विचार / लेख

किस्सा भारत का है जो शुरू हंगरी से होता है
किस्सा भारत का है जो शुरू हंगरी से होता है
Date : 03-Sep-2019

1956 तक भारत का कोई दूतावास हंगरी में नहीं था। एम.ए. रहमान साहेब वहां डिप्लोमेसी का काम देखते थे। वो हंगरी की क्रांति पर गहरी नजऱ रखे हुए थे। सोवियत सेना ने वहां काफी दिनों तक युद्ध जारी रखा था। 
रहमान साहेब के दूतावास में पेंटिग का काम चल रहा था। उसी वक्त एक नौजवान दूतावास आया। उसने रहमान साहेब को बताया कि वह लेखक है और बुद्धिजीवियों के उस ग्रुप का सदस्य है जो सोवियत ग़ुलामी से मुक्ति चाहते हैं। उसने ये भी बताया कि वह भारत के पीएम नेहरू के नाम क्रांतिकारियों की तरफ से एक संदेश लाया है। चूँकि नेहरू के सोवियत से अच्छे संबंध हैं इसलिए नेहरू सोवियत की हंगेरियन नीति पर प्रभाव डाल सकते हैं।  वो युवा अभी बात ही कर रहा था कि दो गुप्तचर टाइप आदमी आते दिखाई दिए। अचानक रहमान साहेब ने उससे कहा तुम अंदर जाओ और पुताई का कार्य करो। 
उस युवक का उपनाम ही पेंटर पड़ गया। पेंटर छुपकर लगातार रहमान साहेब से मिलता था। उन्हें दमन की जानकारी देता । उनके सभी साथी मानते थे कि नेहरू उनकी सहायता कर सकते हैं। 
इस बीच पेंटर गिरफ्तार हो गया। ऐसा लग रहा था उसे फांसी की सजा हो जाएगी। लेकिन रहमान साहेब की अथक कोशिशों से वह छूट गया। उन्होंने ड्राइवर को अपनी सरकारी मर्सिडीज में छुपाकर ऑस्ट्रिया की सीमा तक पहुंचा दिया। 
नेहरू ने भी मास्को में इंडियन एम्बेसी और ब्रिग्रेडियर नानावती को इस काम पर लगा दिया। जिससे पेंटर को आजीवन कारावास की ही सज़ा मिली। 
समय बीता , हंगरी सोवियत प्रभाव से आज़ाद हुआ। वहां निष्पक्ष चुनाव हुए। हंगरी के नए राष्ट्रपति अर्पाद गोंट्स ने कहा  हंगरी का भारतीय दूतावास क्रांति का दूतावास बन गया था।
नए राष्ट्रपति पहले सरकारी दौरे पर इंडिया आये। उन्होंने दिल्ली में सबसे पहले रहमान साहेब से मिलना चाहा। मंत्रालय ने उन्हें बुलाने को कहा,लेकिन प्रेसीडेंट ने कहा कि वो खुद रहमान साहेब के घर जाकर उनसे मिलना चाहेंगे। हालांकि प्रोटोकॉल के खिलाफ था लेकिन वो रहमान साहेब के घर जाकर ही मिले।  रहमान साहेब के घर जाकर उनसे मिलने वाला नया प्रेजिडेंट और कोई नही वही पेंटर था जिसकी फांसी की सज़ा रहमान साहेब की वजह से बच गई थी। 
(असगऱ वजाहत की किताब ‘स्वर्ग में पांच दिन’  के संपादित अंश) 
(अनिता मिश्रा ने इसे फेसबुक पर पोस्ट किया है।)

 

 

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