विचार / लेख

देश और दुनिया इस हफ्ते
देश और दुनिया इस हफ्ते
Date : 11-Aug-2019

-प्रकाश दुबे
लाट साहब का कद घट जाएगा?  
जम्मू-कश्मीर में संविधान का अनुच्छेद-370 निष्प्रभावी करने के फेर में दो केन्द्रशासित प्रदेश बन गए। बेदी यह सोचकर खुश हो सकती हैं कि महत्वपूर्ण राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और मैं बराबरी पर आ गए। खुशकिस्मत तो ईएल नरसिंहन हैं। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बने थे। बरसों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों की कमान संभाली। अब तेलंगाना के राज्यपाल हैं।  इंटेलिजेंस ब्यूरो के सेवानिवृत्त नरसिंहन से सबसे बड़े उत्तरप्रदेश के नेता मलिक का कद बहुत बड़ा है। इस अनदेखी को दूर करने के लिए ही शायद प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने का संकेत दिया है।
कह दिया तो डरना क्या
प्रकाश जावड़ेकर के सितारे बुलंदी पर हैं। कर्नाटक के प्रभारी थे। वहां सरकार बन गई। राजस्थान के प्रभारी थे। विधानसभा में थोड़े अंतर से पिछडऩे के बाद लोकसभा चुनाव में विपक्ष का सफाया हो गया। अब दिल्ली विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी मिली है। संसद भवन में जावड़ेकर को निमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधि बारम्बार सफाई दे रहे थे कि पै साथ आने वाले थे। जावड़ेकर ने पै की अनुपस्थिति की पूछताछ नहीं की। सहज भाव से कहा-कोई बात नहीं। कार्यक्रम में पहुंचने पर तुरंत हामी नहीं भरी। यानी विनम्रता पर सस्पेंस लपेट दिया। पै कौन से? मोहनदास? आर्थिक विषयों के जानकार पै ने कैफे काफी डे के मालिक सिद्धार्थ की आत्महत्या के सिलसिले में आयकर विभाग की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की थी। तहलका मचना ही था। उनके बाद किरण शा मजुमदार ने कहा कि एक आयकर अधिकारी मुझे भी नेक सलाह देने पहुंचे थे।  
राज्यसभा में राज्य
कभी-कभी सांस लेना कितना कष्टप्रद होता है? अस्थमा के मरीज जानते हैं। अनेक विधेयक पारित होने के कारण कई साल के बाद संसद ने राहत की सांस ली। राज्यसभा में बिना बखेड़ा विधेयक पारित होने से अधिक महत्वपूर्ण तथ्य की तरफ सिर्फ उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का ध्यान गया। राज्यसभा के सभापति का दायित्व संभालने वाले नायडू के मुताबिक बरसों बाद राज्यसभा ने अपने नाम के अनुसार आचरण किया। मोटर वाहन अधिनियम को संशोधित करते समय सदस्यों और मंत्री नितीन गडकरी ने राज्यों की अपेक्षा और जरूरतों का पूरा ध्यान रखा। सदन में उत्तर देते समय ही आश्वस्त किया कि राज्यों की अनदेखी नहीं होगी। कानून बनाते समय राज्य अनदेखी के शिकार हो जाते हैं। यही कारण है कि संसद सत्र समाप्त होने के तीसरे दिन राष्ट्रपति ने सम्मति दी।
चूल्हा अलग, ठिकाना तो... 
नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश में एक विधान, एक निशान-झंडा की पहल की। पटना उच्च न्यायालय के सामने उल्टी चुनौती है। उसे घर का बंटवारा करना है। इस घर में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का बसेरा है। दोनों उसके मालिक नहीं हैं। घर का विभाजन दोनों टालना चाहते हैं। आप सोचते होंगे न, कि अजीब गुत्थी है। है तो। ऐश्वर्या राय ने अदालत से अलग रसोईघर सहित पाक व्यवस्था की मांग की है। गफलत में मत पड़ो, ज्ञानी पाठक। यह ऐश्वर्या किसी फिल्मी-चिल्मी दंपत्ति की बहू नहीं है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पोती है। सास-ससुर का नाम भी हम ही बताएं? राबड़ी-लालू के लिए सरकार ने 10, सरकुलर रोड पर विशाल बंगला आवंटित किया है। बहू ऐश्वर्या ने उच्च न्यायालय से अपने लिए अलग रसोई घर आदि की पृथक व्यवस्था मांगी है। ऐश्वर्या सास-ससुर के साथ रहती है। पिता चंद्रिका राय राष्ट्रीय जनता दल के विधायक हैं।
(लेखक दैनिक भास्कर नागपुर के समूह संपादक हैं)

 

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