संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : भारतमाता की वंदना करने वाले इस रफ़्तार से घटिया बयानों पर
30-Nov-2021 5:03 PM (148)
‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : भारतमाता की वंदना करने वाले इस रफ़्तार से घटिया बयानों पर

कांग्रेस के चर्चित लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने कल दोपहर संसद भवन से अपनी एक तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट की जिसमें वे छह अलग-अलग महिला सांसदों के साथ दिख रहे हैं। ये सभी इस तस्वीर में खुश दिख रही हैं, और शशि थरूर ने इस तस्वीर को लेकर भाजपा के लोगों द्वारा किए हमले के बाद अपनी पोस्ट में यह बात जोड़ी है कि ऐसी सेल्फी लेने की पहल महिला सांसदों की ओर से की गई थी, और यह अच्छे मजाक के रूप में ली गई फोटो थी, और उन्होंने मुझसे यह फोटो पोस्ट करने के लिए भी कहा था, अब यह देखकर दुख होता है कि कुछ लोग इस तस्वीर से आहत हैं। लेकिन मुझे काम की अपनी जगह पर अपनी साथी सांसदों के साथ ली गई इस तस्वीर से खुशी है। दरअसल शशि थरूर ने फेसबुक पर इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा था कि कौन कहते हैं कि लोकसभा काम करने के लिए आकर्षक जगह नहीं है। उनकी लिखी हुई इसी बात को लेकर भाजपा के लोग उन पर तमाम किस्म के हमले कर रहे हैं और प्रियंका गांधी से जवाब मांग रहे हैं कि उनका सांसद संसद को एक आकर्षक जगह कह रहा है। महिलाओं के सम्मान में कही बातों की समझ भी भाजपा के ये नेता शायद खो चुके हैं।

भारत की आज की राजनीति इस कदर घटिया हो चुकी है कि अपनी साथी सांसदों के साथ ली गई एक ऐसी मासूम तस्वीर, जिसे जाहिर तौर पर एक गैर कांग्रेसी महिला सांसद ही ले रही है, उसे लेकर एक बवाल खड़ा करना यह न सिर्फ शशि थरूर के लिए अपमानजनक है बल्कि जितनी महिला सांसद इस तस्वीर में दिख रही हैं, ऐसा विवाद उनका भी बड़ा अपमान है। अगर महिला सांसदों के लिए शशि थरूर ने संसद को काम करने की एक आकर्षक जगह लिखा है, तो ना तो उन्होंने कोई ओछी बात लिखी है, न ही किसी का अपमान किया है। अभी दो-चार ही दिन हुए हैं कि किसी एक राज्य में एक मंत्री ने सडक़ों की चिकनाई को लेकर ऐसा बयान दिया है कि उन्हें कैटरीना कैफ के गानों की तरह चिकना बनाया जाए। लोगों को यह भी याद होगा कि लालू यादव ने एक समय बिहार की सडक़ों को हेमा मालिनी के गालों की तरह चिकना बनाने की बात की थी। लंबे समय तक भाजपा और एनडीए के साथ काम कर चुके शरद यादव ने संसद के भीतर ही शहरी महिलाओं के लिए परकटी जैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। और जहां तक शशि थरूर का सवाल है तो उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी आमसभा में 100 करोड़ की गर्लफ्रेंड जैसे शब्द कहे थे। शशि थरूर ने महिला सांसदों के अलावा दूसरे सांसदों के साथ भी खींची गई इसी तरह की ग्रुप फोटो पोस्ट की है और लिखा है कि इन तस्वीरों को कोई वायरल नहीं करेगा।

