संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : हिंदुस्तान में पेगासस के इस्तेमाल की जांच का सुप्रीम कोर्ट का शानदार फैसला, अब दूध का दूध...
27-Oct-2021 4:59 PM (126)
 ‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय :  हिंदुस्तान में पेगासस के इस्तेमाल की जांच का सुप्रीम कोर्ट का शानदार फैसला, अब दूध का दूध...

इजराइली जासूसी घुसपैठिया स्पाइवेयर पेगासस के भारत में इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका पर आज अदालत का बहुत महत्वपूर्ण फैसला आया है। इस फैसले के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की देखरेख में अदालत ने विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई है जो भारत में पेगासस के इस्तेमाल की जांच करेगी कि इसका इस्तेमाल हुआ है या नहीं, और अगर हुआ है तो किस कानून के तहत, किन लोगों के खिलाफ इससे घुसपैठ की गई है। इस तरह के बहुत से पहलुओं को लेकर अदालत ने बड़ा साफ-साफ आदेश दिया है, और यह आदेश इस सुनवाई के दौरान अदालत में भारत सरकार द्वारा दिए गए तर्कों को खारिज करते हुए सामने आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की एक बेंच ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र कर देने से ही केंद्र सरकार इस जांच से नहीं बच सकती। सुनवाई के दौरान भारत सरकार कोई भी जवाब देने से बार-बार कतराती रही कि उसने इसका इस्तेमाल किया है या नहीं। सरकार का तर्क था कि ऐसी कोई भी जानकारी देना कि वह किस निगरानी या घुसपैठ सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है, उससे आतंकियों को सरकार के तरीकों की जानकारी मिलेगी और उससे वे चौकन्ने भी हो सकते हैं। लेकिन केंद्र सरकार के वकील के यह सारे तर्क मुख्य न्यायाधीश ने खारिज कर दिए और कहा कि अदालत को राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है, और वह केवल यह पता लगाना चाहती है कि क्या पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करके नागरिकों को निशाना बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला देश में नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में एक बड़ा फैसला है। अदालत ने जिन बातों की जांच करने के लिए कहा है उनमें यह भी है कि क्या भारत के नागरिकों के फोन या दूसरे उपकरणों पर मौजूद जानकारी पाने के लिए, उनकी बातचीत सुनने के लिए, या किसी और मकसद से पेगासस का इस्तेमाल किया गया? अदालत ने यह भी जांच करने कहा है कि अगर ऐसा स्पाइवेयर हमला हुआ है तो किन लोगों पर हुआ है? अदालत ने यह भी कहा कि जब भारत के नागरिकों ने 2019 में पेगासस का इस्तेमाल करके उनके व्हाट्सएप अकाउंट हैक करने की जानकारी मीडिया की रिपोर्ट में दी थी, तो उसके बाद से सरकार ने क्या कदम उठाए या क्या कार्यवाही की थी? अदालत ने यह भी जानने के लिए कहा है कि किसी भी राज्य सरकार, केंद्र सरकार, या किसी केंद्रीय और राज्य एजेंसी ने पेगासस का इस्तेमाल किया है, और अगर किया है तो किस कानून, नियम, और वैध प्रक्रिया के तहत ऐसा किया है? अदालत ने इस एक्सपर्ट कमेटी से यह सिफारिश भी मांगी है कि कैसे इस देश में नागरिकों की निजता के अधिकार पर हमले को रोका जा सकता है कैसे नागरिकों के उपकरणों की अवैध निगरानी के संदेह पर शिकायत के लिए एक तंत्र विकसित किया जा सकता है, कैसे साइबर सुरक्षा को बढ़ाया जा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट का आज का यह फैसला जनहित याचिका लेकर अदालत पहुंचने वाले कई लोगों के साथ-साथ देश के तमाम नागरिकों को राहत देगा जिसमें पेगासस के हमले से अब तक प्रभावित न होने वाले लोग भी हैं। अदालत में  याचिका लगाने वाले कई ऐसे पत्रकार भी थे जिनको अभी उन पर पेगासस के हमले की जानकारी नहीं थी, लेकिन जिन्होंने व्यापक मीडिया हित में, और जनहित में याचिका लगाई थी। आज का यह फैसला केंद्र सरकार के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दे रहा है और यह फैसला साफ-साफ कह रहा है कि केंद्र सरकार केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देकर न्यायिक जांच से दूर नहीं हो सकती। उसने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा ऐसी डरावनी नहीं हो सकती कि अदालतें इसका नाम लेने भर से दूर हट जाएं। चूँकि मुख्य न्यायाधीश सहित दो अन्य न्यायाधीशों की बेंच ने यह फैसला दिया है, तो ऐसी गुंजाइश कम दिखती है कि इसके खिलाफ केंद्र सरकार किसी पुनर्विचार याचिका में जाए और केंद्र सरकार को अपनी किसी निगरानी को अदालती जांच-पड़ताल से बाहर रखने की कोई राहत मिल सके। अदालत का रुख बिल्कुल साफ है कि शासन द्वारा केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का आव्हान करने से अदालत मूकदर्शक नहीं बन जाती है। फैसले में यह भी लिखा गया है कि भारत सरकार का अदालत में पेगासस के इस्तेमाल पर किसी बात की पुष्टि करने से बहुत स्पष्ट इनकार, पर्याप्त नहीं है, और अदालत ने याचिकाकर्ताओं की रखी गई सामग्री पर विचार और जांच की जरूरत कही है। अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में याचिकाकर्ताओं के द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए उनके तर्क मंजूर करने के अलावा अदालत के पास और कोई विकल्प नहीं है।

पेगासस को लेकर हिंदुस्तान ही नहीं दुनिया के बहुत से देशों की सरकारों और वहां की लोकतांत्रिक संस्थाओं में खलबली मची हुई है। कुछ देशों ने औपचारिक रूप से जांच-आदेश भी दिए हैं कि क्या उसके नेताओं पर किसी और देश में पेगासस के माफऱ्त हमला किया है, और घुसपैठ की है? और कम से कम 2 देश ऐसे हैं जहां पर अलग-अलग लोगों की हत्याओं के पीछे पेगासस के इस्तेमाल की बात खुलकर सामने आई है। इन 2 लोगों को मारने के पीछे किसी देश की सरकार का हाथ बताया जा रहा है। हिंदुस्तान में लोकतंत्र की यह मांग है कि जनता की जिंदगी में राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में अगर ऐसी घुसपैठ हुई है, तो सच सामने आना चाहिए।
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