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पहली बार हमारी गैलेक्सी के बाहर खोजा गया एक ग्रह- जानिए कैसे
27-Oct-2021 9:49 AM (56)
पहली बार हमारी गैलेक्सी के बाहर खोजा गया एक ग्रह- जानिए कैसे

अभी तक हमारे वैज्ञानिकों को जितने भी बाह्यग्रहों की जानकारी मिली है. वहां सभी हमारी गैलेक्सी के ही ग्रह लेकिन हमारे सौरमंडल के बाहर के ग्रह थे. हमारी गैलेक्सी में भी भारी मात्रा में मौजूद तारों का चक्कर लगाने वाले ये बाह्यग्रह हमारे सौरमंडल को समझने में बहुत अहम भूमिका निभा सकते हैं. अब एक नई उपलब्धि के तहत खगोलविदों ने हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के बाहर भी एक ग्रह को खोज निकाला है. इस खास खोज की अगुआई नासा के चंद्रा एक्स रे वेधशाला ने की जब एक सर्पिल गैलेक्सी मेसियर 51 (M51), जिसे वर्लपूल गैलेक्सी भी कहते हैं, में यह ग्रह मिला.

अभी तक सब ग्रह गैलेक्सी के अंदर ही
अभी तक खगोलविदों करीब 4 हजार ऐसे बाह्यग्रहों की खोज की है. इनमें से कुछ पृथ्वी की तरह हैं तो कुछ गुरु ग्रह के आकार के लेकिन गर्म हैं, तो वहीं कुछ खगोलीय घटनाओं के कारण उत्सर्जन भी कर रहे हैं. लेकिन ये भी हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के दायरे अंदर ही मौजूद हैं जो पृथ्वी करीब तीन हजार प्रकाशवर्ष तक की दूरी तक है.

बहुत दूर है यह बाह्यग्रह
लेकिन यह बाह्यग्रह एम51 गैलेक्सी में है जो हमसे 2.8 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर स्थित है जिसका मतलब यही है कि हमारी मिल्की वे में मौजूद सुदूर ग्रहों से भी हजारों गुना ज्यादा दूर है. इस अध्ययन की अगुआई करने वाले सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स की शोधकर्ता रोजाने डि स्टीफानो ने बताया, “हम एक्स रे वेवलेंथ के जरिए उम्मीदवार ग्रहों की खोजकर दूसरी दुनिया के नए क्षेत्र खोलने का प्रयास कर रहे हैं. इस रणनीति से हमारे लिए उन्हें दूसरी गैलेक्सी में खोजना संभव हो जाएगा.”

एक्सरे की चमक में गिरावट
खगोलविदों ने सुदूर चमकीले द्विज तारों के तंत्र से रही एक्स रे चमक में गिरावटों को खोजा जो खास तौर पर एक गैस खींचने वाले न्यट्रॉन तारे या फिर ब्लैक होल आ रही थी जो अपने साथी तारे का चक्कर लगा रहा था. बाह्यग्रहों की खोज के लिए खगोलविद किसी तारे से आ रहे प्रकाश का अध्ययन करते हैं, जब वह ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है. इससे इस प्रकाश में बदलाव होने लगता है.

ऐसे होती है बाह्यग्रह की खोज
खगोलविद जमीन और अंतरिक्ष दोनों पर स्थापित टेलीस्कोप का उपयोग कर इन प्रकाश में होने वाले बदलावों से हजारों बाह्यग्रहों की खोज कर चुके हैं. इस अध्ययन में खगोलविदों ने एक्स रे का अध्ययन किया. इस छोटे से इलाके से आने वाले चमकीले एक्स रे निकल कर आ रही है. यह ग्रह बहुत सारी एक्स रे रोक सकता है. इससे वहां से आने वाली विकिरणों में बदलाव आसानी से देखा जाता है क्योंकि एक समय पर ये एक्स रे किरणें आना रुक ही जाती हैं.

एक ब्लैक होल वाला द्विज तारों का तंत्र
इस बाह्यग्रह के द्विज तारों के तंत्र को M51 ULS-1 नाम रखा गया है. इस द्विज तंत्र में एक ब्लैक होल है जिसमें साथी तारा सूर्य से 20 गुना ज्यादा भारी तारे का चक्कर लगा रहा है. नासा का कहना है कि उन्होंने जो चंद्रा वेधशाला के आंकड़ों से जो एक्स रे संक्रमण पाया है वह तीन घंटे तक चला. इस दौरान एक्स रे उत्सर्जन घट कर शून्य हो गया था. इसके और अन्य जानकारी के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि M51 ULS-1 में स्थित यह ग्रह शनि ग्रह के आकार ग्रह हो सकता है.

क्या है परेशानी
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और इस अध्ययन की सहलेखिका निया इमारा का कहना है कि दुर्भाग्य से इस बात की पुष्टि करने के लिए कि हमें वाकई में एक ग्रह को देख रहे हैं, हमें कई दशकों तक इंतजार करना जब अगली बार यह ग्रह अपने सूर्य के सामने से गुजरेगा. इसके कक्षा की अनिश्चितता के कारण हम यह भी नहीं बता सकते कि ऐसा कब होगा.

खगोलविदों का मानना है कि यदि वाकई में कोई ग्रह मौजूद है तो इसके एक ज्वलंत इतिहास होना चाहिए क्योंकि इसे एक सुपरनोवा विस्फोट से बच कर निकलना पड़ा होगा जिससे न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल बना होगा. उनका यह भी कहना है कि साथी तारा भी सुपरनोवा की तरह विस्फोटित हुआ होगा और इससे ग्रह में भी बहुत बड़ी मात्रा के विकिरण पैदा हुए होंगे. (news18.com)

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