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अदानी पॉवर प्लांट सी जन सुनवाई में हुआ जमकर विरोध
22-Jun-2024 9:46 PM
अदानी पॉवर प्लांट सी जन सुनवाई में हुआ जमकर विरोध

रायपुर, 22 जून। अदानी पॉवर लिमिटेड की 1600 मेगावाट पॉवर प्लांट की प्रस्तावित परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आज जनसुनवाई हुई।  छतीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने इसमें आपत्तियां दर्ज करवाई। साथ ही जन सुनवाई को रद्द करने की भी मांग की गई। 

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के जन सुनवाई पैनल को दिए गए पत्र में इस परियोजना के गंभीर पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया है।
    
आलोक शुक्ला ने बताया कि ईआईए अधिसूचना, 2006 में विहित जन सुनवाई के नियमों का पूर्ण अनुपालन नहीं हुआ और इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए जनसुनवाई को निरस्त किया जाना चाहिए।

पर्यावरण समाघात निर्धारण (ईआईए) अधिसूचना, 2006 की धारा 7 (i) के प्रक्रम III लोक परामर्श के बिंदु क्रमांक (vi) के अनुसार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि परियोजना के क्रियाकलापों के संबंध  विस्तृत प्रचार के लिए मीडिया और समाचार पत्रों का उपयोग हो साथ ही इसकी जानकारी संबंधित वेबसाइट में भी डाली जाए और ड्राफ्ट संक्षेप ईआईए रिपोर्ट भी वेबसाइट पर उपलब्ध हो ताकि लोग लिखित में विभिन्न पर्यावरणीय पहलुओं को उजागर कर सके| परिशिष्ट IV में उल्लेखित प्रक्रिया के अनुसार ड्राफ्ट संक्षेप ईआईए की प्रति स्थानीय भाषा में जिला स्तरीय कार्यालयों और पंचायत में उपलब्ध होना अनिवार्य है ताकि प्रभावित व्यक्ति इसका अवलोकन कर सके|

उक्त नियमों का अनुपालन नहीं हुआ है, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के वेबसाइट में लोक परामर्श वाले भाग में इस जन सुनवाई की जानकारी और ड्राफ्ट संक्षेप ईआईए की प्रति अपलोड नहीं की गई है| लोक सुनवाई हेतु आवश्यक दस्तावेज एवं स्थान की जानकारी का विस्तृत प्रचार ठीक से नहीं किया गया, जिस के कारण इस परियोजना से हो रहे पर्यावरणीय दुष्प्रभाव के संबंध में लोगों की राय स्पष्ट तरीके से सामने नहीं आ पाई| ऐसे खानापूर्ति प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं है अगर इसकी मूल मंशा को ही ध्यान में न रखा जाए| 
2) कंपनी द्वारा पूर्व में इस परियोजना को जारी पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का गंभीर उल्लंघन और पर्यावरण प्रदूषण से स्थानीय लोगों की आजीविका, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन अत्यंत प्रभावित है:

केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 9 मई, 2011 को 2×685 मेगावाट ताप विद्युत् संयंत्र प्रारंभ करने मेसर्स जीएमआर एनर्जी लिमिटेड को पर्यावरणीय स्वीकृति जारी की गई थी| 26-02-2015 को  मंत्रालय द्वारा जारी इस परियोजना के मॉनिटरिंग रिपोर्ट में पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के अनुपालन में गंभीर लापरवाहियां दर्ज की गई| 05-11-2019 को केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा एक पत्र जारी कर इस परियोजना का स्वामित्व जीएमआर एनर्जी लिमिटेड से रायपुर एनेर्जेन लिमिटेड को स्थानांतरित किया जाता है जो अदानी पॉवर लिमिटेड की सहायक कंपनी है| 

19-01-2022 को केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की नया रायपुर स्थित एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी उक्त परियोजना की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरणीय अनुपालन में निम्नलिखित गंभीर कमियां पाई गई जिस पर अगर विचार न करते हुए इस विस्तार परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई तो उसके अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय दुष्प्रभाव होंगे।

i. कंपनी की रेलवे साइडिंग से निकलने वाले दूषित जल से आस पास की कृषि भूमि में प्रदूषण:

रेलवे साइडिंग से दूषित जल का बहाव यह दर्शाता है कि कोल हैंडलिंग क्षेत्र अब भी जीरो डिस्चार्ज का पालन करने में असफल है| साथ ही केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी रेलवे साइडिंग गाइडलाइन्स के अनुसार कंपनी साइडिंग का प्रबंधन नहीं कर रही है जिस से लोगों की कृषि भूमि दूषित हो रही है और इसका सीधा प्रभाव उनकी आजीविका पर पड़ रहा है|
ii. कंपनी द्वारा रिजेक्ट कोयले के उपयोग की पूरी जानकारी मंत्रालय को उपलब्ध नहीं कराई गई:

