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'ये इल्म का सौदा ये रिसाले...' पढ़ें मोहब्बत को नया आयाम देती इश्क़िया शायरियां
28-Nov-2021 4:32 PM (70)
'ये इल्म का सौदा ये रिसाले...' पढ़ें मोहब्बत को नया आयाम देती इश्क़िया शायरियां

जाँ निसार अख़्तर का जन्म 08 फरवरी 1914 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था. उनका मूल नाम सय्यद जाँ निसार हुसैन रिज़वी है. 'अख्तर' को साल 1976 में साहित्य अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया गया था. जाँ निसार साल 1914-1976 के प्रगतिशील आंदोलन में सक्रिय थे. उनका नाम प्रमुख शायरों की फेहरिस्त में शामिल है. मशहूर शायर जाँ निसार अख़्तर ने इश्क़िया शायरी को नया आयाम दिया. ये फ़िल्मों के जाने-माने गीतकार भी रहे. मशहूर फ़िल्म लेखक व गीतकार जावेद अख़्तर जाँ निसार अख़्तर के बेटे हैं. पढ़ें जाँ निसार के चुनिंदा शेर

आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम होसाया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो.

आँखों में जो भर लोगे तो काँटों से चुभेंगेये ख़्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं.

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाएहै यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए.

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगीतुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी.

लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ सेतेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से.

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबेंइक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं. 

(news18.com)

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