सेहत / फिटनेस

क्या गुर्दों की बीमारियों का एक मात्र उपचार डायलिसिस है?

Posted Date : 12-Apr-2019



गुर्दों की बीमारियों के बारे में अनेक भ्रांतियां भी समाज में मौजूद हैं, जिनके बारे में जानकारी जरूरी है। मिथकों के बारे में जानकारी देता आलेख

हकीकत हां, यह सही है कि अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता, जब तक रोग एडवांस स्टेज तक नहीं पहुंच जाता है। क्रॉनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) के कारण गुर्दे 96 प्रतिशत तक खराब हो जाते हैं। थोड़ी भी परेशानी हो, तो डॉक्टर को दिखाएं। सामान्य रक्त और यूरिन टेस्ट से  गुर्दों की बीमारियों का पता चल जाता है।

मिथक-गुर्दे के रोगों का इलाज एक लंबी और खर्चीली प्रक्रिया है।
हकीकत-नहीं, यह बिल्कुल गलत है। किडनी रोगों का इलाज बहुत आसान और कम खर्चीला होता है। इसमें दो प्रकार के टेस्ट किए जाते र्हैं सिंपल यूरिन टेस्ट के द्वारा यूरिन में प्रोटीन की मात्रा की जांच की जाती है। अगर यूरिन में प्रोटीन की मात्रा कम है, तो यह किडनी रोग का संकेत हो सकता है। जीएफआर (ग्लोमेरूलर फिल्ट्रेशन रेट) का पता लगाने के लिर्ए सिंपल ब्लड टेस्ट, आपका जीआरएफ नंबर बताता है कि आपकी किडनी कितनी बेहतर तरीके से काम कर रही है।

मिथक-कोई नहीं जानता कि गुर्दों की बीमारियों का कारण क्या है?
हकीकत -गुर्दों की बीमारियों के दो सबसे प्रमुख कारण, डायबिटीज और उच्च रक्तदाब हैं। इनके कारण दोनों गुर्दों में मौजूद छोटी-छोटी रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे गुर्दों को नुकसान पहुंचता है। कई और स्थितियां हैं, जो गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इनमें सम्मिलित हैं हृदय रोग, ग्लोमेरूलोनेफ्राइटिस (एक रोग, जिस कारण किडनियों में सूजन आ जाती है) और जन्मजात पॉली सिस्टिक किडनी डिसीज, जिससे किडनी में सिस्ट बन जाते हैं।

मिथक-गुर्दों की बीमारियों का एकमात्र उपचार डायलिसिस है।
हकीकत-गुर्दों की बीमारियों से पीडि़त सभी व्यक्तियों को डायलिसिस की आवश्यकता नहीं पड़ती। प्रारंभिक स्तर पर इसे व्यायाम, खानपान और दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। इस तरह से अधिकतर लोग इन रोगों को गंभीर होने से बचा सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं। इसलिए बहुत जरूरी है कि ठीक समय पर गुर्दों के रोगों का पता लगाया जाए और उनका उपचार किया जाए। डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता तब होती है, जब किडनी फेलियर हो गया हो।

मिथक-एक किडनी फेल होती है या दोनों।
हकीकत-सभी स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण दोनों किडनियां फेल हो जाती हैं। किडनी फेलियर शब्दावली तब इस्तेमाल की जाती है, जब दोनों किडनियां काम करना बंद कर देती हैं। अगर एक किडनी ठीक प्रकार से काम करे, तो रक्त में यूरिया का स्तर नहीं ब?ेगा।

मिथक-किडनी रोग का खतरा है, लेकिन इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते।
हकीकत-ऐसा नहीं है। जिसे गुर्दे की बीमारी का खतरा है, उसे ये बीमारी हो, यह जरूरी नहीं होता। आप अपने गुर्दों को स्वस्थ्य रख सकते हैं। पोषक भोजन का सेवन करें, नियमित रूप से व्यायाम करें, रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें, अपना वजन ठीक रखें, धूम्र्रपान छो? दें और पेन किलर का अधिक इस्तेमाल न करें। ये सभी आदतें आपके गुर्दों को स्वस्थ्य रखेंगी और आपको गुर्दों की बीमारियों की चपेट में आने से बचाएंगी।




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