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2020 तक भी नहीं आ पाएगा 5जी!
2020 तक भी नहीं आ पाएगा 5जी!
Date : 02-Jun-2019


नई दिल्ली, 2 जून। भारत में 5जी टेक्नोलॉजी का इंतजार लंबा हो सकता है। देश में मोबाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार धीमा रहने वाला है। बुनियादी सरकारी ढांचे और नीतिगत अड़चनों के कारण इसमें और मुश्किलें पैदा हो रही हैं। मौजूदा टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर एक बिलियन एक्टिव यूजर्स का भार उठाए हुए है, जिसमें तेजी से विस्तार की जरूरत है।
एक्टिव नेटवर्क शेयरिंग पर बेरुखी, पतले फाइबर और सही मानदंडों के अभाव के कारण 2020 तक 5जी का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नरेंद्र मोदी सरकार की अगले साल तक 5जी सर्विसेज शुरू करने की योजना है। पिछले कुछ वर्षों से भारी कर्ज के बोझ तले दबी वोडाफोन-आइडिया और भारती एयरटेल ने बहुत कम नेटवर्क इन्वेस्टमेंट किया है और मौजूदा दौर में सक्रिय और निष्क्रिय नेटवर्क को शेयर करना बहुत अहम है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर भारत में 5जी को कामयाब बनाना है तो फाइबर, छोटे सेल और मोबाइल टॉवर्स के जरिए बड़ा निवेश जरूरी है। टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट पिछले कुछ वर्षों में टेलीकॉम टावर कंपनियों को मेनस्ट्रीम में नहीं ला पाया है, जबकि भारत की डिजिटल सर्विस में उनका बड़ा रोल है।
फाइबर को फैलाने का सिस्टम अभी भी भारत में बहुत छोटे स्तर पर है। उद्योग ने अपने आकलन में पाया कि भारत के 5जी नेटवर्क को 100 मिलियन फाइबर किलोमीटर ऑप्टिक-फाइबर केबल की जरूरत पड़ेगी, जो मौजूदा दौर में सिर्फ 25 एमएफकेएम की दर से बढ़ रहा है। सरकार हाई स्पीड डाटा के लिए इसे बेहद अहम सामान मानती है और साल 2022 तक इसे पांच गुना या 7.5 मिलियन तक बढ़ाना बहुत बड़ी चुनौती है। नेशनल पॉलिसी का मकसद 2022 तक टेलीकॉम टावर्स को कम से कम 60 प्रतिशत तक फाइबर से लैस करना है।
आईसीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई स्पीड हासिल करने के लिए फाइबर कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। भारत में फिलहाल 5 लाख टावर्स हैं, जिसमें से 22 प्रतिशत फाइबर से लैस हैं, जबकि यह आंकड़ा चीन में 80 प्रतिशत है। इससे पहले टेलीकॉम सेक्रेटरी अरुणा सुंदराजन ने कहा कि डिपार्टमेंट यह मानदंड तय करना चाहता है कि हर दिन 4जी और 5जी के लिए कितना फाइबर लगाया जा रहा है। अब यह राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अगर इंडस्ट्री को गांवों में 5जी पहुंचाना पड़ा तो वह फाइबर के बिना नहीं हो पाएगा।  (आजतक)

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