अब सोशल मीडिया पर जगह-जगह ऐसी तस्वीरें दिखती हैं कि किसी कार्यक्रम में या किसी स्टेडियम में लड़कियां और महिलाएं जाकर शशि थरूर के साथ अपनी सेल्फी लेती हैं और पोस्ट करती हैं। हो सकता है बहुत से लोगों को उनकी निजी जिंदगी के कुछ विवादों के बावजूद उनका व्यक्तित्व आकर्षक लगता हो, उनकी किताबें पठनीय लगती हों, संसद या और उसके बाहर उनके भाषण अच्छे लगते हों, या फिर अक्सर चर्चा में रहने वाली उनकी अंग्रेजी आकर्षक लगती हो। राह चलते और सार्वजनिक जगहों पर अगर लड़कियां और महिलाएं शशि थरूर के साथ अपनी तस्वीरें खिंचवाने में गर्व महसूस करती हैं तो उनमें कोई बात तो ऐसी होगी। ऐसे में प्रियंका गांधी का नाम ले लेकर जिस तरह से मध्य प्रदेश के दिग्गज भाजपा मंत्रियों ने शशि थरूर को लेकर सवाल पूछे हैं, वह बहुत ही ओछी बात है। ऐसे विवाद खड़े करने वाले नेताओं को यह भी याद रखना चाहिए कि वह महिला सांसदों की सहमति मर्जी और पहल से खींची गई ऐसी तस्वीर को लेकर जब बखेड़ा खड़ा करते हैं, तो वे उन तमाम महिलाओं का भी अपमान करते हैं, और यह भी बताते हैं कि सभ्य समाज के तौर-तरीके बखेड़ेबाज लोगों को छू नहीं गए हैं। यह वही मध्यप्रदेश तो है जहां से आज शशि थरूर के खिलाफ ये बयान जारी किए जा रहे हैं और जहां पर भाजपा सरकार के पिछले एक मंत्री रहे हुए राघवजी को अपने ही नौकर के साथ जबरिया बलात्कार या सेक्स के जुर्म में गिरफ्तार किया गया था। ऐसे और भी कई सेक्स स्कैंडल मध्य प्रदेश में हुए थे, लेकिन हम शशि थरूर और महिला सांसदों की इस इस तस्वीर के संदर्भ में किसी सेक्स स्कैंडल को याद करना नहीं चाहते, हम भाजपा के नेताओं की बयानबाजी को लेकर इसे याद कर रहे हैं. राजनीति और सार्वजनिक जीवन में इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए कि जिन लोगों से वैचारिक असहमति हो उन पर हमला करते हुए देश की संसद की आधा दर्जन महिला सांसदों का भी इस तरह अपमान किया जाए।

भारत के राजनेताओं को लेकर समय-समय पर जितने किस्म के विवाद सामने आए हैं उनकी लिस्ट अगर बनाई जाए तो भाजपा कहीं भी कांग्रेस के पीछे नहीं रहेगी। इसलिए किसी एक दिन की सुर्खियां कब्जाने के लिए इस तरह की बकवास बहुत ही घटिया बात है, और सार्वजनिक जीवन के लोगों को, गैरराजनीतिक भी, ऐसी बकवास के खिलाफ खुलकर बयान देना चाहिए। शशि थरूर एक अच्छे लेखक हैं एक अच्छे वक्ता हैं उनका लंबा अंतरराष्ट्रीय तजुर्बा है वह संयुक्त राष्ट्र संघ में लंबा काम कर चुके हैं और सार्वजनिक  जीवन में उन्हें घटिया बोलने के लिए नहीं जाना जाता। वह दरियादिली के साथ सभी पार्टियों के नेताओं को जन्मदिन या दूसरे मौकों पर बधाई देने से नहीं चूकते फिर चाहे इसे लेकर राजनीति के लोग उनकी आलोचना ही क्यों न करें। भाजपा के जिन नेताओं ने इस तस्वीर को लेकर शशि थरूर के खिलाफ उनके चरित्र की तरफ इशारा करते हुए घटिया बातें कही हैं उन्होंने राजनीति में गिरावट का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। शशि थरूर के साथ इस तस्वीर में अलग-अलग पार्टियों की महिला सांसद हैं और सांसदों का सम्मान करना अगर भाजपा के नेता नहीं सीख पाए तो उन्हें कम से कम महिला का सम्मान तो करना चाहिए क्योंकि वे भारत माता के गुणगान करते हुए थकते नहीं हैं। कांग्रेस के एक सांसद से अपने विरोध का चुकारा करने के लिए ऐसा घटिया काम भाजपा के नेताओं को नहीं करना चाहिए। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)

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