विशेष रिपोर्ट

कोण्डागांव, आजादी के 70 साल बाद भी यहां नहीं पहुंचा विकास, कड़ेनार के बच्चे तबेले से भी बुरे हाल में पढऩे मजबूर
कोण्डागांव, आजादी के 70 साल बाद भी यहां नहीं पहुंचा विकास, कड़ेनार के बच्चे तबेले से भी बुरे हाल में पढऩे मजबूर
Date : 17-Jul-2019

आजादी के 70 साल बाद भी यहां नहीं पहुंचा विकास, कड़ेनार के बच्चे तबेले से भी बुरे हाल में पढऩे मजबूर

शंभू यादव

कोण्डागांव, 16 जुलाई। अंग्रेजी शासनकाल के दौरान वर्ष 1888 में कोण्डागांव जिले के बड़ेडोंगर में स्कूल की स्थापना हो चुकी थी। यहां स्कूल की स्थापना वर्ष 1888 में तो हो चुकी है, लेकिन आज भी जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां स्कूल के नाम पर केवल एक झोपड़ी है। इतना ही नहीं उसमें पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक ही पदस्थ हैं।  हम बात कर रहे हैं मर्दापाल के कड़ेनार में संचालित स्कूलों की। यहां के स्कूल आज भी टीन के शेड के नीचे संचालित होते हैं। फिर चाहे मौसम कोई भी हो, बच्चों को यहीं बैठकर अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करनी होती है।

  कोण्डागांव जिला के मर्दापाल मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर, सुदूर अंचल में बसा है ग्राम पंचायत कड़ेनार। इस पंचायत की स्थिति के बारे में बात करें तो यहां पहुंचने के लिए आज भी कोई सड़क नहीं है। यदि ग्रामीणों को मुख्यालय पहुंचना होता है तो वह जंगल के अंदर से पगडंडी मार्ग से होते हुए मुख्यालय तक पहुंचते हैं। ऐसे गांव में शिक्षा का अलाव जलाए रखना अपने आप में एक चुनौती साबित होता है। इसके बाद भी ग्राम पंचायत कड़ेनार में प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं का स्थापना किया गया है। तत्कालीन सरकार ने कड़ेनार गांव में शिक्षा के अलाव जलाए रखने के लिए स्कूलों की स्थापना तो कर दी लेकिन शायद वे इन स्कूलों को वर्तमान समय में भूल चुके हैं। क्योंकि यहां संचालित स्कूल की स्थिति किसी तबेले से कम नहीं है। फिर भी यहां पदस्थ शिक्षक व अन्य कर्मी अपना काम बखूबी निभा रहे है।


एक की हालत सुधरी, तो दो की हालत जस के तस
कड़ेनार गांव में 3 प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं का संचालन हो रहा है। इनमें से एक ग्राम पंचायत कड़ेनार मुख्यालय में, मदोड़ा में एक प्राथमिक शाला और इसी तरह प्राथमिक शाला तिरीनबेड़ा का संचालन हो रहा है। इन तीन स्कूलों में से पंचायत मुख्यालय में संचालित स्कूल के लिए किसी तरह छोटा सा भवन तो बना दिया गया है, लेकिन तिरीनबेड़ा और मदोड़ा दोनों स्कूलों की हालत किसी तबेला घर से कम नहीं है। ऐसा नहीं है कि यहां के शिक्षक और ग्रामीण गांव विकास के साथ-साथ स्कूल विकास की इच्छा ना रखते हो। वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए कई बार शासन-प्रशासन के अधिकारियों से लेकर मंत्री स्तर तक स्कूल की समस्या बता चुके हैं। एक ओर गांव के अनपढ़ ग्रामीण शिक्षा की महात्व को जानते हुए स्कूल भवन की लंबे समय से मांग करते आए है, लेकिन आफरसाही जगत में शिक्षा के लिए किए गए मांग को हर बार अनसुनी कर दिया जाता है। 

