संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 16 जून : ..बेहतर खेल का मजा लेने में अपने देश के साथ गद्दारी नहीं
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 16 जून : ..बेहतर खेल का मजा लेने में अपने देश के साथ गद्दारी नहीं
Date : 16-Jun-2019

भारत और पाकिस्तान के बीच अब से कुछ देर में क्रिकेट विश्वकप का मैच शुरू हो जाएगा, और अभी हमारे सामने जो हिंदुस्तानी टीवी चैनल हैं, वे हिंदुस्तान की जीत के लिए एक भावनात्मक उन्माद खड़ा कर रहे हैं, और शायद ऐसा ही कुछ पाकिस्तान में वहां की टीम के लिए हो रहा होगा। कुछ चैनलों पर दोनों देशों के भूतपूर्व खिलाडिय़ों के चेहरे स्क्रीन पर दिख रहे हैं, जो कि दोनों देशों के भूतपूर्व फौजियों के मुकाबले अधिक समझदारी की, कम नफरत की, और कुछ खेल की भी बात कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों सोशल मीडिया पर लगातार कुछ ऐसे मजाकिया वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें पाकिस्तान द्वारा रिहा किए गए भारतीय फौजी पायलट अभिनंदन को लेकर व्यंग्य गढ़ा गया है, और फिर सरहद के दूसरी तरफ से उसका वैसा ही जवाब भी बनाकर पोस्ट किया गया। मजाक से लेकर व्यंग्य तक, और फिर नफरत से लेकर हमलावर तेवरों तक, सोशल मीडिया दोनों तरफ के अलग-अलग मिजाज के अलग-अलग लोगों को देख रहा है, झेल रहा है। और दुनिया का तजुर्बा यही है कि जब भाईयों के बीच दीवार उठती है, तो कुछ अधिक ही ऊंची उठती है। भारत और पाकिस्तान के बीच भी यह हाल दोनों की आजादी के बाद से तकरीबन लगातार बना रहा है, या कि बनाकर रखा गया है। पूरी दुनिया में क्रिकेटप्रेमियों के बीच यह बात बहुत अच्छी तरह जानी और मानी जाती है कि भारत और पाकिस्तान के बीच के क्रिकेट मैच जितनी अधिक दिलचस्पी दुनिया के किसी भी और मैच के लिए कभी नहीं होती। और इन दोनों देशों के बीच खेला गया कोई भी मैच उस टूर्नामेंट के फाइनल मैच की तरह का रोमांचक हो जाता है। 

लेकिन जिनको सरहद पर गोलियों से मोहब्बत न हो, और जो सचमुच ही खेल को चाहते हैं, क्या उन्हेें ऐसे मैच को देखते हुए यह हैरानी नहीं होती होगी कि वे दूसरे देश की टीम के बेहतर खेल की भी तारीफ नहीं कर सकते? खेल दो देशों के बीच तनावतले कुछ ऐसा दब गया है कि एक बेहतरीन गेंद या एक बेहतरीन शॉट की तारीफ मन में भी उठने के पहले यह सोच लेना होता है कि क्या दूसरे देश के खिलाड़ी के काबिले तारीफ खेल पर भी मन में तारीफ उठना अपने देश के साथ गद्दारी होगी? लेकिन इन दोनों देशों के बीच समय-समय पर सरहदी तनाव के चलते, या आतंकी हमलों के चलते एक-दूसरे से क्रिकेट खेलना सरकारों में बंद भी करवाया हुआ है। खेल से इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते अच्छे हो सकते थे, ठीक उसी तरह जिस तरह कला, साहित्य, संगीत के चलते अच्छे हो सकते थे, एक देश से दूसरे देश में सामानों की आवाजाही के चलते अच्छे हो सकते थे, कहीं दरगाह और कहीं मंदिर-गुरुद्वारे में आवाजाही से अच्छे हो सकते थे। लेकिन दोनों मुल्कों की राजधानियों में बैठे नेताओं, अफसरों, और फौजियों के चलते रिश्तों की मोहब्बत मुमकिन नहीं हो पाती है, और फिर आग में घी डालने के लिए सरहद के दोनों तरफ टीवी के समाचार चैनल भी हैं, जिनका धंधा जंग के फतवों से एकदम ही बढ़ जाता है। अभी भी जिन समाचार चैनलों पर हमारी नजर जा रही है, वे अपने देश के लिए फतवे जारी करते हुए मीडिया की अपनी बुनियादी और परंपरागत भूमिका से कोसों दूर चल रहे हैं। इस मैच को देखते हुए भी समझदार लोगों को यह तो याद रखना ही चाहिए कि सरहद के आरपार एक शायर की लिखी गज़ल को दूसरे देश के गायक ने गाकर मशहूर कर दिया, और फिर उस गज़ल का इस्तेमाल दूसरे देश ने बखूबी किसी फिल्म में कर दिया। आम लोगों से लेकर खेल, कला, साहित्य, और संगीत के खास लोगों तक सरहद के दोनों तरफ खूब मोहब्बत है, बस राजधानियां और समाचार चैनल अपने पेट चलाने के लिए इसे तबाह न करें। अब से कुछ मिनटों में शुरू होने वाला यह मैच लोग बेहतर खेल का मजा लेने के लिए देखने की कोशिश करें, उसमें अपने देश के साथ कोई गद्दारी नहीं होगी।
-सुनील कुमार

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