संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 16 मई : कमल हासन का बयान और गोडसे की औलादों की हिंसा
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय 16 मई : कमल हासन का बयान और गोडसे की औलादों की हिंसा
Date : 16-May-2019

दक्षिण भारत के, और बॉलीवुड के भी, एक विख्यात अभिनेता कमल हासन दक्षिण की एक आम परंपरा के मुताबिक फिल्मों की शोहरत के साथ राजनीति में आए, और अभी वे एक नई पार्टी बनाकर यह तौल रहे हैं कि उन्हें किसके साथ जाना है। लेकिन इस बीच वे चुनावी सभा में यह बोलकर एक बवाल खड़ा कर चुके हैं कि नाथूराम गोडसे हिन्दुस्तान का पहला हिन्दू आतंकी था जिसने गांधी की हत्या की थी। हिन्दुस्तान में आज गोडसे के बहुत से हिमायती हैं, जो कि गिनती में चाहे कम हों, लेकिन जो मुखर बहुत हैं, और आए दिन गांधी को कोसते हुए गोडसे की प्रतिमाएं लगाने में लगे रहते हैं। ऐसे लोगों को जाहिर तौर पर कमल हासन की बातें खटकनी थीं, और उनकी गोडसे-आस्था पर इससे गहरी चोट लगी होगी। अब दिक्कत यह है कि अपने आपको हिन्दू धर्म का कहकर उसके बारे में किसी भी आलोचना से अपनी धार्मिक भावनाएं आहत पाने वाले लोग जब अदालत में हिन्दू धर्म पर बहस चलती है तो इसे धर्म के बजाय एक जीवनशैली करार देने पर आमादा रहते हैं। यह बहुत सहूलियत की बात रहती है कि हिन्दू धर्म को जब चाहे धर्म मानकर अपने को आहत करार देकर अदालत के भीतर और बाहर हमले शुरू कर दें, और जब चाहे तब इसे महज जीवनशैली बताकर धर्म से परे साबित कर दें। यही वजह है कि इस धर्म के कुछ लोग हिंसक और हमलावर तेवरों के साथ कहीं बाबरी मस्जिद गिराते हैं, तो कहीं गुजरात के दंगों में हजार जिंदगियां ले लेते हैं, और इसके साथ-साथ इस बात पर कानूनी आपत्ति करते हैं कि हिन्दू धर्म में कोई आतंकी हो सकता है। 

अब गांधी जैसे निहत्थे की सोच-समझकर, साजिश करके हत्या करने वाले हिन्दू संगठनों से सक्रिय जुड़े हुए नाथूराम गोडसे ने इस हत्या को जायज ठहराते हुए लंबी-चौड़ी वकालत भी की, लेकिन उसकी सोच के डीएनए के आज के वारिस यह मानने से इंकार करते हैं कि उसने कोई आतंकी काम किया था, वे यह भी नहीं मानते हैं कि हिन्दू धर्म में कोई आतंकी हो सकता है, या भगवा आतंक नाम की कोई चीज हो सकती है। कमल हासन की बात पर जो एफआईआर तमिलनाडू में दर्ज हुई है, उस पर जब कमल हासन मद्रास हाईकोर्ट पहुंचे, तो वहां के जज ने अदालती अवकाश के दौरान इसे सुनने से मना कर दिया। पुलिस ने जुर्म दर्ज किया है कि उनके बयान से धार्मिक भावनाओं को भड़काने और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का काम हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि हत्यारा नाथूराम गोडसे, और मरने वाले गांधी, दोनों ही हिन्दू थे। ऐसे में धार्मिक भावना किसकी भड़क रही है? एक हत्यारे को जिसने एक विचारधारा का दावा करते हुए गांधी जैसे महान व्यक्ति की सोच-समझकर हथियार से हत्या की, क्या वह हिन्दू धर्म का प्रतिनिधि है जिसे आतंकी कहने पर हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं भड़क रही हैं? या कौन से दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा मिल रहा है? गोडसे की औलादों और गांधीवादियों के बीच? जिस गांधी के नाम पर इस देश में कोई हिंसा नहीं होती, हिंसा महज बर्दाश्त होती है, उसे कोई क्या भड़का लेगा? ऐसे में पुलिस ने एक निहायत बदनीयत और लापरवाही से कमल हासन पर यह जुर्म दर्ज किया है, ठीक उसी तरह जिस बदनीयत और लापरवाही से देश के बहुत से धर्मनिरपेक्ष लोगों, या अंधविश्वासविरोधियों के खिलाफ जुर्म दर्ज होते हैं, या उनका कत्ल होता है।
 
गोडसेवादियों के साथ दिक्कत यह है कि गांधी को खुलकर वे कोस नहीं पाते क्योंकि गांधी इस देश के लोगों की आत्मा में हैं। लेकिन वे मुस्लिमों से नफरत करने वाले, ईसाईयों से नफरत करने वाले, मुस्लिमों को पाकिस्तानी मानने वाले, नेहरू को मानने वाले लोगों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए बंद कमरे में दबी जुबान गोडसे का गान करते हैं, और गांधी को कोसते हैं। ऐसे ही कुछ लोग पुलिस में पहुंचकर हिन्दू आतंकी या हिन्दू उग्रवादी शब्द से अपनी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचने की रिपोर्ट लिखा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि गांधी के हत्यारे के संदर्भ में जब उसे हिन्दू आतंकी कहा जा रहा है, तो क्या गलत किया जा रहा है? क्या वह आतंक नहीं था? इस देश में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के नाम पर जिस कानून का इस्तेमाल किया जाता है, उसके चलते इस देश में महज साम्प्रदायिक और धर्मान्ध लोग ही सुरक्षित रह सकते हैं, जो लोग धर्म की खामियों को गिनाने का काम करते हैं, धर्म की हिंसा पर उसे आईना दिखाने का काम करते हैं, उन लोगों को ऐसे कानूनों के तहत जेल में डालना तमाम सरकारों को बहुत सुहाता है। लेकिन यह देश ऐसी हरकतों से चाहे-अनचाहे एक गृहयुद्ध की तरफ बढ़ेगा जब एक धर्म की हिंसा दूसरे धर्म के लोगों को मारते चल रही है, और खुद अपने धर्म के भीतर के दलितों को, आदिवासियों को कहीं अछूत मानती है, तो कहीं बंदर मानती है। यह सिलसिला लंबे समय तक नहीं चलेगा, और बेइंसाफी अगर इतनी बढ़ जाएगी कि गोडसे को हिन्दू आतंकी कहना भी जुर्म हो जाएगा, तो बहुत से लोग अलग-अलग कई किस्मों से कानून तोडऩे लगेंगे, क्योंकि कानून बेइंसाफी का हिमायती हो जाएगा, हिंसक हो जाएगा। कमल हासन ने जो कहा है, वह बिल्कुल ठीक कहा है। हिन्दुओं का एक तबका अगर आईना देखना नहीं चाहता है, तो उसे अपना बदशक्ल चेहरा दिखेगा भी नहीं, और उसका एहसास भी नहीं होगा, और ऐसे में यह धर्म अपनी साख और अधिक हद तक खोते भी चलेगा।
-सुनील कुमार

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