चुनाव  करवाना था बनवा दिया स्कूल भवन
गांव के बुजुर्ग और जानकारों ने जानकारी देते हुए बताया, गांव में दो नहीं बल्कि इन तीनों स्कूलों की हालत एक जैसी थी, तीनों स्कूल तबेला नुमा झोपड़े में ही संचालित होते थे। अब जब प्रशासन को इन स्कूल भवन के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा चुनाव संपन्न करवाना था तो कड़ेनार मुख्यालय में संचालित स्कूल में भवन का निर्माण करवाया गया। निर्माण के बाद स्कूल में पहले तो चुनाव कार्य संपन्न हुआ उसके बाद कही जाकर बच्चों के लिए स्कूल के द्वार बच्चों के लिए खोले गए। ग्रामीणों ने प्रशासन पर यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि, लंबे समय से गांव में स्कूल भवन की मांग करते आए हैं लेकिन प्रशासन कोई ना कोई बहाना करके टालमटोल करते आई है। लेकिन जब स्वयं के उपयोग की बारी आई तो प्रशासन ने स्कूल भवन का निर्माण करवा दिया। 

वर्ष 2007-08 में भवन के लिए 4 लाख  हुए थे स्वीकृत
प्राथमिक शाला तिरीनबेड़ा के शिक्षक रतन लाल कश्यप (सहायक शिक्षक एलबी) ने चर्चा के दौरान बताया कि, प्रथमिक शाला तिरीनबेड़ा की स्थापना वर्ष 1998 में शिक्षा गारंटी के तहत की गई है। रतन लाल कश्यप उसी समय से इस स्कूल में पदस्थ है। उन्होंने आगे बताया कि, वर्ष 2005 में इस स्कूल का शिक्षा गारंटी से प्राथमिक शाला में उन्नयन किया गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2007-08 भवन निर्माण के लिए लगभग 4 लाख रुपए की स्वीकृति भी शासन स्तर से मिली, लेकिन स्वीकृति के 10 साल बाद भी यहां भवन निर्माण नहीं हो पाया है। भवन के ना होने से पहली से लेकर पांचवीं तक के सभी 33 स्कूली बच्चें एक ही झोपड़ी के अंदर बैठ कर पढ़ाई करते हैं। यहां पढऩे के दौरान कई बार ऐसे हालत भी उत्पन्न हो जाते है कि, पठन-पाठन सामग्री भींग जाते है। 

इसी क्षेत्र के विधायक रहे पूर्व शिक्षा मंत्री
ग्राम पंचायत कड़ेनार राजस्व जिला कोण्डागांव के नक्शे में ही शामिल है, लेकिन यह विधानसभा और पुलिस जिला नारायणपुर का एक हिस्सा है।  इसी क्षेत्र से केदार कश्यप भाजपा के विधायक रहे और प्रदेश सरकार में वे स्कूल शिक्षा मंत्री भी बनाए गए थे।  

जल्द ही स्कूल भवन का निर्माण करवाया जाएगा
इस मामले पर कोण्डागांव के शिक्षा अधिकारी राजेश मिश्रा से चर्चा किया गया तो उन्होंने कहा कि, पूर्व में कड़ेनार क्षेत्र में काफी परेशानी थी, जिसके कारण वहां स्कूल भवन निर्माण नहीं हो पाया। अब पंचायतों के माध्यम से भवन का निर्माण करवाया जाएगा। वहीं इस मामले पर कोण्डागांव के कलेक्टर नीलकंठ टीकाम ने कहा कि, पूर्व वर्ष में कड़ेनार माओवाद गढ़ हुआ करता था। अब यहां परिस्थितियां बदल चुकी है। जल्द ही यहां शाला भवन का निर्माण कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं इस गांव में बच्चों को आवासिय सुविधा देने के लिए छात्रावास-आश्रम का भी संचालन किया जाएगा। 

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