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National Pollution Control Day: देश में दुनिया के सबसे औद्योगिक हादसे का दिन
02-Dec-2021 10:43 AM (55)
National Pollution Control Day: देश में दुनिया के सबसे औद्योगिक हादसे का दिन

 

क्या भारत में वायु प्रदूषण के मामले में दुनिया केवल दिल्ली की आबोहवा खराब होने पर ही हलचल होती है. आज तो शायद यही सही लगता है. लेकिन अजीब बात यह है कि भारत में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस उन लोगों की याद में  मनाया जाता है जो दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदी के शिकार हुए थे. 2-3 दिसंबर 1984 को भोपाल में जहरीली गैस के रिसाव की औद्योगिक दुर्घटना हुई थी जिसमें हजारों आम लोगों की जान चली गई थी और उस प्रदूषण का असर 37 साल बाद भी देखने को मिलता है.

एक सबक के तौर पर
ये दुर्घटना  दुनिया भर के पर्यावरणविदों के लिए एक बढ़िया केस स्टडी बन कर रह गई है. लेकिन यह दिन औद्योगिक प्रणालियों और उनमें की जाने वाली मानवीय भूलओं के कारण पैदा हुए प्रदूषण के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है. इस हादसे के साथ एक बड़ा हादसा यह भी है कि आज भी देश में पर्यावरण के लिए वह जागरुकता पैदा नहीं हो सकी है जिसके जरूरत है.

बढ़ता जा रहा है प्रदूषण
आज देश की राजधानी हर सर्दी के मौसम से पहले रिकॉर्ड तोड़ प्रदूषण स्तरों से जूझती है और इसे रोकने के लिए किए जाने वाले जरूरी प्रयास हर साल ही कम ही पड़ते हैं. और देश के हर शहर में वायु प्रदूषण के नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं. इसका सीधा असर लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है.

क्या हुआ था उस दिन
भोपाल हादसा कई लिहाज से बहुत सबक देने वाली दुर्घटना रही है. 1984 में 2-3 दिसंबर की रात को यूनियन कार्बाइड के कारखाने में मिथाइल आइसो साइनाइड का रिसाव हुआ था. यह जहरीली गैस के हवा में मिलकर  शहर में दूर दूर तक फैल गई और हजारों लोगों के लिए जानलेवा साबित हुई. इतना ही नहीं यह हवा में रहने के साथ भोपाल के तलाबों और वहां की जमीन तक में मिल गई.

क्या रहा था असर
भोपाल हादसे केवल वायु प्रदूषण की ही नहीं बल्कि जल प्रदूषण और थल प्रदूषण की  भी मिसाल बना. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस हादसे का प्रभाव आज भी मौजूद है. उस दिन कुल 40 टन मिक गैस का रिसाव हुआ था. भारतीय चिकित्सकीय अनुसंधान परिषद के आंकड़ों के मुताबिक करीब 5.21 उस हादसे में गैस से प्रभावित हुए थे, जिसमें से कुल 23 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.

वर्तमान वायु प्रदूषण की समस्या अलग तरह की 
प्रदूषण के प्रति गंभीरता जगाने के लिए इस हादसे को याद कर भर लेना काफी है , लेकिन भारत में प्रदूषण की समस्या कुछ अलग तरह से चिंता जनक है. देश की गंभीर स्थिति को समझने के लिए हमें इसका स्वरूप समझना होगा. कारण और प्रभाव के लिहाज से वर्तमान स्थिति भोपाल हादसे  की तरह इतनी स्पष्ट नहीं है. मानव जनित कारणों से प्रदूषण बढ़ रहा है और उसका प्रभाव काफी हद तक अप्रत्यक्ष है.

अलग अलग स्रोतों का योगदान
पहले अगर स्रोतों की बात करें तो वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण, ऊर्जा उत्पादन के बड़े उद्योगों  से लेकर ईंटों के निर्माण जैसे छोटे उद्योग, निर्माण उद्योग और सड़कों से उड़ने वाली धूल, आदि कई मानवीय गतिविधियां जीवाश्म और जैविक ईंधन के जलाने वाले प्रदूषण के साथ आंधी, जंगलों में आग जैसे प्राकृतिक स्रोतों और कटाई के मौसम में खुले खेतों में आग का प्रदूषण को एक बड़ा रूप देने पूर्ण रूप से योगदान होता है.

ऐसे काम करने की जरूरत
प्रदूषण की समस्या के हल के लिए व्यापक और बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है. जैसे निर्माण उद्योंग में ऐसे तरीके निकाले जाएं जिनसे धूल वायुमंडल में कम से कम हो. जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाश कर उन्हें लोगों को उपलब्ध करने के साथ ही उनका उपयोग भी आसान बनाना होगा. मिसाल के तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्जिंग आसान और आसानी से उपलब्ध होने वाली सुविधा बनाना होगा.

प्रदूषण के प्रति गंभीरता लोगों में जागृत होना बहुत जरूरी है. राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण को हलके में लेना कितनी बड़ी सजा दे सकता है. कोविड-19 महामारी ने हमें कई सबक दिए हैं और हमारे अपने समस्याओं के प्रति गंभीर होना सिखाया है. यह दिवस भी हमें ऐसा ही मौका देता है. (news18.com)

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