विशेष रिपोर्ट

नक्सलगढ़ में लड़ते सिपाही से निरीक्षक बने अफसर ने मारे 41 नक्सली, अफसर लक्ष्मण केंवट को वीरता पदक के साथ महकमें से मिली रही शाबासी
नक्सलगढ़ में लड़ते सिपाही से निरीक्षक बने अफसर ने मारे 41 नक्सली, अफसर लक्ष्मण केंवट को वीरता पदक के साथ महकमें से मिली रही शाबासी
Date : 27-Aug-2019

नक्सलगढ़ में लड़ते सिपाही से निरीक्षक बने अफसर ने मारे 41 नक्सली

अफसर लक्ष्मण केंवट को वीरता पदक के साथ महकमें से मिली रही शाबासी

प्रदीप मेश्राम

राजनांदगांव, 27 अगस्त (छत्तीसगढ़)। पुलिस और नक्सलियों की निर्णायक लड़ाई में राजनांदगांव के धूर नक्सलग्रस्त गातापार जंगल में पदस्थ इंस्पेक्टर लक्ष्मण केंवट अपनी बहादुरी की वजह से सुर्खियां बटोर रहे हैं। हाल ही में दूसरी बार वीरता पदक लेने वाले लक्ष्मण केंवट की नक्सलियों से लोहा लेने के जज्बे को देखकर अफसर उन्हें उदाहरण के तौर पर पेश कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस की ‘वन टाईम प्रमोशन’ नीति से आरक्षक से सीधे उपनिरीक्षक बने केंवट ने सरकार के उम्मीद पर खरा उतरते हुए अब तक 41 नक्सलियों को ढेर किया है।  केंवट के निशाने में आए नक्सलियों पर करीब 1.50 करोड़ रूपये का इनाम घोषित था। 

वर्ष 2007 में बतौर आरक्षक सूरजपुर जिले में महकमें में शामिल   केंवट ने वन-टाईम प्रमोशन नीति के तहत खुद को नक्सल इलाके में 10 साल के लिए झोंक दिया। बीजापुर में अपने पहले नक्सल मुठभेड़ में केंवट ने अपने बूते नक्सलियों को खदेडऩे की मुहिम शुरू की। साल 2014 में बीजापुर से सटे गुंडापुर गांव में एक नक्सली को मारकर केंवट ने अपना सफर शुरू किया। इस कामयाबी के लिए महकमें ने सीधे उपनिरीक्षक से निरीक्षक पद पर पदोन्नत कर दिया। 

वर्ष 2012 से बीजापुर में ‘लाल आंतक’ से भिड़ते हुए केंवट ने अपने सेना के साथ दो साल में 27 नक्सलियों को मार गिराया। बीजापुर में लगातार नक्सलियों के बढ़ती पैठ को कमजोर करने के लिए केंवट ने टीमवर्क के रूप में अपने मातहत जवानों के साथ औसतन हर सप्ताह नक्सलियों को घेरकर ढ़ेर करने का अभियान जारी रखा। बीजापुर में अपनी पदस्थापना के दौरान केंवट की साहसिक और लड़ाकू होने की कृतियां राजधानी रायपुर तक पहुंच गई। इस बीच केंवट के अदम्य साहस को देखते हुए शीर्ष अफसरो ने वीरता पदक के लिए उनके नाम की सिफारिश की। बताया जाता है कि अब भी केंवट के नाम अब भी आधा दर्जन वीरता पदक दिए जाने का प्रस्ताव महकमें में मौजूद है। 

बीजापुर में  रहते हुए केंवट ने नक्सलियों की गोरिल्लावार तकनीकी की बारीकियों को बखूबी समझा। नतीजनत नक्सलियों को उनके ही तकनीकी लड़ाई में केंवट ने मात देना शुरू किया। धीरे-धीरे केंवट गोरिल्लवार में पारंगत होकर नक्सलियों पर भारी पडऩे लगे। इसके बाद 2017 में राजनांदगांव जिले के उत्तरी इलाके साल्हेवारा और गातापार क्षेत्र में बीजापुर और सुकमा से नक्सलियों की बड़ी फौज के आमद देने की खुफिया सूचना के बीच केंवट ने यहां मोर्चा संभाल लिया। 

गातापार थाना के प्रभारी बनते ही केंवट ने नक्सलियों को घेरने के लिए योजनाबद्ध तरीके से हमला करना शुरू कर दिया। पठारी इलाका होने के बावजूद हार्डकोर महिला नक्सली जमुना को मारकर केंवट ने  नक्सलियों के महाराष्ट-मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन की बुनियाद पर करारा प्रहार किया। जमुना को इससे पहले कई अफसरो ने घेरने की नाकामयाब कोशिश की। जमुना के मारे जाने के बाद नक्सलियों की बौखलाहट खुलकर सामने आने लगी।  अपने साथी की मौत होने के बाद से नक्सलियों की स्मॉल एक्शन टीम ने केंवट पर नजर रखनी शुरू कर दी। इसकी परवाह किए बगैर केंवट ने 3 अगस्त को एमएमसी जोन को नेस्तानाबूत करते हुए मिलिट्री इंचार्ज सुखेदव उर्फ लक्ष्मण समेत 7 नक्सलियों को मार गिराया।  इस घटना से नक्सलियों के विस्तार नीति को तगड़ा झटका लगा है। 

बताया जाता है कि नक्सलियों के लिए दर्रेकसा इलाका ‘ट्रांजिट रूट ’ के रूप में माना जाता है। नक्सलियों पर हर थोड़े दिन में प्रहार कर केंवट के अब महकमें में एक काबिल अफसर के रूप में गिनती हो रही है। 

चुनौतियों को अवसर में बदलकर केंवट बने मिसाल-डीआईजी
नक्सलियों से जूझते केंवट को महकमे के शीर्ष अधिकारियों से लगातार शाबासी मिल रही है। राजनांदगांव रेंज डीआईजी आरएल डांगी का कहना है कि केंवट में चुनौतियों को अवसर में बदलने का हुनर है। उनका कहना है कि नक्सलियों से लड़ते हुए इस अफसर ने नई मिसाल पेश की है। यह जज्बा ऐसे अफसरों के लिए सीख हो सकता है जो नक्सली इलाकों में अपनी तैनाती से बचने व समय काटने की सोच रखते हैं। केंवट ने पुलिस जवानों के मनोबल को बढ़ाने को जहां साहस दिखाया है वहीं नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई को देश की आन-बान से जोड़ा भी है। डीआईजी का कहना है कि मौका मिलने पर हर अफसर और जवान को ऐसे अभियान में बढ़ चढक़र हिस्सा लेना चाहिए।

 

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