विचार / लेख

ये हैं श्वेताम्बरी शर्मा
ये हैं श्वेताम्बरी शर्मा
Date : 11-Jun-2019

-रूबी अरूण
जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की स्पेशल इंवेशटिगेशन टीम (एसआईटी) की एकमात्र महिला सदस्य। कठुआ केस में इंसाफ मिलने पर इन्हें भी बधाई दीजिए।  इनकी निष्पक्ष जांच की वजह से ही बलात्कारियों को सजा़ और मासूम आसिफा को न्याय मिला है। क्योंकि अगर श्वेताम्बरी शर्मा ने अपने अथक परिश्रम और निर्भीकता से ठोस सबूत ना जुटाते तो शायद इस केस की वकील दीपिका राजावत को इस केस को जीतने में बेहद मुश्किलें आतीं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस सेवा 2012 की अधिकारी श्वेताम्बरी शर्मा को ब्राह्मण होने का हवाला देकर बलात्कारियों को बचाने का दबाव डाला गया था, और भी बहुत से मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इन्होंने इस केस की जांच के दरम्यान एक दफा बताया था-
''हमने कड़ी चुनौतियों के बीच काम किया। कई बार हम बहुत निराश हो गए। खास तौर पर जब हमें ये मालूम हुआ कि हीरानगर पुलिस स्टेशन के लोगों को केस दबाने के लिए रिश्वत दी गई है और उन्होंने पीडि़त लड़की के कपड़ों को धो दिया जिससे अहम सबूत मिटाया जा सके। इसके बावजूद हमने बलात्कार और हत्या की इस गुत्थी को पवित्र नवरात्र के दिनों के दौरान सुलझा लिया। मैं मानती हूं कि एक दैवीय हस्तक्षेप हुआ ताकि गुनहगारों को सजा मिल सके। मुझे विश्वास है कि दुर्गा मां का हाथ हमारे सिर पर था।''
''उस आठ साल की मासूम बच्ची के जघन्य बलात्कार और हत्या में हमें जिन लोगों के शामिल होने का शक था, जैसे उनके रिश्तेदार और उनसे सहानुभूति रखने वाले जिनमें कई वकील भी शामिल हैं, उन्होंने हमारी जांच में अड़चन डालने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने हमें अपमानित और परेशान करने की सभी हदें पार कर दीं। लेकिन हम अपने इरादों में आखिर तक डटे रहे।''
आखिरकार इस कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और बहादुर लेडी ऑफिसर ने निष्पक्ष जांच की और समाज के भेडिय़ों का डट कर मुकाबला किया, जिसके परिणामस्वरूप इस केस की वकील दीपिका राजावत गुनहगारों को सजा़ दिलवाने में सफल हो पाई।

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