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'हो गई है पीर पर्वत सी...' पढ़ें दुष्यंत कुमार की क्लासिक और मशहूर रचनाएं
01-Nov-2021 9:14 AM (84)
 'हो गई है पीर पर्वत सी...' पढ़ें दुष्यंत कुमार की क्लासिक और मशहूर रचनाएं

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मिरा मक़्सद नहीं,मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिएइस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है,माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है,माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है 

 (news18.com)

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