पीछे रेडियो-फ्रीक्वेंसी ऊर्जा के लक्षित आवेग भी एक वजह हो सकते हैं.

अन्य शोधकर्ताओं का मानना ​​​​है कि हवाना सिंड्रोम माइक्रोवेव हथियारों के कारण होता है जो अमेरिका के विरोधी, खासतौर पर राजनयिकों, खुफिया अधिकारियों और उनके परिवारों को लक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. उच्च-आवृत्ति विकिरण को नियोजित करने वाले ऐसे हथियार पहले ही विकसित किए जा चुके हैं.

माइक्रोवेव एक से 300 गीगाहर्ट्ज की रेंज में काम करते हैं. घरों में भोजन को गर्म करने वाला माइक्रोवेव ओवन, भोजन को 2.5 गीगाहर्ट्ज की आवृत्ति पर गर्म करता है. जैसे-जैसे आवृत्ति बढ़ती है, विकिरण में ऊर्जा भी बढ़ती जाती है. सही उपकरणों का उपयोग करके और आवृत्ति को मैनेज करके, इसे लोगों पर लक्षित किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में किरणें शरीर में गहराई तक प्रवेश कर जाती हैं और वहां नुकसान पहुंचा सकती हैं.

उदाहरण के लिए, अमेरिकी रक्षा विभाग ने एक हथियार प्रणाली विकसित की है जो 95 गीगाहर्ट्ज की आवृत्ति पर माइक्रोवेव का उपयोग करती है.

लक्षण का एक अन्य संभावित कारण जिसे माना गया है वह ध्वनि हथियार है. इसके पीछे तर्क यह है कि हवाना सिंड्रोम से पीड़ित कुछ लोगों ने अपने लक्षणों के शुरू होने से पहले एक तेज आवाज सुनी. हालांकि हवाना सिंड्रोम के ही अन्य पीड़ितों ने ऐसा कुछ नहीं सुना.

जानकारों के मुताबिक, ऐसी प्रणालियां भी हो सकती हैं जो अश्रव्य सीमा में हमलों की अनुमति देती हैं लेकिन इनके बारे में बहुत कम जानकारी है, सिवाय इसके कि सैन्य अधिकारी उन पर शोध कर रहे हैं. अब तक, विशेषज्ञों ने उनके अस्तित्व को अत्यधिक असंभाव्य के रूप में वर्गीकृत किया है.

हवाना सिंड्रोम के लिए कौन जिम्मेदार है, यह सवाल उतना ही अस्पष्ट है जितना कि इसके पीछे के कारण हैं.

मई महीने में, अमेरिकी सरकार के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर पोलिटिको पत्रिका से बातचीत में कहा था कि उन्हें रूस की जीआरयू सैन्य खुफिया एजेंसी पर हमलों के पीछे होने का संदेह था. हालांकि वाइट हाउस ने फिलहाल आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है.(dw.com)

 

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