सामान्य ज्ञान

एशियाई मंत्री स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन

Posted Date : 06-Nov-2018



 1-3 नवंबर, 2017 के मध्य 7वां एशियाई मंत्री स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन  थाईलैंड के बैंकांक में आयोजित किया गया।  सम्मेलन का मुख्य विषय-संक्रमणकाल में वैश्विक ऊर्जा बाजार: अवलोकन से कार्रवाई तक  है। इस सम्मेलन का आयोजन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फोरम (आईईएफ) द्वारा किया जाता है।   इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा की सुरक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्र से जुड़े ज्ञान का आदान-प्रदान करना है।
    इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत की तरफ से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भाग लिया।  सऊदी अरब, रूस, यूएई, थाईलैंड, इराक, कतर, कुवैत, बांग्लादेश, मलेशिया तथा ब्रुनेई के ऊर्जा मंत्रियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया।    7वें एशियाई मंत्री स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन हेतु थाईलैंड मुख्य तथा यूएई सहायक मेजबान देश था।  इस सम्मेलन का आयोजन 3 वर्ष में एक बार होता है।     इससे पूर्व वर्ष 2015 में कतर के दोहा में 6वीं एशियाई मंत्री स्तरीय ऊर्जा गोलमेज सम्मेलन आयोजित की गई थी।
    वर्तमान में भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फोरम (आईईएफ) का अध्यक्ष है जिसमें कुल 72 देश सदस्य हैं। अप्रैल, 2018 में होने वाले आईईएफ के 16वें मंत्री स्तरीय सम्मेलन का आयोजन भारत में ही होगा।

अमरूशतकम् 
अमरूशतकम् संस्कृत का एक गीतिकाव्य है। इसके रचयिता अमरु या अमरूक हैं। इसका रचना काल नवीं शती माना जाता है। इसमें 100 श्लोक हैं जो अत्यन्त शृंगारपूर्ण एवं मनोरम हैं।
 नाम से यह शतक है, परंतु इसके पद्यों की संख्या एक सौ से कहीं अधिक है। सूक्तिसंग्रहों में अमरूक के नाम से निर्दिष्ट पद्यों को मिलाकर समस्त श्लोकों की संख्या 163 है। इस शतक की प्रसिद्धि का कुछ परिचय इसकी विपुल टीकाओं से लग सकता है। इसके ऊपर दस व्याख्याओं की रचना विभिन्न शताब्दियों में की गई जिनमें अर्जुन वर्मदेव (13वीं सदी का पूर्वार्ध) की  रसिक संजीवनी  अपनी विद्वत्ता तथा मार्मिकता के लिए प्रसिद्ध है। आनंदवर्धन की सम्मति में अमरूक के मुक्तक इतने सरस तथा भावपूर्ण हैं कि अल्पकाय होने पर भी वे प्रबंधकाव्य की समता रखते हैं।

माही नदी
माही नदी पश्चिमी भारत की एक प्रमुख नदी हैं। माही का उद्गम ग्वालियर के समीप हुआ है। यह दक्षिणी अरावली में जयसमन्द झील से प्रारम्भ होती है। यह मध्य प्रदेश के के धार, झबुआ और रतलाम जिलों तथा गुजरात राज्य से होती हुई खंभात की खाड़ी द्वारा अरबसागर में गिरती है।
 इसकी दक्षिणी-पूर्वी शाखा बांसवाड़ा जिले से विपरीत दिशा में आकर मिलती है। इस पर माही बजाज सागर एवं कडाणा बांध बनाये गए हैं। यह खम्भात की खाड़ी में गिरती है। इसकी कुल लम्बाई लगभग 500 किलोमीटर है।




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