विशेष रिपोर्ट

  राजनांदगांव, 'लाल गलियारा' की  चाल फोर्स के दखल से धीमी, स्व. विनोद चौबे व 29 जवानों की शहादत के दस साल में नक्सल चुनौतियां बौनी
राजनांदगांव, 'लाल गलियारा' की चाल फोर्स के दखल से धीमी, स्व. विनोद चौबे व 29 जवानों की शहादत के दस साल में नक्सल चुनौतियां बौनी
Date : 12-Jul-2019

'लाल गलियारा' की  चाल फोर्स के दखल से धीमी, स्व. विनोद चौबे व 29 जवानों की शहादत के दस साल में नक्सल चुनौतियां बौनी

राजनांदगांव, 12 जुलाई।  दस साल पहले मानपुर के कोरकोट्टी व मदनवाड़ा में हुए वीभत्स नक्सल हमले में तत्कालीन एसपी विनोद चौबे और 29 जवानों की शहादत की घटना के बाद राजनांदगांव जिले का दक्षिणी क्षेत्र मानपुर नक्सल मकडज़ाल से बाहर निकलकर खुली हवा में सांस लेने लगा। हालांकि अभी भी नक्सलियों का एक बड़े हिस्सें में पैठ कायम है। 'लाल गलियारा ' बनाने की फिराक में जंगल में आंतक मचा रहे नक्सलियों को पीछे ढ़केलते फोर्स आगे बढ़ते दिख रही है। नक्सलियों की आमदरफ्त पर पुलिस काफी हद तक अंकुश लगाने में कामयाब हुई है।

 12 जुलाई 2009 को कोरकोट्टी में एसपी विनोद चौबे व 29 जवान शहीद हो गए थे। यह पहला मौका था जब पुलिस के इतिहास में किसी आईपीएस अफसर को शहादत मिली। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने भी नक्सल समस्या की गंभीरता को समझा और राज्य के साथ कई हिस्सो में ऑपरेशन शुरू किया।

 पुलिस के ऑपरेशन के साथ सरकार ने विकास के रास्ते नक्सलियों की दखल को कम किया। यही कारण है कि आज मानपुर इलाके की तस्वीर बदल गई है। 

नक्सलियों के अंदरूनी आवाजाही को रोकने के लिए पुलिस ने ताबड़तोड़ बेसकैंप खड़े कर दिए। बाद में कुछ बेसकैंपों को थाना का दर्जा दिया गया। मानपुर के औसतन हर 10 किमी में पुलिस थाना व कैंप के जरिए अपनी धाक जमा चुकी है। नक्सलियों को रणनीतिक तौर पर कमजोर करने के लिए मुख्य ठिकानो में पर बैसकैंप तैयार कर लिए गए है। महाराष्ट्र और कांकेर की सरहद पर राजनांदगांव पुलिस का सख्त पहरा है। मानपुर और औंधी क्षेत्र में सड़क मार्ग का जाल फैल गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने कई योजनाओं को मूर्तरूप दिया है। 

बीते दस साल में पुलिस के संसाधन में इजाफा हुआ है। प्रशासनिक मशीनरी को भी जंगल में काम करने के लिए भयमुक्त माहौल मिला है। यद्यपि मानपुर में नक्सल धमाको की गंूज को पुलिस ने कम किया है लेकिन यह भी कटु सत्य है कि राजनांदगांव का उत्तरी इलाका बकरकट्टा अब नक्सलियों के नए ठिकाने में बदल गया है। नक्सलियों ने इस क्षेत्र में भी जवानों को निशाना बनाया है। करीब तीन साल पहले उपनिरीक्षक युगल वर्मा समेत दो जवान शहीद हो गए थे। 
नक्सलियों के लिए यह इलाका पहाड़ी होने की वजह से शरणस्थली बना है। राजनांदगांव जिले के रास्ते लाल गलियारा बनाने में डटे नक्सलियों को पुलिस ने कभी हद तक रास्ते में लाने का प्रयास किया है। नक्सल मोर्चे में अभी भी पुलिस लंबी लड़ाई करते कई चुनौतियोंं से निपटना है। यह सच है कि मानपुर अब नक्सल चंगुल से बाहर निकलता विकास की राह में बढ़ रहा है।

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