विशेष रिपोर्ट

बैकुंठपुर, घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में अब 5 बाघ इनमें से एक पन्ना रिजर्व से भटका
बैकुंठपुर, घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में अब 5 बाघ इनमें से एक पन्ना रिजर्व से भटका
Date : 28-Jul-2019

घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में अब 5 बाघ इनमें से एक पन्ना रिजर्व से भटका

29 जुलाई विश्व टाइगर दिवस

चन्द्रकांत पारगीर
बैकुंठपुर, 28 जुलाई । कोरिया जिला स्थित गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में बीते एक साल से बाघों की संख्या में इजाफा होकर 5 हो गया है,जबकि गर्भवती बाघिन ने 1 बच्चे को जन्म दिया है, 5 बाघों में एक पन्ना टाइगर रिजर्व से भटककर आया पन्नालाल बताया जा रहा है।

इस संबंध में पार्क के रेंजर एमएस मर्शकोले का कहना है पार्क क्षेत्र में बाघों के भोजन के लिए पर्याप्त भोजन के कारण बाघिन और उसका शावक के साथ 3 और बाघ इन दिनों देखे जा रहे है, खुशी की बात ये है हमारे उद्यान में बाघिन ने एक शावक को जन्म दिया और दोनो सुरक्षित और स्वस्थ भी है। इसके अलावा एक बाघ सोनहत रेंज में बीते कई दिनों से है जबकि एक जनकपुर और एक कमर्जी क्षेत्र में है। जनकपुर में घूम रहा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व से आया हुआ लग रहा है। जिसे पन्नालाल के नाम से जाना जाता है।

जानकारी के अनुसार जिले में स्थित गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में बीते जनवरी माह से एक बाघिन यहां देखी गयी, बाद में विभाग को पता लगा कि वो गर्भवती है, उस पर विभाग ने नजऱ बनाये रखी, जून माह के अंतिम दिनों में उसने एक शावक को जन्म दिया, बाघिन के शावक के जन्म देने पर पार्क के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गयी, उन्होंने इसकी जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को भी दी। बीते दो माह से पार्क के कर्मचारियों में माँ और बच्चे के पगमार्क इकठ्ठे किये, इसी बीच लगभग 4 वर्ष की उम्र का एक जवान बाघ सोनहत परिक्षेत्र में देखा गया, उसकी तस्वीरे भी ट्रैप कैमरे ने कैद की, उस पर भी विभाग नजऱ बनाये हुए है, लगभग 12 से 15 जानवरों का अभी तक वो शिकार कर चुका है, फिलहाल उसे सोनहत रेंज के गिधेर में देखा गया है।  वहीं संजय गांधी पार्क से लगा गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान का जनकपुर और कमर्जी परिक्षेत्र में एक-एक बाघ की जानकारी विभाग के पास है। 

जनकपुर में विचरण कर रहा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व से भटक कर आया पन्ना लाल बताया जा रहा है। बताया जाता है पन्नालाल पहले बांधवगढ़ में कई दिनों तक देखा गया, और फिर अचानक वहां से गायब हो गया, इधर गुरु घासीदास पार्क के जनकपुर में उसे देखे जाने पर उससे जुड़ी जानकारी जुटा कर भेजा गया, जिससे पता चला कि ये बाघ और कोई नही पन्नालाल ही है। जबकि कमर्जी में विचरण कर रहा एक बाघ ने 4 गाय भैस का शिकार कर चुका है। 
बारिश से हो रही है दिक्कत

बारिश शुरू होते ही पार्क क्षेत्र में लगे बेशकीमती ट्रैप कैमरों को विभाग ने निकाल लिए, ताकि वो खराब ना हो सके, जिसके बाद बाघों को ट्रैप नही किया जा पा रहा है। 

दूसरी ओर बाघिन और उसके एक बच्चे को कुछ गांव वालों ने देखा और दोनों के पगमार्क को विभाग ने पाया है, बारिश में कारण उनके पगमार्क भी मिलना काफी मुश्किल हो गया है। हालांकि विभाग मां और बच्चे पर नजऱ बनाये हुए है। विभाग की माने तो ये सोनहत रेंज के आसपास ही है। 

घोषित हो सकता है टाइगर रिजर्व
वर्ष 2001 में अस्तित्व में आये गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में वैसे तो कई बार बाघ आये और यहां से चले गए, वर्ष 2005 के बाद लंबे समय तक बाघ यहाँ नही दिखे, वर्ष 2019 के जनवरी माह से यह क्षेत्र बाघों के यहां आने और उनके रहने के लिए शानदार क्षेत्र के रूप में सामने आया, उसका मुख्य कारण है बाघों के लिए मिलने वाला पर्याप्त भोजन, यहां बड़ी मात्रा में नील गाय, हिरण, चीतल देखे जा रहे है, जो बाघों के यहां निवास करने का बड़ा कारण है। अब ये टाइगर रिजर्व बनने की घोषणा के काफी करीब है।

बदलाव से आया परिवर्तन
राज्य में नई सरकार बनते ही पार्क के अधिकारियों को बदला गया, पार्क में बदले अधिकारियों ने बाघों के संरक्षण को लेकर गंभीर प्रयास किये, उन्होंने यहां रहने वाले ग्रामीणों को समझाइश के साथ शिकारियों पर तेज नजऱ बनाई, कइयों को पकड़ का जेल भेजा, जिसका परिणाम यह हुआ कि अब इस पार्क में 5 बाघ मौजूद है।

धारियों से होती है अलग पहचान
वाइल्ड लाइफ के जानकार नरेंद्र बताते है बाघ के शरीर की धारियां हर बाघ में अलग होती है, इन धारियों से हर बाघ की अलग पहचान होती है, इनकी दोनो ओर की धारियो का डेटा एकत्रित है, जिसके आधार पर सबकी अपनी अलग पहचान है।

Related Post

Comments