कंपनी द्वारा किस खदान से कितना रिजेक्ट कोयला उपयोग में लाया जा रहा है इसकी जानकारी नहीं दी गई| यह जानकारी आवश्यक है क्यूंकि इस परियोजना के कोयला आपूर्ति के स्त्रोत कई बार बदले है और इन्हें कोल ब्लेंडिंग की भी अनुमति दी गई थी | रिजेक्ट कोयला उपयोग फ्लाई ऐश उत्सर्जन को बढ़ावा देगा और उस से भी गंभीर पर्यावरण प्रदूषण की स्थिति निर्मित होती है | आवश्यक जानकारियों का खुलासा न करना भी एक गंभीर अनुपालन की कमी को दर्शाता है|

iii. मॉनिटरिंग के दौरान वायु प्रदूषण की स्थिति भी गंभीर पाई गई और हवा में पार्टिकुलेट मैटर लिमिट से अधिक पाया गया जो वायु प्रदूषण की रोकथाम से जुड़ी पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन की कमी को दर्शाता है|

iv. 2011 को जारी पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्त जिसमे महानदी में जल की उपलब्धता के संबंध में अध्ययन किया जाना था वह आज तक नहीं हुआ:

संयंत्र के लिए जल आपूर्ति पूरा महानदी पर बने समोदा डैम पर निर्भर है ऐसे में महानदी के पानी की अन्य उपयोगिता जैसे पीने, सिंचाई, औद्योगिक उपयोग साथ ही नदी के न्यूनतम बहाव और अन्य पहलुओं पर आईआईटी जैसी तकनिकी संस्थाओं के माध्यम से अध्ययन किया जाना था लेकिन यह अध्ययन आज तक नहीं हुए है| यह एक गंभीर लापरवाही है जिसको संज्ञान में लेना आवश्यक है|

इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग और हाइड्रोजियोलॉजी संबंधी जो आवश्यक अध्ययन और कार्य होने चाहिए थे, वे अपूर्ण है और अब जा के जब क्षमता विस्तार का प्रस्ताव लाना था तो उस पर थोड़े कार्य किये गए किन्तु आज इसके अनुपालन की क्या स्थिति है इसको स्पष्ट किये बिना इस परियोजना के क्षमता विस्तार की प्रक्रिया को बढ़ाना अनुचित है| अतः कंपनी के पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के अनुपालन की मॉनिटरिंग किये बिना परियोजना के क्षमता विस्तार के प्रस्ताव को आगे बढ़ाना पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है|

3) महानदी के समोदा डैम से बड़े पैमाने पर पॉवर प्लांट की जल आपूर्ति निर्भर है लेकिन नदी में पानी की उपलब्धता के महत्वपूर्ण अध्ययन कंपनी आज तक नहीं कर पाई है:
समोदा डैम से 35 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन से पॉवर प्लांट अपनी जल आपूर्ति करता है|  ईआईए रिपोर्ट में दी गई जानकारी अनुसार, इस प्रस्तावित क्षमता विस्तार से डैम पर जल आपूर्ति का भार बढ़ेगा, जो 25 mcm से बढ़कर 61 mcm प्रति वर्ष होगा | पॉवर प्लांट के संचालन में बड़े पैमाने पर जल चाहिए होता है, कंपनी ने अपने जल आपूर्ति कि व्यवस्था तो कर ली है लेकिन जिस प्रकार जल संकट आज के समय में एक बड़ी समस्या बन गई है ऐसे में नदी और नालों एवं अन्य जल धाराओं के प्राकृतिक बहाव और पानी की उपलब्धता, विभिन्न उपयोग को ध्यान में रखते हुए उसका एक सम्पूर्ण वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन अत्यन्त आवश्यक है जिसको करने में कंपनी पूर्णतः विफल रही है| कंपनी को दिनांक 9 मई, 2011 को  जारी  पर्यावरणीय स्वीकृति पत्र में यह अध्ययन कराया जाना एक महत्वपूर्ण शर्त है पर कंपनी ने इसका भी खुला उल्लंघन किया है| इस प्रकार कि लापरवाही कंपनी के पर्यावरण संवेदनहीनता का परिचायक है| इस अध्ययन के बिना इस क्षमता विस्तार परियोजना को स्वीकृति नहीं मिलनी चाहिए|

