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कश्मीरी घरों में सेना के आग लगाने का सच: फ़ैक्ट चेक
कश्मीरी घरों में सेना के आग लगाने का सच: फ़ैक्ट चेक
Date : 08-Aug-2019

बीबीसी न्यूज
सोशल मीडिया पर कुछ जलते हुए मकानों का एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि भारतीय सेना ने भारत प्रशासित कश्मीर के बांदीपुरा इलाके में लोगों के घरों में आग लगा दी है। करीब सवा मिनट का यह वीडियो फेसबुक पर दस हजार से ज़्यादा बार शेयर किया गया है और तीन लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। लेकिन अपनी पड़ताल में हमने इस दावे को गलत पाया है। ये कोई ताजा मामला नहीं है, बल्कि डेढ़ साल पुरानी घटना है।
कश्मीर से चलने वाले न्यूज पोर्टल राइजिंग कश्मीर और कश्मीर ऑब्जर्वर के अनुसार 27 मार्च 2018 को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के लाचीपोरा गाँव में यह घटना हुई थी। इस गाँव के चार घरों में आग लगी थी जिसके कारण सात परिवार प्रभावित हुए थे और उनके करीब 20 मवेशी इस आग में झुलस गये थे।
गाँव के लोगों ने यह आरोप लगाया था कि पास में कोई अग्निशमन सुविधा न होने के कारण आग इतनी बढ़ गई। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में इस बात का जिक्र नहीं मिलता कि लाचीपोरा गाँव में आग लगने का कारण क्या था?
सोमवार को भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भारत प्रशासित कश्मीर से धारा-370 हटाये जाने की घोषणा से पहले ही जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट और दूरभाष सेवाएं बंद कर दी गयी थीं।
शनिवार को जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती के ऑर्डर दिये गए थे जिसे लेकर काफी हलचल बढ़ी। अभी भी जम्मू-कश्मीर से संपर्क टूटा हुआ है और वहां की स्थिति के बारे में तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं।
लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर से जुड़ी कुछ अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं जिनकी सच्चाई हमने पता की।
दक्षिणपंथी रुझान वाले तमाम फेसबुक गु्रप्स में श्रीनगर के नागरिक सचिवालय की यह तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है कि सरकारी बिल्डिंग से अब कश्मीर का झंडा हटा दिया गया है।
अपनी पड़ताल में हमने पाया कि यह तस्वीर साल 2016 की है जिसे कल की तस्वीर और आज की तस्वीर में तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पुरानी फोटो को एडिट कर इससे कश्मीर का झंडा मिटा दिया गया है और बिल्डिंग के ऊपर सिर्फ तिरंगा लगा दिया गया है। सोशल मीडिया पर गलत सूचना के साथ शेयर की जा रही इस तस्वीर को अगर आप गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि झंडों के अलावा इन दो तस्वीरों में बाकी सभी चीजें हूबहू हैं। सचिवालय के सामने खड़े लोग, उनके कपड़े और उनकी स्थिति भी एक जैसी है।
समाचार एजेंसी एएनआई, पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल और बीजेपी कश्मीर के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस बात की पुष्टि की है कि नागरिक सचिवालय पर पहले की तरह दोनों झंडे अब भी लगे हुए हैं।
दक्षिणपंथी रुझान वाले कई यूजर सोशल मीडिया पर मुस्लिम लोगों की पिटाई का एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर कर रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और पत्थरबाजों को पीटना शुरू कर दिया है। इस वीडियो में दिखाई देता है कि पुलिस ने कुछ लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया है और उन्हें पीट रही है।
जिन गु्रप्स में यह वीडियो शेयर किया गया है, उनमें लिखा है, कश्मीर में धारा-370 और 35-ए के हटते ही प्रसाद बंटना शुरु हो गया है। लेकिन ये एक भ्रामक सूचना है। रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि वीडियो अगस्त 2015 का है और ये घटना बिहार की राजधानी पटना में स्थित गर्दनीबाग स्टेडियम के पास हुई थी।
पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मदरसों में पढ़ाने वाले टीचर्स ने राज्य के 2400 मदरसों में काम की स्थिति सुधारने की माँग को लेकर गर्दनीबाग स्टेडियम में प्रदर्शन किया था। जैसे ही ये प्रदर्शनकारी स्टेडियम से बाहर आये, पुलिस ने इन पर लाठीचार्ज कर दिया था। इस घटना के बाद बिहार पुलिस ने अपनी सफाई में कहा था कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाने की कोशिश कर रहे थे।
पाकिस्तान में भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता और हुर्रियत काँफे्रंस (गिलानी गुट) के चेयरमैन सैय्यद अली शाह गिलानी का एक वीडियो काफी शेयर किया जा रहा है। जिन्होंने इस वीडियो को शेयर किया है, उन्होंने लिखा है कि भारत सरकार ने धारा-370 हटाने से पहले देखिए शाह गिलानी को कैसे कैद किया।
इस वीडियो में गिलानी को कहते सुना जा सकता है, दरवाजा खोलो। मैं भारतीय लोकतंत्र के जनाजे में शामिल होना चाहता हूँ। हमने पाया कि इस वीडियो का जम्मू-कश्मीर के मौजूदा घटनाक्रम से कोई वास्ता नहीं है। ये वीडियो अप्रैल 2018 का है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2018 में शोपियाँ जिले में भारतीय फौज और चरमपंथियों के बीच हुए तीन बड़े एनकाउंटरों के बाद सैय्यद अली शाह गिलानी समेत अन्य अलगाववादी नेताओं ने मार्च का आह्वान किया था। लेकिन भारतीय सेना ने मार्च शुरु होने से पहले ही गिलानी को उनके घर में नजरबंद कर दिया था। ये वायरल वीडियो उसी समय का है।
पाकिस्तान में इससे पहले अलगाववादी नेता यासीन मलिक की दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में मौत की अफवाह फैली थी जिसे तिहाड़ जेल प्रशासन ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यासीन मलिक बिल्कुल ठीक हैं।
 

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