संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : कुदरत की बनाई दुनिया के मुकाबले इंसान की बनाई जा रही एक आभासी दुनिया
29-Oct-2021 5:06 PM (133)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय :  कुदरत की बनाई दुनिया के मुकाबले इंसान की बनाई जा रही एक आभासी दुनिया

दुनिया में जो लोग पिछले डेढ़ बरस में जगह-जगह हुए लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम से अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, उनके लिए आने वाला वक्त कुछ और चीजें लेकर आने वाला है। एक नई जुबान खबरों में सामने आ रही है, जिसमें वर्चुअल-रियलिटी विजन (मेटावर्स) का इस्तेमाल हो रहा है। और इसी को ध्यान में रखकर दुनिया में ईश्वर की तरह ताकतवर हो चुकी कंपनी फेसबुक ने अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया है। अब यह समझना थोड़ा सा मुश्किल भी हो सकता है कि मेटावर्स से क्या होगा। तो इस बारे में फेसबुक सहित दूसरी कुछ कंपनियां मिलकर जो एक नया आभासी वातावरण, वर्चुअल एनवायरमेंट बना रही हैं, उसे समझने की जरूरत है। अभी लोगों ने इंटरनेट पर कंप्यूटर और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए दो लोगों के बीच तरह-तरह की ऑडियोवीजुअल बैठकें की हैं, और इसके साथ-साथ तरह-तरह की कॉन्फ्रेंस भी की हैं। लेकिन अब मेटावर्स के बारे में कहा जा रहा है कि इसे कुछ खास किस्म के हेडसेट लगाकर ऐसा महसूस किया जा सकेगा कि लोग इस आभासी दुनिया के भीतर चल-फिर रहे हैं, उठ-बैठ रहे हैं, वहां दूसरे लोगों से मिल रहे हैं, वहां काम कर रहे हैं, वहां खरीदारी कर रहे हैं, और घर के भीतर भी ऐसे हेड सेट लगाकर लोग दफ्तर की तरह काम कर सकेंगे, या घर में बैठे-बैठे ही दुनिया की दूसरी जगहों की सैर कर सकेंगे। यह कंप्यूटर स्क्रीन पर चलने वाली बैठकों से बहुत ही अलग किस्म का अनुभव होगा और लोग ऐसा महसूस करेंगे कि वे सचमुच इस दुनिया के दूसरे हिस्सों में जाकर वहां लोगों से मिल रहे हैं, सब कुछ देख रहे हैं, और कई किस्मों के काम कर रहे हैं। यह शायद किसी 3-डी फिल्म देखने की तरह होगा, जिसमें देखने वाले उसके भीतर जाकर उसे जी भी सकेंगे।

