सामान्य ज्ञान

शूरसेन महाजनपद
16-Mar-2023 12:32 PM
शूरसेन महाजनपद

शूरसेन महाजनपद उत्तरी-भारत का प्रसिद्ध जनपद था जिसकी राजधानी मथुरा में थी। इस प्रदेश का नाम संभवत: मधुरापुरी (मथुरा) के शासक, लवणासुर के वधोपरान्त, शत्रुघ्न ने अपने पुत्र शूरसेन के नाम पर रखा था। शूरसेन जनपद, मथुरा मंडल अथवा ब्रजमंडल का यह नाम कैसे और किस के कारण पड़ा? यह निश्चित नहीं है।

बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तरनिकाय के अनुसार कुल सोलह 16 महाजनपद थे - अवन्ति, अश्मक या अस्सक, अंग, कम्बोज, काशी, कुरु, कौशल, गांधार, चेदि, वज्जि या वृजि, वत्स या वंश , पांचाल, मगध, मत्स्य या मच्छ, मल्ल, सुरसेन या शूरसेन ।   लगभग एक सहस्त्र ईस्वी पूर्व से पांच सौ ईस्वी तक के युग को भारतीय इतिहास में जनपद या महाजनपद-युग कहा जाता है । कुछ इतिहासकारों के मतानुसार यह एक क़बीला था जिसने ईसा पूर्व 600-700 के आस-पास ब्रज पर अपना अधिकार कर लिया था और स्थानीय संस्कारों से मेल बढऩे के लिए कृष्ण पूजा शुरू कर दी।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार  शूरसेन ने पुरानी मथुरा के स्थान पर नई नगरी बसाई थी इसका जिक्र उत्तरकांड में है।  शूरसेन-जनपदियों का नाम भी वाल्मीकि रामायण में आया है। वाल्मीकि रामायण में मथुरा को शूरसेना कहा गया है।  महाभारत में शूरसेन-जनपद पर सहदेव की विजय का उल्लेख है ।   कालिदास ने रघुवंश में शूरसेनाधिपति सुषेण का वर्णन किया है। इसकी राजधानी मथुरा का उल्लेख कालिदास ने इसके आगे रघुवंश में किया है।

श्रीमद् भागवत में यदुराज शूरसेन का उल्लेख है जिसका राज्य शूरसेन-प्रदेश में कहा गया है।   मथुरा उसकी राजधानी थी। विष्णु पुराण में शूरसेन के निवासियों को ही संभवत: शूर कहा गया है और इनका आभीरों के साथ उल्लेख है।

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