संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 14 जून : सरकार की आलोचना, उस पर भ्रष्टाचार की तोहमत कब से राजद्रोह जैसा जुर्म होने लग गया?
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 14 जून : सरकार की आलोचना, उस पर भ्रष्टाचार की तोहमत कब से राजद्रोह जैसा जुर्म होने लग गया?
Date : 14-Jun-2019

छत्तीसगढ़ में कल से आज तक दो अलग-अलग जिलों में दो घटनाएं हुई हैं जिन्हें जोड़कर देखने की जरूरत है, और देखकर फिक्र भी होती है। आज महासमुंद जिले के एक समाचार वेबसाईट वाले पत्रकार को पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया है, और उस पर आरोप है कि वह बिजली बंद होने को लेकर अपनी वेबसाईट पर जो लिख रहा था उससे लोगों में असंतोष भड़क रहा था। लेकिन दूसरी खबर इससे अधिक फिक्र की है, राजनांदगांव जिले में एक आदमी ने एक वीडियो बनाकर उसे फैलाया जिसमें राज्य सरकार पर उसका आरोप है कि उसने बिजली के इन्वर्टर बनाने वाली एक कंपनी के साथ मिलकर यह साजिश रची है कि बार-बार बिजली बंद की जाएगी ताकि उसके इन्वर्टर की बिक्री बढ़े। इसके बाद इस आदमी को राजद्रोह की धाराओं में गिरफ्तार करने की खबर है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के कानूनी सलाहकार ने इसे राजद्रोह करार देते हुए थाने में रिपोर्ट लिखाई है, और उस पर यह कार्रवाई हुई है। 

इन दोनों बातों के कई पहलू बहुत बुरी तरह चौंकाने वाले हैं। इस बात में कोई शक नहीं है कि पूरे प्रदेश में जगह-जगह बिजली का इंतजाम गड़बड़ाया हुआ है। हो सकता है कि इसमें कुछ तोहमत कुदरत के हिस्से भी जाए कि आंधी-तूफान से तार और खंभे गिरे हैं, कुछ जगहों पर असामान्य गर्मी की वजह से ट्रांसफार्मर भी गड़बड़ाए हैं, लेकिन कुल मिलाकर जनता को बिजली की दिक्कत हो रही है, इसे अनदेखा करना खुद राज्य सरकार के लिए अच्छा नहीं होगा। लोगों का यह भी मानना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को विधानसभा चुनाव के मुकाबले जो बड़ा नुकसान हुआ है, उसके पीछे लोगों की बिजली की दिक्कत भी कई वजहों में से एक वजह रही है। अभी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक में बिजली की शिकायतों को लेकर आधा दर्जन बिजली इंजीनियरों को निलंबित भी किया था, और उससे भी जाहिर है कि बिजली का मामला गड़बड़ तो है ही। 

ऐसी हालत में अगर जनता के बीच से कोई सरकार पर भ्रष्टाचार करके किसी साजिश के तहत बिजली गुल करने का आरोप भी लगा रहा है, तो उस पर कार्रवाई के लिए कुछ दूसरे साधारण कानून हो सकते हैं, और हमारे हिसाब से तो ऐसे कानूनों से भी कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। लोकतंत्र में जनता तकलीफ के बीच अगर सरकार पर कोई आरोप लगाती है, तो सरकार में बर्दाश्त रहना चाहिए। ऐसे में जिस किसी की समझ से इस आदमी पर राजद्रोह के तहत जुर्म दर्ज करने की खबर है, वह समझ कानूनी रूप से कुछ कमजोर जान पड़ती है। राजद्रोह का अंग्रेजों का कानून हिन्दुस्तानी जनता को कुचलने के लिए बनाया गया था। राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के घोषणापत्र में यह वायदा किया था कि कांग्रेस सरकार में रहेगी तो राजद्रोह का कानून खत्म करेगी। राजनांदगांव में जिस दफा के तहत यह जुर्म दर्ज किया गया है, ठीक उसी दफा का जिक्र कांग्रेस के घोषणापत्र में था। और अभी चार दिन भी नहीं हुए हैं सुप्रीम कोर्ट ने एक ट्वीट पर एक पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर योगी सरकार को जमकर फटकार लगाई थी, हालांकि जजों का कहना था कि उन्हें वह ट्वीट अच्छा नहीं लगा था, लेकिन अभिव्यक्ति का जवाब गिरफ्तारी नहीं हो सकती। 

ऐसे में भूपेश सरकार की इन दो जिलों की यह कार्रवाई चाहे जिस स्तर के अधिकारियों ने की हो, इन्हें तुरंत सुधारना चाहिए। अगर सरकार यह मानेगी कि बिजली की गड़बड़ी की खबरों को पोस्ट करना, या सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना जुर्म है, तो सरकार बिजली ठीक रखने की अपनी जिम्मेदारी से बचने का काम करेगी। लोकतंत्र में जनता की तरफ से आने वाली जायज, और नाजायज आलोचना भी, एक सबक और चेतावनी के रूप में लेनी चाहिए। राज्य सरकार को हमारी सलाह है कि अपने अधिकारियों पर काबू करे, और ऐसी कार्रवाई न करे जो कि न सिर्फ पूरी तरह अलोकतांत्रिक हैं, बल्कि जो अदालत में राज्य सरकार को शर्मिंदगी भी दिलाने वाली साबित होंगी। खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पिछले बरसों में विपक्ष के नेता के रूप में राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के बहुत से आरोप लगाते आए हैं, और सरकारी इंतजाम के नाकाम रहने पर भी उन्होंने लगातार हमला बोला है। उनकी ऐसी सक्रियता ने ही उन्हें राज्य की सत्ता में आने का मौका दिया। इस ताजा-ताजा तजुर्बे को भूलकर जनअसंतोष पर ऐसी कड़ी कार्रवाई बिल्कुल ही नाजायज है, और मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से यह सिलसिला खत्म करना चाहिए, वरना अदालत में तो यह खत्म हो ही जाएगा। 
-सुनील कुमार

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