अब यह समझने की जरूरत है कि हाल के वर्षों में लोग अपनी असल जिंदगी के मुकाबले ऑनलाइन जिंदगी में जिस तरह उलझे हैं, और जिस तरह की संभावनाओं और आशंकाओं के बीच में अपनी ऑनलाइन मौजूदगी बढ़ाते चल रहे हैं, उस तरह अब अगर वे ऑनलाइन के आभासी वातावरण में जाकर वहां रह सकेंगे, बस सकेंगे, काम कर सकेंगे, वहीं लोगों से मिलजुल सकेंगे, सैर सपाटा कर सकेंगे, तो क्या होगा? उससे असल जिंदगी पर कैसा असर पड़ेगा? आज के मौजूदा रिश्ते पर कैसा असर पड़ेगा? ऐसी बहुत सी बातें टेक्नोलॉजी से परे लोगों के निजी मनोविज्ञान और समाज विज्ञान के नजरिए से देखने और समझने की रहेंगी। जब असल जिंदगी और आभासी जिंदगी के बीच के फासले को इस तरह घटाया जा रहा है, और जब लोगों को आभासी जिंदगी में और अधिक जीने की सहूलियत मुहैया कराई जा रही है जहां पर लोग असल जिंदगी की दिक्कतों से दूर वक्त गुजार सकेंगे, और कामकाज कर सकेंगे, तो फिर यह देखना होगा कि ऐसी आभासी जिंदगी के बढ़ते चलने से उनकी असल जिंदगी पर कैसा असर पड़ेगा? आभासी दुनिया के रिश्तों का असल दुनिया के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? और यह अंदाज लगाना अभी आसान इसलिए नहीं होगा कि अभी तो इस आने वाली, आभासी दुनिया, मेटावर्स की संभावनाओं और उसकी दखल के बारे में भी लोगों की कल्पनाएं काम नहीं कर रही हैं। लोगों को अभी यह पता नहीं लग रहा है कि ऐसी आभासी दुनिया या ऐसे आभासी वातावरण में क्या-क्या किया जा सकेगा। लेकिन चूंकि दुनिया की बहुत सी कंपनियां, बहुत से विश्वविद्यालय, बहुत से वैज्ञानिक संस्थान इस मेटावर्स पर काम कर रहे हैं, और जैसा कि फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने कहा, यह इतनी बड़ी सोच है कि फेसबुक जैसी कंपनी भी इसे अकेले पूरा नहीं कर सकती थी, इसलिए वह बाकी संस्थानों और कंपनियों के साथ इस प्रोजेक्ट में भागीदार बनी है। इसलिए आज किसी को इस सोच की विकरालता का कोई अंदाज नहीं है। ठीक उसी तरह जिस तरह कि 10-15 बरस पहले किसी को फेसबुक की इन संभावनाओं का अंदाज नहीं था, या कि व्हाट्सएप के बारे में किसी ने सोचा नहीं था कि वह जिंदगी को इस तरह बदल देगा।

इंसानी मनोविज्ञान के जानकार लोगों, और समाज विज्ञान के जानकार लोगों के लिए यह एक बड़ी चुनौती का समय है कि वे ऐसे मेटावर्स के बारे में कल्पना करें और उससे इंसानों की जिंदगी में पढऩे वाले फर्क के बारे में सोचें। यह सोचना जरूरी इसलिए भी है कि जिस दिन बाजार इस नए औजार को हथियार की तरह इस्तेमाल करके इंसानों की मौजूदा जिंदगी को तहस-नहस करने, और उसे दुहने पर आमादा हो जाएगा, उस दिन लोगों के पास संभलने का वक्त भी नहीं होगा। यह भी सोचने की जरूरत है कि टेक्नोलॉजी और बाजार मिलकर आज के मौजूदा बाजार और रोजगार को किस तरह खत्म या प्रभावित कर सकते हैं। यह सोचना भी आसान नहीं है, और दूसरी बात यह कि मेटावर्स से जुड़ी हुई कुछ कंपनियों को छोडक़र बाकी बाजार पर इस आभासी वातावरण का क्या असर होगा, इसे भी बाकी कारोबार को सोचना चाहिए। इससे हो सकता है कि बहुत से कारोबार खत्म होने की नौबत आ जाए, बहुत से रोजगार पूरी तरह खत्म ही हो जाएं। यह भी हो सकता है कि इससे कारोबार और रोजगार का एक नया आसमान खुल जाए। कुल मिलाकर इस दुनिया के भीतर एक नई आभासी दुनिया बन जाने से हालात में जो भूचाल आएगा, उसे समझने का काम शुरू किया जाना चाहिए, और उसके हिसाब से लोगों को तैयारी भी करनी चाहिए। फिलहाल तो हम इतना ही सुझा सकते हैं कि तमाम लोगों को, जो पढऩा-लिखना जानते हैं, उन्हें इस विषय पर आने वाली हर नई जानकारी को जरूर पढऩा चाहिए क्योंकि इससे उनकी जिंदगी बहुत जल्द ही बदलने जा रही है। ऐसे बदलाव के लिए उन्हें दिमागी रूप से तैयार रहना चाहिए। आगे-आगे देखिए होता है क्या।
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