4) ईआईए रिपोर्ट वायु प्रदूषण जैसे गंभीर समस्या के स्त्रोतों और आवश्यक समाधानों को दर्ज करने में पूरी तरह से विफल है:
ईआईए रिपोर्ट को बनाने का मूल उद्देश्य, संभावित पर्यावरणीय समस्याएँ जो परियोजना के निर्माण एवं संचालन से उत्पन्न हो सकती है, उनकी पहचान करना और निर्दिष्ट समाधान निकालना है| किन्तु इस उद्देश्य के विपरीत ईआईए रिपोर्ट कई मायनो में वायु प्रदूषण के स्त्रोतों की पहचान करने में विफल है और परिणामस्वरुप समाधान की अपेक्षा व्यर्थ है| इस सन्दर्भ में ईआईए रिपोर्ट में निम्नलिखित कमियां है: 

जिप्सम और लाइमस्टोन के सड़क मार्ग से होने वाले परिवहन से उत्पन्न वायु प्रदूषण को ईआईए रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है:
ईआईए रिपोर्ट में कोयला रेल से आएगा कह कर अन्य परिवहन संबंधित वायु प्रदूषण स्त्रोतों की पहचान नहीं की गई जो एक गंभीर लापरवाही है जब कि रिपोर्ट में लिखा है कि 1,75,350 MTPA लाइमस्टोन ट्रक के माध्यम से पॉवर प्लांट लाया जाएगा और 2,80,560 MTPA जिप्सम उत्पन्न होगा जिसका प्रयोग ACC सीमेंट और अम्बुजा सीमेंट संयंत्रों में किया जाना है तो इसका भी परिवहन होगा| सड़क मार्ग से परिवहन से उत्पन्न होने वाला वायु प्रदूषण  केवल स्थानीय नहीं रह जाते बल्कि पूरे परिवहन मार्ग के आस –पास रहवासियों को प्रभावित करते है| 

रेलवे साइडिंग में कोयले के लोडिंग/अनलोडिंग एवं कोल हैंडलिंग से उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण का पूरे  ईआईए रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है:
रेलवे साइडिंग से होने वाले प्रदूषण से लोगों कि कृषि भूमि और आजीविका पर जो प्रभाव पद रहे है इसका उल्लेख इस पत्र में पहले ही किया जा चुका है| केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा कि गई मॉनिटरिंग में रलवे साइडिंग के प्रबंधन में खामियां पाई गई थी उसके बाद भी ईआईए रिपोर्ट में इस समस्या के कारणों और निदान के बारे में कोई भी उल्लेख न होना गंभीर लापरवाही है| इस संबंध में कंपनी को गंभीरता से रलवे साइडिंग प्रबंधन योजना बनाए बिना इस क्षमता विस्तार को अनुमति नही मिलनी चाहिए क्योंकि पहले इस पॉवर प्लांट को 6.77 मिलियन टन कोयला प्रति वर्ष चाहिए होता था और अगर क्षमता विस्तार हुआ तो 13.37 MTPA कोयला रेल के माध्यम से पॉवर प्लांट तक पहुंचेगा जो पहले की अपेक्षा दो गुना है| ऐसे में रेलवे साइडिंग में कोल हैंडलिंग और साइडिंग के प्रबंधन केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित किये बिना इस परियोजना को विस्तार की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए|

5) ईआईए रिपोर्ट के 10 किलोमीटर अध्ययन क्षेत्र के अंतर्गत भूमि उपयोग को वर्गीकृत तो किया गया है लेकिन परियोजना से उनपर जो प्रभाव होंगे उसकी व्याख्या और समाधान बहुत ही सतही स्तर के है:
ईआईए रिपोर्ट में भूमि उपयोग के वर्गीकरण के अनुसार परियोजना के 10 किलोमीटर के अध्ययन क्षेत्र में 57.76% कृषि भूमि, 18.8% वन भूमि जिसे दो संरक्षित वन है, 5% में विभिन्न जल स्त्रोत कुछ 14 तरह के टैंक, नहर, जलाशय और जल धाराएं है| ये सभी भूमि उपयोग इस क्षेत्र में निवासरत लोगों की आजीविका और जीवन के लिए आवश्यक है| पॉवर प्लांट के संचालन और परिवहन से उत्पन्न वायु प्रदूषण से बड़े पैमाने पर कृषि भूमि की उर्वरता, फसल उत्पादन और जल स्त्रोत प्रभावित होते है लेकिन प्रदूषण के स्त्रोतों की पहचान करने में कमी आगे चल कर प्रदूषण की बड़ी समस्याओं को जन्म देगा जिस से स्थानीय किसान और सभी वर्ग के लोग प्रभावित होंगे|

अतः उक्त पर्यावरणीय चिंताओं, प्राकृतिक संसाधनों के सम्वेधानशील उपयोग के अभाव  और कंपनी के पर्यावरण कानून और स्वीकृति के अनुपालन कि लगातार अनदेखी को ध्यान में रखते हुए पॉवर प्लांट के क्षमता विस्तार के प्रस्ताव को और इस जन सुनवाई को निरस्त किया जाना चाहिए|

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