विशेष रिपोर्ट

बागबाहरा/ महासमुन्द, फर्जी ऋण पुस्तिका, पटवारी-तहसीलदार-किसानों  के फर्जी हस्ताक्षर से सेंट्रल बैंक से कर्ज निकला
बागबाहरा/ महासमुन्द, फर्जी ऋण पुस्तिका, पटवारी-तहसीलदार-किसानों के फर्जी हस्ताक्षर से सेंट्रल बैंक से कर्ज निकला
Date : 29-Jun-2019

उत्तरा विदानी-सुरेश नरेडिय़ा

बागबाहरा/ महासमुन्द, 29 जून। महासमुन्द जिले के बागबाहरा विकास खंड के ग्राम टेमरी के दो किसानों के नाम पर फर्जी पट्टा, ऋण पुस्तिका बनाकर सेंन्ट्रल बैंक से हजारों  का कर्ज  किसी अन्य के द्वारा लेने का मामला सामने आया है। चूंकि खसरा नंबर आन लाईन है, इसलिए ऋण पुस्तिका में जब कर्ज की बात सामने आई तो वे हैरान हैं। इनकी जमीन इस वक्त कर्ज नहीं पटाने के एवज बैंक में बंधक है और इससे इन किसानों को कर्ज मिलना भी संभव नहीं है। इनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है।  
इनका कहना है कि जिन कागजात  से लोन लिया गया है इसमें तहसीलदार, पटवारी, किसान समेत सारे लोगों के हस्ताक्षर फर्जी हैं। ये काम किसका है, यह जांच का मुद्दा है। हैरानी की बात यह भी है कि  लोन देने से पहले बैंक ने इस बात की तफ्तीश भी नहीं की कि किसानों के नाम पर जमा किए गए नो ड्यूज सही हंै अथवा नहीं। 

सेन्ट्रल बैंक महासमुंद के  फील्ड अफसर देवाशीष का कहना है कि बैंक से उन्हें 2014 में कर्ज दिया गया। इसके लिए बकायदा गांव जाकर जमीन देखी गई। सारे कागजात देखे गए। लेकिन लोन लेने वाला फर्जी था, इसकी जानकारी बैंक कैसे कर सकता है। जब इन्होंने लोन लिया तब आनलाईन वर्क नहीं हो रहा था। हाल ही में कम्प्यूटर पर अपडेट करने के बाद किसानों को जानकारी मिली।

इधर किसानों ने थाने में इसकी शिकायत की है। थानेदार का कहना है कि पहले मामले की जांच करेंगे तभी रिपोर्ट लिखेंगे। 
कलेक्टर ने कहा है कि शीघ्र ही मामले की तह तक जाकर किसानों के साथ इंसाफ किया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। यहां केवल दो किसान ही सामने आये हैं, लेकिन न जाने कितने ही किसानों के साथ इस तरह का आघात हुआ होगा।  
किसान नेक राम, उम्र 30 साल, पिता बिरसिंग, जाति तेली, ग्राम करहीडीह टेमरी कहता है-मेरी भूमि स्वामी हक की पटवारी हल्का नंबर 58-47 , ऋण पुस्तिका क्रमांक 1944384 पर कुल रकबा 1.15 हेक्टेयर भूमि है। जिस पर मेरे फर्जी हस्ताक्षर और ऋण पुस्तिका निकालकर पता नहीं किसने मेरे नाम से सेंट्र्ल बैंक महासमुन्द से 75 हजार रुपये का लोन लिया है। पांच साल के भीतर इसे पटाना है। मेरी आमदनी इतनी नहीं कि मैं कर्ज पटा सकूं। सामने धान की बोआई करना है। इसके लिए मुझे सोसायटी से खाद,बीज,दवाई चाहिए।  जमीन गिरवी हो चुकी है।
मैं अपने बच्चों और परिवार को क्या जवाब दूं और कैसे उनके हिस्से की रोटी बचाऊं। मन तो कर रहा है कि आत्महत्या कर लूं। 

मैंने कभी अपनी औकात से अधिक किसी से कर्ज नहीं लिया। मैं और मेरा परिवार बैंक के इतिल्ला के बाद खाना-पीना छोडक़र सिर्फ इस बात की चिंता में हैं कि हमारे साथ ऐसा क्यों किया गया? मेरे नाम से शपथ पत्र और नो ड्यूज भी है साहब, जिसके बारे में मैं जानता तक नहीं। मेरा हस्ताक्षर मिला लीजिये, नकली है। 

इसी तरह किसान भुलऊ राम उम्र 30 साल पिता बिसहत का कहना है-मेरी भूमि स्वामी हक की ग्राम टेमरी स्थित पटवारी हल्का नंबर 47 खसरा नंबर 5 की 1.37 हेक्टेयर जमीन पर पता नहीं किसने 90 हजार रुपये का ऋण ले रखा है। सेंट्रल बैंक से। बैंक से पत्र आया तो सबसे पहले परिवार वालों ने मुझ पर ही संदेह किया। बाद में पता चला कि इसी तरह नेक राम को कर्ज से लाद दिया गया है, तो परिवार के लोग चुप हुए।  हमारे कागजात का फर्जी नकल, तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर, पटवारी का फर्जी हस्ताक्षर कर आखिर किसने ऐसा खेल होगा? अब सिर्फ एक ही रास्ता है कि मौत को गले लगा लूं लेकिन इससे मुझे ही गुनाहगार समझेंगे परिवार के लोग। कहेंगे परिवार पालने के डर से आत्महत्या कर लिया।  इन दोनों किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से किसान होने के नाते निवेदन किया है कि मामले की जांच करंे और उनकी जमीन बचा लें।  
 

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